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तस्करी से बचाये वन्यजीवों की बढ़ती संख्या बनी पूर्वोत्तर राज्यों के लिए समस्या

क्रुक्ड ट्री वाइल्डलाइफ सेंचुरी, बेलीज़ में एक ग्रीन इगुआना। विदेशी पालतू जानवरों के शौकीन लोगों के बीच ग्रीन इगुआना काफी लोकप्रिय हैं। तस्वीर- बर्नार्ड ड्यूपॉन्ट/विकिमीडिया कॉमन्स

  • भारत में म्यांमार और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में तस्करी करके लाए गए विदेशी जानवरों को बचाने के बाद भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के चिड़ियाघरों में रखा जाता है।
  • जानवरों की बढ़ती संख्या से मिजोरम सबसे ज़्यादा प्रभावित है। राज्य का आइजोल चिड़ियाघर जब्त किए गए विदेशी जानवरों से भरा हुआ है।
  • पूर्वोत्तर राज्य केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से वित्तीय सहायता लेकर जानवरों के लिए बचाव केंद्र बनाने की योजना बना रहे हैं।
  • चिड़ियाघर में विशेष बाड़े बनाएंगे, पशु चिकित्सा देखभाल में सुधार करेंगे और चिड़ियाघर के कर्मचारियों को स्थानीय और जब्त किए गए विदेशी वन्यजीवों के बेहतर रखरखाव के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।

भारत के पूर्वोत्तर राज्य तस्करों से बरामद किए गए विदेशी जानवरों और बचाए गए देशी वन्यजीवों के आवास और उचित रखरखाव के लिए संसाधनों के अभाव का सामना कर रहे हैं। राज्य अब ऐसे जानवरों के लिए नए घर बना रहे हैं। 

म्यांमार और बांग्लादेश के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से तस्करी करके लाए गए विदेशी वन्यजीवों की खेप को राज्य के वन विभाग, सीमा सुरक्षा एजेंसियां और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) नियमित रूप से जब्त करते रहते हैं। तस्करों से बचाए गए इन जानवरों को पुनर्वास के लिए छोटे और मिनी चिड़ियाघरों में ले जाया जाता है। हालांकि, जगह और संसाधनों की कमी के कारण ऐसा करना मुश्किल होता जा रहा है। चिड़ियाघर घायल, बचाए गए और अनाथ देशी वन्यजीवों के इलाज के सही बंदोबस्त न होने के कारण भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

पिछले नवंबर में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) के अधिकारियों के साथ एक बैठक में सभी उत्तर पूर्व राज्यों के वरिष्ठ वन अधिकारियों ने उनके यहां चिड़ियाघरों में आने वाले विदेशी और देशी वन्यजीवों के आवास को लेकर सामने आ रही चुनौतियों के बारे बात की थी। मेघालय वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुछ चिड़ियाघरों को कई बार जब्त किए गए विदेशी वन्यजीवों को वापस भेजना पड़ा है, क्योंकि उनके पास उन्हें रखने के लिए जगह नहीं थी। उदाहरण के लिए आप मेघालय के शिलांग में लेडी हैदरी पार्क में मिनी चिड़ियाघर के मामले को ले सकते हैं। इस बैठक के बाद यह फैसला किया गया कि इस चुनौती से निपटने के लिए नए बचाव केंद्र बनाने होंगे।

इस साल अप्रैल के मध्य में सीजेडए की तकनीकी समिति ने मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में नए बचाव केंद्रों को मंजूरी देने की सिफारिश की, जबकि सिक्किम में उसने मौजूदा बचाव केंद्र को अपग्रेड करने की मंजूरी की सिफारिश की। प्रस्तावों और लेआउट के अनुसार, इन नए बचाव केंद्रों में विदेशी जानवरों के लिए अलग बाड़े, विशेष क्वारंटाईन सेल और अन्य सुविधाओं के बीच बड़ी पशु चिकित्सक सुविधाएं होंगी।

एक लोकप्रिय विदेशी प्रजाति का सांप- बर्मी अजगर। तस्वीर- सुसान ज्वेल/ विकिमीडिया कॉमन्स

केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के सदस्य सचिव संजय कुमार शुक्ला ने कहा, “हमारा उद्देश्य ऐसे जानवरों के लिए उचित आवास या बाड़े बनाना है।” शुक्ला ने कहा कि सीजेडए राज्यों को पशु चिकित्सा देखभाल, लंबे समय तक देखभाल, हाउसकीपिंग और वन्यजीवों को खिलाने की लागत के लिए आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने कहा, सीजेडए यह भी पता लगा रहा है कि क्या प्रतिपूरक वनरोपण से फंड का इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि बचाव केंद्र यहां से फंड निकाल सकते हैं।

सीजेडए की ओर से बारीकी से किया गया एक अनुमान साझा किया गया था। इसके अनुसार, मौजूदा समय में अलग-अलग भारतीय चिड़ियाघरों में जब्त की गई विदेशी प्रजातियों की लगभग 40 प्रजातियां हैं। इनमें इगुआना, मेरकट, कई तरह के गिब्बन और अन्य सरीसृप जैसे जानवर शामिल हैं।

राज्यों के वन विभाग क्या कहते हैं?

हालांकि सभी उत्तर पूर्व राज्य अलग-अलग स्तर पर जब्त किए गए विदेशी वन्यजीवों और बचाए गए देशी वन्यजीवों के पुनर्वास की चुनौती का सामना कर रहे हैं। लेकिन मिजोरम, असम और त्रिपुरा में समस्या ज़्यादा गंभीर है। फिर, मेघालय जैसे राज्य भी हैं, जहां मौजूदा चिड़ियाघर आकार में बहुत छोटे हैं और तस्करों से बचाए गए विदेशी वन्यजीवों को रख पाना उनके लिए संभव नहीं है।

शंघाई चिड़ियाघर में एक डी ब्रेज़ा प्रजाति का बंदर। इस प्रजाति को चेन्नई हवाई अड्डे पर बैंकॉक की एक फ्लाइट से बचाया गया था। तस्वीर- जे.पैट्रिक फिशर/ विकिमीडिया कॉमन्स

म्यांमार सीमा के करीब चम्फाई जिले में विदेशी वन्यजीवों की नियमित जब्ती के कारण मिजोरम सबसे अधिक प्रभावित है। मोंगाबे इंडिया ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह जिला जंगली जानवरों की तस्करी के लिए हॉटस्पॉट के रूप में सामने आया है। सीजेडए को दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, अकेले चम्फाई जिले में फरवरी 2021 और सितंबर 2022 के बीच 25 प्रजातियों के 582 जंगली जानवरों को जब्त किया गया था। इनमें सरीसृप, पक्षी, बंदर और रोडेंट शामिल हैं जिनका मूल निवास मध्य अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में है।

मिजोरम वन विभाग के मुख्य वन्यजीव वार्डन, लालतलानह्लुआ ज़थांग ने कहा, “आइजोल में हमारा छोटा सा चिड़ियाघर है। वहां इतने सारे जब्त किए गए जानवरों को नहीं रखा जा सकता है। इसलिए यहां एक बचाव केंद्र बनाना बेहद जरूरी हो गया है। हमें ऐसे जानवरों के वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव के लिए प्रशिक्षण और कैपेसिटी बिल्डिंग की भी जरूरत है।” 

शिलांग का लेडी हैदरी पार्क एक मिनी पार्क है। जब्त किए गए जानवरों को यहां से लौटाना पड़ता है क्योंकि उनके पास सिर्फ अपने चिड़ियाघर के जानवरों को रखने के लिए जगह है। या फिर ज्यादा से ज्यादा यहां बचाए गए देशी वन्यजीवों का इलाज किया जा सकता है और उन्हें अस्थायी रूप से आश्रय दिया जा सकता है।

लेडी हैदरी पार्क के निदेशक और खासी हिल्स वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी सचिन ग्वाडे ने कहा, “पिछले साल पश्चिमी जैंतिया हिल्स जिले में बरामदगी के बाद इन जानवरों को हमारे पास लाया गया और हमसे उन बचाए गए वन्यजीवों को आश्रय देने का अनुरोध किया गया था। लेकिन हमने साफ तौर पर उन जानवरों को रखने से मना कर दिया क्योंकि कोई जगह नहीं है। बचाए गए जानवरों को आखिर में असम के गुवाहाटी भेजा गया।

एक इंद्री लेमुर और उसका बच्चा। इंद्री लेमुर आइजोल चिड़ियाघर में आश्रय प्राप्त विदेशी जानवरों में से एक है। तस्वीर- मारियस कॉनज्यूड/ विकिमीडिया कॉमन्स

तस्करी किए गए जानवरों को आमतौर पर तंग पिंजरों और भरे वाहनों में एक-दूसरे के ऊपर लादकर लंबी दूरी तक ले जाया जाता है। कुछ सरीसृपों को जूट की थैलियों में भर दिया जाता है, जिससे जानवरों का दम घुट जाता है। जब बचाए गए जानवरों को चिड़ियाघरों में भेजा जाता है, तो चिड़ियाघर-पालकों और पशु चिकित्सकों को उनकी बीमारी और समय पर खाने पर नजर रखनी होती है।

प्रभागीय वन अधिकारी और असम राज्य चिड़ियाघर, गुवाहाटी के निदेशक अश्विनी कुमार ने कहा कि जब्त किए गए जानवरों का रखरखाव एक बड़ी चुनौती है। कुमार बताते हैं, “हमें उनकी सही आहार व्यवस्था और आराम के लिए जरूरी तापमान के बारे में जानकारी लेनी होती है। हमें बीमारियों के लिए उनकी जांच भी करनी होती है।”

जब्त किए गए जानवरों की मौत आम है। वर्ष 2020 में कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कोलकाता हवाई अड्डे से बचाए जाने के तुरंत बाद अलीपुर चिड़ियाघर में एक हायसिंथ मैको ने दम तोड़ दिया था।

वन्य जीवों की बढ़ती तस्करी, एजेंसी हुईं चौकस

हालांकि देश में विदेशी वन्यजीवों की तस्करी में वृद्धि देखी गई है, लेकिन कानून-प्रवर्तन एजेंसियां भी कम चौकस नहीं हैं। अक्टूबर 2022 में, राजस्व खुफिया विभाग (डीआरआई) ने चेन्नई में बॉल पाइथन, ग्रीन इगुआना और कॉर्न सांपों सहित 1204 सरीसृपों को जब्त किया था। जबकि मुंबई में 650 विदेशी सरीसृपों को जब्त किया गयाडीआरआई ने भारत में तस्करी रिपोर्ट– 2021-22 में यह जानकारी दी है। 

गुवाहाटी स्थित गैर-लाभकारी संगठन आरण्यक के कानूनी और वकालत प्रभाग के वरिष्ठ प्रबंधक जिमी बोरा ने कहा, सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच अधिक संवेदनशीलता है और हथियारों की तस्करी पर फोकस के साथ-साथ तस्करी किए गए वन्यजीवों की खेप को रोकने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। महामारी के बाद ऐसे जानवरों द्वारा ईकोलॉजी और मनुष्यों के लिए उत्पन्न खतरों के बारे में गंभीरता बढ़ गई है। इस सब के कारण बरामदगी में भी तेजी आई है 

बोरा ने कहा कि नए बचाव केंद्र बनाने से कुछ चिड़ियाघरों पर दबाव कम होगा।

चिड़ियाघरों में कैसे पहुंचते हैं जानवर

एक बार जब वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और राज्य पुलिस विभाग जैसी प्रवर्तन एजेंसियां खेप जब्त कर लेती हैं, तो राज्य वन विभाग स्थानीय पुलिस स्टेशनों में मामला दर्ज करते हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन से पहले अवैध विदेशी वन्यजीव व्यापार के मामले आमतौर पर सीमा शुल्क अधिनियम या पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किए जाते थे। ऐसा इसलिए था क्योंकि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम विदेशी वन्यजीवों की रक्षा नहीं करता था।

इसलिए, जानवरों के अवैध आयात के आधार पर सीमा शुल्क अधिनियम लागू होता था और जानवरों को अवैज्ञानिक तरीके और भीड़ भरे वाहनों में ले जाने पर पशु क्रूरता निवारण कानून लागू होता था।

हालांकि, संशोधन के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 2022 अब विदेशी प्रजातियों की रक्षा करता है। संशोधनों ने अधिनियम को वन्य वनस्पतियों और जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के साथ जोड़ दिया, जो वनस्पतियों और जीवों के स्थायी व्यापार पर एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।

पूर्वी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो में क्षेत्रीय उप निदेशक अग्नि मित्रा ने कहा, नए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में CITES परिशिष्ट में सूचीबद्ध विदेशी जानवरों को अनुसूची 4 श्रेणियों में शामिल किया गया है और इस अधिनियम का इस्तेमाल जब्त किए गए वन्यजीव के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए किया जाएगा। हालांकि, CITES के तहत संरक्षित नहीं किए गए विदेशी जानवर अभी भी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के दायरे से बाहर हैं

एक बार मामले दायर होने के बाद, स्थानीय अदालतें आमतौर पर जब्त किए गए जानवरों के पुनर्वास के लिए वन विभाग से परामर्श करती हैं। ये जानवर मामलों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने तक के जरूरी सबूत होते हैं। नतीजतन, अदालत के आदेशों के आधार पर, जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए चिड़ियाघरों या मौजूदा बचाव केंद्रों में ले जाया जाता है।

 

बैनर तस्वीर: क्रुक्ड ट्री वाइल्डलाइफ सेंचुरी, बेलीज़ में एक ग्रीन इगुआना। विदेशी पालतू जानवरों के शौकीन लोगों के बीच ग्रीन इगुआना काफी लोकप्रिय हैं। तस्वीर– बर्नार्ड ड्यूपॉन्ट/विकिमीडिया कॉमन्स

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