Articles by Manish

उत्तरप्रदेश के पीलीभीत में जब खत्म हुए शिकारी तो तिगुना हुआ बाघ का कुनबा

माना जाता है कि बाघ की दहाड़ करीब तीन किलोमीटर तक सुनी जा सकती है। विडंबना यह है कि अपनी बहादुरी के लिए चर्चित यह सुंदर जीव भी खतरे में…
बुद्गम जंगल से गुजरता हुआ पावर लाइन। इन बिजली के तारों की वजह से पेड़ों को काटा गया। फोटो- अथर परवेज

आदिवासियों को जंगल से उजाड़ने वाली जम्मू-कश्मीर सरकार को क्या वाकई है पर्यावरण की चिंता

जम्मू-कश्मीर की ऊंची पहाड़ियों पर घने जंगलों के किनारे बेहद छोटी-छोटी झोपड़ियां नजर आती हैं। पत्थर, मिट्टी और घास-फूस से बने ये घर गुज्जर समुदाय के लोगों का आशियाना है।…
बुद्गम जंगल से गुजरता हुआ पावर लाइन। इन बिजली के तारों की वजह से पेड़ों को काटा गया। फोटो- अथर परवेज
कोविड-19 की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के दौरान झिरिया घाट गांव के लोगो ने श्रमदान कर नया कुआं खोदा। फोटो- मनीष चन्द्र मिश्र

मध्यप्रदेश के इस गांव में कुओं के सामने हैंडपंप और बोरवेल फेल, पारंपरिक साधन से सूखे का समाधान

हरियाली ओढ़े विंध्याचल के पर्वत मध्यप्रदेश की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। मध्यप्रदेश के सतना जिले का मझगवां तहसील भी इसी खूबसूरत जंगल के बीच है। यहां के गांवों…
कोविड-19 की वजह से लगाए गए लॉकडाउन के दौरान झिरिया घाट गांव के लोगो ने श्रमदान कर नया कुआं खोदा। फोटो- मनीष चन्द्र मिश्र
इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू

इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू

स्लॉथ बियर भालू की एकमात्र प्रजाति है जो अपने से हजारों गुना छोटी चींटियों का शिकार कर उन्हें अपने भोजन के तौर पर इस्तेमाल करता है। इस भालू के मुख्य…
इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू
बूंद-बूंद पानी बचाने वाले आबिद सूरती की कहानी, पानी बचाने में लगाई पूरी जिंदगी

बूंद बूंद का संघर्ष: 85 वर्ष के आबिद सुरती ने अपने 13 सालों के प्रयास से बचाया करोड़ों लीटर पानी

आपके घर में नल से पानी गिरने की टप-टप की आवाज़ आती है तो आप क्या करते हैं? सामान्यतः लोग अनसुना कर देते हैं। लेकिन देश में एक 85 साल…
बूंद-बूंद पानी बचाने वाले आबिद सूरती की कहानी, पानी बचाने में लगाई पूरी जिंदगी
कोयला खदानों पर धनबाद जैसे शहर की अर्थव्यवस्था आधारित है। फोटो- आई फॉरेस्ट

पर्यावरण के लिए कोयला खनन बंद होना जरूरी पर ऐसी स्थिति में बेरोजगार हो रहे लाखों लोगों के भविष्य का क्या!

झारखंड का रामगढ़ जिला भविष्य में आने वाली एक अजीबोगरीब चुनौती से रू-ब-रू कराता है। इस जिले के 54,000 घर अपने जीवन-यापन के लिए कोयला-खदानों पर निर्भर हैं। इनमें से…
कोयला खदानों पर धनबाद जैसे शहर की अर्थव्यवस्था आधारित है। फोटो- आई फॉरेस्ट
छत्तीसगढ़ की चाय इसी बागान से आती है। यह बागान वन विभाग द्वारा जशपुर के सारूडीह गांव में एक दशक पहले बना था। फोटो- वन विभाग

पेश है छत्तीसगढ़ की चाय, स्वाद-सुगंध में दार्जिलिंग टी के बराबर, लेकिन जलवायु परिवर्तन से चुनौती

चाय पीने वालों की दुनिया में असम या दार्जिलिंग की चाय का नाम ही काफी है। कुछ ऐसा कि बड़ी-बड़ी कंपनियां भी प्रचार में यह बताना नहीं भूलतीं कि उनकी…
छत्तीसगढ़ की चाय इसी बागान से आती है। यह बागान वन विभाग द्वारा जशपुर के सारूडीह गांव में एक दशक पहले बना था। फोटो- वन विभाग

पर्यावरण और संरक्षण की खबरों के लिए मोंगाबे-हिन्दी में आपका स्वागत है

मोंगाबे-हिन्दी को आपके साथ साझा करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इस समाचार वेबसाइट का उद्देश्य भारत की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा, हिन्दी में पर्यावरण और…
मादा खरमोर राजस्थान के आसमान में उड़ान भरती हुई। राजस्थान का शोकलिया-केकरी क्षेत्र में खरमोर प्रजनन के लिए आते हैं। फोटो- अंगद अछाप्पा/विकिमीडिया कॉमन्स

इंसानी विकास की होड़ से संकट में खरमोर पक्षी का अस्तित्व

मालवी में भाट कुकड़ा, हिंदी में खरमोर और अंग्रेजी में लैसर फ्लोरिकन। अलग-अलग बोली-भाषाओं में इस पक्षी के अनेक नाम हैं, लेकिन हर स्थान पर इस पक्षी से जुड़ी एक…
मादा खरमोर राजस्थान के आसमान में उड़ान भरती हुई। राजस्थान का शोकलिया-केकरी क्षेत्र में खरमोर प्रजनन के लिए आते हैं। फोटो- अंगद अछाप्पा/विकिमीडिया कॉमन्स
झामरकोटरा के इस खदान से फॉस्फेट निकाला जाता है। इसकी वजह से ग्रामीणों की जिंदगी तबाह हो गई है। फोटो- सोहैल खान

पौधों में जान डालने वाले फॉस्फेट के खदानों ने गांव के गांव कर दिए तबाह

सिंचाई की व्यवस्था होने के बावजूद अगर फसल सूखने या मुरझाने लगे तो परेशान किसान को बताया जाता है कि मिट्टी में फॉस्फोरस की कमी हो गई है। फिर किसान…
झामरकोटरा के इस खदान से फॉस्फेट निकाला जाता है। इसकी वजह से ग्रामीणों की जिंदगी तबाह हो गई है। फोटो- सोहैल खान