- एक अध्ययन के अनुसार लोकटक झील के जलग्रहण क्षेत्र में कृषि अपवाह, बढ़ती बस्तियाँ और झूम खेती झील में गिरने वाली नदियों की जल गुणवत्ता को गंभीर रूप से खराब कर रही हैं।
- नामबुल नदी सबसे अधिक प्रदूषित पाई गई, जहां घुलित ऑक्सीजन और बीओडी स्तर मत्स्य पालन मानकों से बहुत अलग हैं।
- अध्ययन इस बात पर जोर देता है कि लोकटक झील के जलग्रहण क्षेत्र में सख्त भूमि विनियमन, टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ और नियंत्रित झूम खेती चक्र अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
नागालैंड विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन ने मणिपुर की लोकटक झील के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। लोकटक झील भारत के सबसे महत्वपूर्ण मीठे पानी वाले पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है और इसी झील पर स्थित केईबुल लामजाओ नेशनल पार्क दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है। इस नए शोध से पुष्टि होती है कि इस झील के जलग्रहण क्षेत्र में भूमि उपयोग में परिवर्तन सीधे तौर पर झील में गिरने वाली नदियों के जल की गुणवत्ता को खराब कर रहे हैं, जिससे इसकी जैव विविधता और इस पर निर्भर हजारों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ रही है।
नागालैंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की एलिज़ा ख्वैराकपम के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में झील में गिरने वाली नौ प्रमुख नदियों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि कृषि अपवाह, बढ़ती बस्तियाँ और झूम खेती जल प्रदूषण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं। अध्ययन के दौरान नामबुल और खुगा नदियाँ सबसे अधिक प्रदूषित पाई गईं, जबकि इरिल और थौबल नदियों में उनके जलग्रहण क्षेत्रों में अधिक वन आवरण के कारण पानी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई।
नामबुल नदी में पानी की गुणवत्ता सबसे खराब पाई गई, जिसमें घुलित ऑक्सीजन का स्तर मात्र 0.02 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मत्स्य पालन के लिए अनुशंसित 4 मिलीग्राम प्रति लीटर की अनुमेय घुलित ऑक्सीजन सीमा से काफी कम है। शुष्क मौसम में इसका जैव रासायनिक ऑक्सीजन मांग (बीओडी) स्तर 25 मिलीग्राम/लीटर और आर्द्र मौसम में 20 मिलीग्राम/लीटर तक पहुंच गया, जो दर्शाता है कि इस झील में कार्बनिक पदार्थों का प्रदूषित बहुत ज्यादा है। अध्ययन में इसका कारण भारी कृषि गतिविधियों और आसपास की इंसानी बस्तियों को बताया गया है, जो मिलकर नदी के जलग्रहण क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं। इम्फाल शहर से कीटनाशकों, उर्वरकों और घरेलू कचरे, जिसमें प्लास्टिक भी शामिल है, के साथ बहकर आने वाला पानी इस प्रदूषण में भारी योगदान देता है।
इसके विपरीत, खुगा नदी, जिसका 34% भाग घने जंगलों से घिरा हुआ है, में भी व्यापक झूम खेती के कारण पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई। झूम खेती इस नदी के जलग्रहण क्षेत्र के लगभग 42% हिस्से में होती है। इस अध्ययन में पाया गया कि पारंपरिक झूम खेती का चक्र लगभग 10 वर्षों से घटकर केवल एक या दो वर्ष रह गया है, जिससे मिट्टी का कटाव, पोषक तत्वों की कमी और नदी के पानी में अम्लता में वृद्धि हो रही है।

इस अध्ययन के लेखक ख्वैराकपम के अनुसार, “हमारे अध्ययन से यह पुष्टि होती है कि ऊपरी इलाकों में स्थित गांवों और वन क्षेत्रों में भूमि उपयोग संबंधी निर्णय निचले इलाकों में जल की गुणवत्ता को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। इससे लोकटक झील के जीर्णोद्धार के लिए सामुदायिक आधारित भूमि प्रबंधन और कृषि अपवाह एवं अपशिष्ट निर्वहन पर सख्त नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।”
“भूमि प्रबंधन केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि मणिपुर के लोगों के लिए आजीविका संरक्षण की रणनीति भी है। भारत के एकमात्र तैरते राष्ट्रीय उद्यान और झील के भीतर लुप्तप्राय संगाई हिरण के आवास की रक्षा के लिए जलग्रहण क्षेत्र में भूमि विनियमन, टिकाऊ कृषि पद्धतियां और नियंत्रित झूम खेती चक्र अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे,” उन्होंने आगे कहा।
और पढ़ेंः असम का रामसर वेटलैंड संकट में, शैवाल के बढ़ते प्रकोप से मछलियां और आजीविका प्रभावित
लोकटक झील लगभग 287 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और जलविद्युत, मत्स्य पालन, परिवहन और पर्यटन को सहारा देती है। यह 132 प्रजातियों के पौधों और 428 प्रजातियों के जानवरों का घर है, जिनमें लुप्तप्राय संगाई हिरण भी शामिल है, जो केवल झील के भीतर स्थित केइबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान में ही पाया जाता है। इसके पारिस्थितिक महत्व के बावजूद, झील को मॉन्ट्रो रिकॉर्ड में सूचीबद्ध किया गया है, जो महत्वपूर्ण पारिस्थितिक परिवर्तनों से गुजर रहे आर्द्रभूमि क्षेत्रों की पहचान करता है।
यह खबर मोंगाबे-इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 31 अक्टूबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: मणिपुर का लोकतक तालाब 38 स्थानीय मछलियों का घर है। वेटलैंड्स जैव-विविधता को पनाह देने के साथ-साथ इंसानों के लिए रोजगार के मौके भी प्रदान करता है। तस्वीर- कार्तिक चंद्रमौली/मोंगाबे-हिन्दी