कृषि News

तमिलनाडु में खाने-पीने की ऑर्गेनिक चीजों का स्टॉल। तस्वीर- थमिझप्परिथि मारी/विकिपीडिया कॉमन्स

क्या है ऑर्गेनिक फूड और कैसे करें इसकी पहचान?

आपने अपने मोहल्ले की किराना दुकान पर खाने-पीने की ऑर्गेनिक चीजें देखी होंगी। लेकिन इन उत्पादों को ऑर्गेनिक का तमगा किस तरह दिया जाता है? और इनकी कीमत बहुत ज़्यादा…
तमिलनाडु में खाने-पीने की ऑर्गेनिक चीजों का स्टॉल। तस्वीर- थमिझप्परिथि मारी/विकिपीडिया कॉमन्स
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।

मधुमक्खी और तितली जैसे कीड़े-मकोड़ों के कम होने का असर इंसानों पर भी, हर साल मर रहे पांच लाख लोग

बटरफ्लाई थ्योरी कहती है कि न के बराबर होने वाले बदलाव भी बहुत बड़ा असर दिखाते हैं। केओस थ्योरी के बारे में चर्चा के दौरान अक्सर एक रूपक का इस्तेमाल…
सिक्किम में एक तितली। एक नई मॉडलिंग स्टडी के मुताबिक, हर साल लगभग 5 लाख लोग अपनी उम्र पूरी किए बिना ही मर जा रहे हैं क्योंकि वैश्विक स्तर पर परागणक का काम करने वाले कीड़े-मकोड़ों की संख्या में तेजी से कमी आ रही है। तस्वीर- नंदिता चंद्रप्रकाश/मोंगाबे।
असम के नागांव के एक गांव पहुकाता में धान की खेती। तस्वीर: दिगंता तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।

बढ़ते जलवायु संबंधी खतरों के साथ, अनुकूलन के लिए तैयार होते किसान

फरवरी के अंत में, भारतीय गेहूं और जौ अनुसंधान संस्थान (IIWBR), गेहूं के लिए एक प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान, ने भारत में किसानों को तापमान में अचानक वृद्धि के मामले में…
असम के नागांव के एक गांव पहुकाता में धान की खेती। तस्वीर: दिगंता तालुकदार/विकिमीडिया कॉमन्स।
खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने के लिए नरवाई में आग लगा देना मिट्टी की सेहत को सबसे नुकसान में डाल देता है, इससे मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व ख़तम हो रहे हैं और मिट्टी कि उपजाऊ क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। तस्वीर- राकेश कुमार मालवीय/मोंगाबे

अब तीसरी फसल के लिए भी पराली जला रहे किसान, मिट्टी के लिए बड़ा खतरा

मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर आता है। यहां के नर्मदापुरम जिले की मिट्टी को एशिया की सबसे उपजाऊ मिट्टी माना जाता है और गेहूं उत्पादन…
खेतों को अगली फसल के लिए तैयार करने के लिए नरवाई में आग लगा देना मिट्टी की सेहत को सबसे नुकसान में डाल देता है, इससे मिट्टी के सूक्ष्म पोषक तत्व ख़तम हो रहे हैं और मिट्टी कि उपजाऊ क्षमता पर बुरा असर पड़ रहा है। तस्वीर- राकेश कुमार मालवीय/मोंगाबे
भोपाल के लहारपुरा के पास गेहूं के खेतों में लगी आग। फसल काटने के बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए फसल अवशेष में आग लगा देते हैं। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

पराली जलाने के मामले में मध्य प्रदेश का देश में दूसरा स्थान, सरकारी योजनाओं से बेखबर किसान

मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर आता है, यह बात प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। लेकिन इसके साथ ही मध्य प्रदेश अब फसल अवशेषों…
भोपाल के लहारपुरा के पास गेहूं के खेतों में लगी आग। फसल काटने के बाद कई किसान खेत साफ करने के लिए फसल अवशेष में आग लगा देते हैं। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

पिछले साल गर्मी और अब भारी बारिश, गेहूं की फसल पर फिर मौसम की मार

इस साल मार्च में हुई भारी बारिश के चलते कई राज्यों में गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। पिछले साल भीषण गर्मी के चलते गेहूं उत्पादन पर असर…
मटर के खेत में निराई-गुराई का काम करतीं पोखरा ब्लॉक के वीणा धार गांव में रहने वाली महिलाएं। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे

उत्तराखंड में किसानों को क्यों नहीं मिल पा रहा जैविक खेती का लाभ

उत्तराखंड में कोटद्वार से लगभग 100 किलोमीटर दूर पोखरा ब्लॉक के वीणाधार गांव में रहने वाली लता देवी पूरे दिन व्यस्त रहती हैं। अहले सुबह वो अपनी गाय को दूहती…
मटर के खेत में निराई-गुराई का काम करतीं पोखरा ब्लॉक के वीणा धार गांव में रहने वाली महिलाएं। तस्वीर- सत्यम कुमार/मोंगाबे

कीटनाशक बनाने वाली कंपनी पर किसानों ने लगाया फसलें खराब करने का आरोप, कार्रवाई की मांग

सलीम पटेल, 43, गुजरात के भरूच जिले के वागरा तालुका के त्रालसा गांव में कपास की खेती करते हैं। वह पिछले 16 साल से ज्यादा समय से कपास उगा रहे…
भारत के एक खेत में कीटनाशक का छिड़काव करते किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर। भारत में फसलों की रक्षा करने वाले कीटनाशकों का इस्तेमाल ज्यादातर कपास, गेहूं, धान और सब्जियों की फसलों पर होता है। तस्वीर- देवेंद्र/पिक्साहाइव।

एग्रोकेमिकल उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ा भारत, औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण पर सवाल बरकरार

सितंबर 2021 को देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक भाषण में कहा कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल उत्पादक देश है। देश की 15 क्रॉप…
भारत के एक खेत में कीटनाशक का छिड़काव करते किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर। भारत में फसलों की रक्षा करने वाले कीटनाशकों का इस्तेमाल ज्यादातर कपास, गेहूं, धान और सब्जियों की फसलों पर होता है। तस्वीर- देवेंद्र/पिक्साहाइव।
छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग की पशुपालन से संबंधित टॉस्क फोर्स की 2022 की एक रिपोर्ट कहती है कि राज्य के मवेशी अत्यंत कमज़ोर, अनुत्पादक, अल्प-उत्पादक व अलाभप्रद हैं।  तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

कुपोषण से जूझ रहे हैं छत्तीसगढ़ के मवेशी, उत्पादकता और प्रजनन क्षमता पर असर

छत्तीसगढ़ के धमतरी के रहने वाले महेश चंद्राकर की गाय पिछले कई सप्ताह से बुखार से तप रही थी। उसका खाना-पीना कम हो गया था और वह बेहद कमज़ोर हो…
छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग की पशुपालन से संबंधित टॉस्क फोर्स की 2022 की एक रिपोर्ट कहती है कि राज्य के मवेशी अत्यंत कमज़ोर, अनुत्पादक, अल्प-उत्पादक व अलाभप्रद हैं।  तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल
पोषक तत्वों से भरपूर करेवा केसर व बादाम की खेती के लिए के लिए अहम है। तस्वीर- शाज़ सैयद/मोंगाबे 

[वीडियो] बुनियादी ढांचे के नीचे दम तोड़ती कश्मीर के करेवा की उपजाऊ जमीन

केसर की धरती कहे जाने वाले पंपोर इलाके के बीच से एक राष्ट्रीय राजमार्ग (NH44) होकर गुजर रहा है। केसर की खेती करने वाले इश्फाक अहमद यहां खड़े होकर इस…
पोषक तत्वों से भरपूर करेवा केसर व बादाम की खेती के लिए के लिए अहम है। तस्वीर- शाज़ सैयद/मोंगाबे 
मध्य प्रदेश के सतना जिले के धतूरा गांव में टमाटर की तुड़ाई करता एक किसान। इस गांव में किसानो ने खेती के तरीकों में बदलाव किया है। पानी की खपत कम करने के लिए मंचिंग पॉलीथिन का प्रयोग किया गया जिससे पानी की बचत हुई। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

[वीडियो] क्लाइमेट स्मार्ट विलेज: जलवायु परिवर्तन से जूझने के लिए कैसे तैयार हो रहे हैं मध्य प्रदेश के ये गांव

मध्यप्रदेश के सतना जिले में धतूरा गांव के किसान देवशरण पटेल (53) कंधे पर बैट्री से चलने वाली कीटनाशक छिड़कने की मशीन लादे खेतों की ओर जा रहे हैं। कुछ…
मध्य प्रदेश के सतना जिले के धतूरा गांव में टमाटर की तुड़ाई करता एक किसान। इस गांव में किसानो ने खेती के तरीकों में बदलाव किया है। पानी की खपत कम करने के लिए मंचिंग पॉलीथिन का प्रयोग किया गया जिससे पानी की बचत हुई। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
पंचनथंगी के पास मौजूद अभयारण्य में स्लेंडर लोरिस। तस्वीर- SEEDS ट्रस्ट।

वन समुदाय के अधिकार और तमिलनाडु में स्लेंडर लोरिस का संरक्षण, समझिए क्या है समस्या

तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले का पंचनथंगी इलाका सुदूर क्षेत्र में बसा हुआ एक छोटा सा गांव है। यह गांव हरी-भरी और छोटी-मोटी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यहां पहुंचना बेहद…
पंचनथंगी के पास मौजूद अभयारण्य में स्लेंडर लोरिस। तस्वीर- SEEDS ट्रस्ट।
गन्ना किसान महाराष्ट्र के सतारा में एक चीनी मिल के पास तुलाई और बिक्री के लिए इंतजार कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

गन्ने के कचरे से बायो-सीएनजी: स्वच्छ ईंधन में चीनी मिलों की बढ़ती भूमिका

गन्ना उत्पादक राज्य महाराष्ट्र की चीनी मिलें स्वच्छ ईंधन के लिए एक नया प्रयोग कर रही हैं। ये मिलें परिवहन ईंधन के नए स्रोत बायो-सीएनजी के उत्पादन में गन्ने के…
गन्ना किसान महाराष्ट्र के सतारा में एक चीनी मिल के पास तुलाई और बिक्री के लिए इंतजार कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
गुमला जिले के गुनिया गांव के सीताराम उरांव अपने तरबूज के खेत में काम कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

सर्द रातों में सिंचाई की समस्या का समाधान बनती सौर बिजली

राजस्थान के गंगानगर जिले में लुढ़कता पारा नए रिकॉर्ड बना रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग गर्म रजाई में भी ठिठुर रहे हैं। ऐसे वक्त में मोहनपुरा गांव के…
गुमला जिले के गुनिया गांव के सीताराम उरांव अपने तरबूज के खेत में काम कर रहे हैं। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
महाराष्ट्र के बारामती में गन्ने की फसल में पानी लगाता एक किसान। इस फसल की सिंचाई के लिए आवश्यक बिजली के कारण इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि से कार्बन फुटप्रिंट भी बढ़ेगा। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

महाराष्ट्र के गन्ना किसानों तक कितना पहुंच रहा गन्ने से ईंधन बनाने की योजना का लाभ

साहू थोरत महाराष्ट्र के सतारा जिले  कलावडे गांव में रहने वाले 47 वर्ष के एक गन्ना किसान हैं। थोरत पिछले 25 वर्षों से गन्ने की खेती अपने चार एकड़ के…
महाराष्ट्र के बारामती में गन्ने की फसल में पानी लगाता एक किसान। इस फसल की सिंचाई के लिए आवश्यक बिजली के कारण इथेनॉल उत्पादन में वृद्धि से कार्बन फुटप्रिंट भी बढ़ेगा। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में सरसो के खेत। सीक्वेंस की जानकारी के आधार पर, स्टेवियोल ग्लाइकोसाइड्स का उत्पादन करने वाले जैवसंश्लेषण जीन पर पेटेंट का मालिकाना हक स्विस मुख्यालय वाली बायोटेक कंपनी इवोल्वा के पास है। तस्वीर- अभिजीत कर गुप्ता/विकिमीडिया कॉमन्स

कॉप15: छाया रहेगा डिजिटल जेनेटिक इन्फॉर्मेशन से समान लाभ का मुद्दा

संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (कॉप15) में डिजिटल सीक्वेंस इन्फॉर्मेशन (डीएसाई) पर जोरदार बहस चल रही है। सम्मेलन में शामिल सभी पक्ष जेनेटिक स्रोतों (डीएसाई) तक पहुंच और लाभ साझाकरण…
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में सरसो के खेत। सीक्वेंस की जानकारी के आधार पर, स्टेवियोल ग्लाइकोसाइड्स का उत्पादन करने वाले जैवसंश्लेषण जीन पर पेटेंट का मालिकाना हक स्विस मुख्यालय वाली बायोटेक कंपनी इवोल्वा के पास है। तस्वीर- अभिजीत कर गुप्ता/विकिमीडिया कॉमन्स
तेलंगाना के खम्मम जिले में अपने तेल ताड़ के खेत में एक ताड़ का किसान। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

धान से लेकर पाम तक: पानी की अधिक खपत करने वाली फसलों की ओर तेलंगाना का रुख

बासठ साल के बी.बुच्छया तेलंगाना के खम्मम जिले में पाम या ताड़ की खेती करने वाले एक किसान हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी 12 एकड़ की जमीन पर ताड़…
तेलंगाना के खम्मम जिले में अपने तेल ताड़ के खेत में एक ताड़ का किसान। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
खम्मम जिले के नेलकोंडापल्ली मंडल के कोराटलागुडेम गांव में अपने ताड़ के तेल के बागान में बी. बुच्चैया। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे

पाम ऑयलः सब्सिडी के सहारे बढ़ती तेलंगाना में ताड़ की खेती, भविष्य में नुकसान की आशंका

तेलंगाना का खम्मम जिला पूरे राज्य में ताड़ की खेती के लिए जाना जाता है। यह राज्य के चार ऐसे चुनिन्दा जिलों में से है जहां 1990 के दशक में…
खम्मम जिले के नेलकोंडापल्ली मंडल के कोराटलागुडेम गांव में अपने ताड़ के तेल के बागान में बी. बुच्चैया। तस्वीर- मनीष कुमार / मोंगाबे
प्याज की फसल की कटाई करते किसान। जीबी-9 ने ‘फसल विविधता के संरक्षक’ के रूप में किसानों की भूमिका को मान्यता देते हुए एक प्रस्ताव का अंतिम रूप दिया। तस्वीर- मीना631/विकिमीडिया कॉमन्स।

प्लांट जेनेटिक पर अंतरराष्ट्रीय संधि में किसानों के अधिकारों पर बनी आम सहमति

खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों (प्लांट जेनेटिक रिसोर्से फॉर फ़ूड एंड एग्रीकल्चर) पर हुई अंतरराष्ट्रीय संधि में खाद्य और कृषि में पौधों के आनुवंशिक संसाधनों पर किसानों…
प्याज की फसल की कटाई करते किसान। जीबी-9 ने ‘फसल विविधता के संरक्षक’ के रूप में किसानों की भूमिका को मान्यता देते हुए एक प्रस्ताव का अंतिम रूप दिया। तस्वीर- मीना631/विकिमीडिया कॉमन्स।
पराली जलाने के स्थान पर मशीनों को किराए पर लेने या खरीदने की लागत छोटे और सीमांत किसान वहन नहीं कर सकते। तस्वीर- 2011CIAT / नील पामर / फ़्लिकर

[वीडियो] तमाम सरकारी ‘समाधानों’ के बावजूद उत्तर भारत में क्यों लौट रहा है पराली संकट

देश में पराली जलाने यानी धान के अवशेष को खेतों में जलाने की समस्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। पराली जलाने की समस्या सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा संकट…
पराली जलाने के स्थान पर मशीनों को किराए पर लेने या खरीदने की लागत छोटे और सीमांत किसान वहन नहीं कर सकते। तस्वीर- 2011CIAT / नील पामर / फ़्लिकर
बडासियालिनी गांव के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की एक महिला दो किस्म के बाजरा दिखाती हुई, रागी (बाएं) और ज्वार (दाएं)। तस्वीर: ऐश्वर्या मोहंती।

मोटे अनाज की खेती से बदल रही ओडिशा के आदिवासी महिलाओं की जिंदगी

30 साल की कल्पना सेठी अपनी दो एकड़ जमीन को उत्साह से दिखाती हैं, यह जमीन कभी एक बंजर भूमि थी लेकिन अब यह जमीन उनके बच्चों की शिक्षा में…
बडासियालिनी गांव के स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की एक महिला दो किस्म के बाजरा दिखाती हुई, रागी (बाएं) और ज्वार (दाएं)। तस्वीर: ऐश्वर्या मोहंती।
हिमाचल के ठंडे रेगिस्तान में खेती की चुनौती: बदलता जलवायु और बदलती फसल

हिमाचल के ठंडे रेगिस्तान में खेती की चुनौती: बदलता जलवायु और बदलती फसल

हिमाचल प्रदेश के ठंडे रेगिस्तान में स्थित तांदी गांव के 30 किसानों के लिए 2022 की गर्मी बेरहम साबित हुई। सिंचाई के लिए पानी की कमी के कारण लाहौल और…
हिमाचल के ठंडे रेगिस्तान में खेती की चुनौती: बदलता जलवायु और बदलती फसल
बायोचार बनाने की प्रक्रिया। बायोचार को पेड़ों और फसलों से जुड़े अपशिष्ट पदार्थों (पराली, भूसा, डंठल सूखे पत्तों आदि) से बनाया जाता है और लंबे वक्त तक जमीन में दबाकर रखा जाता है। तस्वीर- लोरेन इशाक/पर्माकल्चर एसोसिएशन/फ्लिकर

बायोचार में बिगड़ते मौसम को बचाने की ताकत, लेकिन लागत बड़ी बाधा

मौसम में हो रहे बदलावों से निपटने के लिए आजकल बायोचार की खूब चर्चा हो रही है। एक नए रिव्यू के मुताबिक इससे टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को भी हासिल…
बायोचार बनाने की प्रक्रिया। बायोचार को पेड़ों और फसलों से जुड़े अपशिष्ट पदार्थों (पराली, भूसा, डंठल सूखे पत्तों आदि) से बनाया जाता है और लंबे वक्त तक जमीन में दबाकर रखा जाता है। तस्वीर- लोरेन इशाक/पर्माकल्चर एसोसिएशन/फ्लिकर
मध्य प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले पांच साल में मध्य प्रदेश में उर्वरक की खपत दोगुनी हो गई है, 2015-16 में राज्य में 19.65 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया था। इस साल यह बढ़कर 39.75 मीट्रिक टन होने का अनुमान है।  तस्वीर- राकेश कुमार मालवीय

नर्मदापुरम: गेहूं की नहीं बढ़ रही उपज, उर्वरकों के बेतहाशा इस्तेमाल ने बढ़ाई चिंता

“हमारे गांव की मिट्टी कुछ अलग है। यहां की फसल पूरे जिले में अलग दिखाई देती है। पानी भी भरपूर है और अब तो यहां पर तीन फसलें ली जा…
मध्य प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले पांच साल में मध्य प्रदेश में उर्वरक की खपत दोगुनी हो गई है, 2015-16 में राज्य में 19.65 मीट्रिक टन खाद का वितरण किया गया था। इस साल यह बढ़कर 39.75 मीट्रिक टन होने का अनुमान है।  तस्वीर- राकेश कुमार मालवीय
अब तक पूरे भारत में 2.37 लाख सोलर वाटर पंप स्थापित किए जा चुके हैं और 35 लाख सोलर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है। तस्वीर- सीसीएएफएस/2014/प्रशांत विश्वनाथन/फ्लिकर

ऊर्जा के विकेंद्रीकृत स्रोत से हो रही किसानों की मदद

बीते कुछ महीनों से विट्ठल रेड्डी रात में चैन से सो पा रहे हैं।  अब उन्हें खुद के गन्ने के खेत में जंगली सुअरों के आ जाने की चिंता नहीं…
अब तक पूरे भारत में 2.37 लाख सोलर वाटर पंप स्थापित किए जा चुके हैं और 35 लाख सोलर पंप स्थापित करने का लक्ष्य है। तस्वीर- सीसीएएफएस/2014/प्रशांत विश्वनाथन/फ्लिकर
11 देशों के 41 संगठनों से जुड़े 57 शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने 60 देशों से ली गई चने की 3,366 जीनोम रेखाओं की सिक्वेंसिंग की। तस्वीर- जॉर्ज रॉयन/विकिमीडिया कॉमन्स

वैज्ञानिकों ने तैयार किया चने का जीनोम सीक्वेंस, फसलों में सुधार से जुड़े प्रयासों को मिलेगा बढ़ावा

शोधकर्ताओं ने चने की अनुवांशिक सिक्वेंसिंग की है। इस तरह उन्होंने प्रोटीन युक्त चने का एक विस्तृत जीनोम मैप तैयार किया है। इस मैप ने उसके माइग्रेशन और उद्गम की…
11 देशों के 41 संगठनों से जुड़े 57 शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने 60 देशों से ली गई चने की 3,366 जीनोम रेखाओं की सिक्वेंसिंग की। तस्वीर- जॉर्ज रॉयन/विकिमीडिया कॉमन्स
जो लोग केवल खेती पर निर्भर हैं, उन्होंने अपने गांवों में भूमि होने के बावजूद, खेती के लिए अन्य गांवों में पट्टे पर जमीन ली है। तस्वीर- सत सिंह

जलभराव की वजह से खेत बेचने को मजबूर हरियाणा के किसान, किसानी छोड़ने को मजबूर

हरियाणा के चरखी दादरी जिले के इमलोटा गांव के रहने वाले 42 वर्षीय किसान सोनू कलकल अपनी जमीन पर खेती कर खुशहाल जीवन जी रहे थे। उनके खेत में बंपर…
जो लोग केवल खेती पर निर्भर हैं, उन्होंने अपने गांवों में भूमि होने के बावजूद, खेती के लिए अन्य गांवों में पट्टे पर जमीन ली है। तस्वीर- सत सिंह
वैशाली जिले के रूसुलपुर तुर्की गांव में 414 एकड़ खेत जैविक कॉरिडोर का हिस्सा है और इसमें कुल 351 किसान जुड़े हुए हैं।। फोटो: उमेश कुमार राय

बिहार की जैविक कॉरिडोर योजना हो रही है फेल, केंद्र के लिए भी सबक

बीते फरवरी महीने में आम बजट पेश करते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में खासकर गंगा नदी की धारा के पांच किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को प्रोत्साहित करने…
वैशाली जिले के रूसुलपुर तुर्की गांव में 414 एकड़ खेत जैविक कॉरिडोर का हिस्सा है और इसमें कुल 351 किसान जुड़े हुए हैं।। फोटो: उमेश कुमार राय