पर्यावरण से जुड़ी सुर्खियां

प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की खोज खबर। मोंगाबे एक गैर-लाभकारी संस्था है।

झाबुआ के सरकारी फार्म पर कड़कनाथ मुर्गा। इसका रंग काला होता है, इनका हर अंग यहां तक कि खून भी काला होता है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे

जंगल से जीआई टैग तक, झाबुआ के काले मुर्गे कड़कनाथ की कहानी

किसान वीर सिंह (44) दानों से भरी एक टोकरी लेकर कुट-कुट, कुट-कुट की आवाज लगा रहे हैं। देखते ही देखते कई दर्जन काले मुर्गे चारों तरफ से उनकी तरफ दौड़ते…
झाबुआ के सरकारी फार्म पर कड़कनाथ मुर्गा। इसका रंग काला होता है, इनका हर अंग यहां तक कि खून भी काला होता है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे
गोवा के पंजिम में एक पेड़ को मापते शोधकर्ता। तस्वीर: नंदिनी वेल्हो।

बड़े होते शहरों में सिकुड़ती हरियाली

इस साल की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में किसी भी भारतीय शहर की सड़कों पर चलते हुए आपको चिलचिलाती गर्मी में चक्कर आ सकता है। हालांकि, पेड़ों से भरी सड़क पर…
गोवा के पंजिम में एक पेड़ को मापते शोधकर्ता। तस्वीर: नंदिनी वेल्हो।
धान की बुआई। छत्तीसगढ़ में धान मुख्यतः खरीफ की फसल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे

धान के बढ़ते समर्थन मूल्य के कारण हाशिये पर दलहन, तिलहन

देश भर में सर्वाधिक क़ीमत पर धान की ख़रीदी से छत्तीसगढ़ के किसानों की बांछे भले खिली हुई हों लेकिन राज्य में दूसरी फसलों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो…
धान की बुआई। छत्तीसगढ़ में धान मुख्यतः खरीफ की फसल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे
अध्ययन के मुताबिक, जंगली भारतीय स्टार कछुओं के भौगोलिक वितरण में एक निश्चित पैटर्न है और दोनों आबादियों में मध्यम से उच्च आनुवंशिक विविधता है। तस्वीर -आदित्यमाधव83/विकिमीडिया कॉमन्स

जेनेटिक इंटेलिजेंस से चुना जा सकता है तस्करी से बचाए गए स्टार कछुओं का सही घर

भारतीय स्टार कछुओं को घरों में पालने और उनके अंगों के इस्तेमाल के चलते बड़े पैमाने पर उनकी अवैध तस्करी की जाती रही है। ये कछुए भारतीय उपमहाद्वीप में पाए…
अध्ययन के मुताबिक, जंगली भारतीय स्टार कछुओं के भौगोलिक वितरण में एक निश्चित पैटर्न है और दोनों आबादियों में मध्यम से उच्च आनुवंशिक विविधता है। तस्वीर -आदित्यमाधव83/विकिमीडिया कॉमन्स
लामेर के निवासी मुख्य रूप से बांस और तेंदू पत्ते जैसे वन उत्पादों पर निर्भर रहते हैं और इसी से अपनी आजीविका कमाते हैं। उनका कहना है कि ग्रेफाइट की खोज करना और यहां एक खदान की संभावना के चलते उन वन उत्पादों की उपलब्धता पर खतरा मंडराने लगा है जिन पर वे निर्भर हैं। तस्वीर: आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे।

देश में महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती खोज के बीच कितनी जरूरी है स्थानीय समुदायों की भागीदारी

अपनी स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत ने अहम खनिजों पर अपना ध्यान केंद्रित किया है और इसी के चलते ओडिशा के जंगलों में रहने वाले लोगों से टकराव की…
लामेर के निवासी मुख्य रूप से बांस और तेंदू पत्ते जैसे वन उत्पादों पर निर्भर रहते हैं और इसी से अपनी आजीविका कमाते हैं। उनका कहना है कि ग्रेफाइट की खोज करना और यहां एक खदान की संभावना के चलते उन वन उत्पादों की उपलब्धता पर खतरा मंडराने लगा है जिन पर वे निर्भर हैं। तस्वीर: आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे।
सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 54 साल के देव प्रसाद अहिरवार जो हीटस्ट्रोक से बचने में सफल रहे। इलेस्ट्रेशन - हितेश सोनार/मोंगाबे।

भीषण गर्मी में तैनात सुरक्षा गार्ड के हीट-स्ट्रोक से बचने की कहानी

इस साल दिल्ली में गर्मी के दौरान लंबे समय तक चली लू में दिल्ली के अस्पतालों को एक कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा। जब हीट-स्ट्रोक से गंभीर रूप से…
सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 54 साल के देव प्रसाद अहिरवार जो हीटस्ट्रोक से बचने में सफल रहे। इलेस्ट्रेशन - हितेश सोनार/मोंगाबे।
अप्रैल 2016 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चितई के पास चीड़ के जंगलों में लगी आग। फाइल तस्वीर- Ramwik/विकिमीडिया कॉमन्स

बकाया वेतन, संसाधनों का अभाव, जंगल की आग से कैसे लड़ेंगे उत्तराखंड के अग्नि प्रहरी

इस साल उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों में वनाग्नि के मामले दर्ज किये गए। राज्य की दोनों प्रशासनिक इकाइयों में सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून…
अप्रैल 2016 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चितई के पास चीड़ के जंगलों में लगी आग। फाइल तस्वीर- Ramwik/विकिमीडिया कॉमन्स

एक नए सूचकांक के मुताबिक, पूर्व की तुलना में पश्चिमी हिमालय ज्यादा खतरे में है

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT-M) के शोधार्थियों द्वारा बनाए गए एक नए क्लाइमेट रिक्स इंडेक्स यानि जलवायु के संकट को मापने वाले सूचकांक के जरिए पता चला है कि पूर्वी…
नासिक जिले के किसान दिगंबर अशोक काटे अपने अंगूर के बागान की सुरक्षा प्लास्टिक कवर से करते हैं। तस्वीर- अरविंद शुक्ला।

अंगूर को अचानक बदलने वाले मौसम से बचाते हैं फसल के कवर

महाराष्ट्र के नासिक जिले में पिछले साल नवंबर में कई बार बेमौसम बारिश हुई और ओले भी पड़े। यह बारिश इतनी जोरदार थी कि सारे खेत ओलों से पट गए…
नासिक जिले के किसान दिगंबर अशोक काटे अपने अंगूर के बागान की सुरक्षा प्लास्टिक कवर से करते हैं। तस्वीर- अरविंद शुक्ला।
एकलव्य फाउंडेशन की ग्रीन बिल्डिंग धूप में पकाई गई मिट्टी और चूने से बनी ईंटो से बनी है जिस से यह दूसरी इमारतों के मुकाबले ठंडी रहती है। तस्वीर- एकलव्य फाउंडेशन

भोपाल की यह ईको-फ्रेंडली इमारत है पर्यावरण के लिए लाभकारी

मई और जून के महीनों में बाहर पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद भी भोपाल के एकलव्य फाउंडेशन के कर्मचारी एक पंखे के नीचे खुश हैं। उन्हें दूसरे दफ्तरों के…
एकलव्य फाउंडेशन की ग्रीन बिल्डिंग धूप में पकाई गई मिट्टी और चूने से बनी ईंटो से बनी है जिस से यह दूसरी इमारतों के मुकाबले ठंडी रहती है। तस्वीर- एकलव्य फाउंडेशन
स्पोटेड पोटेटो लेडीबर्ड बीटल जो आलू, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचाता है। तस्वीर - arian.suresh/विकिमीडिया कॉमन्स।

बढ़ते तापमान से बढ़ेगा फसलों पर कीटों का प्रभाव, पैदावार पर हो सकता है असर

बात पिछले साल सितंबर की है। केरल में वायनाड के थिरुनेली एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के किसान और सीईओ राजेश कृष्णन ने यहां धान की फसलों में कुछ अजीबो गरीब…
स्पोटेड पोटेटो लेडीबर्ड बीटल जो आलू, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचाता है। तस्वीर - arian.suresh/विकिमीडिया कॉमन्स।
दुसुमियर का मडस्किपर। बोलेओफथाल्मस दुसुमियरी। तस्वीर-वैथियानाथन कन्नन 

जमीन पर कूदने और रेंगने वाली मडस्किपर मछलियां

मडस्किपर एक अनोखे उभयचर मछलियों का समूह है जो इवोल्यूशन के अनुकूलन के एक चमत्कार के रूप में सामने आया है। ये दलदली इलाकों और मैंग्रोव वनों में रहती हैं।…
दुसुमियर का मडस्किपर। बोलेओफथाल्मस दुसुमियरी। तस्वीर-वैथियानाथन कन्नन 

बेंगलुरु के पार्कों का दोपहर में बंद होना और हाशिए पर रहने वाले कर्मचारियों पर इसका प्रभाव

इस साल अप्रैल महीने में बेंगलुरु में तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। फिर भी गार्डन सिटी के नाम से मशहूर इस शहर में कई सार्वजनिक बगीचों को तपती…
बड़वानी जिले के कुकरा राजघाट गांव की रहनेवाली सुमित्रा दरबार। यह गांव बड़वानी जिले की बड़वानी तहसील के बिरखेड़ा पंचायत में पड़ता है और पिछले साल की बाढ़ के दौरान टापू बन गया था। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे

सरदार सरोवर के जलस्तर में बदलाव से अधर में लटकी हजारों परिवारों की जिंदगियां

मध्य प्रदेश के धार जिले के एकलवाड़ा गाँव के 73 वर्षीय जगदीश सिंह तोमर को पिछले साल सितंबर में नर्मदा नदी में आई बाढ़ के बाद अपना पुश्तैनी मकान छोड़ना…
बड़वानी जिले के कुकरा राजघाट गांव की रहनेवाली सुमित्रा दरबार। यह गांव बड़वानी जिले की बड़वानी तहसील के बिरखेड़ा पंचायत में पड़ता है और पिछले साल की बाढ़ के दौरान टापू बन गया था। तस्वीर- राहुल सिंह/मोंगाबे
डिब्रूगढ़, असम में बाढ़। तस्वीर- अरुनभ0368/विकिमीडिया कॉमन्स 

जलवायु परिवर्तन के कारण मेघालय में चरम बारिश की घटनाएं चार गुना बढ़ी- अध्ययन

1979 के बाद से, चार दशकों में मेघालय राज्य सहित बांग्लादेश और भारत क्षेत्र के पूर्वोत्तर हिस्सों में एक दिन में होने वाली चरम बारिश की घटनाएं चार गुना बढ़…
डिब्रूगढ़, असम में बाढ़। तस्वीर- अरुनभ0368/विकिमीडिया कॉमन्स 
बाराजान पठार से बहने वाली एक प्राकृतिक जलधारा पर निर्माणाधीन एक छोटा बांध। तस्वीर-मैत्रेय पृथ्वीराज घोरपड़े

उत्तरी गोवा के गांवों में बढ़ती पानी की किल्लत, नए हवाई अड्डे को जिम्मेदार ठहराते लोग

पिछले कई दिनों से, हर सुबह उदय महाले एक उम्मीद के साथ अपने बाथरूम का नल खोलते हैं कि शायद आज उसमें पानी आ जाए। लेकिन ऐसा होता नहीं है।…
बाराजान पठार से बहने वाली एक प्राकृतिक जलधारा पर निर्माणाधीन एक छोटा बांध। तस्वीर-मैत्रेय पृथ्वीराज घोरपड़े
बर्लिन के एक चिड़ियाघर में तिलापिया मछली। जब इन्हें जंगली इलाकों में छोड़ा जाता है, तो समय के साथ तिलापिया की आबादी तेजी से बढ़ती जाती है, जो संभावित रूप से देशी मछली प्रजातियों को विस्थापित कर देती है। तस्वीर: उडो श्रोटर/विकिमीडिया कॉमन्स। 

मीठे पानी के जलाशयों के बाद समुद्री जल में डेरा डालती तिलापिया मछली

तिलापिया मछली पाक खाड़ी के तटीय जल में अपने लिए नई जगह बना रही हैं। वो न सिर्फ इस नए क्षेत्र में बस रही हैं बल्कि प्रजनन भी कर रही…
बर्लिन के एक चिड़ियाघर में तिलापिया मछली। जब इन्हें जंगली इलाकों में छोड़ा जाता है, तो समय के साथ तिलापिया की आबादी तेजी से बढ़ती जाती है, जो संभावित रूप से देशी मछली प्रजातियों को विस्थापित कर देती है। तस्वीर: उडो श्रोटर/विकिमीडिया कॉमन्स। 
रांची के एक अस्पताल में लगे एयर कंडीशनर। तस्वीर - विशाल कुमार जैन/मोंगाबे

छोटे शहरों में फैलता एयर कंडीशनर का बाजार, मौसम में तेज बदलाव से बढ़ती जरूरत

चंदन कुमार रांची में रहते हैं। एक साल पहले ही वह परिवार के साथ दिल्ली से झारखंड की राजधानी में शिफ्ट हुए हैं। चंदन रांची के जिस नामकुम इलाके में…
रांची के एक अस्पताल में लगे एयर कंडीशनर। तस्वीर - विशाल कुमार जैन/मोंगाबे
ऑटो के रियरव्यू मिरर पर बंधा हुआ तौलिया। ड्राइवर अक्सर गर्मी से राहत पाने के लिए अपना चेहरा ढकने के लिए गीले तौलिये या कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। तस्वीर - पल्लवी घोष।

भीषण लू से ऑटो रिक्शा चालकों की आय और स्वास्थ्य पर असर

दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में लू का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के वक्त छाया या घर में रहने की सलाह दी है। इस समय…
ऑटो के रियरव्यू मिरर पर बंधा हुआ तौलिया। ड्राइवर अक्सर गर्मी से राहत पाने के लिए अपना चेहरा ढकने के लिए गीले तौलिये या कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। तस्वीर - पल्लवी घोष।
सी बकथ्रॉन झाड़ी में एक लिंक्स। चंबा ने आठ अलग-अलग मौकों पर यूरेशियन लिंक्स को देखा और कई तस्वीरें खींचीं। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा

भारत में पाई जाने वाली दो जंगली बिल्लियाँ को मिला अंतर्राष्ट्रीय संरक्षण का दर्जा

भारत में पाई जाने वाली दो जंगली बिल्लियाँ - पलासेस कैट और मध्य एशियाई लिंक्स - को इस साल हुए 14वें  प्रवासी प्रजातियों (सीएमएस) के संरक्षण पर कन्वेंशन में जंगली…
सी बकथ्रॉन झाड़ी में एक लिंक्स। चंबा ने आठ अलग-अलग मौकों पर यूरेशियन लिंक्स को देखा और कई तस्वीरें खींचीं। तस्वीर- स्टैनज़िन चंबा

क्यों बढ़ रही हैं केरला के वायनाड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं

केरला का उत्तरी जिला वायनाड इस साल फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के कारण चर्चा में है। जिले में जंगली हाथियों के साथ संघर्ष में इस साल जनवरी और फरवरी…
नेपाल में कैमरा ट्रैप द्वारा ली गई बाघों की तस्वीर। तस्वीर सौजन्य: DNPWC/NTNC/Panthera/WWF/ZSL

नेपाल के बाघ वाले जंगल चितवन में भय और कठिनाइयों भरा जीवन

सूर्य प्रसाद पौडेल, 42 वर्षीय एक दुबले-पतले व्यक्ति, जिनकी नाक तीखी, आंखें धंसी हुई और चेहरे पर भूरे बाल हैं। वे अपने मिट्टी के घर के सामने डगमगाते हुए खड़े…
नेपाल में कैमरा ट्रैप द्वारा ली गई बाघों की तस्वीर। तस्वीर सौजन्य: DNPWC/NTNC/Panthera/WWF/ZSL
वधावन तट से शैलफिश और मोलस्क इकट्ठा करती मछुआरिन। तस्वीर - मीना मेनन।

मछुआरों के विरोध के बावजूद महाराष्ट्र में बंदरगाह परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी

महाराष्ट्र का वधावन गांव दहानू तालुका में स्थित है। यहां अंतर-ज्वारीय क्षेत्र पांच वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र हरे समुद्री शैवाल या उलवा और नरम मैरून और…
वधावन तट से शैलफिश और मोलस्क इकट्ठा करती मछुआरिन। तस्वीर - मीना मेनन।
भारत में पलास कैट की स्थिति के बारे में अभी तक कोई बहुत गहन शोध नहीं हुआ है। लेकिन यह भारत के पार-हिमालयी या ट्रांस-हिमालयी राज्यों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और सिक्किम में पाई जाती है और अभी तक जो रिकार्ड्स मिले हैं वहीँ से मिले हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर- निकोलस फिशर/विकिमीडिया कॉमन्स

[इंटरव्यू] हिमालयी क्षेत्रों में दिख रही पलासेस कैट के संरक्षण में क्या हैं चुनौतियां

पलासेस कैट या मनुल भारत में पाई जाने वाली जंगली बिल्लियों की प्रजातियों में से एक है। भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह प्रजाति बहुत ही शर्मीली…
भारत में पलास कैट की स्थिति के बारे में अभी तक कोई बहुत गहन शोध नहीं हुआ है। लेकिन यह भारत के पार-हिमालयी या ट्रांस-हिमालयी राज्यों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, और सिक्किम में पाई जाती है और अभी तक जो रिकार्ड्स मिले हैं वहीँ से मिले हैं। प्रतीकात्मक तस्वीर- निकोलस फिशर/विकिमीडिया कॉमन्स
सम गांव स्थित गोडावण कृत्रिम प्रजनन केन्द्र के बाहर गोडावण की प्रतिकृति। तस्वीर- कबीर संजय

[समीक्षा] गोडावण, अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करते एक पक्षी की कहानी

राजस्थान के जैसलमेर के आसपास पाए जाने वाले पक्षी गोडावण या ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का शिकार करने के लिए कभी लोग इसके अंडे या चूजे को ढूंढते थे। अगर ऐसा…
सम गांव स्थित गोडावण कृत्रिम प्रजनन केन्द्र के बाहर गोडावण की प्रतिकृति। तस्वीर- कबीर संजय
मुंबई में प्रदूषित समुद्र तट का नजारा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज़्यादा प्रदूषित देश है। साथ ही इसके इतिहास में पहली बार अमीरी और गरीबी के बीच सबसे ज्यादा अंतर देखा गया है। तस्वीर - वायन वोटा/फ़्लिकर।

भारत में अमीरों और गरीबों के उपभोग का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव अलग-अलग- अध्ययन

हाल ही में इकोलॉजिकल इकोनॉमिक्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भारतीयों का खान-पान पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभावों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। खास…
मुंबई में प्रदूषित समुद्र तट का नजारा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज़्यादा प्रदूषित देश है। साथ ही इसके इतिहास में पहली बार अमीरी और गरीबी के बीच सबसे ज्यादा अंतर देखा गया है। तस्वीर - वायन वोटा/फ़्लिकर।
कश्मीर का दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान कई वन्यजीवों का घर है। तस्वीर - मुदस्सिर कुलू।

कश्मीर में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष, वन्यजीवों को बचाना हुआ चुनौतीपूर्ण

घटना इस साल फरवरी महीने की है। कश्मीर वन्यजीव विभाग में काम करने वाले शब्बीर अहमद (अनुरोध पर बदला हुआ नाम) को किसी सहकर्मी ने फोन किया और उन्हें मध्य…
कश्मीर का दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान कई वन्यजीवों का घर है। तस्वीर - मुदस्सिर कुलू।
अपने बैलों के साथ सुंडी बाई उइके। बैल मोटे अनाज के सूखे डंठलों के चारों तरफ घूमते हैं। इस प्रक्रिया में अनाज के दाने डंठल से अगल हो जाते हैं। तस्वीर - शुचिता झा/मोंगाबे।

मोटे अनाज से क्यों दूर हो रहे हैं मध्य प्रदेश के आदिवासी?

सुंडी बाई उइके मध्य प्रदेश के मांडला जिले के केवलारी गांव में रहती हैं। गांव में उनकी झोपड़ी मिट्टी और गाय के गोबर से लीपकर बनाई गई है। झोपड़ी के…
अपने बैलों के साथ सुंडी बाई उइके। बैल मोटे अनाज के सूखे डंठलों के चारों तरफ घूमते हैं। इस प्रक्रिया में अनाज के दाने डंठल से अगल हो जाते हैं। तस्वीर - शुचिता झा/मोंगाबे।
ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स

विलायती बबूल की छाया में पनप रहे देसी शोला के पौधे

पश्चिमी घाट में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि विदेशी पेड़ों की छाया में शोला वनों की मूल प्रजातियों के पुनर्जनन यानी फिर से फलने फूलने की संभावना होती…
ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स
स्लॉथ भालू भारतीय उपमहाद्वीप के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में काफी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। तस्वीर- रुद्राक्ष चोदनकर/विकिमीडिया कॉमन्स 

स्लॉथ भालू के आवासों के लिए खतरा बनी आक्रामक पौधे की एक प्रजाति

गुजरात के जेसोर स्लोथ भालू अभ्यारण्य में हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह जानने की कोशिश की गई कि आक्रामक प्रजाति "प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा", शुष्क इलाके में स्लोथ भालू…
स्लॉथ भालू भारतीय उपमहाद्वीप के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में काफी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। तस्वीर- रुद्राक्ष चोदनकर/विकिमीडिया कॉमन्स