- भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार तो बढ़ रहा है, लेकिन छोटे शहरों में चार्जिंग की पर्याप्त सुविधा नहीं होने से उपभोक्ताओं को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- उपभोक्ताओं को चार्जिंग स्टेशन खोजने के लिए अलग-अलग कंपनियों के ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता है। साथ ही, सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों पर चार्जिंग दरों में भी लगभग दोगुने का अंतर है।
- जानकारों का मानना है कि पेट्रोल स्टेशनों की तरह चार्जिंग स्टेशनों पर चार्जिंग को सुविधाजनक बनाने के लिए वॉलेट के अलावा पेमेंट के दूसरे तरीकों को अपनाने के साथ नियामक तंत्र बनाया जाना चाहिए।
इस साल फरवरी के पहले हफ्ते में कारोबारी गौरव कुमार सिंह अपनी कार से पुरी से बेगूसराय जाने के लिए निकले। संयोग से 700 किलोमीटर की यह दूरी वह इलेक्ट्रिक कार से तय कर रहे थे जो फुल चार्ज होने पर 400 किलोमीटर तक चलती है।
आधा सफर पूरा कर लेने पर जब उन्हें अपनी कार चार्ज कराने की जरूरत महसूस हुई, तो वे ऐप की मदद से चार्जिंग स्टेशन खोजने लगे। अलग-अलग ऐप से उन्हें पांच चार्जिंग स्टेशन का पता तो चला, लेकिन वे सब के सब खराब थे।
आखिरकार उन्हें अपनी कार चार्ज कराने के लिए रांची शहर के अंदर आना पड़ा। उन्होंने कोकर स्थित अक्षत फ्यूल पर अपनी कार चार्ज करते हुए मोंगाबे-हिंदी से कहा, “अगर हाइवे पर चार्जिंग स्टेशन मिल गया होता, तो मैं वहीं से बेगूसराय निकल जाता और मुझे इतनी परेशानी नहीं होती।”
चार्जिंग स्टेशन से डिस्चार्ज होता मार्केट
ओडिशा के क्योंझर में अपना बिजनेस करने वाले गौरव महीने में दो बार बेगूसराय जाते हैं। आठ महीने पहले जब उन्होंने कार खरीदने पर विचार करना शुरू किया, तो जलवायु परिवर्तन और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इलेक्ट्रिक कार का विकल्प पसंद आया।
यही वजह है कि भारत इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में लगातार तेजी देख रहा है। लेकिन, लेकिन चार्जिंग के लचर बुनियादी ढांचे की वजह से भारत EV को अपनाने में अमेरिका, यूरोपीय संघ व चीन से पीछे है। इलेक्ट्रिक कार के मामले में यह स्थिति और चिंताजनक है। एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती लागत ज्यादा होने, चार्जिंग का बेहतर बुनियादी ढांचा नहीं होने और सीमित डीलरशिप नेटवर्क से टियर 2 और 3 शहरों में लोग इलेक्ट्रिक कार खरीदने से कतराते हैं।
रांची में बासुदेव ऑटो लिमिटेड में सेल्स कोच विशाल तिवारी भी इस डर की तस्दीक करते हैं, “हमारे पास आने वाले कस्टमर के पास चार्जिंग को लेकर सबसे ज्यादा सवाल होते हैं। सबसे सामान्य प्रश्न यह होता है कि अगर गाड़ी सुनसान जगह पर बंद हो गई, तो क्या होगा? पेट्रोल-डीजल के साथ यह सुविधा है कि उसे आप बोतल में भी ला सकते हैं।”
गौरव कहते हैं कि ज्यादातर पेट्रोल पंप पर चार्जर तो लग गए हैं, लेकिन ये काम नहीं कर रहे हैं। वे कहते हैं, “समस्या राज्यों के बिजली विभाग की तरफ से अधिक है, क्योंकि इलेक्ट्रिक चार्जर के लिए अलग से ट्रांसफर्मर लगाना होता है और पावर लाइन लेनी होती है। विभाग की ओर से हो रही देरी का खामियाजा हम जैसे उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है।”

गौरव जैसी समस्याओं से रांची के रुक्का निवासी संदीप सिंह भी अक्सर दो-चार होते हैं। वैसे वे रात में घर पर अपनी गाड़ी चार्ज कर लेते हैं, लेकिन लंबी दूरी तय करने के लिए पहले उन्हें घर से 12 किलोमीटर दूर अक्षत फ्यूल पर आकर अपनी कार चार्ज करानी पड़ती है। वह कहते हैं कि उनके घर के पांच किलोमीटर के दायरे में तीन पेट्रोल पंप हैं, लेकिन इनमें से किसी में भी चार्जिंग की सुविधा नहीं है।
संदीप एक घटना का जिक्र करते हैं जब उन्हें रांची से 300 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर जाना था। वह कहते हैं, “जब मैंने अलग-अलग ऐप के जरिए चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की कोशिश की, तो एक भी नहीं मिला। आखिरकार मुझे डीजल कार से जाना पड़ा जिसमें 6,000 रुपए खर्च हुए। इलेक्ट्रिक कार से सफर करने पर महज 1,500 रुपए खर्च होते।“
जानकार मानते हैं कि पेट्रोल पंप पर चार्जिंग स्टेशन लगाने को अनिवार्य बनाकर इस समस्या से निजात पाया जा सकता है। रांची सहित झारखंड के चार शहरों में इलेक्ट्रिक कारों के डीलर सिंघानिया फ्यूचर प्राइवेट लिमिटेड के सेल्स उपाध्यक्ष राजेश धर कहते हैं, “चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से विकसित हो रहा है। पेट्रोल पंप जैसे स्थानों पर 24 घंटे बिजली और पर्याप्त जगह उपलब्ध होती है, जिससे चार्जिंग नेटवर्क को और मजबूत किया जा सकता है। आने वाले समय में यह व्यवस्था और अधिक सुविधाजनक होगी।”
धर की बात को इस तथ्य से मजबूती मिलती है कि भारत में पेट्रोल पंप की संख्या एक लाख से ज्यादा है और इस मामले में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे नंबर है।
अनेक ऐप, कई मुश्किलें
भारत में चार्जिंग स्टेशन खोजने के लिए इलेक्ट्रिक कार मालिकों को अलग-अलग ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता है। गौरव ने भी अपने मोबाइल में ऐसे कम से कम पांच ऐप इंस्टॉल कर रखे हैं लेकिन, इन ऐप की जानकारियों पर शत-प्रतिशत विश्वसनीय नहीं है।
वह कहते हैं, “अगर आप ऐप से सर्च करेंगे, तो रांची के बूटी मोड़ के पास और हजारीबाग के सैनी होटल में चार्जिंग स्टेशन दिखाई देगा। लेकिन इनमें से एक हमेशा खराब रहता है और एक बंद है। कई बार बिजली नहीं होने से आपको इंतजार करना पड़ता है।”
रांची निवासी अंकित जैन भी अपने साथ हुई एक घटना का जिक्र मोंगाबे हिंदी से करते हैं, “बिहार के मुंगेर जाते वक्त नवादा में मुझे अपनी कार चार्ज करानी थी। जब मैंने ऐप पर सर्च करके चार्जिंग स्टेशन पहुंचा, तो वहां ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। इसकी शिकायत मैंने कंपनी से की, लेकिन उनका जवाब अभी तक नहीं आया है।”
डेढ़ साल से इलेक्ट्रिक कार चला रहे और छह ऐप का इस्तेमाल करने वाले जावेद अकरम हजारीबाग में हुई परेशानी मोंगाबे-हिंदी के साथ साझा करते हैं, “जब हम चार्जिंग स्टेशन पर पहुंचे, तो उसमें कुछ फॉल्ट था। कार का चार्ज पूरी तरह खत्म हो चुका था। हारकर हमें अपनी गाड़ी को टो करके एक रिश्तेदार के यहां ले जाकर चार्ज कराना पड़ा।”
अंकित का मानना है, “चार्जिंग स्टेशन सर्च करने के लिए सिंगल सेंट्रलाइज्ड ऐप और उसमें चार्जिंग स्टेशन की रियल-टाइम जानकारी होना चाहिए। कंपनियां अपने सीएसआर फंड को पूल करके इसका खर्च उठा सकती हैं।”

नीति आयोग भी अपनी रिपोर्ट में EV इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और मैनेज करने के लिए UPI जैसे वन स्टॉप यूनिफाइड ऐप को जरूरी बताता है।
भारत में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की संख्या में भी बड़े शहरों का पलड़ा भारी है। एक जानकारी के मुताबिक एक अप्रैल, 2025 तक टियर 1 शहरों में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की कुल संख्या 9,702 थी। टियर 2 और टियर-3 शहरों में यह तादाद 16,665 थी।
दूसरी तरफ, CREDAI की रिपोर्ट के मुताबिक महानगरों यानी टियर-1 शहरों की संख्या महज नौ है और इस तरह एक महानगर में औसतन 1,078 चार्जिंग स्टेशन हैं। टियर-2 और टियर-3 शहर 227 हैं और यह आंकड़ा महज 73 से थोड़ा ज्यादा बैठता है।
चार्जिंग की अलग-अलग दरें
गौरव जैसे कंज्यूमर के लिए चार्जिंग की अलग-अलग दरें भी परेशानी का सबब हैं। गौरव बताते हैं कि सार्वजनिक स्टेशनों पर यह दर करीब 12 रुपए और निजी स्टेशनों पर लगभग 22 रुपए है। वहीं घर पर चार्ज करने पर पांच से सात रुपए प्रति यूनिट तक का खर्च आता है।
संदीप बताते हैं कि अगर वह घर पर चार्ज करते हैं, तो एक किलोमीटर पर उनकी लागत एक रुपए पच्चीस पैसे आती है। सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर लागत दोगुनी और निजी कंपनी में करीब तिगुनी हो जाती है।
मोंगाबे-हिंदी ने रांची में अलग-अलग चार्जिंग स्टेशन का दौरा करने और कस्टमर के बिल देखने के बाद पाया कि निजी स्टेशनों पर जीएसटी से पहले एक यूनिट बिजली के लिए करीब 22 रुपए देने पड़ते हैं। सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर यह रेट 12 रुपए प्रति यूनिट है।
ऐसा तब है जब झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने चार्जिंग स्टेशन के लिए बिजली की दरें तय कर रखी है।
आयोग ने 2025-26 में पीक आवर में चार्जिंग स्टेशन के लिए (सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक) के दौरान हर यूनिट की कीमत 7.31 रुपए तय की है। ऑफ-पीक आवर के लिए यह रेट 8.77 रुपए प्रति घंटा है।

हालांकि, आईफॉरेस्ट में सीनियर रिसर्च एसोसिएट समरीन ढींगरा इसे अलग नजरिए से देखती हैं। उनके मुताबिक, “निजी ऑपरेटर चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए तय मासिक शुल्क का भुगतान करता है, बुनियादी ढांचे और परिचालन पर लागत आती है, स्टेशन का रखरखाव करता है और लाभ कमाता है। इसलिए, दरें बढ़कर ₹22-24 प्रति यूनिट हो जाती हैं।”
अंकित बताते हैं कि सार्वजनिक और निजी चार्जिंग स्टेशन पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी भी लगता है। उनका दावा है, “वॉलेट में पैसा डालते समय भी 18 फीसदी जीएसटी देना होता है और चार्ज कराने पर भी जीएसटी लगता है। ऐसे में 36 फीसदी सिर्फ टैक्स में चले जाते हैं।”
नीति आयोग की रिपोर्ट भी इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग पर जीएसटी को घटाकर पांच फीसदी करने का सुझाव देती है।
गौरव एक और दिक्कत की तरफ इशारा करते हुए कहते हैं कि पेट्रोल पंप के विपरीत चार्जिंग स्टेशनों पर फिलहाल वॉलेट के अलावा पेमेंट का दूसरा तरीका नहीं है।
वैसे, भुगतान प्रणाली पर धर का दृष्टिकोण सकारात्मक है, “डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने प्रक्रिया को सरल बनाया है। यदि चार्जिंग स्टेशनों पर सभी प्रकार के भुगतान विकल्प उपलब्ध हों, तो उपभोक्ताओं का विश्वास और भी मजबूत होगा।”
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जानकार सवाल उठाते हैं कि भारत में पेट्रोलियम और इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर के लिए रेगुलेशन मौजूद हैं। हर राज्य में बिजली की एक दर होती है, डीजल-पेट्रोल का एक रेट होता है। फिर चार्जिंग की अलग-अलग दर, अलग-अलग ऐप क्यों हैं?
सरकारी पहल पर विश्वास जताते हुए धर कहते हैं, “भारत में इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। यदि एक समान और पारदर्शी नीति ढांचा विकसित किया जाए, तो यह बाजार को और गति देगा तथा उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा और भरोसा प्रदान करेगा।”
बैनर तस्वीर- रांची में एक चार्जिंग स्टेशन। चार्जिंग स्टेशन पर अलग-अलग दरें भी परेशानी का सबब हैं। जहां सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर रेट 12 से 14 रुपए प्रति यूनिट है। वहीं निजी में यह रेट बढ़कर लगभग दोगुनी हो जाती है। तस्वीर- विशाल कुमार जैन\मोंगाबे