- 2025 में पहलगाम के आतंकवादी हमले, ऑपरेशन सिन्दूर, रिकॉर्ड बारिश और 24 सितंबर की हिंसा जैसी घटनाओं ने पर्यटन गतिविधियाँ लगभग ठप कर दीं।
- होटल/गेस्ट हाउस मालिकों और टैक्सी ड्राइवरों के अनुसार उनकी आय में 30–40% तक गिरावट आई है।
- कर्ज लेकर खरीदी गई टैक्सियों और होटलों की किश्तें चुकाने की मुश्किल के साथ छह महीने के सीजन में पूरे साल का खर्च निकालना चुनौती बन गया है।
कोविड 19 की महामारी के ख़तम होने के ठीक बाद साल 2022 में लेह में रहने वाले 30 साल के अली का जीवन जैसे पूरी तरह से बदल गया। अली, जो अपनी एक मारुती वैन में सैलानियों को घुमाकर हर महीने करीब 20,000 रुपए तक कमाते थे, लदाख में अचानक बढ़ी सैलानिओं की तादात के चलते अपने धंधे को आगे बढ़ाने में लग गए। साल 2023 में करीब 1.5 लाख रूपए महीने की कमाई के बाद उन्होंने दो गाड़ियों के लिए बैंक से लोन लिया और अपने काम को आगे बढ़ाया। अगले दो साल लद्दाख में पर्यटकों की संख्या ठीक से बढ़ती दिखी, लेकिन साल 2025 ने अली के साथ-साथ लद्दाख के पूरे टूरिज्म सेक्टर को एक संकट की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया।
इस साल अप्रैल के महीने से एक के बाद एक घटी घटनाओं ने देश के इस सबसे नए केंद्र शासित प्रदेश की अर्थ व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाई। अप्रैल में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद विदेशी पर्यटकों में कुछ गिरावट देखी गई। उसके बाद ऑपरेशन सिन्दूर के समय काम बिलकुल बंद रहा। अगस्त में इस इलाके में हुई रिकॉर्ड बारिश के चलते कई रास्ते बंद हो गए। और फिर सितम्बर के महीने में लेह में हुए प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा ने सैलानियों को इस ठन्डे रेगिस्तान वाले क्षेत्र से दूर रखा।
ऑल लद्दाख होटल और गेस्ट हाउस एसोसिएशन की प्रेसिडेंट रिग्ज़िन लाचिक के अनुसार इस साल लद्दाख में व्यापार में काफी कमी आई है और होटल और गेस्ट हॉउसों की बुकिंग कैंसिल होने से बहुत से होटल मालिकों को अपेक्षा से बहुत कम आमदनी हुई।

“लद्दाख में साल 2010 के बाद टूरिज्म की ग्रोथ बड़ी पॉजिटिव रही है। लेकिन 2018 के बाद ये ग्रोथ जैसे रुक सी गई। इस साल खासकर हालात बड़े कठिन रहे हैं, न सिर्फ टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि लद्दाख के सभी लोगों के लिए। पहले पहलगाम, फिर लद्दाख और पास के राज्यों में हुई तेज़ बारिश और फिर सितम्बर 24 को घटी घटना इन सभी इन इंडस्ट्री को बहुत प्रभावित किया।”
लद्दाख को एक पूर्ण राज्य के दर्जे और इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किये जाने की मांग को लेकर 24 सितम्बर को लेह में हो रहा प्रदर्शन हिंसक हो उठा और पुलिस की गोलीबारी में चार लोगों की जान चली गई और 50 से भी ज़्यादा लोग घायल हुए। इस घटना के बाद लेह में एक हफ्ते का कर्फ्यू लगाया गया था।
“ऑपरेशन सिन्दूर के समय में एयरपोर्ट पूरी तरह से बंद था और लोग जो यहां आना चाहते थे वो नहीं आ सके। उस समय में हमारी 80 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हुई जिसका पूरा पैसा हमें वापस देना पड़ा। इस तरह मई का महीने में बहुत ही कम लोग थे, जून में हमने थोड़ा रिकवर करना शुरू किया लेकिन पूरी तरह से नहीं,” उन्होंने बताया।
लद्दाख के कुशोक बकुला रिनपोछे एयरपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार यह एयरपोर्ट 7 मई से 13 मई तक ऑपरेशन सिंदूर के चलते पूरी तरह से बंद रहा। वहीं 25, 26 और 27 अगस्त को बारिश के चलते यहां पर किसी भी विमान की आवाजाही नहीं हुई।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून के महीने में सैलानियों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। लद्दाख में हर साल इस महीने में सैलानियों की संख्या एक लाख से ज़्यादा होती है। पिछली जून में ये संख्या 1,53,711 थी लेकिन इस साल यह सिर्फ 75,089 थी, यानि लगभग आधी।

अपने काम की तैयारी की बात करते हुए एल कैस्टिलो होटल के जनरल मैनेजर अर्नब घोष बताते हैं कि बार-बार होने वाले बदलावों से कैसे उनके काम पर असर पड़ा। “गर्मी के मेन सीजन में बहुत रुकावटें आई। जब बार-बार रुकावटें आती हैं तो कोई भी बिज़नेस को ठीक तरीके से प्लान नहीं किया जा सकता। जैसे, स्टाफ को रखना या फिर उसे कितनी क्षमता में रखना है, स्टॉक को रखना है या नहीं, या फिर कितना रखना है, जब तक हम ये निश्चित कर पाते तब तक हमारा जो मुख्य सीजन था वो निकल गया,” उन्होंने बताया। घोष के अनुसार उनकी कमाई में करीब 30-40% की गिरावट आई है।
“इस साल कम से कम 30 से 45 दिन ऐसे थे जिसमें हमारे होटल में एक भी गेस्ट नहीं था, यानी जीरो ओक्यूपेन्सी! लद्दाख का कोई भी बिज़नेसमैन यहाँ से टूरिस्ट सीजन में अच्छी कमाई के सिर्फ 100 से 120 दिन ही मानकर चलता है। उसमें से करीब आधे दिनों में जीरो ऑक्यूपेंसी थी,” उन्होंने बताया।
कर्ज चुकाने की समस्या
“मैं इस फील्ड में 2010 से हूँ, तब मैं इको वैन चलाता था। नवम्बर 2022 में मैंने नई स्कार्पियो एन लिया था। कोविड के बाद 2022 में काम अच्छा चला और फिर उसके हिसाब से हमारे एक्सपेक्टेशन बढ़ गए थे। ऐसे में जिन लोगों ने नए गाड़ियां ली हैं वो 70-80% लोन पर हैं। ऐसे लोगों को अब लोन की किश्तें देने में भी दिक्कतें आ रही हैं। सभी लोगों की मासिक किश्तें 20,000 रुपए से ऊपर ही हैं,” लेह के एक टैक्सी ड्राइवर, दोरजे ग्यालसन, ने बताया।
“यहां के मौसम की वजह से भी हम सिर्फ छः महीने ही काम कर सकते हैं तो इस छः महीने की कमाई में ही हमें अगले छः महीने में लोन की किश्तें भी देनी है और अपना गुजारा भी चलाना है,” उन्होंने आगे बताया।
पिछले कुछ सालों में लद्दाख में बढ़े टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्टर के लिए लोगों ने कई बैंकों से लोन लेकर अपने व्यापार को आगे बढ़ाया। लेकिन मौजूदा हालातों में उन्हें उस कर्ज की किश्तें चुकाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ऐसे में अलग-अलग संगठनों ने कुछ समय के लिए उनके कर्ज और ब्याज के भुगतान में रियायत की मांग की थी।

वित्त विभाग ने इस मांग पर ध्यान देते हुए बैंकर्स के लिए एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए लद्दाख को एक आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया। इस घोषणा के बाद लद्दाख के बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक के मास्टर डायरेक्शन के सातवें चैप्टर के प्रावधानों के तहत कर्जदारों को किश्तों और उनके भुगतान की अवधि में रिआयत दे सकते हैं।
व्यापर और प्रतिस्पर्धा की बढ़ती रफ़्तार
पर्यटन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में लद्दाख में 3,35,872 पर्यटक आए हैं जो कि पिछले साल के आंकड़ों (3,76,386) से करीब 10% ही कम है। ऐसे में ये सवाल उठता है कि पर्यटकों की संख्या बड़ी गिरावट नहीं होने के बावजूद भी इस सेक्टर से जुड़े लोगों को इतना भारी नुकसान क्यों उठाना पड़ रहा है?
इसका कारण पिछले कुछ सालों में बढ़ी होटलों और गेस्ट हाउसों की संख्या भी हो सकती है। पिछले तीन सालों में सिर्फ लेह शहर में होटल और गेस्ट हाउसों की संख्या में करीब 30% का इजाफा हुआ है। वहीं टैक्सी की संख्या में खासी वृद्धि हुई है।
“साल 2025 के ख़ास कारोबारी महीनों में कुछ रुकावटें आई और उसकी वजह से पर्यटकों की संख्या में भी गिरावट देखी गई। हालांकि, लोगों की आय में गिरावट का यह इकलोत कारण नहीं है। पिछले कुछ सालों में होटलों, गेस्ट हाउसों, टैक्सियों और दुसरे व्यवसायों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन पर्यटकों की संख्या उस अनुपात में नहीं बढ़ी है,” लद्दाख के पर्यटन सचिव संजीत रोड्रिग्स ने कहा।
उन्होंने यह भी सलाह दी कि लद्दाख, विशेषकर लेह शहर में, उचित वहन क्षमता विश्लेषण करने की आवश्यकता है।

इस सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि साल 2022 और 2023 में लद्दाख में अचानक से बढ़ी सैलानियों की संख्या को एक सामान्य परिस्तिथि मानकर लोगों का अपनी आमदनी को लेकर पूर्वानुमान लगाना सही नहीं होगा। इन सालों में कोविड से सम्बंधित प्रतिबंधों की वजह से घरेलू पर्यटकों के बाहर के देशों में न जा सकने की स्थिति में लद्दाख में पर्यटकों की संख्या बढ़कर पांच लाख के पार चली गई। लेकिन 2024 में संख्या पौने चार लाख के करीब आ गई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2011 में लेह में 149 होटल और 386 गेस्ट हाउस थे। साल 2015 में होटलों की संख्या 213 और गेस्ट हाउस की संख्या 433 गई। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार लेह में 291 होटल और 807 गेस्ट हाउस हैं। वहीं कारगिल में साल 2015 में 17 होटल और 82 गेस्ट हाउस थे जो साल 2022 में बढ़कर क्रमशः 40 और 100 हो गए।
लद्दाख में होटल और गेस्ट हाउस के हालिया आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन नीति आयोग के एक रिपोर्ट में पुराने आंकड़ों के आधार पर साल 2025 तक लद्दाख में 489 होटल, 1061 गेस्ट हाउस और 73 होम स्टे होने का अनुमान लगाया गया है। साल 2015 के आधार पर होटलों की संख्या में 108% और गेस्ट हाउस में करीब 206% वृद्धि है।
वहीं अगर टैक्सी की बात की जाए तो 2022 में लद्दाख में 3,646 टैक्सी थी लेकिन लद्दाख टैक्सी यूनियन के वाईस प्रेसिडेंट, स्टैंज़िन लोलदान के अनुसार फ़िलहाल अकेले लेह में 5,500 से ज़्यादा टैक्सी हैं।
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पर्यटन और पर्यावरण से जुडी चुनौतियाँ
होटल, टैक्सी और पर्यटन के अन्य साधनों के बढ़ने और ज़्यादा सैलानिओं के आने से लद्दाख के पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लेकिन, दूसरी तरफ इसमें प्राकृतिक संसाधनों जैसे पानी और जमीन की खपत भी लगातार बढ़ती जा रही है।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार लद्दाख में लोगों ने खेती और खाली पड़ी जमीनों पर होटल बनाये हैं। साल 2001 से 2011 के बीच खाली पड़ी जमीन में लगभग 50% की कमी आई। साल 2001 में ये ज़मीन 283 हेक्टेयर से घटकर 2011 में 196 हेक्टेयर हो गई, जबकि निर्माण क्षेत्र (कंस्ट्रक्टेड एरिया) 168 हेक्टेयर से बढ़कर 294 हेक्टेयर हो गया। साथ ही, शहरीकरण, सुंदरता और व्यवसाइक कारणों से पेड़-पौधों की बाहरी प्रजातियों के आने से लेह शहर की बायोडायवर्सिटी को नुकसान हुआ है।

पर्यटन मंत्रालय द्वारा लद्दाख में पर्यटन के विकास के लिए तैयार किए गए विज़न डॉक्यूमेंट में भी पर्यटन बढ़ने से सांस्कृतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इस डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि लदाख में पर्यटन के एक हद से अधिक बढ़ने से सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत के लिए खतरा, सीमित संसाधनों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल, और दुसरे नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। पारंपरिक और पर्यावरण के अनुकूल इमारतों की जगह पर्यावरण के प्रतिकूल इमारतों का बनना, सूखे कचरे के बढ़ती समस्या, वायु प्रदूषण का बढ़ना, जल संसाधनों में कमी, और जैवविविधता का नुकसान ऐसे कुछ कारण हैं।
बैनर तस्वीरः लद्दाख में पर्यटन की घटती गति, ख़ाली होटल और बंद व्यवसाय इसकी सच्चाई बयां कर रहे हैं। 2025 में आतंकी हमले, रिकॉर्ड बारिश और स्थानीय हिंसा ने इस क्षेत्र के पर्यटन को गंभीर रूप से प्रभावित किया, जिससे होटल और टैक्सी व्यवसायों की आय में भारी गिरावट आई। तस्वीर- शैलेष श्रीवास्तव/मोंगाबे