- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, कॉप30, में भाग लेने वाले रेस्टोरेंट, अपनी सभी सामग्रियों का कम से कम 30% हिस्सा ब्राज़ील के पारा में पारिवारिक किसानों और स्वदेशी एवं कृषि-पारिस्थितिक उत्पादकों से प्राप्त कर रहे हैं।
- किसानों को स्थिर बाज़ारों से जोड़ने के लिए सार्वजनिक खरीद का उपयोग करना जलवायु लचीलेपन को मज़बूत करने का एक तरीका माना जा रहा है।
- हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु वित्त का बहुत कम हिस्सा सीधे छोटे उत्पादकों तक पहुँचता है।
ब्राजील के पारा राज्य की 18 वर्षीय एना क्लारा ब्रांडाओ आजकल अपना समय डेलिसियास क्विलोम्बोलस में काम करते हुए बिता रही हैं। डेलिसियास क्विलोम्बोलस एक परिवार द्वारा संचालित भोजन स्टॉल है लेकिन वर्तमान में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में खासा प्रचलित है। इस स्टॉल के सामने सम्मेलन के आधिकारिक स्थल, सीओपी30 के ब्लू जोन में लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।
एना फीसिओथेरपी की पढाई कर रही हैं, उनकी 20 वर्षीय सहकर्मी एमिली भी एक छात्रा हैं। एमिली ने स्टॉल की ट्रे और टोकरियों में रखे खाने के बारे में बताया कि वे आकाई, ब्राज़ील नट, जम्बू हर्ब और कपुआकु फल से बने बिस्कुट, अंडे और नारियल के दूध के साथ टैपिओका, और कपुआकु, कोको और एसरोला से बने क्षेत्रीय जूस बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये पारा में ये रोज़मर्रा की खाने वाली चीजें हैं, लेकिन कॉप30 में कई प्रतिनिधियों के लिए ये बिलकुल नई हैं।
कॉप30 की तैयारियों के दौरान, जिसमें दुनिया भर से लोग शामिल हुए थे, ब्राज़ील सरकार ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया था, जिसके तहत कॉप30 स्थल के अंदर के रेस्टोरेंट्स को अपनी सामग्री का कम से कम 30% हिस्सा पारिवारिक किसानों, स्वदेशी समुदायों, पारंपरिक आबादी और कृषि-पारिस्थितिक नेटवर्क से खरीदना अनिवार्य था। सरकार और टिकाऊ खाद्य समर्थकों के बीच एक साल से भी ज़्यादा समय तक चली चर्चा के बाद, इस नियम को सार्वजनिक खरीद नोटिस में शामिल किया गया था।
चालीस से ज़्यादा ब्राज़ीलियाई संगठनों के गठबंधन, ना मेसा दा कॉप30, ने उत्पादकों के मानचित्रण और सरकारी अधिकारियों के साथ संवाद का समन्वय किया। मोंगाबे-इंडिया से बात करते हुए, गठबंधन का नेतृत्व करने वाले संगठनों में से एक, कॉमिडा डो अमान्हा की मोनिका सूज़ा ने कहा, “जब से बेलेम को कॉप का मेज़बान घोषित किया गया है, हमने सरकार और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर सहकारी समितियों और किसानों के नेटवर्क का मानचित्रण किया है ताकि यहाँ परोसे जाने वाले भोजन को जलवायु कार्रवाई के रूप में मान्यता मिले।”

उन्होंने कहा कि रेस्टोरेंट्स के लिए 30% सोर्सिंग पारिवारिक खेती से साबित करने की आवश्यकता ब्राज़ील के सार्वजनिक खाद्य कार्यक्रमों के अनुरूप है। “पारिवारिक खेती में मूल निवासी, पारंपरिक समुदाय और कृषि सुधार के लिए बसने वाले लोग शामिल हैं। सार्वजनिक सूचना सहकारी समितियों, महिला-नेतृत्व वाले समूहों और युवाओं को भी प्रोत्साहित करती है। हमें उम्मीद है कि इन उत्पादकों तक कम से कम 33 लाख रियाल (ब्राज़ीलियाई मुद्रा) की आय पहुँचेगी। कई लोगों के लिए, इतने बड़े मंच पर यह प्रदर्शन कॉप समाप्त होने के बाद नए बाज़ार खोल सकती है।” उन्होंने कहा कि वे विश्व खाद्य कार्यक्रम के साथ एक रिपोर्ट जारी करेंगे जिसमें बताया जाएगा कि सोर्सिंग व्यवहार में कैसे काम करती है।
गठबंधन का नेतृत्व करने वाला एक अन्य संगठन, इंस्टीट्यूटो रेजेनेरा, 2020 से बेलेम में कृषि-पारिस्थितिकी नेटवर्क के साथ काम कर रहा है। संस्थान के सह-संस्थापक फैब्रिसियो मुरियाना ने बताया कि उनका समूह खाद्य प्रणालियों के माँग पक्ष पर काम करता है। वे समुदायों की पहचान करते हैं, खुदरा विकल्पों का मानचित्रण करते हैं और पारिवारिक खेती के लिए नए बाज़ार बनाते हैं।
उन्होंने बताया कि कॉप में भोजन उपलब्ध कराने का विचार 2023 में अमेज़न शिखर सम्मेलन के बाद आया, जो वर्षा वनों की रक्षा के लिए अमेज़न के देशों की एक बैठक थी। “किसानों ने उस कार्यक्रम में एक छोटे से मेले में भाग लिया और पूछा कि उन्हें बैठक में भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्यों नहीं बुलाया गया। इसी सवाल ने इस अभियान को जन्म दिया।”
स्थानीय स्रोतों के लिए कानूनी ढाँचा
कूपाबेन, कॉप30 में भोजन की व्यवस्था में लगी कई सहकारी समितियों में से एक है। कूपाबेन बेलेम के पास बेनेविडेस में स्थित है। इस सहकारी समिति के एक प्रतिनिधि ने बताया, “हमने उत्पादों और कीमतों की एक सूची तैयार की और उसे कॉप30 की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। किसी ने इसे देखा और हमसे संपर्क किया, और हमारे सभी सदस्यों के लिए यहां से मिला प्रचार बहुत सकारात्मक रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि पारिवारिक किसानों को अभी भी बेहतर बाज़ार पहुँच और बुनियादी ढाँचे के समर्थन की ज़रूरत है। समिति के प्रतिनिधि ने कहा, “हम पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना, बिना जलाए और बिना रासायनिक सामग्री के काम करते हैं।” उन्होंने बताया कि कूपाबेन के पास एक छोटा कृषि उद्योग शुरू करने की अनुमति तो है, लेकिन उत्पादन बढ़ाने के लिए ज़रूरी कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का अभाव है।
ब्राज़ील में कई सार्वजनिक नीतियाँ हैं जो छोटे किसानों का समर्थन करती हैं, जिनमें स्कूल में दिए जाने वाले भोजन की खरीद और संस्थागत खाद्य खरीद शामिल हैं। इन नीतियों के तहत सार्वजनिक संस्थाओं को अपने भोजन का एक हिस्सा पारिवारिक किसानों से खरीदना अनिवार्य है। जैविक किसान संगठनों के अंतरमहाद्वीपीय नेटवर्क के सदस्य थेल्स मेंडोंका ने कहा कि नीतिगत संदर्भ ने कॉप30 में इस्तेमाल किए गए मॉडल को बनाने में मदद की।

उन्होंने कहा, “ब्राज़ील में पारिवारिक खेती की एक कानूनी परिभाषा है। 50% से ज़्यादा आय खेती से आनी चाहिए और ज़मीन के आकार और कर्मचारियों की संख्या की भी सीमाएँ हैं। पारिवारिक किसान के रूप में वर्गीकृत होने से उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों तक पहुँच मिलती है।”
मेंडोंका ने कहा कि खाद्य प्रणालियों में बदलाव ब्राज़ील के जलवायु एजेंडे का केंद्रबिंदु है। उन्होंने कहा कि कृषि और भूमि-उपयोग में बदलाव मिलकर ब्राज़ील के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं, जो वनों की कटाई, पशुपालन और कमोडिटी फ़सलों के कारण होता है।
वित्तपोषण एक प्रमुख कमी
जलवायु वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि हालाँकि खरीद मॉडल अवसर पैदा कर सकते हैं, फिर भी पारिवारिक किसानों के पास धन तक सीधी पहुँच का अभाव है। इस अवसर पर बोलते हुए, क्लाइमेट फोकस के हसीब बख्तारी ने कहा कि आमतौर पर छोटे उत्पादक जलवायु वित्त संरचनाओं से बाहर रहते हैं। बख्तारी एक जलवायु वित्त विशेषज्ञ हैं जो वैश्विक जलवायु नीति, कार्बन बाज़ारों और विकासशील देशों में अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त के प्रवाह पर काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक जलवायु वित्तपोषण का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा ही छोटे किसानों तक सीधे पहुँच पाता है, और उन्हें अभी भी योजना बनाने या निर्णय लेने में भागीदार के बजाय मुख्य रूप से लाभार्थी माना जाता है। उन्होंने आगे कहा कि कॉप30 में अपनाई गई सार्वजनिक खरीद, ग्रामीण उत्पादकों का समर्थन करने का एक तरीका है, लेकिन किसानों और सहकारी समितियों को नीतिगत चर्चाओं और पूर्वानुमानित वित्तपोषण तक पहुँच की भी आवश्यकता है।
अमेज़न का बड़ा राजनीतिक क्षण
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर देश जलवायु लक्ष्यों के साथ खरीद को जोड़ते हैं, तो ऐसे स्रोत मॉडल और भी मज़बूत हो सकते हैं। कॉप30 में बोलते हुए, अंतर्राष्ट्रीय जल प्रबंधन संस्थान (IWMI) में जलवायु के लचीलेपन के प्रमुख शोधकर्ता, गिरिराज अमरनाथ ने कहा, “कॉप30 दिखाता है कि जलवायु कार्रवाई हमारे खाने से कैसे शुरू हो सकती है। पारा के पारिवारिक किसानों और स्वदेशी उत्पादकों से भोजन प्राप्त करके, यह वैश्विक महत्वाकांक्षा को स्थानीय लचीलेपन से जोड़ता है। भारत और वैश्विक दक्षिण भी इसी तरह के जनादेश अपना सकते हैं, छोटे किसानों, सहकारी समितियों और कम कार्बन उत्सर्जन वाले कृषि-पारिस्थितिक आहार का समर्थन कर सकते हैं।”
कई आयोजकों ने कहा कि यह प्रयोग भविष्य के सम्मेलनों को प्रभावित कर सकता है। इंस्टीट्यूटो रेजेनेरा के मुरियाना ने कहा कि यह मॉडल अन्य देशों में भी संभव है, बशर्ते वे मौजूदा ढाँचों पर काम करें। उन्होंने कहा, “आपको अपने देश में सबसे टिकाऊ स्रोत प्रणाली से शुरुआत करनी होगी। नई नीति बनाने की तुलना में मौजूदा सार्वजनिक नीति को अपनाना आसान होता है।”
कॉप30 में खाद्य स्रोत का आयोजन शिखर सम्मेलन के दौरान अमेज़न की प्राथमिकताओं को सामने लाने के एक व्यापक प्रयास का हिस्सा है। नागरिक समाज समूह वनों की रक्षा और खाद्य उत्पादन में स्थानीय समुदायों की भूमिका को उजागर करने के लिए पीपुल्स समिट सहित समानांतर कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
ब्लू ज़ोन में, डेलिसियास क्विलोम्बोलास में लगातार लगी कतार स्थानीय भोजन में रुचि को दर्शाती है। सम्मलेन में आए प्रतिनिधि रुककर व्यंजनों, किसानों और उनके पीछे की कहानियों के बारे में पूछ रहे हैं। ब्रांडाओ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह ध्यान उत्पादकों को स्थायी पहचान दिलाएगा। उन्होंने कहा, “जंगल की रक्षा उसमें रहने वाले लोग करते हैं। वे ज़्यादा पहचान और सम्मान के हक़दार हैं।”
बैनर तस्वीर: पूर्वोत्तर ब्राज़ील में एक किसान कसावा के खेत की देखभाल करते हुए। प्रतिनिधि तस्वीर -स्कॉट वालेस/विश्व बैंक द्वारा फ़्लिकर (CC BY-NC-ND 2.0) के माध्यम से।