Articles by Arathi Menon

घनी हरी कैनोपी और शानदार पीले फूल आक्रमणकारी कसोद के पौधों को आकर्षक बनाते हैं। तस्वीर- पी ए विनयन।

कभी खूबसूरती और छाया के लिए लगाए गए थे कसोद के पौधे, अब बने जंजाल

साल 1986 में केरल के वन विभाग ने एक ऐसा फैसला लिया था जिसके लिए उन्हें कई दशक बाद पछताना पड़ रहा है। वन विभाग की सोशल फॉरेस्ट्री विंग ने…
घनी हरी कैनोपी और शानदार पीले फूल आक्रमणकारी कसोद के पौधों को आकर्षक बनाते हैं। तस्वीर- पी ए विनयन।
मध्य प्रदेश की बैगा आदिवासी महिलाएं। बैगा मूलतः वनवासी हैं, जो जंगलों में प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में वनों की कटाई और विकास की गति ने उन्हें शहरों के नजदीकी स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है। (प्रतीकात्मक इमेज) तस्वीर-सैंडी और व्याज/विकिमीडिया कॉमन्स

बेहतर वन प्रबंधन के लिए आदिवासी समुदाय का नजरिया शामिल करना जरूरी

भारत में जंगल में रहने वाले आदिवासी समुदायों के लिए जंगल का क्या मतलब है? क्या वे वन पारिस्थितिकी तंत्र को उसी तरह देखते हैं जैसे जंगल के बाहर के…
मध्य प्रदेश की बैगा आदिवासी महिलाएं। बैगा मूलतः वनवासी हैं, जो जंगलों में प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर रहते हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों में वनों की कटाई और विकास की गति ने उन्हें शहरों के नजदीकी स्थानों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है। (प्रतीकात्मक इमेज) तस्वीर-सैंडी और व्याज/विकिमीडिया कॉमन्स
इचोर्निया क्रैसिप्स को आमतौर पर पानी की जलकुंभी कहा जाता है। यह एक बाहरी आक्रमणकारी प्रजाति है जो भारत में हर जगह पानी में पाई जाती है। तस्वीर- शहादत हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स। 

पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वैश्विक खतरा हैं जैव आक्रमण

आक्रमणकारी प्रजातियों का प्रसार जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं के सामने मौजूद पांच बड़े खतरों में से एक है। ऐसे जानवर, पौधे, कवक और सूक्ष्म जीव जो कि…
इचोर्निया क्रैसिप्स को आमतौर पर पानी की जलकुंभी कहा जाता है। यह एक बाहरी आक्रमणकारी प्रजाति है जो भारत में हर जगह पानी में पाई जाती है। तस्वीर- शहादत हुसैन/विकिमीडिया कॉमन्स। 
वायनाड पठार के कई हिस्सों को हाथी वन क्षेत्रों में आने-जाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि फिलहाल इस्तेमाल में लाए जा रहे ऐसे कॉरिडोर को ऐतिहासिक एलिफेंट कॉरिडोर की तरह पहचाना और संरक्षित किया जाना चाहिए। तस्वीर -अनूप एन.आर. 

गर्मियों के मौसम में वायनाड हाथियों की पसंदीदा जगह

गर्मियों के दिनों में हाथी वायनाड के आद्र पहाड़ी इलाकों में आना पसंद करते हैं। इसकी वजह तटवर्ती जंगल और यहां मौजूद दलदलीय इलाके हैं, जो पास के मैसूर और…
वायनाड पठार के कई हिस्सों को हाथी वन क्षेत्रों में आने-जाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। एक हालिया अध्ययन में कहा गया है कि फिलहाल इस्तेमाल में लाए जा रहे ऐसे कॉरिडोर को ऐतिहासिक एलिफेंट कॉरिडोर की तरह पहचाना और संरक्षित किया जाना चाहिए। तस्वीर -अनूप एन.आर. 
मैसूरु दशहरा जुलूस के दौरान देवी चामुंडेश्वरी का स्वर्णजड़ित हौदा (पालकी) ले जाते हाथी अर्जुन की एक फ़ाइल तस्वीर। तस्वीर - मधुसूदन एसआर।

मैसूरु दशहरा के मशहूर हाथी की मौत से उजागर होती कर्नाटका में हाथियों की बढ़ती दिक्क़तें

कर्नाटका के वन्यजीव प्रेमियों को पिछले साल दिसंबर का महीना बहुत ज्यादा दुखी कर गया। हासन जिले के यसलूर वन रेंज में हाथी पकड़ने के अभियान के दौरान जंगली हाथी…
मैसूरु दशहरा जुलूस के दौरान देवी चामुंडेश्वरी का स्वर्णजड़ित हौदा (पालकी) ले जाते हाथी अर्जुन की एक फ़ाइल तस्वीर। तस्वीर - मधुसूदन एसआर।
मालाबार हॉर्नबिल। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया साल भर मुख्य रूप से दो तरह के सर्वे करवाता है- एक प्रजाति के आधार और दूसरा क्षेत्र या संरक्षक इलाके के आधार पर। तस्वीर- अमित्व मजूमदार।

भारत में लुप्त होने की कगार पर हैं पक्षियों की तीन स्थानीय प्रजातियां

विश्व भर में पाए जाने वाली पक्षियों की विविधता में से 12.40 प्रतिशत भारत में पाए जाते हैं। दुनियाभर में पाए जाने वाले पक्षियों की कुल 10,906 प्रजातियों में से…
मालाबार हॉर्नबिल। जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया साल भर मुख्य रूप से दो तरह के सर्वे करवाता है- एक प्रजाति के आधार और दूसरा क्षेत्र या संरक्षक इलाके के आधार पर। तस्वीर- अमित्व मजूमदार।
लाओस में साल 2019 में आई बाढ़। ग्लोबल साउथ में कुछ जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि कम आय वाले देशों को ज्यादा स्थानीय जलवायु अनुमान लाने होंगे ताकि वे बेहतर नीतियां विकसित कर सकें। तस्वीर- बेसिल मोरिन/विकिमीडिया कॉमन्स

आईपीसीसी रिपोर्ट के बजाए भारत को अपने जलवायु अनुमान की जरूरत, क्षेत्रीय क्लाइमेट मॉडल बेहतर

ग्लोबल नॉर्थ की तुलना में ग्लोबल साउथ खासकर दक्षिण एशिया जलवायु परिवर्तन के प्रति ज्यादा संवेदनशील है। साथ ही, यह क्षेत्र ज्यादा समृद्ध और विकसित देशों की तुलना में ग्लोबल…
लाओस में साल 2019 में आई बाढ़। ग्लोबल साउथ में कुछ जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि कम आय वाले देशों को ज्यादा स्थानीय जलवायु अनुमान लाने होंगे ताकि वे बेहतर नीतियां विकसित कर सकें। तस्वीर- बेसिल मोरिन/विकिमीडिया कॉमन्स
पश्चिमी घाट में कलाकड़ मुंडनथुराई टाइगर रिजर्व के अंदर एक पवित्र स्थल पर नदी में डुबकी लगाते हुए तीर्थयात्री। बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों में बने पवित्र स्थलों पर तीर्थयात्रियों की वजह से प्राचीन वनों को नुकसान पहुंच रहा है। तस्वीर- निल्लई वीकेंड क्लिकर्स 

आस्था और संरक्षण के बीच बेहतरीन तालमेल के लिए हरित तीर्थयात्रा मॉडल

भारत के तीन टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियों और संरक्षण के बीच तालमेल बिठाने के तरीकों को समझने के लिए एक दीर्घकालिक अध्ययन किया गया था। इस अध्ययन में…
पश्चिमी घाट में कलाकड़ मुंडनथुराई टाइगर रिजर्व के अंदर एक पवित्र स्थल पर नदी में डुबकी लगाते हुए तीर्थयात्री। बाघ अभयारण्यों के मुख्य क्षेत्रों में बने पवित्र स्थलों पर तीर्थयात्रियों की वजह से प्राचीन वनों को नुकसान पहुंच रहा है। तस्वीर- निल्लई वीकेंड क्लिकर्स 
पुट्टेनहल्ली पुट्टाकेरे झील की सतह से जलकुंभी के नरकट हटाते कुछ स्वयंसेवक। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे 

अपने आस-पास के विकास की जिम्मेदारी लेते शहरी नागरिक

8 सितंबर, 2023 को बेंगलुरु की जक्कुर झील के सामुदायिक उद्यान में एक पिकअप ट्रक में लगभग 800 पौधे पहुंचे। यहां वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा था। इस सामुदायिक उद्यान…
पुट्टेनहल्ली पुट्टाकेरे झील की सतह से जलकुंभी के नरकट हटाते कुछ स्वयंसेवक। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे 
जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान में हिम तेंदुए की कैमरा ट्रैप तस्वीर। एक अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन और इंसानी खलल के कारण हिम तेंदुए पहाड़ों में और ज्यादा ऊंचाई की ओर जा रहे हैं। तस्वीर- जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग।

जलवायु परिवर्तन का असर, पहाड़ों पर ज्यादा ऊंचाई की तरफ जा रहे हिम तेंदुए

ग्रेटर हिमालय में लंबे समय के प्रबंधन के लिए जलवायु अनुकूल संरक्षण तरीक़ों की अहमियत पर जोर देने वाले एक नए अध्ययन से पता चलता है कि इंसानी खलल और…
जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ राष्ट्रीय उद्यान में हिम तेंदुए की कैमरा ट्रैप तस्वीर। एक अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन और इंसानी खलल के कारण हिम तेंदुए पहाड़ों में और ज्यादा ऊंचाई की ओर जा रहे हैं। तस्वीर- जम्मू-कश्मीर वन्यजीव संरक्षण विभाग।

हिल स्टेशनों पर कचरे का बेहतर प्रबंधन जरूरी, सिर्फ प्लास्टिक बैन से नहीं बनेगा काम

तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के मशहूर हिल स्टेशन कोडईकनाल की लैंडफिल साइट पर लगभग चार महीने पहले आग लग गई थी। इसे बुझाने की खूब कोशिशें की गईं लेकिन महीनों…
कर्नाटका के कोलार जिले में जलकुंभी से पटी कोलारम्मा झील का ड्रोन शॉट। कर्नाटक सरकार का केसी वैली प्रोजेक्ट बेंगलुरु के सेकेंडरी ट्रीटेड वेस्टवाटर को कोलार क्षेत्र में लाता है और उसे जलाशयों औऱ झीलों में भरता है ताकि इससे भूजल रीचार्ज किया जा सके। तस्वीर- आंजनेय रेड्डी।

क्या शहरों का गंदा पानी पिएंगे ग्रामीण भारत के लोग?

अगस्त के शुरुआती दिनों में कोलार भूरे और हरे रंग का दिख रहा था। जुलाई के महीने हुई अप्रत्याशित बारिश ने यहां के किसानों की उम्मीदें जगा दी थीं। कर्नाटक…
कर्नाटका के कोलार जिले में जलकुंभी से पटी कोलारम्मा झील का ड्रोन शॉट। कर्नाटक सरकार का केसी वैली प्रोजेक्ट बेंगलुरु के सेकेंडरी ट्रीटेड वेस्टवाटर को कोलार क्षेत्र में लाता है और उसे जलाशयों औऱ झीलों में भरता है ताकि इससे भूजल रीचार्ज किया जा सके। तस्वीर- आंजनेय रेड्डी।
छत्ते पर काम करती हुई एपिस डोरसाटा प्रजाति की मधुमक्खियां। तस्वीर-नीरक्षित/विकिमीडिया कॉमन्स

मधुमक्खियां जो रात में भी रंगों को देख सकती हैं

एक नए अध्ययन से पता चला है कि रॉक मधुमक्खियां (एपिस डोरसाटा), जिन्हें एशिया की विशाल मधु मक्खियां भी कहा जाता है, इंसानों की तरह ही तेज और धुंधली रोशनी…
छत्ते पर काम करती हुई एपिस डोरसाटा प्रजाति की मधुमक्खियां। तस्वीर-नीरक्षित/विकिमीडिया कॉमन्स

जलवायु और खाद्य सुरक्षा के लिए भोजन की हानि और बर्बादी से निपटना

भले ही भोजन की हानि और बर्बादी को कम करके खाद्य सुरक्षा में सुधार लाया जा सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे पर्यावरण को भी फायदा पहुंचेगा। नेचर फूड…
मानस नेशनल पार्क में बादलदार तेंदुए की कैमरा-ट्रैप तस्वीर। बादलदार तेंदुए काफी हद तक जंगली, शर्मीले जानवर हैं जिन्हें दुनिया में "सबसे छोटी बड़ी बिल्ली" माना जाता है। तस्वीर- साल्वाडोर लिंगदोह/डब्ल्यूआईआई।

प्रतिस्पर्धा से बचने के लिए बादलदार तेंदुए ने विकसित किए अपने तरीके

बादलदार तेंदुओं (क्लाउडेड तेंदुआ) ने जंगल में खुद को बचाए रखने के लिए सह-अस्तित्व की बारीक रणनीतियां विकसित की हैं। इसमें चरम गतिविधि का समय अन्य मांसाहारी जीवों के साथ…
मानस नेशनल पार्क में बादलदार तेंदुए की कैमरा-ट्रैप तस्वीर। बादलदार तेंदुए काफी हद तक जंगली, शर्मीले जानवर हैं जिन्हें दुनिया में "सबसे छोटी बड़ी बिल्ली" माना जाता है। तस्वीर- साल्वाडोर लिंगदोह/डब्ल्यूआईआई।
ताइवान में एक तेंदुआ बिल्ली। तस्वीर- ourskyuamlea/विकिमीडिया कॉमन्स।

बहुत ज्यादा गर्मी नहीं सह सकता लेपर्ड कैट, जलवायु परिवर्तन का होगा असर

लेपर्ड कैट या तेंदुआ बिल्ली, बिल्ली की एक प्रजाति है जो कद-काठी में छोटी है। इसे IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) रेड लिस्ट में सबसे कम चिंता वाली…
ताइवान में एक तेंदुआ बिल्ली। तस्वीर- ourskyuamlea/विकिमीडिया कॉमन्स।
नेपाल में हिमालय के सागरमाथा राष्ट्रीय उद्यान में एक पर्वत। तस्वीर- पीटर प्रोकोच

कम हो रहे हैं हिमालय के ग्लेशियर और बर्फ, आने वाले समय में और अधिक खतरे की आशंका – अध्ययन

हिमालयन यूनिवर्सिटी कंसोर्टियम (एचयूसी) के फेलो जैकब एफ. स्टीनर ने कहा, "वैज्ञानिकों के रूप में, हमें सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि हिमालय में ग्लेशियर किस पैमाने पर…
नेपाल में हिमालय के सागरमाथा राष्ट्रीय उद्यान में एक पर्वत। तस्वीर- पीटर प्रोकोच
रेडियो कॉलर वाला एक हाथी 18 मई, 2023 को कर्नाटक के हसन जिले के सकलेशपुर के पास एक कॉफी बागान से गुजर रहा है। तस्वीर - अभिषेक एन चिन्नप्पा।

रेडियो कॉलर का कई तरीके से इस्तेमाल, जानवरों से जुड़े अध्ययन में है बेहद कारगर

रेडियो कॉलर, वन्यजीवों की निगरानी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक लोकप्रिय तकनीक है। लेकिन, हाल के महीनों में कूनो में लाए गए चीतों के साथ हुए हादसे के…
रेडियो कॉलर वाला एक हाथी 18 मई, 2023 को कर्नाटक के हसन जिले के सकलेशपुर के पास एक कॉफी बागान से गुजर रहा है। तस्वीर - अभिषेक एन चिन्नप्पा।
दक्षिण सिक्किम के टेमी टी एस्टेट में काम करते चाय बागान कर्मी। रिसर्चर्स का कहना है कि फसलों और खेती से जुड़ी ज्यादातर नीतियां मैदानी क्षेत्रों के हिसाब से होती हैं और इनमें पहाड़ी समुदायों के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता है। तस्वीर- आदित्य प्रधान।

पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं को कैसे देखते हैं स्थानीय लोग, अध्ययनों ने की जानने की कोशिश

पिछले कुछ दशकों में पूरी दुनिया में प्रकृति का संरक्षण प्रकृति की ओर से मिलने वाली पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं के आर्थिक मूल्यों पर आधारित रहा है। इसके जरिए संरक्षण…
दक्षिण सिक्किम के टेमी टी एस्टेट में काम करते चाय बागान कर्मी। रिसर्चर्स का कहना है कि फसलों और खेती से जुड़ी ज्यादातर नीतियां मैदानी क्षेत्रों के हिसाब से होती हैं और इनमें पहाड़ी समुदायों के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता है। तस्वीर- आदित्य प्रधान।
पचास साल में हुई डेढ़ लाख मौत, हर प्राकृतिक आपदा लेती है औसतन 20 लोगों की जान

आपदा प्रबंधन में इस तरह मददगार हो सकती हैं सोशल मीडिया तस्वीरें

जब आपदाएं आती हैं, तो सोशल मीडिया तस्वीरों, चेतावनियों और मदद की मांग से भर जाते हैं। उस वक्त कई सोशल मीडिया पोस्ट आपदा वाली जगहों की जानकारी के स्रोत…
पचास साल में हुई डेढ़ लाख मौत, हर प्राकृतिक आपदा लेती है औसतन 20 लोगों की जान
कोटागिरी में कन्निगदेवी कॉलोनी में खुले मैदान में पड़ा कचरे का ढ़ेर एक लैंडमार्क बन चुका है। यह वन्यजीवों को आकर्षित करता है। इसकी वजह से अक्सर इंसान और जानवरों का आमना-सामना हो जाता है या फिर जानवर इसके आसपास रहने वाले लोगों के घरों में घुस आते हैं। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे 

खराब अपशिष्ट प्रबंधन की कीमत चुकाता नीलगिरी जिले का एक पहाड़ी शहर

38 साल की जयासुधा इसे अपना सौभाग्य मानती हैं कि 11 दिसंबर, 2020 की रात वह घर पर नहीं थीं। उस रात तमिल नाडू के नीलगिरी जिले के कोटागिरी शहर…
कोटागिरी में कन्निगदेवी कॉलोनी में खुले मैदान में पड़ा कचरे का ढ़ेर एक लैंडमार्क बन चुका है। यह वन्यजीवों को आकर्षित करता है। इसकी वजह से अक्सर इंसान और जानवरों का आमना-सामना हो जाता है या फिर जानवर इसके आसपास रहने वाले लोगों के घरों में घुस आते हैं। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे 
पैंगोंग हिमनद झील, लद्दाख। पर्माफ्रॉस्ट डिग्रेडेशन हाइड्रोलॉजिकल सिस्टम में पर्याप्त बदलाव के लिए जिम्मेदार है। तस्वीर- वजाहत इकबाल/विकिमीडिया कॉमन्स।

खतरे की आहट: ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय में भूमिगत हलचल

अप्रैल 2022 के अंत तक नेपाल के एवरेस्ट क्षेत्र में समुद्र तल से 3555 मीटर की ऊँचाई पर बेस शहर – नामचे बाज़ार – में जीवन और व्यवसाय पहले जैसा…
पैंगोंग हिमनद झील, लद्दाख। पर्माफ्रॉस्ट डिग्रेडेशन हाइड्रोलॉजिकल सिस्टम में पर्याप्त बदलाव के लिए जिम्मेदार है। तस्वीर- वजाहत इकबाल/विकिमीडिया कॉमन्स।
तडोबा टाइगर रिजर्व में सड़क पार करता एक वयस्क नर बाघ। एक बाघ 40 वर्ग किमी की सीमा तक कब्जा कर सकता है। इस बाघ के क्षेत्र में लगभग आठ गांव स्थित हैं। तस्वीर- सेंथिल कुमार।

वन्यजीवों के साथ इंसानी गतिविधियों को लंबे वक़्त से कैमरे में कैद करने वाले फोटोग्राफर से एक बातचीत

मानव-वन्यजीव संपर्क बढ़ रहा है। लेकिन उनमें से सभी सकारात्मक नहीं हैं। भारत में हर साल इंसानों और जानवरों के बीच टकराव के कारण सैकड़ों लोगों और जानवरों की मौत…
तडोबा टाइगर रिजर्व में सड़क पार करता एक वयस्क नर बाघ। एक बाघ 40 वर्ग किमी की सीमा तक कब्जा कर सकता है। इस बाघ के क्षेत्र में लगभग आठ गांव स्थित हैं। तस्वीर- सेंथिल कुमार।
पावागढ़ सौर पार्क का नाम शक्ति स्थल रखा गया है। इसे भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरे नंबर का सोलर पार्क माना जाता है। तस्वीर- अभिषेक एन. चिन्नप्पा/मोंगाबे

[वीडियो] सूखाग्रस्त इलाके में लगा 13000 एकड़ का सोलर पार्क, कितनी बदली किसानों की जिंदगी?

“अगर हमारे पास पानी की व्यवस्था होती तो यह शहर काफी पहले विकसित हो गया होता,” यह कहना है गिरिश आर का जो कि पावागढ़ में रहते हैं। पावागढ़ कर्नाटक…
पावागढ़ सौर पार्क का नाम शक्ति स्थल रखा गया है। इसे भारत का सबसे बड़ा और विश्व का दूसरे नंबर का सोलर पार्क माना जाता है। तस्वीर- अभिषेक एन. चिन्नप्पा/मोंगाबे
सोलर पार्क से सटे खेत में टमाटर की टोकरी ढोते किसान। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे

अक्षय ऊर्जा में सब ‘अच्छा’ होने के मिथक को तोड़ता पावागढ़ सौर पार्क

कर्नाटक के तुमकुर जिले के पावागढ़ तालुका के किसानों के लिए सूरज की किरणों से वैसा लगाव नहीं रहा है जैसा अन्य क्षेत्र के लोगों का होता है। यह वही…
सोलर पार्क से सटे खेत में टमाटर की टोकरी ढोते किसान। तस्वीर- अभिषेक एन चिन्नप्पा/मोंगाबे
60 वर्षीय जानकीअम्मा कभी शहद इकट्ठा करने का काम करती थीं, लेकिन आज वे एक अवॉर्ड विनिंग कंपनी की डायरेक्टर हैं। तस्वीर- आरथी मेनन

जानकीअम्माः शहद बटोरने वाली निरक्षर महिला से कंपनी डायरेक्टर का सफर, यूएन से मिला सम्मान

जीवन के 60 वसंत देख चुकी जानकीअम्मा आज एक कृषि उत्पाद कंपनी की डायरेक्टर हैं। दक्षिण भारत के आदिम जनजाति कुरुंबा से वास्ता रखने वाली अम्मा कभी शहद इकट्ठा करने…
60 वर्षीय जानकीअम्मा कभी शहद इकट्ठा करने का काम करती थीं, लेकिन आज वे एक अवॉर्ड विनिंग कंपनी की डायरेक्टर हैं। तस्वीर- आरथी मेनन