[वीडियो] करोड़ों लीटर गंदा पानी जज़्ब करती गोमती नाले में हो रही तब्दील, गंगा की है सहायक नदी

लखनऊ में हैदर नाले पर बन रहा सीवेज ट्रीटमेंट प्‍लांट। इस प्‍लांट का काम फंड की कमी की वजह से रुका हुआ है।  नदी की गंदगी से मछुआरों की आमदनी भी हुई है प्रभावित। तस्वीर- रणविजय सिंह

नाले में तब्‍दील हो जाएगी गोमती नदी

नदी की इस स्‍थ‍िति को ‘गोमती प्रदूषण नियंत्रण इकाई’ के जनरल मैनेजर राकेश कुमार अग्रवाल भी सही नहीं मानते। वो कहते हैं, “यह समझ आता है कि स्‍थ‍ित‍ियां खराब होती जा रही हैं, क्‍योंकि लखनऊ में जो 200 एमएलडी सीवेज गोमती में सीधे गिर रहा है वो आने वाले वक्‍त में और बढ़ेगा। आबादी लगातार बढ़ रही है तो सीवेज भी उसी हिसाब से बढ़ेगा। ऐसे ही रहा तो आने वाले वक्‍त में गोमती नाले में तब्‍दील हो जाएगी।”

राकेश अग्रवाल इस बात पर भी जोर देते हैं कि दो साल पहले ‘नमामी गंगे’ के तहत जो प्रोजेक्‍ट भेजे गए थे, वो तुरंत पास होने चाहिए थे। साथ ही वो बताते हैं कि उनकी तरफ से कोश‍िश की जा रही है कि फंड की कमी को किन्‍हीं दूसरी योजनाओं से पूरा किया जाए ताकि काम चलता रहे।

गोमती के इस हाल पर नदी विशेषज्ञ प्रो. वेंकटेश दत्‍ता भी च‍िंता जाहिर करते हैं। उनके मुताबिक, सरकारों ने गोमती नदी को प्रयोग का साधन बना दिया है। इसको बचाने के नाम पर हजारों करोड़ के प्रोजेक्‍ट लाए जाते हैं, लेकिन उससे नदी के इकोसिस्‍टम को ही खराब किया जा रहा है।

(सीतापुर से जौनपुर तक गोमती नदी का प्रदूष‍ित हिस्सा जिसे लाल रंग में दर्शाया गया है। स्रोत- उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सीतापुर से जौनपुर तक गोमती नदी का प्रदूष‍ित हिस्सा जिसे लाल रंग में दर्शाया गया है। स्रोत– उत्तरप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

वेंकटेश दत्‍ता कहते हैं, “गोमती नदी तो कब का नाला बन चुकी है। लखनऊ शहर के बीच बहने वाली गोमती में जीवन नहीं है। हमारी टीम हर कुछ महीनों पर इसके पानी की जांच करती है और हर बार डिजॉल्‍व ऑक्‍सीजन का स्‍तर बेहद खराब मिलता है। ऐसा मालूम होता है जैसे किसी ने नदी का गला घोंट द‍िया हो। इसका हाल ठीक कुकरैल नाले की तरह हो गया है, जो कभी गोमती की सहायक नदी हुआ करती थी और आज 20 नालों का मिश्रण बन कर रह गई है।”

गोमती की इसी दुर्दशा को देखते हुए जून 2019 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्‍य सरकार को गारंटी के तौर पर 100 करोड़ रुपए का फंड जमा करने को कहा था। साथ ही यह कहा कि अगर गोमती नदी में नाले बिना ट्रीट हुए गिरना बंद नहीं हुए तो पर्यावरणीय हर्जाने के तौर पर इस राशि को जब्त कर लिया जाएगा। हालांकि दो साल होने वाले हैं और अब भी नाले जस के तस गोमती नदी में गिर रहे हैं।

 

बैनर तस्वीरः लखनऊ में रबर डैम के पास गाज से पटी गोमती नदी। तस्वीर- रणविजय सिंह 

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