1991 में जब भारत ने आर्थिक सुधारों की शुरुआत की, तो देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ हमारे समाज और पर्यावरणीय सोच में भी बड़ा बदलाव आया।
इस एपिसोड में, Mongabay India के एडिटोरियल डायरेक्टर एस. गोपीकृष्ण वारियर बताते हैं कि कैसे 1991 के बाद भारत में पर्यावरणीय आंदोलनों, नीति निर्माण और न्यायिक सक्रियता में बदलाव आया। चिपको आंदोलन और नर्मदा बचाओ जैसे जमीनी संघर्षों से लेकर आज के शहरी मुद्दों जैसे वायु प्रदूषण और कचरा प्रबंधन तक, यह बातचीत हमें दिखाती है कि कैसे पर्यावरणीय बहस का फोकस समय के साथ बदलता गया।
वारियर बताते हैं कि वैश्विक व्यापार, अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों और तेजी से हो रहे शहरीकरण ने न केवल नीति-निर्माण की दिशा बदली, बल्कि पर्यावरणीय न्याय के स्वरूप को भी नया रूप दिया। 2000 में बिल क्लिंटन की भारत यात्रा से लेकर 2014 के बाद सत्ता में आए बदलाव तक, यह एपिसोड उन पलों को उजागर करता है जो भारत के पर्यावरणीय इतिहास में निर्णायक रहे हैं।



