- एक नए अध्ययन से पता चला है कि केरल के पश्चिमी घाट से दुर्लभ गैलेक्सी मेंढकों की आबादी गायब हो गई, क्योंकि फोटोग्राफरों ने लकड़ियों के लट्ठों को पलटा, वनस्पतियों को रौंद दिया और जानवरों को गलत तरीके से संभाला।
- शोधकर्ताओं ने फोटोग्राफी टूरिज्म को मैनेज करने के लिए कुछ सुझावों को लागू करने पर जोर दिया है। इनमें जानवरों को पकड़ने और संभालने पर रोक लगाना, तेज रोशनी वाली लाइटों का इस्तेमाल सीमित करना, आवासों में किसी भी तरह छेड़छाड़ से बचना, लाइसेंस प्राप्त गाइडों को नैतिक व्यवहार का प्रशिक्षण देना और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाने जैसे कदम शामिल हैं।
- गैलेक्सी मेंढक अपने वंश के एकमात्र सदस्य हैं, जो उन्हें दुनिया की सबसे अनोखी लुप्तप्राय प्रजातियों में से एक बनाता है।
केरल के पश्चिमी घाट में एक शोध क्षेत्र से खतरे में पड़े सात गैलेक्सी मेंढक (मेलानोबेट्राचस इंडिकस) गायब हो गए हैं। दुर्लभ, तारों जैसे पैटर्न वाले इन उभयचर जीवों की तस्वीरें लेने वाले फोटोग्राफरों ने जंगल की सतह पर उनके नाजुक आवास को नष्ट कर दिया। हर्पेटोलॉजी नोट्स में छपे एक संक्षिप्त लेख में यह जानकारी दी गई है।
शोधकर्ताओं को मार्च 2020 में उस जगह पर सड़े-गले लट्ठों के नीचे सात छोटे मेंढक मिले थे। अगस्त 2021 में वापस लौटने पर टीम ने देखा कि 25 लट्ठों को उलट दिया गया था। आसपास की वनस्पतियों को कुचल दिया गया था और सभी सात मेंढक गायब थे।
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि जून 2020 और अप्रैल 2021 के बीच फोटोग्राफर के कई समूह ने उस जगह का दौरा किया था। उस व्यक्ति के मुताबिक फोटोग्राफरों ने मेंढकों को ढूंढने के लिए लकड़ियों को पलटा, तेज रोशन वाली फ्लैश फोटोग्राफी का इस्तेमाल किया और बिना दस्ताने पहने कई मेंढकों को छुआ। ये ऐसी हरकतें हैं जिनसे मेंढकों के शरीर में पानी की कमी और तनाव हो सकता है। साथ ही, उनमें बीमारियां फैलने का खतरा भी रहता है।
चार से छह फोटोग्राफरों के समूह एक ही मेंढक की बार-बार तस्वीर उतारते थे और हर सत्र लगभग चार घंटे तक चलता था। सूचना देने वाले ने बताया कि फोटोग्राफी सत्र के दौरान दो छोटे मेंढकों की मौत हो गई, हालांकि शोधकर्ता इस दावे की पुष्टि नहीं कर पाए।
गैलेक्सी मेंढक सिर्फ 2-3.5 सेंटीमीटर का होते हैं। ये सिर्फ दक्षिणी पश्चिमी घाट में पाए जाते हैं, जहां 900 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर जंगल की सतह पर लकड़ियों और पत्थरों के नीचे इसका आवास होता है।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ लंदन के एज ऑफ एक्जीसटेंस प्रोग्राम के फेलो के.पी. राजकुमार ने कहा, “अंतरिक्ष की तस्वीरों से मिलती-जुलती अपनी अद्भुत बनावट के लिए उनका ये नाम रखा गया है। ये खूबसूरत लेकिन दुर्लभ मेंढक हमारे ब्रह्मांड के इस छोटे से कोने में किसी भी दूसरी चीज से पूरी तरह अलग हैं।” “अगर सावधानी और जिम्मेदारी से इनका प्रबंधन नहीं किया गया, तो हमें खतरा है कि ये हमेशा के लिए धरती से गायब हो जाएंगे।”
ये मेंढक अपने वंश के एकमात्र सदस्य हैं, जिसके कारण इन्हें विकास के हिसाब से अलग और दुनिया भर में लुप्तप्राय (EDGE) प्रजाति के रूप में रखा गया है। यह दर्जा दुनिया की सबसे खास और संकटग्रस्त प्रजातियों को दिया जाता है। फिलहाल में यह प्रजाति आईयूसीएन की रेड लिस्ट में असुरक्षित के रूप में शामिल है।
पश्चिमी घाट जैव-विविधता के लिहाज से बहुत ही खास है जो धरती पर कहीं और नहीं मिलती। यूनेस्को का यह विश्व विरासत स्थल हाल के सालों में विज्ञान के लिए नई प्रजातियों को खोजने के मामले में बहुत ज़्यादा समृद्ध साबित हुआ है।
जीवविज्ञानी जीशान मिर्जा ने इस इलाके में सांप, टैरेंटुला (मकड़ी की एक प्रजाति) और छिपकलियों समेत 60 से ज्यादा नई प्रजातियां खोजी हैं। एक ऐसे अभियान के दौरान मिर्जा को टैरेंटुला की चार नई प्रजातियां मिलीं। हालांकि, यह जैव समृद्धि लगातार बढ़ते खतरों का सामना कर रही है।
वैसे मिर्जा गैलेक्सी मेढक से जुड़े अध्ययन में शामिल नहीं थे। लेकिन, उन्होंने मोंगाबे को बताया, “कुछ प्रजातियों को तो विलुप्त होने से पहले नाम भी नहीं मिल पाएगा।”

मिर्जा के अनुसार, पश्चिमी घाट सहित जैव-विविधता वाली जगहों के लिए इंसानों की बढ़ती आबादी सबसे बड़े खतरों में से एक है। उन्होंने कहा, “दुनिया भर में जैव-विविधता को खतरे में डालने वाले लगभग सभी मसले इंसानों की आबादी से जुड़े हुए हैं।”
पश्चिमी घाट के जंगलों को कॉफी और चाय के बागानों के लिए खेती की जमीन में बदलने से गैलेक्सी मेंढक के आवास पहले ही खत्म हो गए हैं। अब, अच्छे इरादे से किया जाने वाला लेकिन नुकसानदायक फोटोग्राफी टूरिज्म अतिरिक्त खतरा बन रहा है।
राजकुमार ने कहा, “यह दुखद घटना बेरोकटोक होने वाली फोटोग्राफी के दुष्परिणामों के खिलाफ बड़ी चेतावनी है।” “हालांकि गैलेक्सी मेंढक का रंग और दुर्लभता फोटोग्राफरों को पसंदीदा विषय देती है, लेकिन यह जरूरी है कि जो लोग इन अनोखे मेंढकों की तस्वीरें लेना चाहते हैं, वे अनजाने में उनके खत्म होने की वजह न बनें। यह दुखद विडंबना होगी अगर आज कैमरे से उनकी तस्वीर लेने की कोशिश उन्हें अतीत की चीज बना दे।”
दुर्लभ प्रजातियों को सामने लाने के जोखिम फोटोग्राफी से कहीं ज्यादा हैं। जब मिर्जा और उनके साथियों ने धातु की चमक वाले टैरेंटुला (चिलोब्राचिस साइकेडेलिकस) के बारे में बताया, तो मिर्जा ने कहा, “यह प्रजाति उस विवरण से पहले दुनिया के लिए अनजान थी और दुख की बात है कि इस बारे में बताने के आठ महीने बाद, यह प्रजाति अमेरिका और यूरोप में पालतू पशुओं के ऑनलाइन स्टोर पर बिक रही थी।”

ऐसी घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि शोधकर्ता अब तेजी से जगह का सटीक डेटा क्यों छिपाने लगे हैं, जैसा कि गैलेक्सी मेंढक पर शोध करने वाले लेखकों ने किया। मिर्जा ने समझाया, “पालतू जानवरों का व्यापार करने वाले और संग्रह करने वालो को नई प्रजातियों के बारे में बताने वाले शोध पत्रों से उनके वितरण और खास जगहों की जानकारी मिल जाती है।”
अध्ययन के लेखकों का कहना है कि हालांकि प्रकृति से जुड़ी फोटोग्राफी जागरूकता बढ़ा सकती है, लेकिन इसका सावधानी से प्रबंधन करना जरूरी है। शोधकर्ता जानवरों को पकड़ने और संभालने पर रोक लगाने, तेज रोशनी को सीमित करने, उनके आवास को बाधित नहीं करने, लाइसेंस वाले गाइड को नैतिक व्यवहारों का प्रशिक्षण देने और नियमों का उल्लंघन करने पर सजा देने का सुझाव देते हैं।
राजकुमार ने कहा, “अगर सही तरीके से की जाए, तो फोटोग्राफी संरक्षणवादियों को जानवरों के वितरण या व्यवहार जैसे क्षेत्रों के बारे में हमारी समझ बनाने में मदद का बड़ा साधन हो सकती है। साथ ही, इससे मिलने वाली तस्वीरें दूसरों को इन शानदार प्रजातियों के बारे में शिक्षित करने में मदद कर सकती हैं।” “हालांकि, बिना जिम्मेदारी के साथ की गई फोटोग्राफी खतरा बना सकती है।”
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इस तरह की घटनाओं के बाद भारत ने पहले ही कुछ फोटोग्राफी प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। प्रकृति से जुड़े फोटोग्राफरों की अनैतिक हरकतों के कारण पक्षियों के घोंसलों की फोटोग्राफी पर पाबंदी लगा दी गई और प्रजनन के मौसम के दौरान ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (आर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स) की तस्वीरें लेने को भी रोक दिया गया।
साल 2021 में गैलेक्सी मेंढक केरल के मथिकेट्टन शोला राष्ट्रीय उद्यान के लिए फ्लैगशिप प्रजाति बन गया, जिससे फोटोग्राफरों के बीच इसकी पहचान बढ़ी और इसकी आबादी पर दबाव भी संभावित रूप से बढ़ गया।
ZSL के सरीसृप और उभयचर क्यूरेटर और अध्ययन के सह-लेखक बेंजामिन टैपले ने कहा, “एक तस्वीर किसी को परवाह करने और अधिक जानने व एक्शन लेने के लिए प्रेरित कर सकती है,” लेकिन वह एकदम सही तस्वीर वाला पल कभी भी जानवर की भलाई या उसके आवास की कीमत पर नहीं आना चाहिए।”
यह खबर मोंगाबे की ग्लोबल टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी ग्लोबल वेबसाइट पर 18 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर – पश्चिमी घाट में गैलेक्सी मेंढक। तस्वीर: के.पी. राजकुमार/ZSL.