- मछुआरों से प्राप्त नमूनों की मदद से हाल ही में खोजी गई एक विशाल स्क्विड की प्रजाति ‘टैनिंगिया सिलासी’ का वर्णन करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्राप्त हुए।
- यह नमूना अष्टमुडी झील और अरब सागर के संगम पर स्थित शक्तिकुलंगारा बंदरगाह पर ट्रॉलरों से एकत्र किया गया था।
- यह नमूना, जिसे उप-वयस्क माना गया है, 41.5 सेंटीमीटर लंबा था और इसका वजन लगभग 1.7 किलोग्राम था।
मार्च 2024 में, केरलम के कोल्लम जिले के तट से दूर अरब सागर में, मछुआरों को अपने जालों में एक अनोखा जीव दिखाई दिया। कोच्चि में स्थित केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने इसे गहन अध्ययन के लिए अपने संरक्षण में लिया। यह जीव संभवतः किसी शिकारी से बचने के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया था। लेकिन फिर भी इससे लिए गए नमूनों की मदद से हाल ही में खोजी गई एक विशाल स्क्विड की प्रजाति ‘टैनिंगिया सिलासी’ का वर्णन करने के लिए पर्याप्त प्रमाण प्राप्त हुए। स्क्विड की यह प्रजाति गहरे समुद्र में पाई जाती है।
मरीन बायोडायवर्सिटी नामक जर्नल में पिछले साल प्रकाशित की गई स्क्विड की यह प्रजाति टैनिंगिया जीनस से औपचारिक रूप से वर्णित होने वाली दूसरी प्रजाति है। इससे पहले टैनिंगिया डानाए (स्क्विड की सबसे बड़ी प्रजातियों में से एक) का वर्णन किया गया था। आकारिकी और फाइलोजेनेटिक आकलन से पता चला कि इसकी निचली चोंच का आकार, उपास्थि संरचनाएं और गलफड़े जैसे लक्षण टैनिंगिया डानाए से अलग हैं, जिससे दोनों प्रजातियों के बीच अंतर की पुष्टि होती है।
इस खोज का नेतृत्व इस अध्ययन के लेखकों गीता ससिकुमार और के.के. साजिकुमार ने किया। ससिकुमार मुख्य रूप से शंखों का अध्ययन करती हैं, वहीं साजिकुमार सेफालोपोड्स पर शोध करते हैं। सीएमएफआरआई मछली पकड़ने की गतिविधियों की निगरानी करता है, ट्रॉलरों और गिल नेटर्स जैसे मछली पकड़ने वाले जहाजों के साथ समन्वय करता है, और तटीय लैंडिंग केंद्रों को नियमित रूप से देखता है। टैनिंगिया सिलासी (Taningia silasii) के वर्णन का आधार बनने वाला यह नमूना अष्टमुडी झील और अरब सागर के संगम पर स्थित शक्तिकुलंगारा बंदरगाह पर ट्रॉलरों से एकत्र किया गया था।
“हालांकि यह नमूना क्षतिग्रस्त था और इसके कई आंतरिक अंग गायब थे, लेकिन इस प्रजाति के नमूने को पकड़ना बहुत दुर्लभ है – शायद उनके मेसोपेलैजिक (गोधूलि क्षेत्र) से बाथिपेलैजिक (मध्यरात्रि क्षेत्र) आवास के कारण, जो आमतौर पर 200 से 2,000 मीटर गहरा होता है,” ससिकुमार ने कहा।
हालांकि इसके पेट की सामग्री प्राप्त नहीं की जा सकी, अध्ययन के लेखकों का कहना है कि टी. सिलासी संभवतः मांसाहारी है, जो क्रस्टेशियन और मछली जैसे विभिन्न प्रकार के शिकार पर निर्भर करता है। यह नमूना, जिसे उप-वयस्क माना गया है, 41.5 सेंटीमीटर लंबा था और इसका वजन लगभग 1.7 किलोग्राम था। इसके कई आंतरिक अंग अनुपस्थित होने के कारण इसका लिंग निर्धारित नहीं किया जा सका। हालांकि, आंतरिक आवरण (जिसमें स्क्विड के प्रजनन अंग होते हैं) के साथ प्रत्यारोपित शुक्राणुकोषों से संकेत मिलता है कि यह संभोग के तुरंत बाद पकड़ी गई मादा हो सकती है।
टी. सिलासी का नाम सीएमएफआरआई के पूर्व निदेशक स्वर्गीय ई.जी. सिलास (1928-2018) के सम्मान में रखा गया था, जो भारत में सेफालोपोड्स का अध्ययन करने वाले प्रथम वैज्ञानिकों में से एक थे।
“टैनिंगिया स्क्विड बहुत तेज़ तैराक होते हैं और आमतौर पर तटीय जल में नहीं पाए जाते। इसलिए इनकी आबादी पर नज़र रखना तो दूर की बात है, इनमें से एक को भी ढूंढना आसान नहीं है,” ससिकुमार ने कहा। उन्होंने आगे बताया कि ये 200 मीटर से अधिक गहराई वाले मेसोपेलैजिक यानी ‘गोधूलि क्षेत्र’ और बाथिपेलैजिक यानी ‘मध्यरात्रि क्षेत्र’ में पाए जाते हैं। ऐसी गहराई में अध्ययन के लिए रिमोट से संचालित वाहन यानी आरओवी जैसे महंगे उपकरणों की जरूरत होती है। जो सुरक्षित नमूने लेने के साथ-साथ अन्य प्रजातियों को होने वाले नुकसान कम करते हैं और मनुष्यों के लिए जोखिम को भी कम करते हैं।
ससिकुमार ने कहा कि सीएमएफआरआई को टी. सिलासी प्रजाति के अधिक नमूनों का अध्ययन करने की उम्मीद है ताकि इस प्रजाति, पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका और इसकी आबादी और उपस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। गहरे समुद्र के जीवों के अध्ययन के लिए बड़ी धनराशि और महंगे उपकरणों की आवश्यकता होती है, जिनके बिना शोध धीमा हो जाता है।
व्यावसायिक मछुआरों के साथ सहयोग से समुद्री जीवन के अध्ययन में मदद मिल सकती है। साथ ही, प्रजनन मौसम के दौरान नमूनों को इकट्ठा करने से बचने जैसे स्थिरता उपायों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 8 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: टी. सिलासी की तस्वीर गीता ससिकुमार और के.के. सजीकुमार द्वारा।