- उच्च न्यायालयों में मामलों का बोझ कम करने और पर्यावरण संबंधी कानूनी विवादों के शीघ्र निपटान के लिए साल 2010 राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की स्थापना की गई थी।
- आंकड़ों के अनुसार, एनजीटी की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में नवंबर 2025 तक लंबित मामलों की संख्या 1939 थी।
- पुणे स्थित पश्चिमी पीठ, इसी अवधि में 1933 लंबित मामलों के साथ दूसरे और चेन्नई स्थित दक्षिणी पीठ (846 लंबित मामले) तीसरे स्थान पर थीं।
संसद में पेश किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पर्यावरण सम्बन्धी विवादों के समाधान के लिए समर्पित विशेष अदालत, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पिछले साल 15 दिसंबर को संसद को बताया कि एनजीटी की सभी पांच पीठों के सामने कुल 5,000 से अधिक मामले लंबित हैं।
उच्च न्यायालयों में मामलों का बोझ कम करने और पर्यावरण संबंधी कानूनी विवादों के शीघ्र निपटान के लिए साल 2010 राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की स्थापना एनजीटी अधिनियम के तहत की गई थी। यह प्राधिकरण पर्यावरण अधिकारों और संरक्षण, क्षति और मुआवजे से संबंधित विवादों में विशेषज्ञता रखता है और इसकी उपस्थिति देश के प्रत्येक क्षेत्र में है।
आंकड़ों के अनुसार, एनजीटी की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ में 2020 से 2025 तक सबसे अधिक मामले लंबित थे। इस पीठ में नवंबर 2025 तक लंबित मामलों की संख्या 1939 थी। पुणे स्थित पश्चिमी पीठ, इसी अवधि में 1933 लंबित मामलों के साथ दूसरे स्थान पर थी। इसके बाद चेन्नई स्थित दक्षिणी पीठ (846 लंबित मामले), कोलकाता स्थित पूर्वी पीठ (411 लंबित मामले) और भोपाल स्थित केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ (320 लंबित मामले) का स्थान रहा।
“मामलों के निस्तारण की दर बढ़ाने के लिए, सरकार ने एनजीटी के सभी पीठों में डिजिटल अवसंरचना के उन्नयन हेतु आवश्यक सहयोग प्रदान किया है, जिसके अंतर्गत वर्चुअल कोर्ट कार्यवाही एवं एक समर्पित पोर्टल के माध्यम से ई-फाइलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है,” सिंह ने संसद में एक प्रश्न के उत्तर में बताया।
इस प्राधिकरण की अगुवाई एक अध्यक्ष करते हैं जो प्रधान पीठ में बैठते हैं और इसमें कम से कम 10 और अधिकतम 20 न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं, जो विवादों के समाधान के लिए निर्णय लेने में समान भूमिका निभाते हैं। हालांकि, एनजीटी में वर्तमान में न्यायिक सदस्यों के छह पद और विशेषज्ञ सदस्यों के चार पद रिक्त हैं।
“चेन्नई, पुणे, भोपाल और कोलकाता में स्थित न्यायाधिकरण की क्षेत्रीय पीठों में न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की पूरी संख्या न होने के कारण, नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ याचिकाकर्ताओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अन्य न्यायालयों से प्राप्त आवेदनों की सुनवाई दूरस्थ रूप से कर रही है,” एनजीटी की वेबसाइट पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के पेज पर यह जानकारी दी गई है।
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 22 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: भारत के एक शहर में प्रदूषित नदी। तस्वीर – जन जोर्ग द्वारा विकिमीडिया कॉमन्स (सार्वजनिक डोमेन) के माध्यम से।