- असम के एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मृत या कटे हुए सिर वाले सांप भी जहर छोड़ सकते हैं। अगर समय पर इलाज न मिले, तो इससे शरीर में गंभीर घाव या नुकसान हो सकता है।
- मरे हुए सांप का जहर शायद गलती से विष ग्रंथि पर दबाव पड़ने या मरने के बाद भी सांप की स्वाभाविक प्रतिक्रिया देने की क्षमता के कारण हो सकता है।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि सांप चाहे जिंदा हो या मृत, उसे छूते या उठाते समय बहुत अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद, 35 साल के अबिनाश मारक असम और मेघालय की सीमा से सटे अपने गांव की ओर लौट रहे थे। अचानक पड़ोसी के घर से तेज आवाजें आने लगीं। वह शोर सुनकर वहां गए, तो पता चला कि घर में घुस आए एक काले सांप को घरवालों ने मार डाला है।
पेशे से महावत मारक ने मोंगाबे इंडिया को बताया, “सांप पहले से ही मरा हुआ था। इसलिए मैं खुद से उसे पास की झाड़ियों में फेंकने के लिए आगे बढ़ा। जब मैंने उसका सिर पकड़ा, तो मुझे अपने दाहिने हाथ की छोटी उंगली में चुभन महसूस हुई। सांप मरा हुआ था, इसलिए मैंने उस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।”
लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, मारक की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें सांस लेने और यहां तक कि पानी निगलने में भी तकलीफ होने लगी। अगली सुबह उन्हें पास के ही एक ओझा के पास ले जाया गया, लेकिन उससे कोई खास फायदा नहीं हुआ। असम के बोको में रहने वाले उनके एक दोस्त के कहने पर, उन्हें गुवाहाटी के कामरूप सिविल अस्पताल ले जाया गया, जो उनके घर से गाड़ी से महज 20 मिनट की दूरी पर था।
मारक का इलाज करने वाले डॉ. हेमेन नाथ याद करते हुए बताते हैं, “दोपहर करीब 12:30 बजे उन्हें हमारे अस्पताल लाया गया। शुरुआती जांच के दौरान उनकी आंखे बंद होती जा रही थी, वह कुछ भी नहीं निगल पा रहे थे और गले व शरीर में तेज दर्द था। मरे हुए सांप की पहचान ‘लेसर ब्लैक करैत’ के रूप में हुई। उन्हें तुरंत एंटी-स्नेक वेनम की 20 शीशियां नियोस्टिग्माइन और कैल्शियम ग्लूकोनेट की दो खुराक के साथ इंजेक्ट की गईं। जब उनकी हालत और बिगड़ने लगी, तो उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट के लिए आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। 43 घंटे तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ। कुछ दिनों बाद उन्हें पूरी तरह ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”
यह घटना 2023 की है। एक हफ्ते के आराम के बाद, मारक वापस अपने काम पर लौट आए। अब वह अपनी सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

यह घटना फ्रंटियर्स इन ट्रॉपिकल डिजीज में प्रकाशित एक नए पेपर में मृत सांपों के काटने से हुई तीन घातक घटनाओं में से एक है। अन्य दो मामले भी 2023 में असम के शिवसागर के पास चराइदेव जिले से रिपोर्ट किए गए थे। उन मामलों में, मोनोकल्ड कोबरा सांपों ने मरने के तुरंत बाद जहर फैलाया था। इन सांपों की पहचान भी तस्वीरों के आधार पर की गई थी।
डॉ. सुरजीत गिरि ने समझाते हुए कहा, “सांपों में जहर छोड़ने की क्षमता होती है, जिससे पीड़ित के शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, यहां तक कि मौत भी हो सकती है। सांपों की यह क्षमता उनके मरने और सिर कटने के बाद भी बरकरार रहती है।” डॉ. गिरि इस शोध पत्र के लेखकों में से एक हैं और उन्हें असम में ‘स्नेक डॉक्टर’ के नाम से जाना जाता है। वह शिवसागर जिले के सांप के काटने के इलाज के लिए मशहूर डिमो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत हैं।
डॉ. गिरि आगे कहते हैं कि मरे हुए या मरा हुआ मान लिए गए सांपों द्वारा जहर फैलाने की ये घटनाएं सांपों के काटने के व्यवहार के बारे में नई जानकारी देती हैं। वह बताते हैं, “ये मामले सांपों को संभालते समय बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर देते है।”
एंटीवेनम इलाज से जटिलताएं कम होंगी
पेपर में दर्ज बाकी दो मामले भी मारक के जैसे ही थे, लेकिन उनमें दर्द का स्तर और ठीक होने में लगने वाला समय कहीं ज्यादा था। इन तीनों ही मामलों में मरीज को एंटीवेनम थेरेपी की जरूरत पड़ी थी।
एक अन्य घटना में, 45 साल के व्यक्ति ने अपनी मुर्गियों पर हमला करते हुए एक मोनोकल्ड कोबरा को देखा और उसका सिर काटकर उसे मार डाला। लेकिन जब वह मरे हुए सांप को फेंकने लगा, तो सांप ने उसके दाहिने अंगूठे पर काट लिया। उसे कंधे तक बहुत तेज दर्द होने लगा और उसी रात उसे पास के डिमो ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।
मरीज का इलाज करने वाले डॉ. गिरी कहते हैं, “जहां सांप ने उसे काटा था, वह हिस्सा काला पड़ गया था। तेज दर्द, त्वचा का रंग बदलने और उल्टी जैसे लक्षणों को देखते हुए, उन्हें तुरंत एंटीवेनम की 20 शीशियां इंजेक्ट की गई और दर्द के लिए पैरासिटामोल दी गई। इलाज के बाद दर्द काफी कम हो गया। हालांकि मरीज में न्यूरोटॉक्सिसिटी के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे थे, लेकिन सांप के काटने की वजह से घाव काफी गहरा हो गया और वहां का मांस गलने लगा था। इसे ठीक करने के लिए एक महीने तक घाव की गहरी सफाई और पट्टी करनी पड़ी।”

एक दूसरे मामले में, 2023 में धान के खेत में काम कर रहे एक किसान ने अनजाने में अपने ट्रैक्टर से एक सांप को कुचल दिया। वह ट्रैक्टर से नीचे उतरकर मरे हुए सांप (जो एक मोनोकल्ड कोबरा था) को देखने लगा। अचानक से उसे अपने पैर में चुभन महसूस हुई। सांप ने उसने उसके पैर में काट लिया था। तेज दर्द, सूजन और त्वचा के रंग में बदलाव महसूस होने पर, वह पास के डिमो ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां उसे तुरंत एंटी वेनम की 20 शीशियां इंजेक्ट की गई। पेपर के अनुसार, “हालांकि जहर का उसकी नसों या दिमाग पर असर (न्यूरोटॉक्सिसिटी) नहीं हुआ था, लेकिन जहर ने उसकी कोशिकाओं और मांस को इतना नुकसान (साइटोटॉक्सिसिटी) पहुंचाया कि एक गहरा घाव बन गया, जिसे ठीक होने में कई महीने लग गए।”
ये घटनाएं मरे हुए सांपों के काटने के पुराने रिकॉर्ड्स को और पुख्ता करती हैं। अध्ययन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी खबरें पहले भी आई हैं कि रैटलस्नेक, सिर कटने के बाद भी 20 से 60 मिनट तक सक्रिय रह सकता है। इतना ही नहीं, जहरीले सांपों के फ्रीज-ड्राइड या सुरक्षित रखे गए दांत हफ्तों और महीनों बाद तक जहरीले बने रह सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति इन्हें छू ले, तो उसे एंटी-वेनम से इलाज की जरूरत पड़ सकती है।
लेकिन मरे हुए सांप कैसे काट सकते हैं? शोध पत्र के अनुसार, इसका एक संभावित कारण सांपों के जहर छोड़ने वाले अंगों और नुकीले दांतों की बनावट में छिपा हो सकता है। सांप की विष ग्रंथि में जहर जमा करने के लिए एक बड़ी थैली यानी बेसल ल्यूमेन होती है, जो एक लंबे खोखले दांत से जुड़ी होती है। जब सांप अपने शिकार को काटता है, तो उसकी मांसपेशियों में होने वाले खिंचाव के कारण जहर दांतों के जरिए तेजी से बाहर निकलता है। मरे हुए सांपों के मामले में, “जहर व्यक्ति के शरीर में तभी जाता है” जब कोई व्यक्ति सांप के कटे हुए सिर को पकड़ते समय गलती से उसकी विष ग्रंथि को दबा दे।
पेपर के मुताबिक, मरे हुए सांपों के काटने का कारण उनकी स्वतः प्रतिक्रिया देने की स्वाभाविक क्षमता भी हो सकती है। मरने के बाद सांप का इस बात पर कोई नियंत्रण नहीं रहता कि उसे शरीर में कितना जहर छोड़ना है। इस वजह से वह अनजाने में अपने दांतों में मौजूद सारा जहर एक साथ शरीर में डाल सकता है। ऐसी स्थिति में होने वाली गंभीर समस्याओं को कम करने के लिए एंटी-वेनम से इलाज कराना बहुत जरूरी है।
जागरूकता से सांपों के डर को कम करने में मदद
डॉ. गिरी बताते हैं कि भारत में पाई जाने वाली 300 सांपों की प्रजातियों में से केवल लगभग 60 प्रजातियां ही जहरीली हैं। वह कहते हैं, “ज्यादातर सबसे आम जहरीले सांपों में चार बड़े सांप (स्पेक्टेकल्स कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर) शामिल हैं। उत्तर-पूर्वी भारत में जहरीले सांपों की कुछ अलग प्रजातियां पाई जाती हैं, जैसे ‘मोनोकल कोबरा’, करैत की विभिन्न प्रजातियां और ‘पिट वाइपर’। डॉ. गिरि के मुताबिक, “इन सांपों के काटने से शरीर में विष फैलने के मामलों का वैज्ञानिक दस्तावेजों में भी जिक्र है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।”
2018 से अब तक, डिमो ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ने 3,300 से अधिक सांप के काटने के मामलों का इलाज किया है। इनमें से किसी में भी जान नहीं गई है। डॉ. गिरि के अनुसार, 2024 में असम में सांप के काटने के 11,000 मामले सामने आए, जिनमें से 36 लोगों की मौत हुई। पिछले साल यानी 2023 में लगभग 150 लोगों की मौत सांप के काटने से हुई थी। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार ने सांप के काटने के मामलों का सही तरीके से इलाज करने के लिए लगभग 1,500 डॉक्टरों को विशेष ट्रेनिंग दी है।”
पेपर में लिखा है, सही जानकारी न होने और डर के कारण लोग सांपों को देखते ही मार डालते हैं, चाहे वे विषैले हों या न हों। जबकि ज्यादातर सांप विषैले नहीं होते हैं।
डॉ. गिरि ने कहा, “सांप तब तक नहीं काटते जब तक वे डरे हुए न हों या उन्हें खतरा महसूस न हो। इसलिए, लोगों को कहीं भी आते-जाते या खेतों में काम करते समय सावधान रहना चाहिए।” उन्होंने आगे बताया, “पहले लोग डर के कारण सांपों को मार देते थे, लेकिन अब जागरूकता बढ़ी है। मैंने ग्रामीण इलाकों में 500 से ज्यादा जागरूकता कार्यक्रम किए हैं, जिनमें लोगों को सांपों से दूर रहने और उन्हें न मारने की सलाह दी गई।”
अध्ययनों और कार्यक्रमों के जरिए जागरूकता बढ़ाना काफी मददगार हो सकता है, खासकर सांपों को संभालने के मामले में। चाहे वे जिंदा हों या मरे हुए, हमेशा सावधानी बरतनी चाहिए। मारक कहते हैं, “अपने अनुभव से मैंने सीखा है कि मरे हुए सांप को छूना भी जानलेवा हो सकता है। अब मैं दूसरों को भी यही सलाह दूंगा कि सांप के मरने के बाद कम से कम कुछ घंटों तक उसे न छूएं।”
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 23 सितंबर 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: मरे हुए सांप के काटने से जहर फैलने का कारण शायद विष ग्रंथि पर गलती से दबाव पड़ने या मरने के बाद भी सांप की स्वाभाविक प्रतिक्रिया देने की क्षमता हो सकता है। तस्वीर: पराग शिंदे।