चक्रवात

देश से बाहर भेजने के लिए नमक की पैकेजिंग करते मजदूर। नमक उत्पादन को बेमौसम बारिश से बचाने के लिए यांत्रिक टर्बुलेशन, सौर पैनलों की मदद से गर्मी को रेगुलेट करने और खारे पानी के तापमान को बढ़ाने और वाष्पीकरण में मदद करने वाली रासायनिक रंगों जैसी तकनीकों का पता लगाया जा रहा है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे।

गुजरातः नमक उत्पादन पर अनिश्चित मौसम की मार, बढ़ रही लागत

आषाढ़ी बीज, कच्छी समुदाय का नया साल है। यह दिन गुजरात के कच्छ क्षेत्र में मानसून की शुरुआत का प्रतीक भी है। यह त्योहार जून के आखिर में आता है।…
देश से बाहर भेजने के लिए नमक की पैकेजिंग करते मजदूर। नमक उत्पादन को बेमौसम बारिश से बचाने के लिए यांत्रिक टर्बुलेशन, सौर पैनलों की मदद से गर्मी को रेगुलेट करने और खारे पानी के तापमान को बढ़ाने और वाष्पीकरण में मदद करने वाली रासायनिक रंगों जैसी तकनीकों का पता लगाया जा रहा है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे।
कन्याकुमारी में मछली पकड़ने के घाट पर खड़े रॉबिन्सन जॉनसन और अन्य मछुआरे। तस्वीर: नारायण स्वामी सुब्बारामन/मोंगाबे

तमिलनाडु में चक्रवात ओखी के छह साल बाद भी मानसिक स्वास्थ्य से जूझते लोग

इस लेख में आपदा से बचे लोगों की मानसिक सेहत पर चर्चा की जा रही है। कुछ घटनाएं पाठकों को परेशान कर देने वाली हो सकती हैं। 30 नवंबर, 2017…
कन्याकुमारी में मछली पकड़ने के घाट पर खड़े रॉबिन्सन जॉनसन और अन्य मछुआरे। तस्वीर: नारायण स्वामी सुब्बारामन/मोंगाबे
वर्ष 2020 में मैंग्रोव लगाने की अभियान चलाया गया था। तस्वीर- साबिज बाहिनी

[वीडियो] देखने में अक्षम पर अपने नेतृत्व से गांव को चक्रवात झेलने में बनाया सक्षम

इस साल भारी बारिश से देश के विभिन्न हिस्सों में शहर और गांव बेहाल हैं। चारों तरफ मौसम के मार और उससे होने वाली तकलीफों की चर्चा है। इसी बीच…
वर्ष 2020 में मैंग्रोव लगाने की अभियान चलाया गया था। तस्वीर- साबिज बाहिनी

ताउते के बाद अब यास तूफान ने मचाई तबाही, बढ़ता तापमान बढ़ा रहा मुसीबत

पश्चिम बंगाल की बुजुर्ग महिला शिल्पा गायेन का घर चक्रवाती तूफान यास ने उजाड़ दिया। 26 मई 2021 को हवा के तेज थपेड़ों को उनका कच्चा घर सह नहीं पाया…
मखाना की फसल निकालने के लिए पानी में इस तरह उतरना होता है। घंटों पानी में खड़े रहकर एक-एक पौधे की जड़ से मखाना इकट्ठा किया जाता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में बिहार के मखाना किसान लागत से दोगुनी आमदनी लेने में सफल हो रहे हैं। तस्वीर- चिन्मयानंद सिंह

बिहारः कोसी सीमांचल के किसानों को मौसम की मार से छुटकारा दिला रहा मखाना

मखाने की खेती का जिक्र सुनकर चिन्मयानंद सिंह चिहुक उठते हैं। वे कहते हैं, एक किसान के तौर पर अगर मैं कहूं हैप्पी फार्मर का जो सपना लेकर मैंने खेती करने…
मखाना की फसल निकालने के लिए पानी में इस तरह उतरना होता है। घंटों पानी में खड़े रहकर एक-एक पौधे की जड़ से मखाना इकट्ठा किया जाता है। जलवायु परिवर्तन के दौर में बिहार के मखाना किसान लागत से दोगुनी आमदनी लेने में सफल हो रहे हैं। तस्वीर- चिन्मयानंद सिंह
बिहार में हर साल बाढ़ के रूप में प्राकृतिक आपदा लोगों का जनजीवन प्रभावित करती है। तस्वीर में मौजूद लोग कोसी नदी में आई बाढ़ की वजह से सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। तस्वीर- चंदन सिंह/फ्लिकर

पचास साल में हुई डेढ़ लाख मौत, हर प्राकृतिक आपदा लेती है औसतन 20 लोगों की जान

जलवायु परिवर्तन की वजह से प्राकृतिक आपदा जैसी घटना अब आम-बात हो गयी है और इसमें होने वाले जान-माल की क्षति भी। हाल ही में हुए एक अध्ययन में पता…
बिहार में हर साल बाढ़ के रूप में प्राकृतिक आपदा लोगों का जनजीवन प्रभावित करती है। तस्वीर में मौजूद लोग कोसी नदी में आई बाढ़ की वजह से सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। तस्वीर- चंदन सिंह/फ्लिकर