- वैज्ञानिकों ने जेनेटिक मार्क-रिकैप्चर तकनीक से भारत में हाथियों की अनुमानित आबादी 22,446 बताई है।
- यह तरीका पहले की शारीरिक पहचान-आधारित गणनाओं से अलग है, इसलिए 2017 के आंकड़ों से सीधी तुलना उचित नहीं मानी जा रही।
- देश में हाथियों की कुल संख्या स्थिर मानी जा रही है, लेकिन उनका फैलाव सिमटकर खंडित वनों तक सीमित हो गया है।
हाल ही में जारी हुए हाथियों की आबादी के अनुमान में वैज्ञानिकों ने डीएनए-आधारित जेनेटिक मार्क-रिकैप्चर तकनीक का उपयोग करते हुए भारत में हाथियों की आबादी 22,446 बताई है। यही विधि देश में बाघों की आबादी का अनुमान लगाने के लिए भी उपयोग में लाई जाती है।
साल 2017 में किए गए आबादी अनुमान में देश में हाथियों की संख्या 27,312 बताई गई थी, जो नए अनुमान से करीब 21% ज़्यादा है।
हालाँकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि हाथियों की आबादी के अनुमान के लिए इस्तेमाल की गई इस नई तकनीक के कारण नए आंकड़ों की तुलना पिछले अनुमानों से नहीं की जा सकती है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) में वैज्ञानिकों की एक टीम के साथ इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले कमर कुरैशी कहते हैं, “हाथियों की 2017 की गणना (27,312) से 18% की कथित गिरावट को लेकर चिंता निराधार है, क्योंकि पहले के अनुमान शारीरिक पहचान और पूरी तरह से अलग दृष्टिकोण पर आधारित थे।” हाथियों की नई अनुमानित संख्या 22,446 है, जबकि वास्तविक संख्या 18,255 से 26,645 के बीच होने का अनुमान है। यह अनुमान भविष्य में की जाने वाली निगरानी और अनुसंधान के लिए एक नया राष्ट्रीय आधार प्रदान करता है।
हाथियों के इस अनुमान, सिंक्रोनस आल इंडिया एलीफैंट एस्टिमेशन (SAIEE 2021–25), के लिए बाघ की आबादी के आकलन के ढांचे को अपनाया गया, जिसमें व्यवस्थित नमूनाकरण के लिए भारत को 100 किमी² के क्षेत्रों (आगे 25 किमी² और 4 किमी² इकाइयों में) में विभाजित किया गया। अध्ययन के पहले चरण में M-STrIPES मोबाइल ऐप का उपयोग करके वन क्षेत्रों में जमीनी सर्वेक्षण किए गए, जिसमें हाथियों के निशान, वनस्पति की स्थिति और मानवीय हस्तक्षेप को दर्ज किया गया। हाथियों की उपस्थिति और संख्या का मॉडल तैयार करने के लिए पारिस्थितिक और मानवजनित सहचरों जैसे वन आवरण, पानी से दूरी, इंसानों के पदचिह्न और रात की रौशनी की तीव्रता का उपयोग किया गया। जनसंख्या घनत्व का अनुमान लगाने और उसे नमूना न लिए गए क्षेत्रों तक विस्तारित करने के लिए स्थानिक रूप से स्पष्ट कैप्चर-रीकैप्चर (SECR) मॉडल का उपयोग किया गया, जबकि गोबर के नमूनों का उपयोग करके आनुवंशिक चिह्न-रीकैप्चर किया गया।
इस बार के नतीजे कितने विश्वसनीय हैं, इस सवाल पर कुरैशी कहते हैं, “किसी भी वैज्ञानिक पद्धति की तरह विश्वसनीय।” “यह पद्धति त्रुटियों के साथ-साथ पहचान की संभावना को भी दर्शाती है।” सटीक जनसंख्या अनुमानों के लिए पहचान की संभावना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इस तथ्य को ध्यान में रखती है कि सभी जानवर (इस अध्ययन में हाथी) दिखाई नहीं देते। अध्ययन में शामिल विष्णुप्रिया कोलीपाकम आगे कहती हैं कि शारीरिक चिह्नों पर आधारित गणनाओं में परिवर्तनशीलता होती है क्योंकि ये चिह्न समय के साथ बदल सकते हैं या गायब हो सकते हैं। “सभी हाथियों की पहचान चिह्नों से नहीं की जा सकती। और इससे जनसंख्या गणना में भी काफी समय लगता है,” वे कहती हैं।
कोलीपाकम और कुरैशी डब्ल्यूआईआई की उस टीम का हिस्सा थे जिसने मानव-पशु संघर्ष का अध्ययन किया और एशियाई हाथी सहित चार ऐसी पशु प्रजातियों की जनसंख्या नियंत्रण का सुझाव दिया, जो मनुष्यों के साथ सबसे अधिक संघर्ष में थीं। निष्कर्षों के बारे में बात करते हुए, कोलीपाकम कहती हैं कि हाथियों की जनसंख्या नियंत्रण का सुझाव उच्च संघर्ष वाले क्षेत्रों के लिए दिया गया था। “यह विशिष्ट क्षेत्रों में संघर्षरत कुछ जानवरों की जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करके स्थानीय स्तर पर समस्या का समाधान करने के एक तरीके के रूप में सुझाया गया था। इस पर अभी भी शोध चल रहा है और इसे लागू नहीं किया गया है,” वे आगे कहती हैं।
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इस नई रिपोर्ट के अनुसार, हाथियों की सबसे बड़ी संख्या कर्नाटका में है, जहां 6,013 हाथी हैं। पश्चिमी घाट क्षेत्र में 11,934 हाथी हैं, जबकि पूर्वोत्तर और ब्रह्मपुत्र नदी के बाढ़ के मैदानों (6,559) में असम 4,159 हाथियों के साथ सबसे आगे है।
इस रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में हाथियों की आबादी कुल मिलाकर स्थिर है, लेकिन उनका वितरण उनके ऐतिहासिक क्षेत्र के एक छोटे से हिस्से तक ही सीमित है, जो अब खंडित वन क्षेत्रों तक ही सीमित है। वन्यजीव गलियारों को मजबूत करने, रैखिक बुनियादी ढांचे और बिजली लाइनों के अतिक्रमण को कम करने, कानून प्रवर्तन को बढ़ाने और हाथी संरक्षण में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने की तत्काल आवश्यकता है।
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 24 अक्टूबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: सिंक्रोनस आल इंडिया एलीफैंट एस्टिमेशन में भारत में हाथियों की आबादी 22,446 बताई है। तस्वीर – Drashokk द्वारा Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) के माध्यम से