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अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।

[वीडियो] याक के दूध से बनी चीजें ब्रोकपा समुदाय को दे रही आय के नए साधन

अरुणाचल प्रदेश के बाज़ारों में घूमते हुए आपको मौसमी कीवी, ख़ुरमा, मेवे वगैरह सहित कई तरह के स्थानीय व्यंजन मिल जाएंगे। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राज्य में आने…
अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।
फुकरे-3 फिल्म का एक दृश्य जिसमें लोग टैंकर से पानी भरने के लिए गुत्म-गुत्था हो रहे हैं। तस्वीर साभार- एक्सेल इंटरटेनमेंट

लाइट, कैमरा, क्लाइमेट-एक्शन! पर्यावरण फिल्मों में बढ़ रही फिल्मकारों की दिलचस्पी

पानी का एक टैंकर खड़ा है और सैकड़ों लोग उसे घेरे खड़े हैं। गुत्थम-गुत्था हुए जा रहे हैं। चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं। टैंकर के पेट में सैकड़ों पाइप…
फुकरे-3 फिल्म का एक दृश्य जिसमें लोग टैंकर से पानी भरने के लिए गुत्म-गुत्था हो रहे हैं। तस्वीर साभार- एक्सेल इंटरटेनमेंट
गुजरात के कच्छ में पनीर बनाने वाले अर्पण कलोत्रा और पंचाल डेयरी के भीमसिंहभाई घांघल बकरी के दूध से पनीर बनाते हुए। तस्वीर - पांचाल डेयरी।

भेड़, बकरी और ऊंटनी के दूध से बने चीज़ में बढ़ रही दिलचस्पी, बड़ा हो रहा बाजार

पिछले दिनों चेन्नई में अलग-अलग मवेशियों के दूध से बने चीज़ को टेस्ट करने का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था। यहां रखी गई चीज़ की किस्मों में से एक ताजा…
गुजरात के कच्छ में पनीर बनाने वाले अर्पण कलोत्रा और पंचाल डेयरी के भीमसिंहभाई घांघल बकरी के दूध से पनीर बनाते हुए। तस्वीर - पांचाल डेयरी।
विभिन्न प्राकृतिक रंगों में रंगी टी-शर्ट। तस्वीर- बायोडाई इंडिया 

रासायनिक या प्राकृतिक? फैशन उद्योग के रंगरेज की उलझन

हाल के कुछ सालों में फैशन इंडस्ट्री प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक इस्तेमाल और सिंथेटिक रंगाई प्रक्रिया से निकलने वाले जहरीले कचरे की वजह से जांच के दायरे में आ गई…
विभिन्न प्राकृतिक रंगों में रंगी टी-शर्ट। तस्वीर- बायोडाई इंडिया 
नगांव में धान रोपते किसान। असम में किए गए एक अध्ययन के दौरान चावल के खेतों में ग्रेटर फाल्स वैम्पायर बैट को देखा गया था। तस्वीर- दिगन्त तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।

धान की फसलों के लिए प्राकृतिक कीटनाशक हैं चमगादड़,असम में एक अध्ययन में आया सामने

असम में हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि चमगादड़ धान की फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकते हैं।…
नगांव में धान रोपते किसान। असम में किए गए एक अध्ययन के दौरान चावल के खेतों में ग्रेटर फाल्स वैम्पायर बैट को देखा गया था। तस्वीर- दिगन्त तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।
अपने खेत में कॉमिफोरा वाइटी (गुग्गल) से लगाई गई बाड़ के पास खड़े किसान महिपतसिंह सिंधल। तस्वीर- अजरा परवीन रहमान 

कच्छ के औषधीय पौधे ‘गुग्गल’ की कहानी, विलुप्ति के खतरे से आया बाहर

"यह बिल्कुल एक इंसान की तरह है। जिस तरह एक व्यक्ति का खून बह जाने के बाद वह जिंदा नहीं रह पाता, उसी तरह गुग्गल भी अपनी राल खो देने…
अपने खेत में कॉमिफोरा वाइटी (गुग्गल) से लगाई गई बाड़ के पास खड़े किसान महिपतसिंह सिंधल। तस्वीर- अजरा परवीन रहमान 
यूके के लंदन में करीने से सजाए गए लैंटाना से बने आदमकद हाथी। तस्वीर - मॉरीन बार्लिन/फ़्लिकर।

लैंटाना से हाथी और फर्नीचर बनाकर इस आक्रामक पौधे को खत्म करने की कोशिश

दुनिया की सबसे कुख्यात आक्रामक प्रजातियों में से एक लैंटाना (लैंटाना कैमारा ) के फैलाव को रोकने की उम्मीद के साथ साल 2009 में एक प्रयोग शुरू हुआ था। यह…
यूके के लंदन में करीने से सजाए गए लैंटाना से बने आदमकद हाथी। तस्वीर - मॉरीन बार्लिन/फ़्लिकर।
सड़क पर आवारा कुत्तों का झुंड। तस्वीर - कोट्टाकलनेट/विकिमीडिया कॉमन्स। 

[कमेंट्री] भारत को वैज्ञानिक सोच के साथ आवारा कुत्तों से निपटना होगा

डेविड क्वामेन ने अपनी किताब ‘द सॉन्ग ऑफ द डोडो’ में लिखा है, "इस बीच, ब्रिटिश जहाजों से लाए गए घरेलू कुत्ते तस्मानिया में जंगली हो गए थे और वे…
सड़क पर आवारा कुत्तों का झुंड। तस्वीर - कोट्टाकलनेट/विकिमीडिया कॉमन्स। 
वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट्स का तर्क है कि अगर एक भी हाथी को कहीं और भेजा जाता है तो वहां के बाकी के हाथियों में परिवर्तन आएगा और मूल इलाके में वे वैसी ही समस्याएं पैदा करेंगे। तस्वीर- श्रीधर विजयकृष्णन

केरल में इंसान और हाथियों के संघर्ष को कम करने के लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता

केरल के लोग शायद इस साल की शुरुआत के उन दृश्यों को कभी भुला नहीं पाएंगे जिनमें देखा गया कि एक हाथी को ट्रक पर लादा गया था और ट्रक…
वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट्स का तर्क है कि अगर एक भी हाथी को कहीं और भेजा जाता है तो वहां के बाकी के हाथियों में परिवर्तन आएगा और मूल इलाके में वे वैसी ही समस्याएं पैदा करेंगे। तस्वीर- श्रीधर विजयकृष्णन
गेपो आली की संस्थापक, डिमम पर्टिन (बीच में) अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के सिबुक गांव की महिला किसानों के साथ। गेपो आली स्थानीय महिलाओं की मदद से अन्यत जैसे पारंपरिक मोटे अनाज को नया जीवन देने के लिए काम करती हैं। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज/मोंगाबे।

अन्यत मिलेटः अरुणाचल की थाली में वापस आ रहा पारंपरिक खान-पान से जुड़ा मोटा अनाज

माटी पर्टिन अब इस दुनिया में नहीं है। 97 साल की उम्र में उनका निधन हुआ।  जैसे-जैसे पर्टिन की उम्र बढ़ती गईं, उन्हें अन्यत (एक तरह का मोटा अनाज) की…
गेपो आली की संस्थापक, डिमम पर्टिन (बीच में) अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के सिबुक गांव की महिला किसानों के साथ। गेपो आली स्थानीय महिलाओं की मदद से अन्यत जैसे पारंपरिक मोटे अनाज को नया जीवन देने के लिए काम करती हैं। तस्वीर-संस्कृता भारद्वाज/मोंगाबे।
मोहाली में सड़क पार करते पैदल यात्री। पंजाब ने इसी साल के मई महीने से राइट टु वॉक को लागू करने का फैसला किया है। तस्वीर- बिस्वरूप गांगुली/विकिमीडिया कॉमन्स।

पंजाब ने पैदल चलने वालों को प्राथमिकता देने के लिए लागू की नीति

पंजाब ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत राइट टू वॉक को इसी साल मई के महीने में लागू किया है। इसके लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट…
मोहाली में सड़क पार करते पैदल यात्री। पंजाब ने इसी साल के मई महीने से राइट टु वॉक को लागू करने का फैसला किया है। तस्वीर- बिस्वरूप गांगुली/विकिमीडिया कॉमन्स।

वाराणसी में सौर ऊर्जा से बुनकरी के पेशे में जागती उम्मीद, लेकिन अभी लंबा सफर बाकी

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में विश्व-प्रसिद्द बनारसी साड़ी बनाने वाले कई बुनकरों की तरह ही उनत्तिस साल के उबैद अहमद भी बिजली की अपर्यात आपूर्ति और बेवक्त कटौती को लेकर…
नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।

लद्दाख: आम नागरिकों की पहल से कारगर हो रहा वन्यजीव संरक्षण

लेह में रहने वाले 35 वर्षीय स्टैनज़िन चंबा प्रकृति की खोज में लद्दाख के नुब्रा घाटी में बीते पांच साल से जा रहे हैं। लेह शहर से लगभग 160 किलोमीटर…
नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।
लेह में साल 2022 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच 244.53 टन कचरा उत्पन्न हुआ वहीं इस दौरान कारगिल में 36 टन कचरा उत्पन्न हुआ। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

कठिन मौसम और बढ़ते पर्यटन के बीच बढ़ती लद्दाख की कचरे की समस्या

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख पिछले कुछ सालों में एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। हर साल गर्मी के मौसम में यहां सैलानियों की भीड़ लगी होती है।…
लेह में साल 2022 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच 244.53 टन कचरा उत्पन्न हुआ वहीं इस दौरान कारगिल में 36 टन कचरा उत्पन्न हुआ। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
नर हूलॉक गिब्बन। तस्वीर- मिराज हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स 

मेघालय में स्तनपायी जीवों की आबादी पर समुदाय-आधारित संरक्षण प्रयासों का अच्छा असर

एक अध्ययन में पाया गया है कि कम्युनिटी रिजर्व (सीआर) यानी आदिवासी समुदायों द्वारा प्रबंधित संरक्षित क्षेत्र, संरक्षण प्राथमिकताओं और समुदायों की आजीविका की जरूरतों को संतुलित करने के लिए…
नर हूलॉक गिब्बन। तस्वीर- मिराज हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स 
स्यूसाल गांव के लोगों ने अपने गांव में प्लास्टिक डिस्पोजेबल के इस्तेमाल को पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। अब गांव में होने वाले किसी भी छोटे या बड़े समारोह में प्लास्टिक के दोने, प्लेट और ग्लास के स्थान पर स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे

प्लास्टिक कचरे का स्थानीय स्तर पर समाधान ढूंढते उत्तराखंड के गांव

भीम सिंह रावत (41) उत्तराखंड के पौड़ी जिला मुख्यालय से लगभग 150 किमी दूर थलीसैण विकास खंड के स्यूसाल गांव के रहने वाले हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नौकरी करने…
स्यूसाल गांव के लोगों ने अपने गांव में प्लास्टिक डिस्पोजेबल के इस्तेमाल को पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। अब गांव में होने वाले किसी भी छोटे या बड़े समारोह में प्लास्टिक के दोने, प्लेट और ग्लास के स्थान पर स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे
ताड़ के पत्तों से बने नर्सरी बैग लिए हुए महिलाएं। तस्वीर- बालाजी वेदराजन।

मैंग्रोव रोपाई के लिए प्लास्टिक की जगह लेते ताड़ के पत्तों से बने नर्सरी बैग

फूस से बनी अपनी झोपड़ी के पास बैठकर, अचिक्कन्नु मछली पकड़ने के टूटे हुए जाल से बने बाड़ पर रखे ताड़ के सूखे पत्ते (बोरासस फ्लेबेलिफ़र) की तरफ हाथ बढ़ाती…
ताड़ के पत्तों से बने नर्सरी बैग लिए हुए महिलाएं। तस्वीर- बालाजी वेदराजन।
कर्नाटक के बेल्लारी में थर्मल पॉवर प्लांट। तस्वीर- प्रणव कुमार/मोंगाबे।

ग्रीन क्रेडिट से पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन, लेकिन चाहिए मजबूत नियामक तंत्र

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए "ग्रीन क्रेडिट" स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत व्यक्ति, संगठन और उद्योग पर्यावरण के…
कर्नाटक के बेल्लारी में थर्मल पॉवर प्लांट। तस्वीर- प्रणव कुमार/मोंगाबे।
ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो। भारत में इसे भीमराज और भृंगराज के नाम से जाना जाता है। तस्वीर- बी मैड शहंशाह बापी/विकिमीडिया कॉमन्स।

[वीडियो] आवाज से मिल रहा जंगल के बेहतर होने का जवाब, साउंडस्कैप की मदद से निगरानी

 “हम लैंटाना (विदेशी प्रजाति का एक पौधा) के प्रकोप से आजाद हैं,” मध्य भारत में स्थानीय समुदाय के एक सदस्य बसंत झारिया मुस्कुराते हुए कहते हैं। यह क्षेत्र कभी आक्रामक…
ग्रेटर रैकेट-टेल्ड ड्रोंगो। भारत में इसे भीमराज और भृंगराज के नाम से जाना जाता है। तस्वीर- बी मैड शहंशाह बापी/विकिमीडिया कॉमन्स।
थिरुनेली सीड फेस्टिवल में दर्शाई गईं चावल की विभिन्न किस्में। तस्वीर- मैक्स मार्टिन/मोंगाबे

जलवायु अनुकूल पारंपरिक बीज और कृषि उपज का जश्न मनाता थिरुनेली का सीड फेस्टिवल

पंचरिमेलम की संगीत मंडली ने त्योहार की गूंज को केरल के मंदिर में सुरों के रंगों से सजाया हुआ था। वहीं खड़े एक बुजुर्ग अपने युवा प्रशंसकों से बीज के…
थिरुनेली सीड फेस्टिवल में दर्शाई गईं चावल की विभिन्न किस्में। तस्वीर- मैक्स मार्टिन/मोंगाबे
झाबुआ जिले में सामुदायिक श्रमदान 'हलमा' में शामिल होने जा रहीं भील महिलाएं। झाबुआ-अलीराजपुर के 1,322 गांवों में 500 कुओं की मरम्मत और गहरीकरण,मेड बधान, नलकूप सुधारने, चैकडैम, बोरीबधान बनाने जैसी जल संरचनाओं के निर्माण का काम हलमा से भील समुदाय ने किए हैं। तस्वीर- सतीश मालवीय/मोंगाबे

हलमा: सामुदायिक भागीदारी से सूखे का हल निकालते झाबुआ के आदिवासी

मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के सूखे पहाड़ गर्मी की शुरुआत में ही आग उगल रहे हैं। साढ़ गांव की बाड़ी बोदरी फलिया की एक बेहद जर्जर झोपड़ी में 12…
झाबुआ जिले में सामुदायिक श्रमदान 'हलमा' में शामिल होने जा रहीं भील महिलाएं। झाबुआ-अलीराजपुर के 1,322 गांवों में 500 कुओं की मरम्मत और गहरीकरण,मेड बधान, नलकूप सुधारने, चैकडैम, बोरीबधान बनाने जैसी जल संरचनाओं के निर्माण का काम हलमा से भील समुदाय ने किए हैं। तस्वीर- सतीश मालवीय/मोंगाबे
साइकलिंग के खराब मूलभूत ढांचे और मोटरगाड़ियों के हिसाब से डिजाइन किए गए शहर दिल्ली में साइकलिंग की संभावनाओं को बेहतर बनाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं। तस्वीर- राहुल गोयल

साइकलिंग से घट सकता है दिल्ली का प्रदूषण, साइकिल चालक सबसे ज्यादा हादसों के शिकार

नवंबर 2022 में 50 साल के एक बुजुर्ग साइकिल चलाते हुए दिल्ली के महिपालपुर फ्लाईओवर को पार कर रहे थे, पीछे से आई एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी।…
साइकलिंग के खराब मूलभूत ढांचे और मोटरगाड़ियों के हिसाब से डिजाइन किए गए शहर दिल्ली में साइकलिंग की संभावनाओं को बेहतर बनाने के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा हैं। तस्वीर- राहुल गोयल
ओडिशा में लगभग 7,829 महिला स्वयं सहायता समूह पिछले पांच सालों से गांव के तालाबों में पोषण-संवेदनशील मछली पालन में शामिल हैं। तस्वीर- डेटौर ओडिशा/वर्ल्डफिश 

मछली पालन से पोषण को प्रोत्साहित करती ओडिशा की महिलाएं

लगभग डेढ़ दशक पहले तक ‘मोला मछली’ ओड़िया खाने का अभिन्न अंग थी। यह एक स्वदेशी प्रजाति की मछली है जिसे एंबलीफेरिंगोडोन मोला भी कहा जाता है। लेकिन बदलती जलवायु…
ओडिशा में लगभग 7,829 महिला स्वयं सहायता समूह पिछले पांच सालों से गांव के तालाबों में पोषण-संवेदनशील मछली पालन में शामिल हैं। तस्वीर- डेटौर ओडिशा/वर्ल्डफिश 
आटपाडी में अपने शिमला मिर्च के पौधों की देखभाल करती एक महिला। तस्वीर- जयसिंह चव्हाण/मोंगाबे

[वीडियो] समान सिंचाई के मॉडल से बदलती महाराष्ट्र के इस सूखाग्रस्त क्षेत्र की तस्वीर

लगभग 1.5 लाख से ज्यादा आबादी वाले दक्षिणी महाराष्ट्र के सांगली जिले के आटपाडी तालुका (प्रशासनिक प्रभाग) में लगभग 60 गाँव हैं। यह इलाका सह्याद्रि के सुदूर पूर्वी हिस्से में…
आटपाडी में अपने शिमला मिर्च के पौधों की देखभाल करती एक महिला। तस्वीर- जयसिंह चव्हाण/मोंगाबे
थार रेगिस्तान में ऊंट को पानी पिलाता एक ग्रामीण। एक अनुमान है कि साल 2030 तक भारत में 1.5 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होगी। तस्वीर- व्याचेस्लाव आर्जेनबर्ग / विकिमीडिया कॉमन्स

[कॉमेंट्री] स्थानीय स्तर पर पानी की सफाई से दूर होगा जल संकट

साल 2030 तक भारत में पानी की जरूरत 1.5 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाएगी। भारत में जितना सीवेज या अपशिष्ट जल निकलता है उसमें से सिर्फ 16.8 प्रतिशत की…
थार रेगिस्तान में ऊंट को पानी पिलाता एक ग्रामीण। एक अनुमान है कि साल 2030 तक भारत में 1.5 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत होगी। तस्वीर- व्याचेस्लाव आर्जेनबर्ग / विकिमीडिया कॉमन्स
उत्तरी लखीमपुर, असम में मिसिंग जनजाति का एक घर। बाढ़ग्रस्त इलाकों में रह रहे लोग बाढ़ से बचने के लिए चांग घोर अवधारणा को अपना रहे हैं। तस्वीर- pranabnlp /विकिमीडिया कॉमन्स

कैसे असम का मिसिंग समुदाय वास्तुशिल्प डिजाइन के जरिए बाढ़ से मुकाबला कर रहा है

ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे मेधिपामुआ गांव में दिसंबर की गुनगुनी धूप हर तरफ फैली है। गांव के कुछ पुरुष, महिलाएं और बच्चे झुंड बनाकर जमीन से कुछ फीट ऊपर…
उत्तरी लखीमपुर, असम में मिसिंग जनजाति का एक घर। बाढ़ग्रस्त इलाकों में रह रहे लोग बाढ़ से बचने के लिए चांग घोर अवधारणा को अपना रहे हैं। तस्वीर- pranabnlp /विकिमीडिया कॉमन्स
गुमला जिले के गुनिया गांव के सीताराम उरांव अपने तरबूज के खेत में काम कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

सर्द रातों में सिंचाई की समस्या का समाधान बनती सौर बिजली

राजस्थान के गंगानगर जिले में लुढ़कता पारा नए रिकॉर्ड बना रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग गर्म रजाई में भी ठिठुर रहे हैं। ऐसे वक्त में मोहनपुरा गांव के…
गुमला जिले के गुनिया गांव के सीताराम उरांव अपने तरबूज के खेत में काम कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
मानसून धान के खेत में स्वेच्छा से कोंकणी रान माणूस अतिथि। तस्वीर- कोंकणी रान माणूस

पर्यावरण को सहेजते हुए आगे बढ़ता कोंकण का इको-टूरिज्म

महाराष्ट्र में पर्यटन को लेकर एक नई पहल लोकप्रिय हो रही है। इसमें पर्यटकों को स्थानीय समुदायों की जीवन शैली और उनके कम कार्बन-फुटप्रिंट यानी किसी इकाई (व्यक्ति या संस्था)…
मानसून धान के खेत में स्वेच्छा से कोंकणी रान माणूस अतिथि। तस्वीर- कोंकणी रान माणूस
गणेश प्रतिमाओं से इस साल दो मिट्टी एकत्रित हुई है उसे अगले साल मूर्तियां बनाने में इस्तेमाल में लाया जाएगा। तस्वीर- वेदसूत्र / विकिमीडिया कॉमन्स

पुणे में गणेश प्रतिमाओं की मिट्टी को दोबारा उपयोग में लाकर पर्यावरण बचाने की पहल

दिनेश गोले महाराष्ट्र के पेण में रहने वाले एक मूर्तिकार हैं जो कई वर्षों से गणेश उत्सव के लिए मूर्तियां बनाते हैं। पेण, पुणे से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी…
गणेश प्रतिमाओं से इस साल दो मिट्टी एकत्रित हुई है उसे अगले साल मूर्तियां बनाने में इस्तेमाल में लाया जाएगा। तस्वीर- वेदसूत्र / विकिमीडिया कॉमन्स
गर्मी में ठंड और ठंड में गर्मी, घर बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान

गर्मी में ठंडा और सर्दी में गर्म रहने वाले घर बनाने हों तो इन बातों का रखें ध्यान

आप साल 2030 में इंदौर या सूरत जैसे शहरों में किसी आवासीय परिसर (रेसिडेंशियल कॉम्पलेक्स) की कल्पना करें। अगर ये इमारतें मौजूदा दौर की गगनचुंबी इमारतों की तरह ही हुईं,…
गर्मी में ठंड और ठंड में गर्मी, घर बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान