Conservation

नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।

लद्दाख: आम नागरिकों की पहल से कारगर हो रहा वन्यजीव संरक्षण

लेह में रहने वाले 35 वर्षीय स्टैनज़िन चंबा प्रकृति की खोज में लद्दाख के नुब्रा घाटी में बीते पांच साल से जा रहे हैं। लेह शहर से लगभग 160 किलोमीटर…
नुब्रा वैली में सी बकथ्रॉन की झाड़ियों के बीच एक यूरेशियाई लिंक्स। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा।
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।

मधुमक्खी और तितली जैसे कीड़े-मकोड़ों के कम होने का असर इंसानों पर भी, हर साल मर रहे पांच लाख लोग

बटरफ्लाई थ्योरी कहती है कि न के बराबर होने वाले बदलाव भी बहुत बड़ा असर दिखाते हैं। केओस थ्योरी के बारे में चर्चा के दौरान अक्सर एक रूपक का इस्तेमाल…
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।
आटपाडी में अपने शिमला मिर्च के पौधों की देखभाल करती एक महिला। तस्वीर- जयसिंह चव्हाण/मोंगाबे

[वीडियो] समान सिंचाई के मॉडल से बदलती महाराष्ट्र के इस सूखाग्रस्त क्षेत्र की तस्वीर

लगभग 1.5 लाख से ज्यादा आबादी वाले दक्षिणी महाराष्ट्र के सांगली जिले के आटपाडी तालुका (प्रशासनिक प्रभाग) में लगभग 60 गाँव हैं। यह इलाका सह्याद्रि के सुदूर पूर्वी हिस्से में…
आटपाडी में अपने शिमला मिर्च के पौधों की देखभाल करती एक महिला। तस्वीर- जयसिंह चव्हाण/मोंगाबे
मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के समापन के दो सप्ताह बाद जैव विविधता शिखर सम्मेलन हो रहा है। तस्वीर: संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता/फ़्लिकर।

कॉप15: साल 2030 तक 30% जैव-विविधता को बचाने पर भारत का जोर, सहमति बनाना बड़ी चुनौती

संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (कॉप15) को लेकर आयोजक देश कनाडा में गहमागहमी बढ़ गई है। जैव विविधता को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए यहां ऐतिहासिक समझौते पर…
मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के समापन के दो सप्ताह बाद जैव विविधता शिखर सम्मेलन हो रहा है। तस्वीर: संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता/फ़्लिकर।
उत्तर भारत में हाल ही में काटे गए खेत में चार वूली नेक्ड स्टॉर्क का एक परिवार। पारंपरिक कृषि तकनीक, अनुकूल फसलें, और कम शिकार गतिविधि कृषि क्षेत्रों को पक्षियों के लिए एक स्थायी निवास स्थान बनाती है। तस्वीर- के.एस. गोपी सुंदर।

वूली नेक्ड स्टॉर्क और हैरान करती हरियाणा में इनकी बढ़ती तादाद

भले ही पूरी दुनिया में पक्षियों की आबादी लगातार गिर रही है, लेकिन एक ऐसा भी पक्षी है जिसकी संख्या बढ़ रही है। इसे अंग्रेजी में वूली नेक्ड स्टॉर्क कहते…
उत्तर भारत में हाल ही में काटे गए खेत में चार वूली नेक्ड स्टॉर्क का एक परिवार। पारंपरिक कृषि तकनीक, अनुकूल फसलें, और कम शिकार गतिविधि कृषि क्षेत्रों को पक्षियों के लिए एक स्थायी निवास स्थान बनाती है। तस्वीर- के.एस. गोपी सुंदर।
कहलगांव के 65 वर्षीय दशरथ सहनी डॉल्फिन मित्र के तौर पर संरक्षण का काम करते हैं। वह हर दिन नाव से आठ से दस किमी की गश्त करके संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे

[वीडियो] गंगा डॉल्फिन को बचाने की डगर में कई मुश्किलें, प्रदूषण और बांध बड़ी समस्या

कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन के बाद मीडिया ने गंगा में इंसानी गतिविधियों में कमी के चलते नदी के स्वच्छ होने की खबरें दीं। कहा गया कि इससे देश के…
कहलगांव के 65 वर्षीय दशरथ सहनी डॉल्फिन मित्र के तौर पर संरक्षण का काम करते हैं। वह हर दिन नाव से आठ से दस किमी की गश्त करके संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे
2019 के दौरान बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान में आग।

जंगल में लगने वाली आग के नुकसान और फायदे

जंगल की आग यानि  फॉरेस्ट फायर्स को अनियंत्रित आग माना जाता है। इससे अक्सर जंगलों, घास के मैदानों, ब्रशलैंड और टुंड्रा प्रदेश के पेड़-पौधों की व्यापक तबाही के रूप में…
2019 के दौरान बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान में आग।
लाल कान वाला स्लाइडर कछुआ। अक्सर जब लोग पालतू जानवरों के रूप में इन विदेशी जानवरों की देखभाल करने में असमर्थ होते हैं, तो वे उन्हें देखभाल केंद्रों या अभयारण्यों में छोड़ देते हैं। आमतौर पर बाहरी जीवों को कैद करने की निंदा की जाती है। तस्वीर- नोबो ज़िअस/ पिक्साबे।

क्या कारण है कि भारत वन्यजीवों की तस्करी का एक प्रमुख अड्डा है?

वन्यजीवों की तस्करी से तात्पर्य जीवित या मृत जंगली जानवरों और पौधों के अवैध व्यापार से है। इससे दुनिया के पर्यावरण, जैव विविधता, अर्थव्यवस्था, शासन और स्वास्थ्य पर भारी नकारात्मक…
लाल कान वाला स्लाइडर कछुआ। अक्सर जब लोग पालतू जानवरों के रूप में इन विदेशी जानवरों की देखभाल करने में असमर्थ होते हैं, तो वे उन्हें देखभाल केंद्रों या अभयारण्यों में छोड़ देते हैं। आमतौर पर बाहरी जीवों को कैद करने की निंदा की जाती है। तस्वीर- नोबो ज़िअस/ पिक्साबे।
मध्यप्रदेश सरकार 37,420 वर्ग किलोमीटर को इस निजीकरण के दायरे में लाने का विचार कर रही है। फोटो- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे हिन्दी

मध्य प्रदेश: 16 सौ करोड़ खर्च कर लगे 20 करोड़ पौधे, कितने बचे पता नहीं

“दस साल पहले जंगल खूब घना था। शाम होते ही सड़क पर सन्नाटा पसर जाता था। लोग निकलते नहीं थे घर से। डर रहता था जंगली जानवरों का, लेकिन अब…
मध्यप्रदेश सरकार 37,420 वर्ग किलोमीटर को इस निजीकरण के दायरे में लाने का विचार कर रही है। फोटो- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे हिन्दी
राजाजी नेशनल पार्क उत्तराखंड में विचरण करता एक हाथी। तस्वीर- Achat1999/विकिमीडिया कॉमन्स

उत्तराखंड में हाथियों की लीद में मिला प्लास्टिक, कांच और अन्य कचरा

द जर्नल फॉर नेचर कंजर्वेशन में पिछले महीने छपे एक अध्ययन में उत्तराखंड के जंगलों में हाथी के लीद में प्लास्टिक और अन्य मानव निर्मित सामग्री के मौजूद होने का…
राजाजी नेशनल पार्क उत्तराखंड में विचरण करता एक हाथी। तस्वीर- Achat1999/विकिमीडिया कॉमन्स
नेपाल के पहले पक्षी अभयारण्य में ग्रेट हॉर्नबिल, सारस और भारतीय चिततीदार चील जैसे पक्षियों को आसरा मिल रहा है। तस्वीर- प्रताप गुरुंग/विकिमीडिया कॉमन्स

यह है नेपाल का पहला पक्षी अभयारण्य, भारतीय पर्यटकों के लिए नया आकर्षण

भारत-नेपाल की सीमा पर स्थित घोड़ाघोड़ी वेटलैंड की पहचान एक रामसर स्थल के रूप में होती है। यह स्थान नेपाल के सुदूर पश्चिम प्रांत (सुदूरपश्चिम प्रदेश) में है। सुदूरपश्चिम नेपाल…
नेपाल के पहले पक्षी अभयारण्य में ग्रेट हॉर्नबिल, सारस और भारतीय चिततीदार चील जैसे पक्षियों को आसरा मिल रहा है। तस्वीर- प्रताप गुरुंग/विकिमीडिया कॉमन्स
रूफस-थ्रोटेड व्रेन-बब्बलर (Spelaeornis caudatus)। तस्वीर- माइक प्रिंस / फ़्लिकर

नेपाल और भारत में निर्माण के नियम ‘वन्यजीवों के हित में’ पर पक्षियों के नहीं

भारत और नेपाल जैसे विकासशील देशों के लिए बिजली, सड़क, पुल, रेलवे लाइन जैसे मूलभूत ढ़ांचा का निर्माण बहुत जरूरी है। हालांकि, ये निर्माण अक्सर जंगलों के बीच से गुजरते…
रूफस-थ्रोटेड व्रेन-बब्बलर (Spelaeornis caudatus)। तस्वीर- माइक प्रिंस / फ़्लिकर
पेंच टाइगर रिजर्व में विचरण करते चीतल। यह जंगल मध्यप्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिले के बीच फैला हुआ है। तस्वीर- लिंडा डी वोल्डर/फ्लिकर

भारत में जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने की जंगलों की क्षमता को बढ़ा-चढ़ा कर आंका गया, अध्ययन

वनों के पुनर्रोपण और कृषिवानिकी के जरिए अतिरिक्त कार्बन को सोखकर जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने की कोशिश हो रही है। पर इसके जरिए जो लक्ष्य हासिल…
पेंच टाइगर रिजर्व में विचरण करते चीतल। यह जंगल मध्यप्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिले के बीच फैला हुआ है। तस्वीर- लिंडा डी वोल्डर/फ्लिकर
लद्दाख के इस इलाके के लोग भेड़ियों का शिकार करने के लिए शंडोंग का प्रयोग करते रहे हैं। यह एक उल्टा कीप आकार का गड्ढा होता है जिसमें भेड़ियों को फंसाया जाता है। हालांकि, संरक्षण की कोशिशों की वजह से अब ज्यादातर शंडोंग काम नहीं कर रहे हैं। तस्वीर- करमा सोनम

जानलेवा शंडोंग से शांति देने वाले स्तूप तक: लद्दाख में भेड़ियों के संरक्षण की कहानी

आज से चार दशक पहले सर्दी की एक सुबह एक 10-12 साल का लड़का लद्दाख के बीहड़ क्षेत्र में अपने पिता के साथ घोड़े पर यात्रा कर रहा था। वे…
लद्दाख के इस इलाके के लोग भेड़ियों का शिकार करने के लिए शंडोंग का प्रयोग करते रहे हैं। यह एक उल्टा कीप आकार का गड्ढा होता है जिसमें भेड़ियों को फंसाया जाता है। हालांकि, संरक्षण की कोशिशों की वजह से अब ज्यादातर शंडोंग काम नहीं कर रहे हैं। तस्वीर- करमा सोनम
ऑस्ट्रेलिया के कंगारू द्वीप से एक कंगारू की प्रतिनिधि तस्वीर। तस्वीर- कॉनर स्लेड/विकिमीडिया कॉमन्स

बंगाल के रास्ते कंगारुओं की तस्करी, सवालों के घेरे में इंदौर का चिड़ियाघर

पश्चिम बंगाल के दोरास इलाके में दो अप्रैल को चारों तरफ सनसनी थी। हर तरफ कंगारुओं को देखे जाने की चर्चा हो रही थी। इसे लेकर लोगों के बीच कौतुहल…
ऑस्ट्रेलिया के कंगारू द्वीप से एक कंगारू की प्रतिनिधि तस्वीर। तस्वीर- कॉनर स्लेड/विकिमीडिया कॉमन्स
पटना पक्षी अभयारण्य के पास उड़ते पक्षी। तस्वीर- विराग शर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स

भूदान ने बदली ज़िंदगी, बहेलिये बन गए पक्षियों के पैरोकार

‘बहेलिया आएगा, जाल बिछाएगा, दाना डालेगा..।’ हिन्दी क्षेत्र में कौन होगा जिसने यह कहानी न सुनी होगी! इस कहानी में जिस बहेलिया समुदाय को पक्षियों के लिए खतरा बताया गया…
पटना पक्षी अभयारण्य के पास उड़ते पक्षी। तस्वीर- विराग शर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स
कुएं की खुदाई में मारुवन परियोजना की टीम की मदद करते स्थानीय लोग। गौरव गुर्जर द्वारा फोटो।

जापानी विधि से राजस्थान के मरुस्थल में तैयार हो रहा वन

जंगली पेड़ों के जानकार गौरव गुर्जर जोधपुर में पले-बढ़े हैं। पढ़ाई और रोजगार के लिए वे अपने घर से दूर जाने वाले गौरव गुर्जर को इसका अंदाजा यह नहीं था…
कुएं की खुदाई में मारुवन परियोजना की टीम की मदद करते स्थानीय लोग। गौरव गुर्जर द्वारा फोटो।
जैव विविधता से संपन्न पूर्वोत्तर राज्यों में जंगल लगातार कम हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबित पूर्वोत्तर में 1,69,521 वर्ग किलोमीटर जंगल है, जो कि पिछली सर्वेक्षण रिपोर्ट 2019 के मुताबले 1,020 वर्ग किमी कम है। तस्वीर- सौरभ सावंत/विकिमीडिया कॉमन्स

विश्लेषण: पिछले दो साल में नागालैंड राज्य के बराबर जंगल हुए ‘खराब’

भारत में जंगलों की स्थिति को लेकर 13 जनवरी का दिन अहम रहा। इस दिन केंद्र सरकार ने वन सर्वेक्षण रिपोर्ट, 2021 (इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट यानी आईएसएफआर) जारी की।…
जैव विविधता से संपन्न पूर्वोत्तर राज्यों में जंगल लगातार कम हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबित पूर्वोत्तर में 1,69,521 वर्ग किलोमीटर जंगल है, जो कि पिछली सर्वेक्षण रिपोर्ट 2019 के मुताबले 1,020 वर्ग किमी कम है। तस्वीर- सौरभ सावंत/विकिमीडिया कॉमन्स
दिल्ली के चिड़ियाघर में दोपहर के दौरान लेटा भालू। तस्वीर- परीक्षित निर्भय

दिल्ली के चिड़ियाघर में मरने वाले जीवों में आधे से अधिक सदमे के शिकार

चिड़ियाघर में जानवरों की मौत के लिए शॉक या सदमा सबसे बड़ी वजह बनता जा रहा है। दिल्ली चिड़ियाघर के आंकड़ों से तो यही साबित होता है। यहां पिछले तीन…
दिल्ली के चिड़ियाघर में दोपहर के दौरान लेटा भालू। तस्वीर- परीक्षित निर्भय
हरियाणा स्थित एक थर्मल पावर प्लांट। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोयला संकट के पीछे की असल वजह पावर प्लांट की माली हालत और ढुलाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। तस्वीर- विक्रमदीप सिधु/विकिमीडिया कॉमन्स

कोयला से बिजली पैदा होने वाले संयंत्रों को बंद करना चुनौतीपूर्ण काम, एनजीटी के आदेश पर तैयार हुआ दिशानिर्देश

भारत फॉशिल फ्यूल आधारित ऊर्जा से गैर परंपरागत ऊर्जा यानी अक्षय ऊर्जा की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोयले से चलने वाले कई…
हरियाणा स्थित एक थर्मल पावर प्लांट। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोयला संकट के पीछे की असल वजह पावर प्लांट की माली हालत और ढुलाई से जुड़ी दिक्कतें हैं। तस्वीर- विक्रमदीप सिधु/विकिमीडिया कॉमन्स
23-वर्षीय एलिस बरवा ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन में आदिवासी युवाओं का प्रतिनिधित्व किया। उनके नेतृत्व में गांव छोड़ब नहीं और हसदेव अरण्य बचाओ जैसे पोस्टर्स प्रदर्शनी में शामिल किए गए। तस्वीर- प्रियंका शंकर/मोंगाबे

कॉप-26 में गूंजा ‘गांव छोड़ब नहीं’ की धुन, युवाओं ने भी संभाला मोर्चा

यह ग्लासगो में जलवायु सम्मेलन कॉप 26 का दूसरा सप्ताह है। विश्व के नेताओं ने ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की आवश्यकता के साथ अपने देशों…
23-वर्षीय एलिस बरवा ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन में आदिवासी युवाओं का प्रतिनिधित्व किया। उनके नेतृत्व में गांव छोड़ब नहीं और हसदेव अरण्य बचाओ जैसे पोस्टर्स प्रदर्शनी में शामिल किए गए। तस्वीर- प्रियंका शंकर/मोंगाबे
बैनर तस्वीर: हंगुल का झुंड। तस्वीर- ताहिरशॉल/विकिमीडिया कॉमन्स

[वीडियो] बढ़ने लगी कश्मीर के राजकीय पशु हंगुल की आबादी, भोजन और आवास की कमी अब भी चुनौती

हंगुल या कश्मीरी हिरण की गिरती संख्या चिंता का सबब रहा है। पर मार्च 2021 में सामने आई संख्या उत्साहजनक है। वन्यजीव संरक्षण विभाग के अनुसार, लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल…
बैनर तस्वीर: हंगुल का झुंड। तस्वीर- ताहिरशॉल/विकिमीडिया कॉमन्स
बाघ की तलाश में हाथी के साथ महावत। बाघ वाले जंगल में गश्ती के लिए हाथी बेहद जरूरी है। तस्वीर- कल्याण वर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स

[वीडियो] मध्यप्रदेश में पालतू हाथियों की कमी से बाघ संरक्षण में आ रही हैं मुश्किलें

इस साल जनवरी में एक बाघ मध्य प्रदेश के हरदा जिले स्थित केलझिरी वन के एक गांव में घुस आया। तीन दिन में ही बाघ ने इंसानों पर तीन बार…
बाघ की तलाश में हाथी के साथ महावत। बाघ वाले जंगल में गश्ती के लिए हाथी बेहद जरूरी है। तस्वीर- कल्याण वर्मा/विकिमीडिया कॉमन्स
हसदेव अरण्य का जंगल। यह प्राचीन जंगल पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। तस्वीर- मयंक अग्रवाल/मोंगाबे

कोयला खनन की आशंकाओं से अंधकार में है छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य का भविष्य

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य के जंगल काफी प्रचीन है। जैव-विविधता और पारिस्थितिकी से संपन्न। कोयला खनन को लेकर पिछले एक दशक से यह जंगल बहस के केंद्र में रहा है।…
हसदेव अरण्य का जंगल। यह प्राचीन जंगल पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। तस्वीर- मयंक अग्रवाल/मोंगाबे
असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य से अधिक जैवविविधता मांगर बानी के असंरक्षित जंगल में पाई गई है। तस्वीर- संशेय विश्वास और मैनो वर्चोट।

[वीडियो] देश की राजधानी से सटा ऐसा जंगल जिसे सैकड़ों साल से बचा रहे स्थानीय लोग

अरावली की पहाड़ियों में बसा हरियाणा का मांगर गांव इन दिनों चर्चा में है। चर्चा यहां के कंदराओं में मिले पाषाणकालीन पेंटिंग की हो रही है जिसे हाल ही में…
असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य से अधिक जैवविविधता मांगर बानी के असंरक्षित जंगल में पाई गई है। तस्वीर- संशेय विश्वास और मैनो वर्चोट।
चंडीगढ़ का सुखना झील। तस्वीर- विशेष प्रबंध

पंजाब और हरियाणा की लेटलतीफी से असुरक्षित है चंडीगढ़ का सुखना वन्यजीव अभयारण्य

चंडीगढ़ को देश के पहला सुनियोजित तरीके से बसाये गए शहर का खिताब हासिल है। इस शहर की बाहरी सीमा में सुखमा वन्यजीव अभयारण्य बसा है जो कई दुर्लभ वनस्पतियों…
चंडीगढ़ का सुखना झील। तस्वीर- विशेष प्रबंध
रोजी-रोटी के लिए वन गुज्जर मवेशियों पर निर्भर है। वन विभाग की सख्ती की वजह से वे मवेशी चराने के लिए जंगल नहीं जा सकते। तस्वीर- निशांत सैनी

जंगल की रक्षा करने वाले शिवालिक के टोंगिया और वन गुर्जरों का वनाधिकार अधर में

अप्रैल की अलसाई दोपहरी में उत्तराखंड के हरिद्वार के हरिपुर टोंगिया गांव की महिला पाल्लो देवी (52) बैठी जूट की रस्सियां बुन रही थीं। बदन पर गुलाबी सलवार-कुर्ती और चेहरे…
रोजी-रोटी के लिए वन गुज्जर मवेशियों पर निर्भर है। वन विभाग की सख्ती की वजह से वे मवेशी चराने के लिए जंगल नहीं जा सकते। तस्वीर- निशांत सैनी
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

[वीडियो] छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों के लिए छोड़ा जा रहा धान, जानकारों को अजीब लग रहा यह फैसला

सरगुजा ज़िले के मैनपाट के बरपारा के लोकनाथ यादव अपने टूटे हुए घर के सामने खड़े हो कर यही सोच रहे हैं कि अब इस बरसात में टूटे घर की…
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल
पेंच टाइगर रिजर्व के आस-पास कृषि-वानिकी के लिए तैयार हैं किसान, सबके लिए है फायदे का सौदा

पेंच टाइगर रिजर्व के आस-पास कृषि-वानिकी के लिए तैयार हैं किसान, सबके लिए है फायदे का सौदा

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2021-2030 को पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली का दशक घोषित किया है। यानी इस दौरान पारिस्थितिकी तंत्र को जो नुकसान हुआ है उसकी भारपाई की कोशिश की…
पेंच टाइगर रिजर्व के आस-पास कृषि-वानिकी के लिए तैयार हैं किसान, सबके लिए है फायदे का सौदा
उम्मीद की किरण हैं देश के वेटलैंड्स चैंपियन्स की ये कहानियां

[कॉमेंट्री] वेटलैंड चैंपियन्स: उम्मीद की किरणें

वर्ष 1940 में दूसरा विश्व युद्ध खत्म होते ही विज्ञान को एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल मिली। हुआ यह कि सदियों से चली आ रही जानलेवा बीमारी के खिलाफ जंग में…
उम्मीद की किरण हैं देश के वेटलैंड्स चैंपियन्स की ये कहानियां