तस्वीरों में कैद रेगिस्तान: खतरे में है थार का पारिस्थितिकी तंत्र

रेत में एक चौकन्ना चिंकारा। रेगिस्तान में कई तरह की वनस्पतियां खत्म हो रही हैं, जैसे सेवण घास जो यहां के पशु-पक्षियों के भोजन में पोषण का काम करती थी। इन वजहों से यहां की जैव-विविधता को खतरा है। तस्वीर- डॉ. गोबिंद सागर भारद्वाज।

देखा गया कि टिट्डी हमलों के बाद गोडावण ने एक से ज्यादा अंडे दिए। तो क्या माना जाए कि गोडावण को खाने या खाने में पोषण की कमी है? साथ ही यह भी बताएं कि थार में गोडावण के लिए भोजन उपलब्ध होने या न होने पर आपकी क्या समझ है? 

डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण के लिए खाने की कोई कमी नहीं है। इस प्रजाति को सबसे ज्यादा जरूरत शांतिपूर्ण वातावरण और बिना व्यवधान वाले जगह की है। 

रेगिस्तान में कई तरह की वनस्पतियां खत्म हो रही हैं, जैसे सेवण घास जो यहां के पशु-पक्षियों के भोजन में पोषण का काम करती थी। अब ये खत्म हो चुकी है। ऐसी वनस्पतियों को कैसे बचाया जाए?

सेवण घास विलुप्त नहीं हुई है। हां, इंसानी दबाव से ये पहले की तुलना में कम जरूर हुई है। डीएनपी के अधिकारियों ने पार्क के कई क्लोजर्स में सेवण घास सहित कई तरह की वनस्पतियां विकसित की हुई है। ये घास ना सिर्फ स्थानीय पशुओं बल्कि गोडावण के रहने का भी सबसे बेहतरीन ठिकाना है।

स्पिनी टेल्ड लिजार्ड का एक जोड़ा। थार रेगिस्तान के अलावा ये भारत-पाकिस्तान की सीमा से लगे कच्छ इलाके में भी पाए जाते हैं। तस्वीर- डॉ. गोबिंद सागर भारद्वाज
स्पिनी टेल्ड लिजार्ड का एक जोड़ा। थार रेगिस्तान के अलावा ये भारत-पाकिस्तान की सीमा से लगे कच्छ इलाके में भी पाए जाते हैं। तस्वीर- डॉ. गोबिंद सागर भारद्वाज

जैसलमेर, बाड़मेर में काफी ओरण (चारागाह) हैं जिनमें बड़ी संख्या में जंगली जानवर, पशु-पक्षी रहते हैं। ओरणों को लेकर आपकी क्या टिप्पणी है? क्या भविष्य में हजारों प्रजातियों को संरक्षण देने वाले इन ओरणों को हम देख पाएंगे? 

थार में मौजूद ओरणों में अभी भी जैव-विविधता के तत्व मौजूद हैं, लेकिन इंसानी गतिविधियों खासकर इनके भीतरी हिस्सों में निर्माण एक बड़ी समस्या है। ये ओरण ना सिर्फ पक्षी बल्कि कई तरह के फूल-पत्तियों और कई तरह के प्रजातियों के पशुओं के लिए शरण स्थली हैं। इनको इसी स्वरूप में संरक्षित करने की जरूरत है।

बैनर तस्वीरः रेगिस्तान में भेड़ों का एक झुंड। तस्वीर- डॉ. गोबिंद सागर भारद्वाज

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