Categories for जलवायु परिवर्तन

युवा जलवायु इंटर्नशिप सत्र के दौरान तटीय खतरों पर चर्चा करते प्रतिभागी। तस्वीर- अपर्णा गणेशन।

चेन्नई में पर्यावरण और जलवायु साक्षरता बेहतर कर रहा प्रकृति-आधारित पढ़ाई का तरीका

प्रकृतिवादी, शिक्षक और कार्यकर्ता, युवान एवेस बच्चों के 18 सदस्यीय समूह के साथ तमिलनाडु के चेन्नई में इलियट समुद्र तट के किनारे घूम रहे हैं। वह बच्चों को एक सीप…
युवा जलवायु इंटर्नशिप सत्र के दौरान तटीय खतरों पर चर्चा करते प्रतिभागी। तस्वीर- अपर्णा गणेशन।

[टिप्पणी] आरबीआई की रिपोर्ट भविष्य में भारत की निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की कल्पना करती है

साल 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन हासिल करने का भारत का लक्ष्य नीति निर्माताओं के लिए वित्तीय प्रणाली के संभावित जोखिमों और आवश्यक नीति सुधारों के संबंध में महत्वपूर्ण प्रश्न…
विभिन्न प्रकार के रुगड़ा मशरूम। तस्वीर- विशेष प्रबंध

रुगड़ा: आदिवासियों के पोषण का बड़ा जरिया लेकिन बदलते मौसम से उत्पादन पर दबाव

अगस्त महीने के शुरुआती सोमवार का दिन था। झारखण्ड के रांची जिले में साल के जंगल के किनारे बसे तेतरी गांव की रहने वाली अंजली लकड़ा (38) अचानक से पेड़ों…
विभिन्न प्रकार के रुगड़ा मशरूम। तस्वीर- विशेष प्रबंध
शहरी खेती को बढ़ावा देने के लिए छत पर की जाने वाली खेती। तस्वीर - Maheshcm76/विकिमीडिया कॉमन्स

कार्बन उत्सर्जन कम करने में महत्वपूर्ण है शहरी और कस्बाई खेती की भूमिका

कृषि कीटविज्ञानी (एंटोमोलोजिस्ट) राजेंद्र हेगड़े (53) बेंगलुरु में कुछ-कुछ हफ्तों में एक बड़ी सभा को संबोधित करते रहे हैं। अपनी इस सभा में वह लोगों के सामने एक प्रस्ताव रखते…
शहरी खेती को बढ़ावा देने के लिए छत पर की जाने वाली खेती। तस्वीर - Maheshcm76/विकिमीडिया कॉमन्स
कर्नाटक के बेल्लारी में थर्मल पॉवर प्लांट। तस्वीर- प्रणव कुमार/मोंगाबे।

ग्रीन क्रेडिट से पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन, लेकिन चाहिए मजबूत नियामक तंत्र

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए "ग्रीन क्रेडिट" स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत व्यक्ति, संगठन और उद्योग पर्यावरण के…
कर्नाटक के बेल्लारी में थर्मल पॉवर प्लांट। तस्वीर- प्रणव कुमार/मोंगाबे।
लद्दाख की राजधानी लेह स्थित मौसम केंद्र। यह केंद्र समुद्र तल से 11,562 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

[वीडियो] लद्दाखः भारत के सबसे ऊंचे मौसम केंद्र से ग्राउंड रिपोर्ट, चुनौतियों से भरा है पल-पल बदलते मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विज्ञानी अभय सिंह हवा की दिशा और रफ्तार, बादलों की स्थिति का आकलन कर रहे हैं। किसी भी मौसम केंद्र के लिए यह एक आम दिनचर्या है, लेकिन सिंह…
लद्दाख की राजधानी लेह स्थित मौसम केंद्र। यह केंद्र समुद्र तल से 11,562 फिट की ऊंचाई पर स्थित है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
लद्दाख के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अभियान के तहत सोनम वांगचुक ने जून 2023 में क्लाइमेट फास्ट (जलवायु उपवास) रखा। तस्वीर- सोनम वांगचुक/ट्विटर

[साक्षात्कार] छठवी अनुसूची में संरक्षण मिलने से कैसे बचेगी नाजुक लद्दाख की आबोहवा, समझा रहे हैं पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक

ग्लेशियर की वजह से लद्दाख में जीवन संभव है। सबसे बड़ा मुद्दा ग्लेशियर के तेजी से पिघलने का है। यह एक ठंडा रेगिस्तान है और यहां जिंदगी मुमकिन है तो…
लद्दाख के नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अभियान के तहत सोनम वांगचुक ने जून 2023 में क्लाइमेट फास्ट (जलवायु उपवास) रखा। तस्वीर- सोनम वांगचुक/ट्विटर
नर्सरी से लाने के बाद पौधों को लगाते लोग। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे ।

मैंग्रोव के निर्माण से लाभान्वित हो रहा गुजरात का तटीय समुदाय, आजीविका के साथ पर्यावरण को फायदा

ऐसा लग रहा था कि यह दलदल कभी ख़त्म नहीं होगा। जब मैं घुटनों तक दलदल में चली गई, तो सिर्फ़ केकड़ ही मेरे साथ थे। मुझसे महज 10 फुट…
नर्सरी से लाने के बाद पौधों को लगाते लोग। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे ।
दिल्ली में एक अंडा विक्रेता। जैसा कि भारतीय राज्यों में अंडे की कमी है, लोगों को पारंपरिक प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोत खोजने पड़ सकते हैं। ऐसा ही एक विकल्प खोजा जा रहा है वह है, कीट। तस्वीर पल्लव.जौरनो/विकिमीडिया

[कमेंट्री] भारत में अंडे की कमी के चलते, कीट और पतंगे प्रोटीन और पोषण के लिए संभावित समाधान हो सकते हैं?

भारत ने इस साल 17 जनवरी को जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ दिया। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे लेकर हम असमंजस में हैं कि इस पर…
दिल्ली में एक अंडा विक्रेता। जैसा कि भारतीय राज्यों में अंडे की कमी है, लोगों को पारंपरिक प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोत खोजने पड़ सकते हैं। ऐसा ही एक विकल्प खोजा जा रहा है वह है, कीट। तस्वीर पल्लव.जौरनो/विकिमीडिया
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।

मधुमक्खी और तितली जैसे कीड़े-मकोड़ों के कम होने का असर इंसानों पर भी, हर साल मर रहे पांच लाख लोग

बटरफ्लाई थ्योरी कहती है कि न के बराबर होने वाले बदलाव भी बहुत बड़ा असर दिखाते हैं। केओस थ्योरी के बारे में चर्चा के दौरान अक्सर एक रूपक का इस्तेमाल…
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।
स्थानीय तौर पर बुरांश के नाम से जाना जाने वाला Rhododendron arboreum खूबसूरत और हरा-भरा पेड़ होता है जिस पर गाढ़े लाल रंग के फूल आते हैं और इसका तना गुलाबी भूरे रंग का होता है। तस्वीर: अनिल विजयेश्वर डंगवाल।

(कमेंट्री) हिमालयी फूल बुरांश की संभावनाओं और क्षमताओं की खोज

वनों पर निर्भर समुदायों की जीविका वनों में मिलने वाली जैव विविधता से और समृद्ध होती है। इससे वह वनों में आसानी से जीवित रहते हैं और उनका जीवन आसान…
स्थानीय तौर पर बुरांश के नाम से जाना जाने वाला Rhododendron arboreum खूबसूरत और हरा-भरा पेड़ होता है जिस पर गाढ़े लाल रंग के फूल आते हैं और इसका तना गुलाबी भूरे रंग का होता है। तस्वीर: अनिल विजयेश्वर डंगवाल।
असम के नागांव के एक गांव पहुकाता में धान की खेती। तस्वीर: दिगंता तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।

बढ़ते जलवायु संबंधी खतरों के साथ, अनुकूलन के लिए तैयार होते किसान

फरवरी के अंत में, भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), गेहूं के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, ने भारत में किसानों को तापमान में अचानक वृद्धि के मामले में…
असम के नागांव के एक गांव पहुकाता में धान की खेती। तस्वीर: दिगंता तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।
साल 2018 में भारतीय हिमालय क्षेत्र (IHR) के लिए किए गए जलवायु की अनिश्चितता के आकलन के मुताबिक, असम सबसे ज्यादा संवेदनशील राज्य है। तस्वीर: बंदिता बरुआ।

अचानक बाढ़ और सूखे जैसे हालात से प्रभावित हो रही है असम की खेती

साल 2022 में असम में हुई रिकार्ड तोड़ बारिश के बाद आई बाढ़ पिछले एक दशक में राज्य में आई सबसे भयावह बाढ़ थी। इसके ठीक पहले असम के कुछ…
साल 2018 में भारतीय हिमालय क्षेत्र (IHR) के लिए किए गए जलवायु की अनिश्चितता के आकलन के मुताबिक, असम सबसे ज्यादा संवेदनशील राज्य है। तस्वीर: बंदिता बरुआ।
आइबिस बिल नदियों की छोटी धाराओं के छोटे द्वीपों में अपना घोंसला बनाता है, जो चट्टानों के बड़े और छोटे पत्थरों के बीच छिपा होता है। तस्वीर- नीलांजन चटर्जी 

बदलती जलवायु की वजह से खतरे में हिमालय की करिश्माई जलपक्षी आइबिस बिल की आबादी

समुद्रतल से बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में एक ऐसी पक्षी का घर है जिन्हें आसानी से पहचाना नहीं जा सकता। ये घर चट्टानों के गोल पत्थरों के बीच छिपे होते…
आइबिस बिल नदियों की छोटी धाराओं के छोटे द्वीपों में अपना घोंसला बनाता है, जो चट्टानों के बड़े और छोटे पत्थरों के बीच छिपा होता है। तस्वीर- नीलांजन चटर्जी 
अल्फांसो आम। तस्वीर – हिरेन कुमार बोस।

महाराष्ट्रः बेमौसम बारिश और अधिक गर्मी ने खराब की अल्फांसो आम की फसल, बढ़ी कीमत

बेमौसम बारिश और तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने महाराष्ट्र में अल्फांसो आम की पैदावार को कम कर दिया है। इस वजह से पिछले साल की तुलना में इन आमों…
अल्फांसो आम। तस्वीर – हिरेन कुमार बोस।
गर्मी के मौसम में दिल्ली के मयूर विहार में नारियल पानी बेचता एक व्यक्ति। तस्वीर- अंकुर जैन/विकीमीडिया कॉमन्स

नई रिपोर्ट में वैश्विक तापमान बढ़ने की आशंका, भारत में लू बनेगी घातक

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट ने आशंका जताई है कि अगले पांच साल अब तक के सबसे गर्म हो सकते हैं। इस दौरान वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी 1.5 डिग्री…
गर्मी के मौसम में दिल्ली के मयूर विहार में नारियल पानी बेचता एक व्यक्ति। तस्वीर- अंकुर जैन/विकीमीडिया कॉमन्स
भोपाल के लहारपुरा के पास गेहूं के खेतों में लगी आग। फसल काटने के बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए फसल अवशेष में आग लगा देते हैं। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश का देश में दूसरा स्थान, सरकारी योजनाओं से बेखबर किसान

मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर आता है, यह बात प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। लेकिन इसके साथ ही मध्य प्रदेश अब फसल अवशेषों…
भोपाल के लहारपुरा के पास गेहूं के खेतों में लगी आग। फसल काटने के बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए फसल अवशेष में आग लगा देते हैं। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
जोशीमठ में एक क्षतिग्रस्त घर। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे

उत्तराखंड: आपदा के बाद मुआवजे की धीमी रफ़्तार, जटिल प्रक्रिया से परेशान जोशीमठ के लोग

"हमारा मकान मिट्टी का बना था, जो आपदा के कारण रहने लायक नहीं बचा। अब जब हम मुआवजे के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो हमें कहा जा रहा है…
जोशीमठ में एक क्षतिग्रस्त घर। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे
मुजफ्फरपुर के मणिका गांव स्थित लीची का बगान। लीची की खेती प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल के माजदिया, कालियाचक व कृष्णानगर इलाके, बिहार के मुजफ्फरपुर जिले व उसके आसपास के कुछ जिलों व पंजाब के पठानकोट में होती है। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहे हैं बिहार के लीची किसान

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी ब्लॉक में पड़ने वाले मणिका गांव के किसान राजीव रंजन की 10 हेक्टेयर जमीन में लीची का बगीचा लगा है। लेकिन इस साल बारिश…
मुजफ्फरपुर के मणिका गांव स्थित लीची का बगान। लीची की खेती प्रमुख रूप से पश्चिम बंगाल के माजदिया, कालियाचक व कृष्णानगर इलाके, बिहार के मुजफ्फरपुर जिले व उसके आसपास के कुछ जिलों व पंजाब के पठानकोट में होती है। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे
रामेश्वरम के मछुआरे पकड़ी हुई मछलियों को किनारे पर लाते हुए। तस्वीर- नारायण स्वामी सुब्बारमन/मोंगाबे

प्रदूषण, नियमों की अनदेखी और भूमि रूपांतरण की वजह बनते रामेश्वरम के झींगा फार्म

भारत में, पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए अलग-अलग योजनाएं चलाई गई हैं। इन अनुकूल नीतियों के चलते  देश में…
रामेश्वरम के मछुआरे पकड़ी हुई मछलियों को किनारे पर लाते हुए। तस्वीर- नारायण स्वामी सुब्बारमन/मोंगाबे
रामेश्वरम का एक पारंपरिक मछुआरा। तस्वीर- नारायण स्वामी सुब्बारमन / मोंगाबे

झींगा फार्म के विरोध में क्यों हैं रामेश्वरम के पारंपरिक मछुआरे

समुद्र के बीच में बसे तमिलनाडु के रामेश्वरम में यह सूरज के साथ आंख-मिचौली कर रहे बादलों के कारण यह एक धूप-छाँव वाला दिन था। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.…
रामेश्वरम का एक पारंपरिक मछुआरा। तस्वीर- नारायण स्वामी सुब्बारमन / मोंगाबे
अध्ययन के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में आठ से अधिक तीव्रता वाले भूकंपों को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त तनाव जमा हो गए हैं। तस्वीर- अब्दुलसयद/विकिमीडिया कॉमन्स

हिमालयी क्षेत्र की कमजोर स्थिति की चेतावनी देते इन इलाकों में बार-बार आते भूकंप

इस साल 21 मार्च को उत्तर भारत के कई राज्यों में लोगों ने भूकंप के तेज झटके महसूस किए और दिल्ली समेत उत्तरी राज्यों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों…
अध्ययन के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में आठ से अधिक तीव्रता वाले भूकंपों को ट्रिगर करने के लिए पर्याप्त तनाव जमा हो गए हैं। तस्वीर- अब्दुलसयद/विकिमीडिया कॉमन्स

पिछले साल गर्मी और अब भारी बारिश, गेहूं की फसल पर फिर मौसम की मार

इस साल मार्च में हुई भारी बारिश के चलते कई राज्यों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। पिछले साल भीषण गर्मी के चलते गेहूं उत्पादन पर असर…
बारिश के दौरान पुल से गुजरते लोग। तस्वीर-प्रसाद पिल्लई/विकिमीडिया कॉमन्स

भारतीय मॉनसून पर असर डालती उत्तरी ध्रुव की बदलती जलवायु

उत्तरी ध्रुव में पिछले एक हजार साल के ठंडे और गर्म मौसम के दौर को एक अध्ययन के जरिए फिर से बनाया या रीकंट्रस्ट किया गया है। इसमें पाया गया…
बारिश के दौरान पुल से गुजरते लोग। तस्वीर-प्रसाद पिल्लई/विकिमीडिया कॉमन्स

[वीडियो] पालतू पशु और शाकाहारी वन्य जीव मिट्टी के कार्बन को अलग तरह से प्रभावित करते हैं

एक नए अध्ययन से पता चलता है कि मिट्टी के कार्बन और उसके फलस्वरूप जलवायु पर मवेशियों और शाकाहारी वन्य जीवों के प्रभाव भिन्न होते हैं। पालतू पशुओं में एंटीबायोटिक…
फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण के प्रभाव को दिखाती रूपाहेली कला गांव की महिलाएं। तस्वीर- पारुल कुलश्रेष्ठ

राजस्थानः फैक्ट्री के प्रदूषण से फसल और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव, प्रदूषण बोर्ड ने फैक्ट्री को दिया क्लीन चिट

सुभाष वैष्णव, 52, राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुलाबपुरा कस्बे में रहते हैं। वह हर दिन सुबह 5 बजे उठते हैं और घर के रोजमर्रा के कामों को निपटा कर…
फैक्ट्री से निकलने वाले प्रदूषण के प्रभाव को दिखाती रूपाहेली कला गांव की महिलाएं। तस्वीर- पारुल कुलश्रेष्ठ
2019 में ओडिशा में फानी चक्रवात के आने के एक दिन बाद पुरी के बाहरी इलाके में अपने घर को ठीक करने की कोशिश कर रहा शख्स। तस्वीर- मनीष कुमार।

जलवायु परिवर्तन की मार भारत पर सबसे अधिक, जोखिम घटाने के लिए बढ़ाना होगा निवेश

जलवायु परिवर्तन से बुनियादी ढांचे पर बढ़ रहे जोखिम के मामले में भारत सबसे ऊपर के देशों में शामिल है। हाल ही में आई वैश्विक भौतिक जलवायु जोखिम रिपोर्ट (ग्लोबल…
2019 में ओडिशा में फानी चक्रवात के आने के एक दिन बाद पुरी के बाहरी इलाके में अपने घर को ठीक करने की कोशिश कर रहा शख्स। तस्वीर- मनीष कुमार।
मटर के खेत में निराई-गुराई का काम करतीं पोखरा ब्लॉक के वीणा धार गांव में रहने वाली महिलाएं। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे

उत्तराखंड में किसानों को क्यों नहीं मिल पा रहा जैविक खेती का लाभ

उत्तराखंड में कोटद्वार से लगभग 100 किलोमीटर दूर पोखरा ब्लॉक के वीणाधार गांव में रहने वाली लता देवी पूरे दिन व्यस्त रहती हैं। अहले सुबह वो अपनी गाय को दूहती…
मटर के खेत में निराई-गुराई का काम करतीं पोखरा ब्लॉक के वीणा धार गांव में रहने वाली महिलाएं। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे
थूथुकुडी, तमिलनाडु में नमक के पैन। नमक अब उन कई स्रोतों में से एक है जिसके माध्यम से इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहा है। तस्वीर- राधा रंगराजन।

[वीडियो] समुद्री नमक में मिला माइक्रोप्लास्टिक, सेहत पर असर के लिए रिसर्च की जरूरत

समुद्र के इको-सिस्टम के लिए प्लास्टिक प्रदूषण चिंता का मुद्दा है। हालांकि, समुद्र में बहाए जाने वाले प्लास्टिक की मात्रा का सही अंदाजा लगाना कठिन है। लेकिन अनुमान है कि…
थूथुकुडी, तमिलनाडु में नमक के पैन। नमक अब उन कई स्रोतों में से एक है जिसके माध्यम से इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक पहुंच रहा है। तस्वीर- राधा रंगराजन।

जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में आमने-सामने आते बाघ, तेंदुए और हिम तेंदुए

पिछले दिनों एक वीडियो, संभवतः भारत के जंगल में रिकॉर्ड किया गया, वायरल हुआ। इस वीडियो में एक बाघ पेड़ों के बीच चुपचाप कुछ दूरी पर अपना ध्यान केंद्रित कर…