पर्यावरण से जुड़ी सुर्खियां

प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की खोज खबर। मोंगाबे एक गैर-लाभकारी संस्था है।

घर के भीतर नागराज। तस्वीर- अल्मास मसूद/मोंगाबे द्वारा फोटो।

[वीडियो] क्या सांप और इंसान बैंगलुरु जैसे शहर में साथ रह सकते हैं?

सूरज निकलते ही सांप भी निकल आता है। यह कहना है शौयब अहमद और यतीन कल्की का। दोनों अपने काम पर निकल रहे हैं। इनका काम है बैंगलुरु शहर में…
घर के भीतर नागराज। तस्वीर- अल्मास मसूद/मोंगाबे द्वारा फोटो।
उत्तराखंड स्थित हिमालय के जंगल। तस्वीर- पॉल हैमिल्टन/विकिमीडिया कॉमन्स

जैव विविधता संशोधन कानून का महत्व क्या है और क्यों हुआ इसका विरोध?

जैव विविधता संशोधन बिल (2021) फिलहाल संसदीय संयुक्त समिति के पास है। जैव विविधता कानून (2002) के कुछ प्रावधानों में संशोधन के वास्ते यह बिल अस्तित्व में आया। पूरी दुनिया…
उत्तराखंड स्थित हिमालय के जंगल। तस्वीर- पॉल हैमिल्टन/विकिमीडिया कॉमन्स
दार्जिलिंग में चाय के बगान। तस्वीर- व्याचेस्लाव अर्जेनबर्ग/विकिमीडिया कॉमन्स

देश में वनों की स्थिति: बढ़ रहा है पौधारोपण और घट रहे हैं वन

भारत सरकार ने हाल ही में वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 (आईएसएफआर) जारी किया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो साल पहले की तुलना में देश के वन क्षेत्र…
दार्जिलिंग में चाय के बगान। तस्वीर- व्याचेस्लाव अर्जेनबर्ग/विकिमीडिया कॉमन्स
प्लास्टिक कचरों के बीच प्लास्टिक बॉटल की तलाश में एक कचरा बीनने वाला। तस्वीर- कार्तिक चंद्रमौली/मोंगाबे

अर्थव्यवस्था पर भारी प्लास्टिक कचरे का गणित

वर्तमान सामाजिक व्यवस्था में कचरा भी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। 2012 में दुनिया में प्रति वर्ष 1.3 अरब टन नगरीय ठोस कचरा पैदा हुआ था। फिर 2018 में…
प्लास्टिक कचरों के बीच प्लास्टिक बॉटल की तलाश में एक कचरा बीनने वाला। तस्वीर- कार्तिक चंद्रमौली/मोंगाबे
सोलर पंप के साथ समूह की महिलाएं। भूजल संरक्षण के लिए इन सोलर पंप का इस्तेमाल सिर्फ सतही पानी को पंप करने में किया जा सकता है। तस्वीर- श्रीकांत चौधरी

अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में छोटे-छोटे कदम से सुनिश्चित हो रही महिलाओं की भागीदारी

कर्नाटक के बिंदूर स्थित एक डेयरी में इकतीस वर्ष की नागरत्ना मवेशियों के बीच काम में लगी हैं। वह एक जुगाड़ से बनी मशीन  खींच रही हैं। यह मशीन एक…
सोलर पंप के साथ समूह की महिलाएं। भूजल संरक्षण के लिए इन सोलर पंप का इस्तेमाल सिर्फ सतही पानी को पंप करने में किया जा सकता है। तस्वीर- श्रीकांत चौधरी
रांची और रामगढ जिले के बीच सिकदिरी घाटी में सड़क किनारे ऐसे बोर्ड लगे हुए हैं। तस्वीर- राहुल सिंह

झारखंड: खनन से हाथियों का गमन क्षेत्र हो रहा बाधित, बढ़ रही है सबकी मुश्किल

झारखंड के चेड़गा उरांव अब इस दुनिया में नहीं हैं। 55 साल के उरांव 9 नवंबर, 2021 को गुमला जिले के रायकेरा गांव के अपने घर से धान कटाई की…
रांची और रामगढ जिले के बीच सिकदिरी घाटी में सड़क किनारे ऐसे बोर्ड लगे हुए हैं। तस्वीर- राहुल सिंह
अधिकतर विकसित देश अपना प्लास्टिक कचरा रिसाइकलिंग के लिए बांग्लादेश भेजते हैं। यहां अधिकतर कचरा खुले में या फिर नदियों में जा मिलता है। तस्वीर- मारूफ रहमान/पिक्साबे

प्‍लास्टिक की जीवन यात्रा: जन्‍म से नायक, लावारिस मौत, दैत्‍य के रूप में पुनर्जन्‍म

प्‍लास्टिक हमारे जीवन में किसी बॉलीवुड फिल्म के नायक की तरह आता है। सर्वगुण संपन्न। अनेक जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त, कम लागत में तैयार हो जाने वाला समाधान। इससे…
अधिकतर विकसित देश अपना प्लास्टिक कचरा रिसाइकलिंग के लिए बांग्लादेश भेजते हैं। यहां अधिकतर कचरा खुले में या फिर नदियों में जा मिलता है। तस्वीर- मारूफ रहमान/पिक्साबे
झारखंड के खूंटी जिले के जादुर अखाड़ा में आदिवासी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए।तस्वीर- संजय वर्मा

झारखंडः पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट से एक बार फिर क्यों उठने लगी पेसा कानून की मांग

वैसे तो झारखंड में 2020 के दिसंबर में ही पंचायत चुनाव होना था। लेकिन 2022 के जनवरी में भी पंचायत चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दूसरी…
झारखंड के खूंटी जिले के जादुर अखाड़ा में आदिवासी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए।तस्वीर- संजय वर्मा
बिहार के गया जिले में मुख्यमंत्री सौर पंप योजना के तहत लगा सोलर पंप। तस्वीर- मनीष कुमार

दो साल बीते, बिहार अब भी सोलर पंप पर सब्सिडी वाले प्रधानमंत्री कुसुम योजना के इंतजार में

बिहार के गया जिले के बाघर गांव में रहने वाले जगदेव प्रसाद के पास कुल 3.5 एकड़ खेती की जमीन है जिसमें खेती कर वे अपने और अपने परिवार का…
बिहार के गया जिले में मुख्यमंत्री सौर पंप योजना के तहत लगा सोलर पंप। तस्वीर- मनीष कुमार
सुखेत मॉडल के तहत गांव के किसानों से 1200 किलो गोबर और खेतों-घरों से निकलने वाला कचरा लिया जाता है। इन किसानों को बदले में रसोई गैस सिलेंडर के लिए पैसे दिए जाते हैं। तस्वीर- राहुल कुमार गौरव

जैविक खेती में बिहार के सुखेत मॉडल से कैसा दिखता है भविष्य?

बिहार के जैविक पंचायत के नाम से मशहूर सुखेत पंचायत के रहने वाले सत्तन यादव खेत खाली होने के बाद भी कई दिनों तक गेंहू की बुआई नहीं कर पाये…
सुखेत मॉडल के तहत गांव के किसानों से 1200 किलो गोबर और खेतों-घरों से निकलने वाला कचरा लिया जाता है। इन किसानों को बदले में रसोई गैस सिलेंडर के लिए पैसे दिए जाते हैं। तस्वीर- राहुल कुमार गौरव