उष्ण कटिबंधिय वर्षावन



जैव ईंधन (Biofuel) वर्षावन के लिए बुरे क्यों हैं?

हाल ही में जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोल और डीजल के स्थान पर पौधों का ईंधन के रूप में अधिक उपयोग किया जाने लगा है, जो वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों के बढ़ने में योगदान दे रहा है, जिससे हमारा ग्रह गर्म होता जा रहा है।

पौधों पर आधारित ये ईंधन,जैव-ईंधन (Biofuel) कहलाते हैं, इनका उत्पादन आम तौर पर कृषि फसलों से किया जाता है। जैव ईंधन (Biofuel) के दो मुख्य प्रकार हैं: इथेनॉल (Ethanol) और जैव-डीजल (Biodiesel)। इथेनॉल को आमतौर पर मक्के और गन्ने से बनाया जाता है, जबकि जैव डीजल (Biodiesel) को ताड़ के वृक्ष (मुख्यतः तेल), सोयाबीन (मुख्यतः सोय /Soy), और केनोला (जिसे रेपसीड भी कहा जाता है) के फल से बनाया जाता है।

हालांकि पारंपरिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में कृषि फसलों से उत्पन्न जैव ईंधन (Biofuel) के कारण प्रदूषण कम होता है और ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है। व्यवहार में वैज्ञानिकों ने पाया है कि कुछ के कारण पर्यावरणीय समस्याएं सामने आ रही हैं। जैव ईंधन (Biofuel) गरीबों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसका कारण है कि आर्थिक रूप से उपयोगी हैं।

अब जब कि ऊर्जा के उत्पादन के लिए पारंपरिक खाद्य फसलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ऐसी फसलों की मांग बहुत बढ़ गयी है, इसलिए इनकी कीमतें भी बढ़ गयीं हैं। हालांकि ऊंची कीमतें कुछ किसानों के लिए बेहतर हो सकती हैं, जिन्हें अपनी फसल के लिए अधिक कीमत मिलती है, इससे उपभोक्ता को भोजन के लिए अधिक मूल्य चुकाना पड़ता है। गरीब देशों में, जहाँ लोगों के पास बहुत कम पैसा होता है, इससे भुखमरी की स्थिति आ जाती है। 2007 और 2008 में कई देशों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन और दंगे किये जो भोजन के लिए अधिक उंची कीमतें नहीं चुका सकते थे।

फसलों के ऊंचे मूल्य अन्य समस्याओं का भी कारण है। ऊंचे मूल्य का लाभ उठाने के लिए, दुनिया भर के किसान भूमि को कृषि भूमि में परिवर्तित कर रहे हैं। ऊंचे मूल्य का लाभ उठाने के लिए, दुनिया भर के किसान भूमि को कृषि भूमि में परिवर्तित कर रहे हैं। उत्तरी अमेरिका और यूरोप में अधिकांश भूमि को पहले से ही कृषि भूमि में बदला जा चुका है, उष्णकटिबंधीय स्थानों विशेषकर ब्राजील और इंडोनेशिया में कृषि भूमि का विस्तार हो रहा है, जहां अभी भी नयी कृषि भूमि के लिए उपयुक्त बड़े क्षेत्र हैं। दिक्कत यह है कि इसमें से कुछ भूमि वर्तमान में उष्णकटिबंधीय वर्षावन (Tropical Rainforest) के द्वारा परिवर्तित की गयी है। जब किसान खेतों और फार्मों के लिए वर्षावन की कटाई करते हैं, मृत पेड़ वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है (ठीक वैसे ही जैसा जीवाश्म ईंधन को जलाने पर होता है)। इसके अलावा वर्षावन का विनाश देशी लोगों को वहां से हटाता है और वन्य जीवन को मार डालता है। इसलिए जैव ईंधन (Biofuel) का पर्यावरण पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

कुछ जैव ईंधन (Biofuel) दूसरों की तुलना में कम बुरे हैं। जब फसल को छोड़ दी गयी कृषि भूमि और ऐसे क्षेत्रों में उगाया जाता है जिस पर प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र नहीं है, तो उनका पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़ता है जिसमें उर्वरकों और कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं किया जाता है। भविष्य में, जैव ईंधन (Biofuel) के नए प्रकार कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करेंगे और शायद वास्तव में पर्यावरण के लिए मददगार होंगे। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में जैव ईंधन (Biofuel) के उत्पादन के लिए मूल घासों के उपयोग के कारण जैव ईंधन (Biofuel) के उत्पादन में वृद्धि हो सकती है, और यह मक्का आधारित इथेनॉल की तुलना में कम प्रदूषण उत्पन्न करेगा। साथ ही, ये घासें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और भूमिगत जल स्तर को कायम रखने में मदद कर सकती हैं।




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