वन्य जीव एवं जैव विविधता News

प्याज की फसल की कटाई करते किसान। जीबी-9 ने ‘फसल विविधता के संरक्षक’ के रूप में किसानों की भूमिका को मान्यता देते हुए एक प्रस्ताव का अंतिम रूप दिया। तस्वीर- मीना631/विकिमीडिया कॉमन्स।

प्लांट जेनेटिक पर अंतरराष्ट्रीय संधि में किसानों के अधिकारों पर बनी आम सहमति

खाद्य और कृषि के लिए पादप आनुवंशिक संसाधनों (प्लांट जेनेटिक रिसोर्से फॉर फ़ूड एंड एग्रीकल्चर) पर हुई अंतरराष्ट्रीय संधि में खाद्य और कृषि में पौधों के आनुवंशिक संसाधनों पर किसानों…
प्याज की फसल की कटाई करते किसान। जीबी-9 ने ‘फसल विविधता के संरक्षक’ के रूप में किसानों की भूमिका को मान्यता देते हुए एक प्रस्ताव का अंतिम रूप दिया। तस्वीर- मीना631/विकिमीडिया कॉमन्स।
रंग लाई गैंड़ा संरक्षण की कोशिशें, यूपी के दुधवा में चार दशक में आठ गुना बढ़ी गैंडों की आबादी

रंग लाई गैंडा संरक्षण की कोशिशें, यूपी के दुधवा में चार दशक में आठ गुना बढ़ी गैंडों की आबादी

भारत में जब भी एक सींग वाले गैंडे (राइनो) की बात होती है, तो हमारे दिमाग में एक नाम ही आता है। वो है असम का काजीरंगा नेशनल पार्क। लेकिन…
रंग लाई गैंड़ा संरक्षण की कोशिशें, यूपी के दुधवा में चार दशक में आठ गुना बढ़ी गैंडों की आबादी
मोर महिमा, अनुग्रह, आनंद, वैभव, प्रेम और गौरव का प्रतीक है। लोगों का विश्वास है कि घर में पंख रखने से सकारात्मक ऊर्जा आती है क्योंकि मोर विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों से भी जुड़े हैं। तस्वीर- सोनिका कुशवाहा

[कमेंट्री] खतरे में राष्ट्रीय पक्षी मोर: भारत में एक दशक में अवैध व्यापार और मनुष्यों के साथ संघर्ष की सच्चाई

भारत ने 1963 में मोर (वैज्ञानिक नाम- पेवो क्रिस्टेटस) को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया। मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किए 59 साल हो चुके हैं लेकिन इसकी सुरक्षा…
मोर महिमा, अनुग्रह, आनंद, वैभव, प्रेम और गौरव का प्रतीक है। लोगों का विश्वास है कि घर में पंख रखने से सकारात्मक ऊर्जा आती है क्योंकि मोर विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों से भी जुड़े हैं। तस्वीर- सोनिका कुशवाहा
मुरलेन नेशनल पार्क में एक मार्बल बिल्ली। इस जंगल में अमित कुमार बल ने तेंदुआ, पीले गले वाला मार्टन, केकड़ा खाने वाला नेवला, असामी मकाक (बन्दर), भौंकने वाले हिरण, जंगली सूअर सहित कई वन्यजीव देखे। तस्वीर- अमित कुमार बल

[साक्षात्कार] अमेजन के जंगल से क्यों होती है मिजोरम के घने जंगलों की तुलना

साल 2019 में सितंबर की एक सुबह मिजोरम के चंफाई जिले के छोटे और खूबसूरत मुरलेन गांव के 240 निवासी हैरान थे। छब्बीस साल के शोधकर्ता अमित कुमार बल बहुत…
मुरलेन नेशनल पार्क में एक मार्बल बिल्ली। इस जंगल में अमित कुमार बल ने तेंदुआ, पीले गले वाला मार्टन, केकड़ा खाने वाला नेवला, असामी मकाक (बन्दर), भौंकने वाले हिरण, जंगली सूअर सहित कई वन्यजीव देखे। तस्वीर- अमित कुमार बल
लेह और हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन से बढ़ता कचरा। तस्वीर- जुआन डेल रियो/लोकल फ्यूचर्स।

लेह में पर्यटकों की बढ़ती भीड़ से पर्यावरण प्रभावित होने की आशंका

अक्टूबर 2020 में रोहतांग दर्रे पर अटल सुरंग (टनल) खुलने के बाद पिछले दो वर्षों के दौरान इस क्षेत्र में वाहनों का आवागमन बहुत बढ़ा है। लद्दाख के लेह शहर…
लेह और हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन से बढ़ता कचरा। तस्वीर- जुआन डेल रियो/लोकल फ्यूचर्स।
तडोबा टाइगर रिजर्व में सड़क पार करता एक वयस्क नर बाघ। एक बाघ 40 वर्ग किमी की सीमा तक कब्जा कर सकता है। इस बाघ के क्षेत्र में लगभग आठ गांव स्थित हैं। तस्वीर- सेंथिल कुमार।

वन्यजीवों के साथ इंसानी गतिविधियों को लंबे वक़्त से कैमरे में कैद करने वाले फोटोग्राफर से एक बातचीत

मानव-वन्यजीव संपर्क बढ़ रहा है। लेकिन उनमें से सभी सकारात्मक नहीं हैं। भारत में हर साल इंसानों और जानवरों के बीच टकराव के कारण सैकड़ों लोगों और जानवरों की मौत…
तडोबा टाइगर रिजर्व में सड़क पार करता एक वयस्क नर बाघ। एक बाघ 40 वर्ग किमी की सीमा तक कब्जा कर सकता है। इस बाघ के क्षेत्र में लगभग आठ गांव स्थित हैं। तस्वीर- सेंथिल कुमार।

[वीडियो] पृथ्वी के लिए ‘कोड रेड’, ताजे पानी के जलीय जीवों की संख्या में 83% की गिरावट: रिपोर्ट

बीते 50 वर्षों में दुनिया में ताजे पानी के जलीय जीवों की संख्या में 83% की कमी आई है। जंगली जीवों के मामले में यह आंकड़ा 69% का है। यानी…
देश का 30% भौगोलिक क्षेत्र संरक्षित करने के लिए अब निजी प्रयासों से जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र चिन्हित किए जा रहे हैं। तस्वीर- वर्षा सिंह

जैव-विविधता को सहेजने के लिए सामुदायिक भागीदारी से बढ़ेगा संरक्षित क्षेत्र

जैव-विविधता पर गहराते संकट को हल करने के लिए दुनिया भर में कई तरह की कोशिशें चल रही हैं। इन्हीं में से एक है  साल 2030 तक धरती के 30…
देश का 30% भौगोलिक क्षेत्र संरक्षित करने के लिए अब निजी प्रयासों से जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र चिन्हित किए जा रहे हैं। तस्वीर- वर्षा सिंह
दुनिया भर में जुगनुओं के लिए उनके आवास का नुकसान, रात की कृत्रिम रोशनी से प्रकाश प्रदूषण और कीटनाशकों को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। तस्वीर- अनस्प्लैश 

कृत्रिम प्रकाश से कैसे कम हो रही है जुगनुओं की संख्या

कीट प्राकृतिक प्रकाश व्यवस्था के संतुलन में काम करते हैं और प्रकाश की तीव्रता, तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ), स्रोतों और अन्य बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं। निशाचर (रात को चलने…
दुनिया भर में जुगनुओं के लिए उनके आवास का नुकसान, रात की कृत्रिम रोशनी से प्रकाश प्रदूषण और कीटनाशकों को सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। तस्वीर- अनस्प्लैश 
बैनर तस्वीर: गढ़चिरौली के जंगलों में रात में हाथियों की आवाजाही को कैप्चर करते हुए एक ड्रोन शॉट। तस्वीर- आरईएसक्यू सीटी / महाराष्ट्र वन विभाग

[वीडियो] वन्यजीवों की ड्रोन से निगरानी से कैसे कम होगा इंसान और जंगली जीवों के बीच संघर्ष

पूर्वी महाराष्ट्र में स्थित गढ़चिरौली जिले में जंगल के आसपास बसे गांवों में इन दिनों कौतूहल है। यहां के लोगों की नजर जब भी आसमान की ओर जाती है उन्हें…
बैनर तस्वीर: गढ़चिरौली के जंगलों में रात में हाथियों की आवाजाही को कैप्चर करते हुए एक ड्रोन शॉट। तस्वीर- आरईएसक्यू सीटी / महाराष्ट्र वन विभाग