- शोधकर्ताओं ने चार एशियाई हॉर्नबिल (धनेश) प्रजातियों के अच्छी गुणवत्ता वाले संदर्भ जीनोम तैयार किए हैं।
- संदर्भ जीनोम की सामान्य संरचना हॉर्नबिल पर भविष्य के विकासवादी और जनसंख्या जीनोमिक्स अनुसंधान में और संरक्षण से जुड़े फैसलों में मदद कर सकती है।
- नए सीक्वेंस किए गए जीनोम का इस्तेमाल जनसंख्या आनुवंशिकी के एक अध्ययन में किया गया। इससे पता चला कि अध्ययन में शामिल सभी चार हॉर्नबिल प्रजातियों की आबादी में प्लाइस्टोसीन (महा हिम युग) के दौरान जलवायु परिवर्तन के कारण भारी गिरावट आई।
वैज्ञानिकों ने चार संकटग्रस्त एशियाई हॉर्नबिल प्रजातियों के लिए संदर्भ जीनोम यानी आनुवंशिक संरचना का मॉडल तैयार किया है। मैसूर स्थित नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन और हैदराबाद के सीएसआईआर-सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) के शोधकर्ताओं ने ग्रेट हॉर्नबिल (बड़ा धनेश), रुफस-नेक्ड हॉर्नबिल (लाल-गर्दन धनेश), मालाबार-पाइड हॉर्नबिल (मालाबार धनेश) और रीथेड हॉर्नबिल (मुकुटधारी धनेश) के अच्छी गुणवत्ता वाले जीनोम असेंबली तैयार किए हैं।
शोधपत्र की लेखिका पूजा पवार कहती हैं, “मेरी शोध दिलचस्पी यह समझने में है कि वन्यजीव अपने बदलते पर्यावरण में किस तरह खुद को बचाए रखते हैं।” पवार ने संरक्षित क्षेत्रों और कॉफी के बागानों में ग्रेट हॉर्नबिल (ब्यूसेरॉस बिकॉर्निस\Buceros bicornis) का अध्ययन किया है। अपनी मास्टर डिग्री के शोध प्रबंध के लिए पवार ने अनामलाई पहाड़ियों के संरक्षित क्षेत्रों और तमिलनाडु के वलपराई में इंसानी दबाव से परिवर्तित इलाकों में इन बड़े, शानदार पक्षियों के व्यवहार और प्रजनन जीव-विज्ञान की तुलना की। इसके बाद नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन और मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन में अपनी पीएचडी के दौरान पवार ने अपने शोध का दायरा बढ़ाते हुए जलवायु, भौगोलिक और मानवजनित कारकों से अलग-अलग क्षेत्रों और भू-वैज्ञानिक युगों में हॉर्नबिल की आबादी पर हुए असर का पता लगाने की कोशिश की।
इन सवालों के जवाब खोजने में मदद के लिए, व्यवहार जीव-विज्ञानी ने जीनोमिक्स का रुख किया जो किसी जीव की संपूर्ण आनुवंशिक संरचना का अध्ययन है। पवार कहती हैं, “जीनोमिक्स ने मुझे इन सवालों को बहुत बड़े कालखंडों और भौगोलिक क्षेत्रों के पैमाने पर समझने का अवसर दिया। मैं समय में पीछे जाकर यह पता लगा सकती थी कि प्रजाति की उत्पत्ति कब हुई या वह अपनी नजदीकी प्रजाति से कब अलग हुई। इस तरह, उन्हें अपने शोध को सिर्फ पश्चिमी घाट या पूर्वोत्तर भारत तक सीमित रखने की जरूरत नहीं थी।”
हालांकि, ऐसा करने से पहले पवार को सबसे पहले एशियाई हॉर्नबिल प्रजातियों के लिए आधारभूत जीनोमिक डेटा तैयार करना था। लेकिन, संरक्षण के लिहाज से अहम प्रजाति होने के बावजूद इसकी काफी कमी थी। 32 एशियाई हॉर्नबिल प्रजातियों में से सिर्फ दो, ग्रेट हॉर्नबिल और राइनोसिरस हॉर्नबिल, के लिए ही जीनोम संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध थी।
पवार और उनकी टीम का नया शोधपत्र बीएमसी इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित हुआ है। यह हॉर्नबिल की आनुवंशिक संरचना को समझने के लिए संसाधन के रूप में काम करेगा और यह “पूरे एशिया और अफ्रीका में हॉर्नबिल पर भविष्य के विकासवादी और जनसंख्या जीनोमिक्स से जुड़े अनुसंधान के लिए मूल्यवान” होगा।

संदर्भ जीनोम अहम रिसोर्स
यह समझना जरूरी है कि संदर्भ जीनोम क्या होता है? पवार कहती हैं, “जीनोम किसी जीव की संपूर्ण आनुवंशिक संरचना है, [और] संदर्भ जीनोम किसी खास प्रजाति के लिए आधारभूत जीनोम होता है।” यह किसी प्रजाति की पूरी आनुवंशिक संरचना के बारे में बताता है, जिसमें जीनोम की लंबाई, गुणसूत्रों की संख्या, गुणसूत्रों की लंबाई और उनकी व्यवस्था शामिल होती है।
लेकिन किसी जीव के जीनोम का पुनर्निर्माण किस तरह किया जाता है? सबसे पहले, जीव से ऊतक का एक नमूना लिया जाता है और उसके डीएनए को निकालकर सीक्वेंसिंग तैयार की जाती है। इसके बाद, सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म इन डीएनए खंडों को पढ़ता है, जिन्हें फिर जैव-सूचनाविज्ञान की मदद से जोड़कर पूरा जीनोम तैयार किया जाता है।
पवार के अनुसार, जीनोम की पूरी सीक्वेंसिंग अलग-अलग सीक्वेंसिंग तकनीकों का इस्तेमाल करके की जा सकती है। इल्युमिना एक शॉर्ट-रीड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म है, जो 150 बेस पेयर के डीएनए सीक्वेंस या रीड तैयार करता है। ऑक्सफोर्ड नैनोपोर टेक्नोलॉजी (ONT) दूसरा प्लेटफॉर्म है जो डीएनए के लंबे हिस्सों को पढ़ता है, जिनकी लंबाई कुछ सौ से लेकर 50,000 से अधिक बेस पेयर तक हो सकती है।
पवार और उनकी टीम ने सीसीएमबी की नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग सुविधा में चार हॉर्नबिल प्रजातियों के हाइब्रिड जीनोम को असेंबल और एनोटेट (डेटा को समझने योग्य बनाना) करने के लिए लॉन्ग-रीड और शॉर्ट-रीड सीक्वेंस के संयोजन का इस्तेमाल किया। पवार के अनुसार, यह हाइब्रिड तरीका दोनों डेटासेट की खूबियों को एक-दूसरे का पूरक बनाता है और गड़बड़ियों को कम करता है। इससे पहले, ग्रेट हॉर्नबिल और राइनोसिरस हॉर्नबिल के लिए जीनोमिक डेटा उपलब्ध था, लेकिन दोनों ही सिर्फ शॉर्ट-रीड असेंबली वाले जीनोम थे, जिन्हें इल्युमिना प्लेटफॉर्म का उपयोग करके तैयार किया गया था। पवार कहती हैं, “[ONT] तकनीक कुछ समय से मौजूद है, लेकिन एशियाई हॉर्नबिल के लिए अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हुआ था।” पवार ने बताया कि इल्युमिना सीक्वेंसिंग की लागत ONT की तुलना में कम है।
इल्युमिना और ONT के अलावा, तीसरी सीक्वेंसिंग तकनीक भी है जिसे PacBio कहा जाता है। यह और भी लॉन्ग रीड देती है और गुणसूत्र-स्तरीय असेंबली तैयार करती है। पवार कहती हैं, “मेरी असेंबली में मैं यह नहीं बता सकती कि पहले गुणसूत्र का आकार कितना है या किसी खास गुणसूत्र का पता लगाना संभव नहीं है। यह मेरे अध्ययन की एक सीमा है।” अफ्रीका में पाया जाने वाला सदर्न ग्राउंड-हॉर्नबिल (Bucorvus leadbeateri) अब तक किसी हॉर्नबिल प्रजाति के लिए तैयार किया गया सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले जीनोम का उदाहरण है।
पवार बताती हैं कि जीनोम का N50 मान उसकी गुणवत्ता का अच्छा माप है। वह कहती हैं, “अगर पूरे जीनोम यानी सभी स्कैफोल्ड (जोड़े गए जीनोम सीक्वेस) को घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाए, जिसमें सबसे लंबा स्कैफोल्ड शुरुआत में और सबसे छोटा आखिर में हो, तो बीच वाले स्कैफोल्ड की लंबाई उसका N50 मान होती है।”
पवार और उनकी टीम की ओर से तैयार किए गए जीनोम का N50 मान पिछले एशियाई हॉर्नबिल जीनोम की तुलना में काफी ज्यादा है। लेकिन यह सदर्न ग्राउंड-हॉर्नबिल के N50 मान से कम है। हालांकि, पवार ने इस बात पर जोर दिया कि अच्छी गुणवत्ता वाले संदर्भ जीनोम की उपलब्धता से उसी प्रजाति के लिए दोबारा यह संसाधन तैयार करने की लागत बचती है। वह कहती हैं, “यह अहम रिसोर्स है जो अब शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध है और आगे इसे संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।”
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया में संरक्षण आनुवंशिकी के क्षेत्र में काम करने वाली मेघना नाटेश ने इस “बहुत उपयोगी रिसोर्स” के लिए शोध टीम की तारीफ की। साथ ही, वैश्विक जीनोमिक डेटाबेस में एशियाई प्रजातियों के कम प्रतिनिधित्व की ओर ध्यान दिलाया। अध्ययन से जुड़ी नहीं रहीं नाटेश कहती हैं, “अच्छी गुणवत्ता वाली जीनोम असेंबली जीनोमिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए अहम हैं। [इनसे] जनसंख्या-स्तर की विविधता, आवागमन और संपर्क, अनुकूलन संबंधी विविधता, आबादी के इतिहास और बहुत कुछ समझने में मदद मिलती है।”

संरक्षण में मदद
पवार कहती हैं कि जीनोमिक्स हमारे विकासवाद की समझ का आधार है। वह एशियाई और अफ्रीकी हॉर्नबिल का उदाहरण देती हैं: कुछ प्रजातियां पेड़ों पर रहने वाली हैं, जबकि अन्य जमीन पर रहती हैं। वह कहती हैं, “जब आप प्रजातियों के एक समूह को देखते हैं, तो कुछ खास परिस्थितियों या पर्यावरण से जुड़े दबावों के अनुकूल होती हैं, जबकि कुछ नहीं होतीं। उनके जीनोम की तुलना करके, हम उनके लक्षणों में अंतर का संबंध उनके जीनोम में मौजूद संरचनात्मक और कार्यात्मक विविधताओं से जोड़ सकते हैं।”
नाटेश बताती हैं कि जीनोमिक्स आबादी की निगरानी में अलग पहलू भी जोड़ता है, जिससे आबादी में आनुवंशिक विविधता को मापने में मदद मिलती है। वह कहती हैं, “आनुवंशिक तौर पर अलग-अलग होना या विविधता आबादी की अनुकूलन क्षमता और लंबी अवधि की सहनशीलता के लिए अहम है।” इसलिए, जीनोम डेटा कम आनुवंशिक विविधता और नुकसानदायक बदलाव के बढ़े हुए स्तर वाली जोखिमग्रस्त आबादियों की पहचान करने में मदद कर सकता है, जिससे संरक्षण प्रबंधन संबंधी फैसलों में आसानी होती है।
पवार कहती हैं कि जनसंख्या आनुवंशिकी में इन जीनोम डेटासेट का इस्तेमाल करने के लिए नई विधियां भी विकसित की जा रही हैं। ऐसी ही एक प्रक्रिया पेयरवाइज सीक्वेंशियली मार्कोवियन कोएलिसेंट (PSMC) है, जो किसी प्रजाति के जनसांख्यिकीय इतिहास को पीछे जाकर समझती है और उसकी जनसंख्या के क्रमिक विकास का अध्ययन करके सामान्य पूर्वजों की पहचान करती है।
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जब टीम ने एशियाई हॉर्नबिल के जीनोम पर PSMC को आजमाया, तो पाया कि बदलती जलवायु खास तौर पर प्लाइस्टोसीन काल (25 लाख साल पहले से 11 हजार साल पहले तक) के दौरान, सभी चार प्रजातियां प्रभावित हुईं। इसके परिणामस्वरूप उनकी प्रभावी जनसंख्या के आकार (आनुवंशिक विविधता में योगदान देने वालों की संख्या) में अलग-अलग स्तर तक कुल मिलाकर गिरावट आई। इसके अलावा, यह पाया गया कि अन्य तीन हॉर्नबिल प्रजातियों की तुलना में ज्यादा संख्या में और व्यापक रूप से पाए जाने वाले रीथेड हॉर्नबिल का प्रभावी जनसंख्या आकार अधिक था।
पवार कहती हैं कि इन नए नतीजों ने कई और सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जब चार एशियाई हॉर्नबिल प्रजातियों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले संदर्भ जीनोम उपलब्ध होने के साथ आधार तैयार हो गया है, तो वह अपनी डॉक्टरेट थीसिस को इन सभी सवालों के जवाब खोजने में लगाना चाहती हैं।
यह खबर मोंगाबे इंडिया टीम द्वारा रिपोर्ट की गई थी और पहली बार हमारी अंग्रेजी वेबसाइट पर 31 अगस्त, 2026 को प्रकाशित हुई थी।
बैनर तस्वीर: तमिलनाडु के वलपराई में ग्रेट हार्नबिल का झुंड। तस्वीर – रोहित जाह्नवी\विकिमीडिया कॉमन्स (CC BY-SA 4.0)।