Tribal peoples खबरें

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101 खबरें

आजीविका और वजूद की लड़ाई लड़ रहीं ओड़िशा की तटीय महिलाएं

राजस्थान: लोकगीतों के संसार से दिखता प्रकृति का अद्भुत नजारा

झारखंड: लैंड बैंक से तैयार हो रही संघर्ष की नई ज़मीन!

निकोबार द्वीप की तबाही की वजह बन सकता है कंटेनर टर्मिनल

सात साल में कितना बदला देश में पहले हैबिटेट राइट्स वाला बैगाचक?

[कॉमेंट्री ] पंचायती राज: 30 साल में कितना मजबूत हुआ लोकतंत्र?

तिलाड़ी विद्रोह की 92वीं बरसी, आज भी जंगल और वन अधिकारों का वही संघर्ष

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता खुद बेचना चाहते है आदिवासी, सरकार को है ऐतराज

कोयले के लिए हसदेव अरण्य में काटे जा सकते हैं साढ़े चार लाख पेड़, रात-दिन जागकर पेड़ों की रक्षा कर रहे हैं आदिवासी

झारखंड में वन अधिकार कानून बेहाल, दावा एकड़ में लेकिन पट्टा डिसमिल में

अचानकमार और कान्हा टाइगर रिजर्व में साथ हुआ विस्थापन पर अनुभव एकदम जुदा

एक अधूरी परियोजना में अटकी पीढ़ियों की जिंदगी, न कोयला मिला और न ही खेती बची

वाचिक परंपरा से बताई जाती है यहां नर्मदा बचाओ आंदोलन की गाथा

कोविड, किसान आंदोलन, उदारीकरण, पेसा, नेट जीरो से जोड़कर देखा जाएगा साल 2021

जानकीअम्माः शहद बटोरने वाली निरक्षर महिला से कंपनी डायरेक्टर का सफर, यूएन से मिला सम्मान

महाराष्ट्र के आदिवासी जिलों में शहद निकालने का आया एक नया टिकाऊ तरीका

[कॉमेंट्री] बीते सदी में वन अधिकार को लेकर बदलता नजरिया और उससे जूझते लोग

झारखंड: पत्थर उत्खनन से राजमहल की पहाड़ी के साथ आदिम जनजाति का अस्तित्व संकट में

क्या देश में कोयला संकट से तैयार हो रहा कानूनों में परिवर्तन का रास्ता?

मार्फत बोधघाट परियोजना, छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज और कांग्रेस सरकार के ढाई साल

अचानकमार टाइगर रिजर्वः जिस जंगल में बचपन बीता वहीं फॉरेस्ट गाइड बन गईं ये महिलाएं

[साक्षात्कार] संरक्षण और मानव-वन्यजीव टकराव की ओर ध्यान आकर्षित करने का एक गंभीर प्रयास है शेरनी

[कॉमेंट्री] लक्षद्वीप के अनकहे संकट

अपने घर में ही दर-बदर हो गए उत्तराखंड के वन गुर्जर

साल 2021 वनवासियों पर भारी, कोविड-19 लॉकडाउन के साथ पड़ी जंगल की आग की मार

लघु वनोपज संग्रहण का मॉडल राज्य छत्तीसगढ़ में कितनी सुधरी आदिवासियों की स्थिति?

पीएम किसान योजना: क्या झारखंड के आदिवासी किसानों के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार?

[वीडियो] हसदेव अरण्य और लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार

हरियाली बचाने के वास्ते गोंड समुदाय ने शवों को नहीं जलाने का लिया फैसला

सुंदरबन में भ्रांति और अनदेखी के बीच पिसती ‘बाघ विधवाएं’