Categories for लोग

सामुदायिक संरक्षण क्षेत्र 70 वर्ग किलोमीटर में फैला है। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज

अरुणाचल प्रदेशः पैतृक भूमि को बचाए रखने के लिए इदु मिश्मी का सामुदायिक संरक्षण

पुराने समय में बुजुर्ग कैसे पहाड़ों में बसे एलोपा और एटुगु गांवों से हर दिन लंबी यात्राएं करते थे, जंगलों को पार करते थे और जंगली जानवरों के झुंडों का…
सामुदायिक संरक्षण क्षेत्र 70 वर्ग किलोमीटर में फैला है। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज
अपने खेतों में काम करते हुए मोनपा जनजाति के कुछ लोग। तस्वीर- सुरजीत शर्मा/मोंगाबे 

[वीडियो] क्या अरुणाचल के बढ़ते बिजली संकट को हल कर पाएंगी पारंपरिक पनचक्कियां

रूपा बौद्ध मठ में काफी चहल पहल है। उत्तर पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के रूपा उप-मंडल में रहने वाली एक प्रमुख जनजाति शेरटुकपेन अपने सबसे लोकप्रिय…
अपने खेतों में काम करते हुए मोनपा जनजाति के कुछ लोग। तस्वीर- सुरजीत शर्मा/मोंगाबे 
हसदेव समुदाय की महिलाओं के साथ गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला। तस्वीर गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार के जरिए।

[इंटरव्यू] गोल्डमैन पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला ने कहा, “यह जल, जंगल, जमीन के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों का सम्मान”

छत्तीसगढ़ में पर्यावरण को बचाने के लिए काम करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए 29 अप्रैल का दिन खास रहा। इस दिन राज्य के पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला को संकटग्रस्त…
हसदेव समुदाय की महिलाओं के साथ गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला। तस्वीर गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार के जरिए।
केरल में चिन्नार का जंगल। एफआरए दोनों जनजातियों और अन्य वन निवास समुदायों के निजी और सामुदायिक अधिकारों को मान्यता देता है, जिसमें जंगलों में जल निकायों तक पहुंच शामिल है। तस्वीर - केरल पर्यटन/फ़्लिकर।

15 साल बाद भी कछुआ चाल से वन अधिकार कानून का कार्यान्वयन, नई रिपोर्ट में दावा

हाल में आई एक नई रिपोर्ट के अनुसार वन अधिकार कानून को लागू करने में बड़े पैमाने पर सामुदायिक वन अधिकारों के दावों की अनदेखी की गई है। यही नहीं…
केरल में चिन्नार का जंगल। एफआरए दोनों जनजातियों और अन्य वन निवास समुदायों के निजी और सामुदायिक अधिकारों को मान्यता देता है, जिसमें जंगलों में जल निकायों तक पहुंच शामिल है। तस्वीर - केरल पर्यटन/फ़्लिकर।
ओडिशा के सुंदरगढ़ के फुलधुडी गांव में अपनी मशरूम की फसल के साथ खड़ी कुछ महिलाएं। तस्वीर- ऐश्वर्या मोहंती/मोंगाबे।

भूसे और पराली से मशरूम की खेती ने ओडिशा के गांवों की बदली तस्वीर

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के फुलधुडी गांव में रहने वाली 30 साल की भारती प्रूसेच के घर के पीछे की जमीन कई साल से बंजर पड़ी थी। लेकिन आज यही…
ओडिशा के सुंदरगढ़ के फुलधुडी गांव में अपनी मशरूम की फसल के साथ खड़ी कुछ महिलाएं। तस्वीर- ऐश्वर्या मोहंती/मोंगाबे।
हाथ की चक्की पर बाजरे को पीसती हुई अट्टापडी में एक आदिवासी महिला। तस्वीर-मैक्स मार्टिन/मोंगाबे

लुप्त होती परंपरा बचाने के लिए केरल के आदिवासियों ने दोबारा शुरू की बाजरे की खेती

केरल के अट्टापडी हाइलैंड्स में आदिवासी बस्तियों के किनारे पहाड़ी जंगलों में एक बार फिर से बाजरा के लहलहाते खेत नजर आने लगे हैं। यह इलाका पश्चिमी घाट के वर्षा…
हाथ की चक्की पर बाजरे को पीसती हुई अट्टापडी में एक आदिवासी महिला। तस्वीर-मैक्स मार्टिन/मोंगाबे
पर्यटन के चरम सीजन के दौरान उजाड़ जोशीमठ बाजार से गुजरता एक व्यक्ति। तस्वीर-कुलदीप सिंह।

उत्तराखंडः पर्यटकों की कमी से जोशीमठ की अर्थव्यवस्था चरमराई

उत्तराखंड के जोशीमठ शहर में फरवरी की एक धूप भरी दोपहर में  65 साल के मोतीराम जोशी अपने जनरल स्टोर पर लोगों के आने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि,…
पर्यटन के चरम सीजन के दौरान उजाड़ जोशीमठ बाजार से गुजरता एक व्यक्ति। तस्वीर-कुलदीप सिंह।
झारखंड के आदिवासी हाट में सागों को सुखाकर भी बेचा जाता है। तस्वीर- विनीता परमार और कुशाग्र राजेन्द्र

झारखंड की गुमनाम साग-भाजी में छुपी है पोषण की गारंटी

सितम्बर महीने का वो दिन स्वाद में रच-बस गया, जब दोपहर के भोजन में झारखंड की थालियों की शान गरमागरम भात,दाल,सब्जी के साथ साग और चटनी परोसी गयी। परोसे गए…
झारखंड के आदिवासी हाट में सागों को सुखाकर भी बेचा जाता है। तस्वीर- विनीता परमार और कुशाग्र राजेन्द्र
पेंटिंग्स की गठरी लेकर हस्तकला केंद्र से बाहर निकलते कलाकार राम कुमार श्याम। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

[वीडियो] गोंड आदिवासियों को रोजी-रोटी और पहचान दिलाने वाला जनगढ़ कलम

पीपल के पेड़ की छांव तले वातावरण में एक अनोखी धुन तैर रही है। वाद्ययंत्र बाना पर लोक कलाकार नारायण सिंह टेकाम गोंडी बोली में गीत गा रहे हैं। गीत…
पेंटिंग्स की गठरी लेकर हस्तकला केंद्र से बाहर निकलते कलाकार राम कुमार श्याम। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला

चामी मुर्मू: पेड़ और पानी से होते हुए पद्म श्री तक का सफर

32 साल में लगाए 30 लाख पेड़। हर दिन करीब 257 पौधे।   71 गांवों में चार अमृत सरोवर सहित कुल 217 तालाबों का निर्माण।  263 गांवों में बनाए 2873 स्वयं…
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला
अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।

[वीडियो] याक के दूध से बनी चीजें ब्रोकपा समुदाय को दे रही आय के नए साधन

अरुणाचल प्रदेश के बाज़ारों में घूमते हुए आपको मौसमी कीवी, ख़ुरमा, मेवे वगैरह सहित कई तरह के स्थानीय व्यंजन मिल जाएंगे। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राज्य में आने…
अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।
कन्याकुमारी में मछली पकड़ने के घाट पर खड़े रॉबिन्सन जॉनसन और अन्य मछुआरे। तस्वीर: नारायण स्वामी सुब्बारामन/मोंगाबे

तमिलनाडु में चक्रवात ओखी के छह साल बाद भी मानसिक स्वास्थ्य से जूझते लोग

इस लेख में आपदा से बचे लोगों की मानसिक सेहत पर चर्चा की जा रही है। कुछ घटनाएं पाठकों को परेशान कर देने वाली हो सकती हैं। 30 नवंबर, 2017…
कन्याकुमारी में मछली पकड़ने के घाट पर खड़े रॉबिन्सन जॉनसन और अन्य मछुआरे। तस्वीर: नारायण स्वामी सुब्बारामन/मोंगाबे
गुजरात के मोरबी जिले में लिटिल रण ऑफ कच्छ (एलआरके) के किनारे स्थित एक गांव वेनासर के मछुआरों का कहना है कि हाल के वक्त में शायद ही कोई मछली पकड़ी गई है। मछली पकड़ने के उपकरण घर वापस ले जाने के लिए किराए लायक कमाई भी नहीं हो पाई है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे। 

नमक निर्माण या झींगा पालनः दो आजीविका के बीच द्वंद

“मिट्ठू बराबर छे?” (क्या नमक ठीक है?) रुकसाना ने झींगा चावल परोसते हुए पूछा। इस सवाल पर सभी खाने वालों के चेहरे पर एक व्यंग्यपूर्ण मुस्कुराहट आई। इसकी वजह है…
गुजरात के मोरबी जिले में लिटिल रण ऑफ कच्छ (एलआरके) के किनारे स्थित एक गांव वेनासर के मछुआरों का कहना है कि हाल के वक्त में शायद ही कोई मछली पकड़ी गई है। मछली पकड़ने के उपकरण घर वापस ले जाने के लिए किराए लायक कमाई भी नहीं हो पाई है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे। 
लिटिल रण ऑफ कच्छ में घूमते जंगली गधे। तस्वीर- रोहित कैडज़/विकिमीडिया कॉमन्स

गुजरात के दुर्लभ जंगली गधों के संरक्षण के लिये आगे आए कच्छ में नमक बनाने वाले अगरिया

नमक के मैदानों में डेरा डालने के लिए तेजल मकवाना अपना सामान पैक कर रही हैं। दशहरा के त्यौहार के बाद वह और उनके पति दानाभाई मकवाना किराए पर एक…
लिटिल रण ऑफ कच्छ में घूमते जंगली गधे। तस्वीर- रोहित कैडज़/विकिमीडिया कॉमन्स
तिवरा या खेसारी का फूल। साल 2012-15 के आंकड़े बताते हैं कि देश में तिवरा का कुल क्षेत्रफल 4.93 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 3.84 लाख टन था। तस्वीर- रतन रहीम/विकिमीडिया कॉमन्स

छत्तीसगढ़ः कहां तक सही है प्रतिबंधित तिवरा या खेसारी दाल को समर्थन मूल्य के अंतर्गत लाना

पिछले 50 सालों से भी अधिक समय तक देश में प्रतिबंधित रही, तिवरा या खेसारी दाल की छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर ख़रीदी का मामला अब अटक गया है। असल…
तिवरा या खेसारी का फूल। साल 2012-15 के आंकड़े बताते हैं कि देश में तिवरा का कुल क्षेत्रफल 4.93 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 3.84 लाख टन था। तस्वीर- रतन रहीम/विकिमीडिया कॉमन्स
जींद जिले के किसान बूढ़ा खेड़ा गांव में हाइवे प्रोजेक्ट के लिए मिट्टी की खुदाई खे बाद अपने खेतों में अंतर दिखाते हुए। तस्वीर- सत सिंह

हाइवे के लिए खोदी खेती लायक जमीन, उपज प्रभावित

किसी भी खेत की ऊपरी मिट्टी बताती है कि उसमें होने वाली फसल कितनी प्रचुर मात्रा में होगी। हरियाणा के किसानों ने अपने इस अहम संसाधन को सरकारों को बेच…
जींद जिले के किसान बूढ़ा खेड़ा गांव में हाइवे प्रोजेक्ट के लिए मिट्टी की खुदाई खे बाद अपने खेतों में अंतर दिखाते हुए। तस्वीर- सत सिंह
गेपो आली की संस्थापक, डिमम पर्टिन (बीच में) अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के सिबुक गांव की महिला किसानों के साथ। गेपो आली स्थानीय महिलाओं की मदद से अन्यत जैसे पारंपरिक मोटे अनाज को नया जीवन देने के लिए काम करती हैं। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज/मोंगाबे।

अन्यत मिलेटः अरुणाचल की थाली में वापस आ रहा पारंपरिक खान-पान से जुड़ा मोटा अनाज

माटी पर्टिन अब इस दुनिया में नहीं है। 97 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।  जैसे-जैसे पर्टिन की उम्र बढ़ती गईं, उन्हें अन्यत (एक तरह का मोटा अनाज) की…
गेपो आली की संस्थापक, डिमम पर्टिन (बीच में) अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के सिबुक गांव की महिला किसानों के साथ। गेपो आली स्थानीय महिलाओं की मदद से अन्यत जैसे पारंपरिक मोटे अनाज को नया जीवन देने के लिए काम करती हैं। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज/मोंगाबे।

स्थानीय जलवायु में बदलाव की वजह से प्रभावित हो रहे कच्छ के कारीगर और उनका पारंपरिक काम

गुजरात के कच्छ में समुद्र के निचले इलाको में बसे गांव टुना में रहने वाले रजाक भाई बैठे-बैठे आसमान में उमड़ते बादलों को देख रहे हैं। रजाक भाई कुम्हार का…
कर्नाटका के कोलार जिले में जलकुंभी से पटी कोलारम्मा झील का ड्रोन शॉट। कर्नाटक सरकार का केसी वैली प्रोजेक्ट बेंगलुरु के सेकेंडरी ट्रीटेड वेस्टवाटर को कोलार क्षेत्र में लाता है और उसे जलाशयों औऱ झीलों में भरता है ताकि इससे भूजल रीचार्ज किया जा सके। तस्वीर- आंजनेय रेड्डी।

क्या शहरों का गंदा पानी पिएंगे ग्रामीण भारत के लोग?

अगस्त के शुरुआती दिनों में कोलार भूरे और हरे रंग का दिख रहा था। जुलाई के महीने हुई अप्रत्याशित बारिश ने यहां के किसानों की उम्मीदें जगा दी थीं। कर्नाटक…
कर्नाटका के कोलार जिले में जलकुंभी से पटी कोलारम्मा झील का ड्रोन शॉट। कर्नाटक सरकार का केसी वैली प्रोजेक्ट बेंगलुरु के सेकेंडरी ट्रीटेड वेस्टवाटर को कोलार क्षेत्र में लाता है और उसे जलाशयों औऱ झीलों में भरता है ताकि इससे भूजल रीचार्ज किया जा सके। तस्वीर- आंजनेय रेड्डी।

जलवायु और खाद्य सुरक्षा के लिए भोजन की हानि और बर्बादी से निपटना

भले ही भोजन की हानि और बर्बादी को कम करके खाद्य सुरक्षा में सुधार लाया जा सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। नेचर फूड…

[वीडियो] बिहार में अक्षय ऊर्जा की रफ्तार को धीमी करती जमीन की कमी, क्या रूफटॉप सोलर हो सकता है समाधान

इंवर्टर बल्ब, यानी बिजली जाने के बाद भी यह बल्ब तीन-चार घंटे तक रोशनी दे सकती है। सविता कुमारी की छोटी सी दुकान पर बिजली के दर्जनों उपकरणों में से…
नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।

लद्दाख: आम नागरिकों की पहल से कारगर हो रहा वन्यजीव संरक्षण

लेह में रहने वाले 35 वर्षीय स्टैनज़िन चंबा प्रकृति की खोज में लद्दाख के नुब्रा घाटी में बीते पांच साल से जा रहे हैं। लेह शहर से लगभग 160 किलोमीटर…
नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।
विरोध-प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि झींगा उद्योग के मुनाफे के लिए सीमांत मछुआरों के हितों की बलि दी गई है। तस्वीर - टिमोथी ए. गोंसाल्वेस/विकिमीडिया कॉमन्स। 

कानून में बदलाव से मछुआरों की बढ़ी चिंता, झींगा फार्म को पिछले उल्लंघनों से मिल गई छूट

"ट्रैवलिंग-प्रोजेक्ट भाई भाई, एक डोरी-ते फांसी चाय" (ट्रॉउलिंग और झींगा कल्चर भाई-भाई हैं और दोनों को एक ही रस्सी से लटकाने की जरूरत है) बांग्ला में लिखी गई ये लाइनें…
विरोध-प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं का मानना है कि झींगा उद्योग के मुनाफे के लिए सीमांत मछुआरों के हितों की बलि दी गई है। तस्वीर - टिमोथी ए. गोंसाल्वेस/विकिमीडिया कॉमन्स। 

[टिप्पणी] मैंग्रोव के बीच एक यात्रा और उससे मिले जीवन के सबक

जैसे ही मैं मैदान से रिकॉर्डिंग्स को ट्रांसक्रिप्ट करने के लिए बैठी तो यादें ताज़ा हो गईं। चलने के दौरान मेरी भारी सांसों के पीछे मैं केवल "पच-पच " और…
चाय बागान श्रमिक। तस्वीर - CC BY-NC-SA 3.0 IGO © यूनेस्को-UNEVOC/अमिताव चंद्रा।

चाय बागान की महिला मजदूरों के लिए सर्पदंश बड़ा खतरा, हर साल होती हैं कई मौत

पाही भूमिज उस दिन को याद करके कांप उठती हैं। वह कहती हैं कि मौत से बच निकलने के लिए वह ऊपर वाले की शुक्रगुजार है। भूमिज असम के शिवसागर…
चाय बागान श्रमिक। तस्वीर - CC BY-NC-SA 3.0 IGO © यूनेस्को-UNEVOC/अमिताव चंद्रा।
एम.एस. स्वामीनाथन अपनी लायब्रेरी में। तस्वीर-एमएसएसआरएफ/फ़्लिकर

एम. एस. स्वामीनाथन की याद में…

जाने-माने कृषि वैज्ञानिक एम.एस. स्वामीनाथन ने 28 सितंबर को आखिरी सांस ली और इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्होंने 7 अगस्त को अपना 98वां जन्मदिन मनाया था। स्वामीनाथन का स्वास्थ्य पिछले कुछ सालों से…
एम.एस. स्वामीनाथन अपनी लायब्रेरी में। तस्वीर-एमएसएसआरएफ/फ़्लिकर
बिछड़ी में ज्यादातर लोग अपना सबसे ज्यादा समय पानी भरने और लाने में बिताते हैं। तस्वीर- शिवा सिंह।

[वीडियो] कारखानों के कचरे से प्रदूषित हुआ राजस्थान का बिछड़ी गांव, 35 साल बाद भी न्याय का इंतजार

बिछड़ी गांव की सड़कों पर चहलकदमी करते हुए आपको ज्यादातर घरों के बाहर रखे या खिड़कियों पर लटके हुए सभी आकार के पानी के कंटेनर दिखाई देंगे। ऐसा ही एक…
बिछड़ी में ज्यादातर लोग अपना सबसे ज्यादा समय पानी भरने और लाने में बिताते हैं। तस्वीर- शिवा सिंह।
आराम फरमाते गद्दी चरवाहे। तस्वीर- आशीष गुप्ता/विकिमीडिया कॉमन्स 

हिमाचल प्रदेश में चरवाहों के रास्तों पर चारे-पानी की कमी, पौधरोपण रोकने के आदेश से राहत

हिमाचल प्रदेश में सरकार की ओर से चलाई जा रही पौधरोपण की गतिविधियों ने चरवाहों के प्रति खतरों को बढ़ा दिया है इसके चलते खतरनाक जीवों का विस्तार हो रहा…
आराम फरमाते गद्दी चरवाहे। तस्वीर- आशीष गुप्ता/विकिमीडिया कॉमन्स 

जहरीली हवा के बीच काम करने को मजबूर होम डिलीवरी के बाइक चालक: स्टडी

अट्ठाइस साल के रोहित विश्वास की कोविड-19 महामारी के दौरान मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव की नौकरी चली गई। इसके बाद उन्होंने 2021 में एक किराना डिलीवरी ऐप के लिए डिलीवरी करने का…
खेत में मिलेट्स निकालती एक महिला किसान। तस्वीर- वर्षा सिंह/मोंगाबे

उत्तराखंडः आहार संस्कृति, कृषि विविधता और आजीविका से जुडा गढ़भोज अभियान

मंडुवे की रोटी, गहत की दाल, लिंगुड़े की भुज्जी, लाल भात, रायते में जख्या का तडका। देहरादून के 40 वीं वाहिनी पीएसी की पुलिस कैंटीन में जवान पूरी गर्मजोशी के…
खेत में मिलेट्स निकालती एक महिला किसान। तस्वीर- वर्षा सिंह/मोंगाबे