Categories for वन्य जीव एवं जैव विविधता

ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स

विलायती बबूल की छाया में पनप रहे देसी शोला के पौधे

पश्चिमी घाट में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि विदेशी पेड़ों की छाया में शोला वनों की मूल प्रजातियों के पुनर्जनन यानी फिर से फलने फूलने की संभावना होती…
ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स
स्लॉथ भालू भारतीय उपमहाद्वीप के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में काफी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। तस्वीर- रुद्राक्ष चोदनकर/विकिमीडिया कॉमन्स 

स्लॉथ भालू के आवासों के लिए खतरा बनी आक्रामक पौधे की एक प्रजाति

गुजरात के जेसोर स्लोथ भालू अभ्यारण्य में हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह जानने की कोशिश की गई कि आक्रामक प्रजाति "प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा", शुष्क इलाके में स्लोथ भालू…
स्लॉथ भालू भारतीय उपमहाद्वीप के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में काफी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। तस्वीर- रुद्राक्ष चोदनकर/विकिमीडिया कॉमन्स 
गंडक नदी के किनारे मौजूद एक घड़ियाल। इस प्रजाति के लगातार कम होते जाने की वजह इनकी खास प्रकृति, खासकर इनके निवास स्थल को लेकर इनका व्यवहार और इनके संरक्षण के खिलाफ होने वाली कई इंसानी गतिविधियां हैं। तस्वीर- आशीष पांडा।

असंरक्षित नदियों में भी होना चाहिए घड़ियालों का संरक्षण

गेविलियस जीन वाले मगरमच्छों की फैमिली में से बची एकमात्र प्रजाति, घड़ियाल की संख्या कम होती जा रही है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में…
गंडक नदी के किनारे मौजूद एक घड़ियाल। इस प्रजाति के लगातार कम होते जाने की वजह इनकी खास प्रकृति, खासकर इनके निवास स्थल को लेकर इनका व्यवहार और इनके संरक्षण के खिलाफ होने वाली कई इंसानी गतिविधियां हैं। तस्वीर- आशीष पांडा।
सुंदरबन में स्मूद कोटेड ऊदबिलाव। प्रतीकात्मक तस्वीर। तस्वीर- अनिर्नय/विकिमीडिया कॉमन्स

आंकड़ों के अभाव में भारत के पूर्वोत्तर में प्रभावित हो रहा है ऊदबिलावों का संरक्षण

कामेंग नदी के किनारे खड़े एक बड़े से पेड़ की मोटी-मोटी जड़ों से घिरी कुछ चट्टानों की दरारों की ओर इशारा करते हुए और उत्साहित होते हुए जेहुआ नातुंग कहते…
सुंदरबन में स्मूद कोटेड ऊदबिलाव। प्रतीकात्मक तस्वीर। तस्वीर- अनिर्नय/विकिमीडिया कॉमन्स
अपने खेत में केले की फसल के साथ निशांत के.। उनके इस खेत में देशी और विदेशी किस्मों सहित फलों की लगभग 250 प्रजातियां हैं। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे

केरल में किसानों ने उगाए अलग-अलग प्रकार के केले, पारंपरिक किस्मों के संरक्षण में मिली मदद

केरल के वायनाड जिले के 49 वर्षीय केला किसान निशांत के. ने कहा, "केरल के हर जिले का अपना पसंदीदा केला है।" अकेले उनके खेत में ही 250 से अधिक…
अपने खेत में केले की फसल के साथ निशांत के.। उनके इस खेत में देशी और विदेशी किस्मों सहित फलों की लगभग 250 प्रजातियां हैं। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे
भारत में हिम तेंदुओं की संख्या का अनुमान आखिरी बार 1980 के दशक में लगाया गया था। इसके मुताबिक, देश में हिम तेंदुओं की संख्या 400 से 700 थी। तस्वीर-इस्माइल शरीफ। 

[वीडियो] हिम तेंदुओं की संख्या 700 पार हुई, अगला कदम दीर्घकालिक निगरानी

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से इस महीने की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हिम तेंदुओं की संख्या 718 हो गई हैं। इस…
भारत में हिम तेंदुओं की संख्या का अनुमान आखिरी बार 1980 के दशक में लगाया गया था। इसके मुताबिक, देश में हिम तेंदुओं की संख्या 400 से 700 थी। तस्वीर-इस्माइल शरीफ। 
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड की चारदीवारी के पास हाथियों का झुंड। तस्वीर: रोहित चौधरी।

हाथियों को रास्ता देने के लिए गिराई जा रही दीवार, लंबे संघर्ष के बाद सफलता

भारत में पर्यावरण एक्टिविजम के लिए एक ऐतिहासिक क्षण तब आया जब 17 मार्च को नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (एनआरएल) ने अपनी टाउनशिप में 2.2 किलोमीटर लंबी चारदीवारी को गिराना शुरू…
नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड की चारदीवारी के पास हाथियों का झुंड। तस्वीर: रोहित चौधरी।
बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान की बाड़ के पीछे घूमता हुआ भारतीय हाथियों का एक झुंड। प्रतीकात्मक तस्वीर- सरित शर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स 

बिजली की तेजी से बढ़ रही हैं देश में करंट लगने से हाथियों की मौतें

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर ज़िले में 10 मार्च को लगभग दस साल के एक नर हाथी को करंट लगा कर मार डाला गया। वाड्रफनगर से लगे हुए फोकली महुआ वनक्षेत्र में…
बन्नेरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान की बाड़ के पीछे घूमता हुआ भारतीय हाथियों का एक झुंड। प्रतीकात्मक तस्वीर- सरित शर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स 
अंडों के साथ ग्रैसिक्सलस पैटकैएन्सिस, नर की तरफ आकर्षित होते हुए। तस्वीर-अभिजीत दास 

अरुणाचल में मेंढकों की तीन नई प्रजातियां मिली, आवास के आधार पर रखे गए उनके नाम

भारत में जैव विविधता वाले हॉटस्पॉट में पाई जाने वाली उभयचर प्रजातियों के विशाल भंडार में अरुणाचल प्रदेश के नामदाफा-कमलांग लैंडस्केप से खोजी गई तीन नई मेंढक प्रजातियां भी शामिल…
अंडों के साथ ग्रैसिक्सलस पैटकैएन्सिस, नर की तरफ आकर्षित होते हुए। तस्वीर-अभिजीत दास 
उदयुपर अपनी मानव-निर्मित झीलों के लिए मशहूर है। इन झीलों को वहां के तत्कालीन राजाओं ने गर्मियों के दौरान शहर को ठंडा करने के लिए बनवाया था। तस्वीर- केएस गोपी सुंदर 

पक्षियों को भा रहे छोटे शहर, जलपक्षियों पर अपने तरह के पहले रिसर्च से सामने आई रोचक जानकारियां

झीलों के शहर उदयपुर में जलपक्षी आराम करने और घोंसला बनाने के लिए अलग-अलग जगहों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, वे एक जैसे संकेतों (जैसे आसपास दलदली जगह) से इस…
उदयुपर अपनी मानव-निर्मित झीलों के लिए मशहूर है। इन झीलों को वहां के तत्कालीन राजाओं ने गर्मियों के दौरान शहर को ठंडा करने के लिए बनवाया था। तस्वीर- केएस गोपी सुंदर 
जर्मनी के स्टुटगर्ट के जूलॉजिकल हार्डन में एक इंडियन रॉक पायथन। इंडियन रॉक पायथन ऐसे सांप हैं जिनके बारे में बहुत कम अध्ययन किया गया है। तस्वीर- होल्गर क्रिस्प/विकिमीडिया कॉमन्स।

घर जरूर लौटते हैं अजगर, समय लगता है लेकिन लौट आते हैं: स्टडी

हाल ही में दक्षिण भारत के दो टाइगर रिजर्व में 14 इंडियन रॉक पायथन (Python molurus) पर हुई एक टेलीमेट्री स्टडी में इस प्रजाति के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला…
जर्मनी के स्टुटगर्ट के जूलॉजिकल हार्डन में एक इंडियन रॉक पायथन। इंडियन रॉक पायथन ऐसे सांप हैं जिनके बारे में बहुत कम अध्ययन किया गया है। तस्वीर- होल्गर क्रिस्प/विकिमीडिया कॉमन्स।
दार्जिलिंग में लाल पांडा। तस्वीर- संदीप पाई/विकिमीडिया कॉमन्स 

वन्यजीवों की पहचान और निगरानी के लिए भारत में हो रहा ईडीएनए तकनीक का इस्तेमाल

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण) ने वन्यजीवों पर अध्ययन और निगरानी के लिए ईडीएनए (एनवायरमेंटल डीएनए) का इस्तेमाल करने के लिए एक पायलट परियोजना तैयार की है।…
दार्जिलिंग में लाल पांडा। तस्वीर- संदीप पाई/विकिमीडिया कॉमन्स 
चुनावी बॉन्ड योजना में बुनियादी ढांचा विकास उद्योग की भागीदारी भारत के पर्यावरण नियमों में कमियों को उजागर करती है, जिन्हें कारोबारी हितों को शामिल करने के लिए खत्म कर दिया गया है। तस्वीर - प्रणव कुमार/मोंगाबे।

भारत के हरित विकास को बढ़ावा देने वाली कंपनियों ने राजनीतिक दलों को दिया करोड़ों का चंदा

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने खुद को स्थानीय और दुनिया भर में हरित विकास के समर्थक…
चुनावी बॉन्ड योजना में बुनियादी ढांचा विकास उद्योग की भागीदारी भारत के पर्यावरण नियमों में कमियों को उजागर करती है, जिन्हें कारोबारी हितों को शामिल करने के लिए खत्म कर दिया गया है। तस्वीर - प्रणव कुमार/मोंगाबे।
भारत में दिखने वाला ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल। फोटो: तिशा मुखर्जी/Wikimedia Commons।

कैसे प्राकृतिक रंग पैदा करने वाले पौधों के खत्म होने से आया ग्रामीण अभयारण्य का विचार

असम के चराईदेव जिले के चाला गांव में सफराई नदी के किनारे घोड़े के खुर के आकार में बना यह हरा-भरा जंगल 680 हेक्टेयर का है। यहीं पर एक 152…
भारत में दिखने वाला ओरिएंटल पाइड हॉर्नबिल। फोटो: तिशा मुखर्जी/Wikimedia Commons।

केमफोली नाइट मेंढकों की जेनेटिक जानकारी से बेहतर बनेगी संरक्षण की रणनीति

पश्चिमी घाट में की गई एक नई स्टडी में पता चला है कि आम जनधारणा के विपरीत नदी की धाराओं की सीमाएं जलीय केमफोली नाइट मेंढकों के घूमने-फिरने के लिए…
अपनी बकरियों को चराने के लिए ले जाता हुआ एक चरवाहा। शुष्क क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाली घास को कम करने में आग एक जरूरी भूमिका निभाती है। तस्वीर- सी.एस. सनीश 

चराई या आग: सवाना में बढ़ती घास से निपटने का कौन सा तरीका बेहतर

पूर्वी घाट के एक अध्ययन में मेसिक सवाना पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से फैल रही देसी सिम्बोपोगोन घास (लेमनग्रास) को लेकर चिंता जाहिर की और पारिस्थितिक तंत्र को पुरानी स्थिति…
अपनी बकरियों को चराने के लिए ले जाता हुआ एक चरवाहा। शुष्क क्षेत्रों में तेजी से फैलने वाली घास को कम करने में आग एक जरूरी भूमिका निभाती है। तस्वीर- सी.एस. सनीश 
केरल का एक जंगल। तस्वीर - गो ग्रीन केरल हॉलीडेज/ पिक्सल्स।

सुप्रीम कोर्ट ने वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए बहाल की पुरानी व्यापक परिभाषा

सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) को वनों की पुरानी परिभाषा को बहाल करने का निर्देश दिया। इस परिभाषा में जंगलों की…
केरल का एक जंगल। तस्वीर - गो ग्रीन केरल हॉलीडेज/ पिक्सल्स।
कैमरे में कैद अपने मेमने के साथ एक नीली भेड़ की तस्वीर। विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों के लिए उपयुक्त आवास के रूप में ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क की फिर पड़ताल की जानी चाहिए। तस्वीर- एनएमएचएस

प्राकृतिक रुकावटों से कम हो रहा नीली भेड़ों में जीन का आदान-प्रदान

यह अभी भी बड़ी हैरानी की बात है कि कैसे एक अनगुलेट, जो न तो नीला है, न ही भेड़ है, उसे नीली भेड़ कहा जाने लगा। इनके शरीर की…
कैमरे में कैद अपने मेमने के साथ एक नीली भेड़ की तस्वीर। विशेषज्ञों का मानना है कि जानवरों के लिए उपयुक्त आवास के रूप में ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में संरक्षित क्षेत्रों के नेटवर्क की फिर पड़ताल की जानी चाहिए। तस्वीर- एनएमएचएस
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रांगण में टहलते हुए दो हाथी। तस्वीर साभार- वाइल्डलाइफ एसओएस

कैसे काम करता है भीख मांगने और सर्कस से बचाए गए हाथियों का संरक्षण केंद्र

आज से 14 साल पहले हरियाणा के पलवल हाईवे पर एक हथिनी चोटिल घूम रही थी। वन्यजीवों को बचाने वाली एक टीम ने उसकी देखभाल की। गंभीर चोट की वजह…
वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रांगण में टहलते हुए दो हाथी। तस्वीर साभार- वाइल्डलाइफ एसओएस
बन्नी के सर्वो गांव में मालधारी अपने मवेशियों को चराने के दौरान पेड़ों के नीचे आराम करते हुए। इस चरवाहा समुदाय की आजीविका को बनाए रखने के लिए बन्नी घास के मैदानों का रखरखाव जरूरी है। तस्वीर - धैर्य गजारा/मोंगाबे।

गुजरात का बन्नी करेगा चीतों का स्वागत, लेकिन स्थानीय निवासी कर रहे पट्टों की मांग

भारत में चीतों को फिर से बसाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को एक साल से ज्यादा हो गया है। अब सरकार गुजरात के कच्छ जिले में स्थित कच्छ…
बन्नी के सर्वो गांव में मालधारी अपने मवेशियों को चराने के दौरान पेड़ों के नीचे आराम करते हुए। इस चरवाहा समुदाय की आजीविका को बनाए रखने के लिए बन्नी घास के मैदानों का रखरखाव जरूरी है। तस्वीर - धैर्य गजारा/मोंगाबे।
पश्चिम बंगाल की संतरागाछी झील में मौजूद प्रवासी पक्षी। तस्वीर- बिस्वरूप गांगुली/विकिमीडिया कॉमन्स।  

पश्चिम बंगाल के दक्षिण-मध्य में प्रवासी पक्षियों के अवैध शिकार पर रोक

इसी साल 15 फरवरी को पश्चिम बंगाल के वन विभाग के अधिकारियों ने एक शख्स को पश्चिम बंगाल के मध्य में स्थित मुर्शिदाबाद जिले के 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र…
पश्चिम बंगाल की संतरागाछी झील में मौजूद प्रवासी पक्षी। तस्वीर- बिस्वरूप गांगुली/विकिमीडिया कॉमन्स।  
पश्चिमी घाट में एक किंग कोबरा। संयोजन में सरल होने के बावजूद किंग कोबरा का जहर काफी असरदार होता है। तस्वीर- गैरी मार्टिन।

स्टडी ने ध्वस्त किए किंग कोबरा के जहर से जुड़े मिथक, एंटी वेनम बनाने में होगी आसानी

एक नई स्टडी में पता चला है कि किंग कोबरा के जहर का संयोजन स्पैक्टैकल्ड कोबरा के जहर की तुलना में आसान होता है क्योंकि किंग कोबरा सिर्फ वही चीजें…
पश्चिमी घाट में एक किंग कोबरा। संयोजन में सरल होने के बावजूद किंग कोबरा का जहर काफी असरदार होता है। तस्वीर- गैरी मार्टिन।
हनुमान प्लोवर जमीन पर घोंसला बनाने वाला पक्षी है और अंडे और चूजे दोनों अपने परिवेश से अच्छी तरह छिपे रहते हैं। तस्वीर - जूड जनिथा निरोशन।

श्रीलंका में खोजी गई समुद्री पक्षी की नई प्रजाति, मिला हनुमान का नाम

संस्कृत के प्राचीन महाकाव्य रामायण में ताकतवर वानर देवता हनुमान ने उत्तरी श्रीलंका के मन्नार क्षेत्र को तमिलनाडु के रामेश्वरम से जोड़ने के मकसद से पुल बनाने के लिए सेना…
हनुमान प्लोवर जमीन पर घोंसला बनाने वाला पक्षी है और अंडे और चूजे दोनों अपने परिवेश से अच्छी तरह छिपे रहते हैं। तस्वीर - जूड जनिथा निरोशन।
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला

चामी मुर्मू: पेड़ और पानी से होते हुए पद्म श्री तक का सफर

32 साल में लगाए 30 लाख पेड़। हर दिन करीब 257 पौधे।   71 गांवों में चार अमृत सरोवर सहित कुल 217 तालाबों का निर्माण।  263 गांवों में बनाए 2873 स्वयं…
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला
घनी हरी कैनोपी और शानदार पीले फूल आक्रमणकारी कसोद के पौधों को आकर्षक बनाते हैं। तस्वीर- पी ए विनयन।

कभी खूबसूरती और छाया के लिए लगाए गए थे कसोद के पौधे, अब बने जंजाल

साल 1986 में केरल के वन विभाग ने एक ऐसा फैसला लिया था जिसके लिए उन्हें कई दशक बाद पछताना पड़ रहा है। वन विभाग की सोशल फॉरेस्ट्री विंग ने…
घनी हरी कैनोपी और शानदार पीले फूल आक्रमणकारी कसोद के पौधों को आकर्षक बनाते हैं। तस्वीर- पी ए विनयन।
दिसंबर 2022 में पश्चिमी नेपाल में आम कबूतरों का एक बड़ा झुंड देखा गया। झुंड कुछ ही दिनों में तितर-बितर हो गया। फोटो- हीरूलाल डंगौरा। 

नेपाल में कबूतरों के बड़े झुंड को लेकर क्यों हैरान हैं शोधकर्ता

नेपाल में तीन शोधकर्ता, हीरूलाल डंगौरा, विक्रम तिवारी और शुभम चौधरी, दिसंबर 2022 में नेपाल के पश्चिमी मैदानी इलाकों में गिद्धों की एक कॉलोनी पर नियमित शोध कर रहे थे।…
दिसंबर 2022 में पश्चिमी नेपाल में आम कबूतरों का एक बड़ा झुंड देखा गया। झुंड कुछ ही दिनों में तितर-बितर हो गया। फोटो- हीरूलाल डंगौरा। 
मालिया मछली बाज़ार। जिंजर झींगा (मेटापेनियस कचेंसिस) कच्छ की खाड़ी की एक स्थानिक प्रजाति है और इसकी मछली पकड़ना यहां आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे

कच्छ में बढ़ते नमक उत्पादन से सिमट रहा झींगा कारोबार

गुजरात के कच्छ का सूरजबाड़ी ब्रिज डीजल का धुआं, धूल, ट्रक और ट्रेन की आवाज से आपका स्वागत करता है। आगे बढ़ने पर उस ब्रिज से नमक का मैदान दिखना…
मालिया मछली बाज़ार। जिंजर झींगा (मेटापेनियस कचेंसिस) कच्छ की खाड़ी की एक स्थानिक प्रजाति है और इसकी मछली पकड़ना यहां आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे
पातालकोट इलाके में जड़ी बूटी बेचते भारिया आदिवासी। इनके अनुसार जंगल से मिलने वाली जड़ी-बूटियों की मात्रा कम होने से आमदनी में कमी आई है। तस्वीर- सतीश मालवीय/मोंगाबे

मध्य प्रदेश के जंगलों में क्यों कम हो रहा है औषधीय पौधों का उत्पादन

"हाथ में पैसा होगा तभी त्योहार मनाना अच्छा लगता है," रक्षाबंधन के त्यौहार के दिन मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से सटे मोरावन गांव की सहरिया आदिवासी बस्ती में…
पातालकोट इलाके में जड़ी बूटी बेचते भारिया आदिवासी। इनके अनुसार जंगल से मिलने वाली जड़ी-बूटियों की मात्रा कम होने से आमदनी में कमी आई है। तस्वीर- सतीश मालवीय/मोंगाबे
इचोर्निया क्रैसिप्स को आमतौर पर पानी की जलकुंभी कहा जाता है। यह एक बाहरी आक्रमणकारी प्रजाति है जो भारत में हर जगह पानी में पाई जाती है। तस्वीर- शहादत हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स। 

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वैश्विक खतरा हैं जैव आक्रमण

आक्रमणकारी प्रजातियों का प्रसार जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं के सामने मौजूद पांच बड़े खतरों में से एक है। ऐसे जानवर, पौधे, कवक और सूक्ष्म जीव जो कि…
इचोर्निया क्रैसिप्स को आमतौर पर पानी की जलकुंभी कहा जाता है। यह एक बाहरी आक्रमणकारी प्रजाति है जो भारत में हर जगह पानी में पाई जाती है। तस्वीर- शहादत हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स। 
लिटिल रण ऑफ कच्छ में घूमते जंगली गधे। तस्वीर- रोहित कैडज़/विकिमीडिया कॉमन्स

गुजरात के दुर्लभ जंगली गधों के संरक्षण के लिये आगे आए कच्छ में नमक बनाने वाले अगरिया

नमक के मैदानों में डेरा डालने के लिए तेजल मकवाना अपना सामान पैक कर रही हैं। दशहरा के त्यौहार के बाद वह और उनके पति दानाभाई मकवाना किराए पर एक…
लिटिल रण ऑफ कच्छ में घूमते जंगली गधे। तस्वीर- रोहित कैडज़/विकिमीडिया कॉमन्स