- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ऊर्जा बदलाव, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ तकनीक के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन को मंजूरी दी है।
- लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे प्रमुख खनिजों पर भारी आयात निर्भरता के कारण भारत को आपूर्ति जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है।
- मिशन का उद्देश्य घरेलू स्तर पर खनिजों की खोज, विदेशी अधिग्रहण, रीसाइकिल और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है। साथ ही यह अनुसंधान और विकास, व्यापार समझौतों और नियामक सुधारों को भी प्रोत्साहित करेगा ताकि महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
भारत, दुनिया में ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और उसके स्वच्छ ऊर्जा के महत्वाकांक्षी लक्ष्य हैं। ऐसे में, वह अपनी ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया के लिए जरूरी महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने में जुटा है।
इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, 29 जनवरी को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत की महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरतों को पूरा करना और मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है। इसके लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाना, विदेशों से महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियां हासिल करना, खनिजों को रीसाइकल करना, मानव संसाधन और फंड जुटाना आदि पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार 2031 तक 1,200 खोज परियोजनाएं भी शुरू करेगी और 100 से अधिक महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी की जाएगी।
इस मिशन के लिए सात सालों में 34,300 करोड़ रुपये (343 अरब रुपये) का वित्तीय आवंटन किया जाएगा। इसमें सरकार का 16,300 करोड़ रुपये (163 अरब रुपये) का खर्च शामिल है और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा 18,000 करोड़ रुपये (180 अरब रुपये) का निवेश करने की उम्मीद है।
जियोएक्सप्लोरर्स कंसल्टिंग सर्विसेज में माइनिंग एंड मेटल्स बिजनेस एडवाइजर सौरभ प्रियदर्शी के मुताबिक, महत्वपूर्ण खनिज संसाधन दुनिया भर में असमान रूप से वितरित हैं। कम से कम 55% प्रत्येक पहचाने गए महत्वपूर्ण खनिज केवल 15 देशों में पाए जाते हैं। भारत को इन खनिजों तक पहुंचने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि संसाधन-समृद्ध देश संरक्षणवादी नीतियां अपनाते हैं और अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने आगे बताया, “उदाहरण के लिए, इंडोनेशिया से प्राप्त होने वाला निकल इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी के लिए एक महत्वपूर्ण सामग्री है। लेकिन इसके निर्यात पर प्रतिबंध से दुनिया भर में स्पलाई चैन बाधित हुई है। इससे भारत की ईवी और बैटरी उत्पादन की महत्वाकांक्षाओं पर भी असर पड़ा है।”
प्रियदर्शी का कहना है कि अर्जेंटीना और चिली जैसे देशों में संसाधनों पर राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने से भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए स्थिर आपूर्ति हासिल करना और भी मुश्किल हो गया है। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि एनसीएमएम भारत को खनिज-निर्यात करने वाले देशों पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और भारत अपने संसाधनों का उपयोग करके पैसा कमा सकेगा।
एनसीएमएम की घोषणा जुलाई 2024 के बजट भाषण में की गई थी और इस साल, 2025 का बजट पेश होने से ठीक दो दिन पहले, कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल के बजट भाषण में खनन क्षेत्र में सुधारों की जरूरत पर जोर दिया और खनन कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने की एक नीति पेश की। सीतारमण ने 15 महत्वपूर्ण खनिजों पर बुनियादी सीमा शुल्क में छूट की भी घोषणा की। यह जुलाई 2024 के बजट में पहले से ही पहचाने गए 25 खनिजों के अतिरिक्त था। महत्वपूर्ण खनिजों का जिक्र पहले के बजट भाषणों में भी किया गया है। फरवरी 2024 के बजट भाषण में, सीतारमण ने एक नए वैश्विक क्रम के उदय पर प्रकाश डाला, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रतिस्पर्धा को एक प्रमुख कारक बताया गया था।

भारत की महत्वपूर्ण खनिजों को हासिल करने की रणनीति
एमसीएमएम दस्तावेज में भारत के नेट जीरो लक्ष्यों और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण खनिजों के महत्व पर जोर दिया गया है, खासकर ऊर्जा परिवर्तन में। इसमें कहा गया, “जैसे-जैसे ऊर्जा में बदलाव आगे बढ़ेगा, इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं और बैटरी भंडारण प्रणाली के निर्माण में मदद करने के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की मांग बढ़ेगी।”
मिशन दस्तावेज अपतटीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिज-युक्त ब्लॉकों की खोज और खनिज उत्पादन शुरू करने के प्रयासों को बढ़ाने पर भी जोर देता है। हाल की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, एनसीएमएम कहता है, “कोबाल्ट, दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई), निकल और मैंगनीज जैसे खनिजों वाले पॉलीमेटेलिक नोड्यूल और क्रस्ट के अपतटीय ब्लॉकों की हाल ही में खोज की गई है और नीलामी के लिए रखा गया है।”
मिशन में नियमों और कानूनों का समर्थन करने पर जोर दिया गया है। इसमें जरूरी खनिजों की खोज और खनन से जुड़ी परियोजनाओं को जल्दी मंजूरी देने की बात भी कही गई है। इसका लक्ष्य निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना और टेलिंग, फ्लाई ऐश और लाल मिट्टी जैसे वैकल्पिक स्रोतों से महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने को प्रोत्साहन देना भी शामिल है। इसे सुविधाजनक बनाने के लिए, सरकार मिशन अवधि के दौरान नियमों में ढील देने और 100 करोड़ रुपये (एक अरब रुपये) आवंटित करने की योजना बना रही है।
एमसीएमएम रिपोर्ट में महत्वपूर्ण खनिजों का एक रणनीतिक भंडार बनाने की योजनाओं पर प्रकाश डाला गया, जिसके लिए मिशन अवधि के दौरान 500 करोड़ रुपये (पांच अरब रुपये) आवंटित किए गए हैं। यह अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) पर भी महत्वपूर्ण जोर देता है। घरेलू अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए 2031 तक 500 करोड़ रुपये (पांच अरब रुपये) आवंटित करने का प्रस्ताव रखा गया है। मिशन का लक्ष्य इनोवेटर्स और स्टार्टअप्स के लिए पेटेंट दाखिल करने की प्रक्रियाओं का समर्थन करना और वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) जैसे संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है।
इसके अलावा, एनसीएमएम महत्वपूर्ण खनिजों पर उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना और विशेष रूप से खनिज प्रसंस्करण में अनुसंधान एवं विकास पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने की परिकल्पना करता है। रिपोर्ट में कहा गया है, “टेक्नोलॉजी को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के लिए, विकास और अनुसंधान में जो कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए समय-समय पर इंडस्ट्री की जरूरतों का आंकलन किया जाएगा।”
स्वानिति ग्लोबल में एनर्जी ट्रांजिशन के लिए रिसर्च और स्ट्रैटेजी के डायरेक्टर संदीप पाई ने कहा कि हाल ही में शुरू किया गया क्रिटिकल मिनरल मिशन सही दिशा में उठाया गया एक कदम है, खासकर आर एंड डी पर जो जोर दिया जा रहा है, उससे वह काफी प्रभावित हैं।

कमजोरियां और आगे की राह
भारत अभी भी दुनिया में चल रही उथल-पुथल और सामान की सप्लाई में आने वाली दिक्कतों से प्रभावित हो सकता है। हाल ही में हुई कई रिसर्च में देश के सामने अपनी ऊर्जा बदलने के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जरूरी खनिजों को हासिल करने में आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया है।
उदाहरण के लिए, अक्टूबर 2024 में प्रकाशित गैर-लाभकारी इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) के एक अध्ययन में कहा गया है कि भारत ऊर्जा परिवर्तन के लिए खनिजों और उनके यौगिकों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की लिथियम, कोबाल्ट और निकल खनिजों पर 100% आयात निर्भरता है। आईईईएफए अध्ययन ने आगे भविष्यवाणी की कि यह निर्भरता बनी रहेगी, क्योंकि महत्वपूर्ण खनिजों की मांग 2030 तक दोगुनी से अधिक होने की उम्मीद है, जबकि घरेलू खनन परियोजनाओं को चालू होने में एक दशक से अधिक समय लग सकता है।
इसी तरह, सार्वजनिक नीति में अनुसंधान और शिक्षा के लिए एक स्वतंत्र केंद्र ‘तक्षशिला इंस्टिट्यूशन’ ने दिसंबर 2024 में किए गए एक अध्ययन में 2023 में खान मंत्रालय द्वारा पहचाने गए 30 महत्वपूर्ण खनिजों के स्रोत में भारत की कमजोरियों का आकलन किया। अध्ययन में चीन पर महत्वपूर्ण निर्भरता वाले छह खनिजों पर प्रकाश डाला गया: बिस्मथ (85.6%), लिथियम (82%), सिलिकॉन (76%), टाइटेनियम (50.6%), टेल्यूरियम (48.8%), और ग्रेफाइट (42.4%)।
चीन वैश्विक महत्वपूर्ण खनिजों के बाजार पर हावी है, जो दुनिया के 60% दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (आरईई) का उत्पादन करता है और वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी प्रसंस्करण क्षमता के लगभग 90% को नियंत्रित करता है। खनन सलाहकार हितांशु कौशल ने भारत को अपने खनिज अन्वेषण प्रयासों में तेजी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ऑस्ट्रेलिया कच्चे महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है और चीन की उन्नत तकनीक के कारण प्रसंस्करण के लिए उन्हें चीन को निर्यात करता है। हालांकि ऑस्ट्रेलिया ने खनिज अन्वेषण में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन भारत अभी भी काफी पीछे है। एक खनन परियोजना को विकसित करने में पांच से आठ साल लगते हैं, इसलिए हमें व्यवहार्य खनिज संसाधनों की तेजी से पहचान करनी होगी, अन्वेषण को बढ़ाना होगा और डेटा की उपलब्धता में सुधार करना होगा।” उनका मानना है कि इस मिशन के लिए सात साल की समय सीमा एक बहुत जरूरी और तेजी से आगे बढ़ने की तरफ जाने वाला कदम है।
इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, एनसीएमएम संसाधन संपन्न देशों के साथ व्यापार संबंधों को मजबूत करने की सिफारिश करता है। इसमें कहा गया है, “सरकार का लक्ष्य संसाधन संपन्न देशों के साथ महत्वपूर्ण खनिज भागीदारी समझौते (सीएमपीए) करना होगा।” यह उन देशों के साथ मौजूदा व्यापार समझौतों में महत्वपूर्ण खनिजों पर एक अध्याय शामिल करने की भी बात करता है, जिनसे भारत का हित जुड़ा है।
भारत ने मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप (एमएसपी) जैसी पहलों के माध्यम से और ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, चिली जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय समझौतों तथा कजाकिस्तान के साथ एक संयुक्त उद्यम के माध्यम से साझेदारी स्थापित की है। 2019 में स्थापित KABIL (खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड) भी विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज संपत्तियों को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
घरेलू मोर्चे पर, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) ने पिछले तीन वर्षों में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए 368 खोज परियोजनाएं शुरू की हैं। इनमें से 2024-25 में 195 परियोजनाएं चल रही हैं और 2025-26 के लिए 227 परियोजनाओं की योजना तैयार की जा रही है।
2023 में, केंद्र सरकार ने रणनीतिक या महत्वपूर्ण खनिजों के 24 ब्लॉकों की नीलामी की सुविधा के लिए खनन और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957 में संशोधन किया। हालांकि, दिसंबर 2024 में, सरकार ने निवेशकों की रुचि की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की नीलामी रद्द कर दी थी।
प्रियदर्शी ने कहा, “मुख्य बाधा प्रारंभिक अन्वेषण डेटा की कमी रही है, यहां उचित परिश्रम, तकनीकी अध्ययन और वित्तीय आकलन के लिए आवश्यक विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। निवेशक पर्याप्त डेटा के बिना खनन परियोजनाओं में निवेश करने में हिचकिचाते हैं, क्योंकि इन उपक्रमों में महत्वपूर्ण समय और पूंजी शामिल होती है, जिसमें सफलता की तुलना में विफलता की संभावना अधिक होती है।”
प्रियदर्शी ने सुझाव दिया कि मिशन उन खनन परियोजनाओं की ही नीलामी करके इस चिंता का समाधान कर सकता है जिनकी खोज एक निश्चित स्तर तक की जा चुकी है। यह दृष्टिकोण निवेशकों को सोच-समझकर निर्णय लेने के लिए आवश्यक डेटा प्रदान करेगा, जिससे भारत के महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अधिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 7 फरवरी 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन भारत के नेट जीरो लक्ष्यों और एनडीसी, खासकर, खासकर ऊर्जा परिवर्तन के लिए, में महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका पर जोर देता है। अनुरेजा, विकिमीडिया कॉमन्स (CC-BY-SA-4.0)