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मॉनिटर लिज़र्ड बना फिशिंग कैट का शिकार, बदले हालात की ओर इशारा

सुंदरबन के सजनेखाली वन्यजीव अभयारण्य में एक फिशिंग कैट मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करती हुई। तस्वीर: सौम्यदीप संतरा

सुंदरबन के सजनेखाली वन्यजीव अभयारण्य में एक फिशिंग कैट मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करती हुई। तस्वीर: सौम्यदीप संतरा

  • सुंदरबन में एक फिशिंग कैट की तस्वीर मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करते हुए ली गई, जो आमतौर पर उसके खाने का हिस्सा नहीं है।
  • फिशिंग कैट पश्चिम बंगाल का राज्य पशु है और मछली, चूहे, सांप और छोटे पक्षी खाकर जीता है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि फिशिंग कैट को उसके रहने की जगह पर खाना नहीं मिल रहा हो और बदले हुए हालात की वजह से उसने यह शिकार करना शुरू कर दिया हो।

मछलियों को खाने के लिए जानी जाने वाली फिशिंग कैट जिसे पश्चिम बंगाल के लोग बाघरोल या माछाबाघा भी कहते हैं, कुछ महीनों पहले कुछ नया खाते हुई पाई गई।

जुलाई की गर्मी में सुबह-सुबह, नेचुरलिस्ट सौम्यदीप सांतर सुंदरबन में एक यात्रा पर थे। जब उनकी नाव पानी में तेज़ी से जा रही थी, तब उन्हें एक फिशिंग कैट अपने शिकार पर हमला करने के लिए तैयार होती दिखाई दी। सुंदरबन दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल है और फिशिंग कैट वेटलैंड्स का सबसे बड़ा शिकारी पशु है। जैसे ही सांतर ने फोटो लेने के लिए अपना कैमरा तैयार किया, इस बिल्ली ने कुछ ऐसा किया जिसकी उम्मीद नहीं थी। यह बिल्ली एक बड़ी मॉनिटर लिज़र्ड, यानी गोह पर झपटी और उसे अपने मुँह में दबाकर झाड़ियों की ओर खींच ले गई। चंद सेकंडों में घटी इस घटना की कई तस्वीरें सांतर ने अपने कैमरे कैद कीं जो अब नेचुरल हिस्ट्री का एक दुर्लभ रिकॉर्ड बन गई हैं। मॉनिटर लिज़र्ड को भारत के विभिन्न इलाकों में गोह, गोयरा और पश्चिम बंगाल में गर्जन के नाम से जाना जाता है।

गुजरात  में काम करने वाले संतरा ने मोंगाबे इंडिया को बताया कि यह घटना सुंदरबन के पिरखली के पास हुई, जो सजनेखली वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा, “हमारी बोट पिरखली-6 के पास थी, जहाँ हमने फिशिंग कैट को मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करते देखा,” उन्होंने आगे कहा, “मैं पश्चिम बंगाल के बागनान से हूँ, जहाँ फिशिंग कैट की अच्छी-खासी आबादी है। एक नेचुरलिस्ट के तौर पर, मैंने फिशिंग कैट की इकोलॉजी और बर्ताव को पढ़ा है। लेकिन मैंने उन्हें कभी मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करते नहीं देखा।”

वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र सुदीप्ता चक्रवर्ती ने भी इसी घटना की एक अलग एंगल से तस्वीर ली।

वाइल्डलाइफ़ बायोलॉजिस्ट तियासा आध्या, जो फिशिंग कैट पर अपने काम के लिए जानी जाती हैं, ने मोंगाबे इंडिया को बताया, “यह एक बहुत अच्छी खोज है। फिशिंग कैट को वेटलैंड इकोसिस्टम में एक टॉप शिकारी माना जाता है। इससे यह पता चलता है कि मॉनिटर लिज़र्ड, एक ताकतवर रेप्टाइल जिसकी पूंछ मजबूत होती है और जिसका कद लगभग फिशिंग कैट जितना होता है, इसके शिकार में से एक है।”

जुलाई में, सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के पिरखाली के पास एक फिशिंग कैट की एक मॉनिटर लिज़र्ड को खाते हुए तस्वीर खींची गई। सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी टूरिस्ट के बीच काफी प्रचलित है। तस्वीर - सौम्यदीप संतरा।
जुलाई में, सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के पिरखाली के पास एक फिशिंग कैट की एक मॉनिटर लिज़र्ड को खाते हुए तस्वीर खींची गई। सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी टूरिस्ट के बीच काफी प्रचलित है। तस्वीर – सौम्यदीप संतरा।

जीव विज्ञान के लिए अहम

आध्या ने कहा कि यह शायद पहली बार है जब किसी फिशिंग कैट ने मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार किया हो। “कुछ पेपर्स में कहा गया है कि फिशिंग कैट के खाने में मछली, छोटे रोडेंट्स, सरीसृप और पक्षी होते हैं। मॉनिटर लिज़र्ड को फिशिंग कैट का बड़ा शिकार माना जा सकता है,” उन्होंने कहा। आध्या ने फिशिंग कैट के मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करने के पहले रिकॉर्ड की फोटो की तुलना जगुआर के कैमन का शिकार करने से की। उन्होंने कहा, “पेंटानल में जैगुआर का कैमन समेत पानी में रहने वाले शिकार को पकड़ने का झुकाव होता है। इसलिए, एक फिशिंग कैट का एक बड़े मॉनिटर लिज़र्ड को मारना भी एक ऐसा ही नेचुरल हिस्ट्री मोमेंट है।” पेंटानल, दुनिया का सबसे बड़ा ट्रॉपिकल वेटलैंड और बाढ़ वाला घास का मैदान है जो ब्राज़ील, बोलीविया और पैराग्वे में हैं, और यहाँ जगुआर की अच्छी-खासी आबादी है।

पश्चिम बंगाल के इकोलॉजिस्ट सम्राट चक्रवर्ती, जिन्होंने फिशिंग कैट पर स्टडी पब्लिश की हैं, ने भी मोंगाबे इंडिया को बताया कि यह “एक बहुत ही अनोखी घटना है।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने फिशिंग कैट और उनके खाने पर कई पेपर पढ़े हैं, लेकिन मॉनिटर लिज़र्ड कभी भी उनके मेन्यू में नहीं थे। असल में, 1988 के एक पेपर में, राजस्थान में एक गाय के शव को खाने वाली फिशिंग कैट का ज़िक्र है। लेकिन मुझे मॉनिटर लिज़र्ड का कोई ज़िक्र नहीं मिला।”

उन्होंने कहा, “सुंदरबन के इलाके में खाना कम है। साथ ही, वेटलैंड्स में ऊदबिलाव जैसे दूसरे जीव हैं जिनसे खाने के लिए मुकाबला होता है। तो, शायद इस जानवर को खाना नहीं मिल रहा है और इसलिए इसे मौकापरस्त शिकार कहा जा सकता है। सुंदरबन का इलाका कीचड़ से भरा है और शिकार को जल्दी से वहाँ खींचकर ले जाना आसान नहीं है। एक एडल्ट मॉनिटर लिज़र्ड एक ताकतवर रेप्टाइल है और इस लड़ाई में फिशिंग कैट ने उसे हरा दिया, यह दिखाता है कि बिल्लियाँ कितनी अच्छी शिकारी हो सकती हैं।”

सुंदरबन में सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी जहाँ ज़मीन कीचड़ वाली है और विशेषज्ञों का कहना है कि शिकार को घसीटना एक चुनौती हो सकती है, खासकर एक बड़ी मॉनिटर लिज़र्ड जैसे ताकतवर शिकार को। हालाँकि, यहाँ खाना कम है और फिशिंग कैट को ऊदबिलाव जैसे दूसरे शिकारियों से भी मुकाबला करना पड़ सकता है। तस्वीर - पिनाकपानी द्वारा विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0) के माध्यम से।
सुंदरबन में सजनेखाली वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी जहाँ ज़मीन कीचड़ वाली है और विशेषज्ञों का कहना है कि शिकार को घसीटना एक चुनौती हो सकती है, खासकर एक बड़ी मॉनिटर लिज़र्ड जैसे ताकतवर शिकार को। हालाँकि, यहाँ खाना कम है और फिशिंग कैट को ऊदबिलाव जैसे दूसरे शिकारियों से भी मुकाबला करना पड़ सकता है। तस्वीर – पिनाकपानी द्वारा विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0) के माध्यम से।

एक भूखा शिकारी

वाइल्डलाइफ फ़ोटोग्राफ़र सुदीप्ता चक्रवर्ती पिछले डेढ़ दशक से भारत और विदेश में वन्यजीवों की तस्वीरें लेते आ रहे हैं। जुलाई में वह सुंदरबन में बोरो माँ नाम की एक बाघिन और उसके बच्चों की तस्वीर लेने के मकसद से गए थे। हालाँकि, उन्हें इस यात्रा के दौरान फ़िशिंग कैट की मॉनिटर लिज़र्ड को मारते हुए तस्वीर मिल गयी जो उनके लिए एक बोनस था।

मोंगाबे इंडिया से बात करते हुए, उन्होंने कहा, “मैं नियमित रूप से सुंदरबन आता रहता हूँ। दो साल पहले, मैंने वन विभाग के कहने पर सुंदरबन पर एक कॉफ़ी टेबल बुक बनाई थी, जिसके लिए मैंने 15-20 प्रजातियों की तस्वीरें ली थीं। इस बार मैं एक असाइनमेंट पर गया था जिसमें मुझे बोरो माँ नाम की बाघिन और उसके बच्चों की फ़ोटो लेनी थी। मुझे बाघिन की फ़ोटो तो मिल गई, लेकिन बच्चों के बिना।”

फिशिंग कैट वाली घटना के बारे में उन्होंने कहा, “फिशिंग कैट ज्यादातर मछली पकड़ती है जो उसका मुख्य शिकार है। लेकिन किसी तरह, यह फिशिंग कैट कुछ दिनों से कोई शिकार नहीं पकड़ पाई होगी। इसलिए, भूख लगने के कारण उसने मॉनिटर लिज़र्ड के साथ रिस्क लिया। ऐसा रेगुलर नहीं होने वाला है।”


और पढ़ेंः खाने में क्या है? फिशिंग कैट का आहार से बनती संरक्षण की समझ


संतरा भी चक्रवर्ती की इस बात से सहमत थे। उन्होंने कहा, “फिशिंग कैट के मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करने के अलावा, एक और अजीब बात हुई। यह घटना सुबह करीब 8.30 बजे हुई। यह भी बहुत अजीब है क्योंकि फिशिंग कैट या यूँ कहें कि कोई भी बिल्ली रात में शिकारी करती है। इसलिए, वे सुबह तब तक नहीं दिखेंगी जब तक वे भूखी न हों और शिकार की तलाश में न हों। साथ ही, मॉनिटर लिज़र्ड की पीठ पर बहुत सख्त स्केल्स होते हैं और फिशिंग कैट के लिए उसे फाड़कर उसके मांस तक पहुँचना आसान नहीं होगा।”

 


यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 17 सितंबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।


बैनर तस्वीरः सुंदरबन के सजनेखाली वन्यजीव अभयारण्य में एक फिशिंग कैट मॉनिटर लिज़र्ड का शिकार करती हुई। तस्वीर: सौम्यदीप संतरा।

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