- 13 मई को उत्तर प्रदेश में आई तेज आंधी में 117 लोगों की मौत हुई और 79 लोग घायल हुए। कई प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें SMS या किसी अन्य माध्यम से मौसम की चेतावनी नहीं मिली, जिससे वे खतरे से अनजान रहे।
- अचानक आई आंधी ने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया। कई लोगों का कहना है कि उन्हें SMS या किसी अन्य माध्यम से मौसम की चेतावनी नहीं मिली।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसी आंधियों का अनुमान लगाने के लिए रियल-टाइम स्थानीय डेटा जरूरी है, जबकि अभी पूर्वानुमान के लिए हाइपरलोकल डेटा हर छः घंटे में इकट्ठा होता है।
- उत्तर प्रदेश जैसी ही तेज आंधी तीन हफ्ते बाद दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आंधियां आगे और आम हो सकती हैं।
आंधी में टिन की छतें उड़ जाना असामान्य नहीं है, लेकिन इस मई उत्तर प्रदेश में हवा इतनी तेज चली कि उसने सिर्फ टिन शेड ही नहीं उड़ाया, बल्कि एक वयस्क व्यक्ति को भी 50 फीट से ज्यादा ऊपर उछाल दिया।
बरेली जिले के रहने वाले नन्हे मियां मक्के के खेत में जा गिरे। इस हादसे में उनकी एक हड्डी टूट गई और कुछ मामूली चोटें भी आईं। एक दिन बाद जारी सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मई की इस आंधी में पूरे राज्य में 79 लोग घायल हुए और 117 लोगों की मौत हुई। यह ऐसी घटना थी जिसके लिए राज्य तैयार नहीं था, क्योंकि मौसम पूर्वानुमान इसकी गंभीरता का सही अंदाजा नहीं लगा सका था।
मौसम चेतावनी में अधिकतम हवा की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान था, लेकिन सात जिलों में हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से ऊपर चली गई। बरेली और प्रयागराज जिलों में यह रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।
जिन इलाकों के लिए हल्की या मध्यम आंधी-तूफान का अनुमान जताया गया था, वहां गंभीर आंधी आई। वहीं, जिन इलाकों के लिए गंभीर आंधी का अनुमान था, वहां बहुत गंभीर आंधी देखी गई।
सटीक चेतावनी लोगों को सावधान रहने का मौका देती है और प्रशासन को जान-माल के नुकसान को कम करने में मदद करती है। लेकिन 13 मई को आकाशीय बिजली, पेड़ों के गिरने और बिजली के खंभों के उखड़ने से कई लोग मारे गए और घायल हुए। इनमें से कई लोग घरों से बाहर थे और आने वाली आंधी से अपनी जान को होने वाले गंभीर खतरे से अनजान थे।
मिर्जापुर जिले के सेमरा गांव के रहने वाले सचिन सिंह ने मोंगाबे-हिंदी को बताया कि उनके पिता एक शादी से घर लौट रहे थे, तभी उनकी कार पर एक पेड़ गिर गया। उन्होंने बताया कि उनके पिता को नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
उन्नाव जिले के बाबाखेड़ा गांव के जगदीश यादव ने इस आंधी में अपने आठ साल के बेटे को खो दिया। उन्होंने बताया कि उनका बेटा अपने दादा के घर जा रहा था, तभी अचानक ओलावृष्टि और 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की तेज हवा चली। बचने के लिए वह एक पेड़ के नीचे खड़ा हो गया, लेकिन वही पेड़ उस पर गिर गया और उसकी जान चली गई। करीब 20 मिनट चली इस आंधी ने उन्नाव में छः लोगों की जान ले ली।
राज्य सरकार ने आंधी में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए चार लाख रुपए के मुआवजे की घोषणा की है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों, प्रयागराज में 23, मिर्जापुर में 19 और भदोही में 16 मौतें हुईं। इन तीन जिलों में कुल मौतों का लगभग आधा हिस्सा दर्ज किया गया। इन जिलों के कई मौसम निगरानी केंद्रों पर हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक दर्ज की गई।
इस आंधी में 177 मवेशियों की भी मौत हुई और 330 मकान आंशिक या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए।

अलर्ट सिस्टम कैसे काम करता है?
2 मई को भारत सरकार ने मोबाइल फोन पर आपातकालीन अलर्ट भेजने की अपनी व्यवस्था का सफल परीक्षण किया था। इस परीक्षण से यह साफ हुआ कि सरकार अब नागरिकों के मोबाइल फोन पर तेज बीप के साथ कई भाषाओं में आपातकालीन चेतावनी और टेक्स्ट मैसेज भेज सकती है। देशभर में लागू इस अलर्ट सिस्टम का मकसद शुरुआती चेतावनी को रियल-टाइम में लोगों तक पहुंचाना है।
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के खरगसेन गांव के रहने वाले बुद्ध सेन ने मोंगाबे-हिंदी को बताया कि उनके परिवार को 13 मई की आंधी के बारे में SMS या किसी अन्य माध्यम से कोई अलर्ट नहीं मिला। उन्होंने कहा कि मौसम से जुड़े SMS अपडेट 13 मई के बाद ही आने शुरू हुए।
इस आंधी में उनके घर पर पेड़ गिर गया, जिससे उनकी भाभी और छः महीने व छः साल की दो भतीजियों की मौके पर ही मौत हो गई। उनके चार साल और आठ साल के दो भतीजे गंभीर रूप से घायल हैं।
सेन की तरह, आंधी में अपने परिवार के सदस्यों को खोने वाले सचिन सिंह और जगदीश यादव ने भी मोंगाबे-हिंदी को बताया कि उन्हें इस आंधी के बारे में कोई अलर्ट नहीं मिला था। हालांकि, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आंधी के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के अलग-अलग इलाकों में मध्यम आंधी-तूफान, जिसमें हवा की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती थी, को लेकर रेड अलर्ट SMS के जरिए भेजा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 12:44 बजे से शाम 6:40 बजे के बीच 12 बार में 7.4 करोड़ से अधिक ऐसे SMS भेजे गए।

आंधी का सही अनुमान क्यों नहीं लगा?
इन अलर्ट को लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की है, लेकिन मौसम से जुड़ी अहम घटनाओं की जानकारी के लिए वह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पर निर्भर करता है। आंधी की तीव्रता का सही अनुमान क्यों नहीं लगाया जा सका, इस बारे में मोंगाबे-हिंदी के सवालों का IMD ने जवाब नहीं दिया। हालांकि, IMD के पूर्व महानिदेशक और वरिष्ठ जलवायु वैज्ञानिक के.जे. रमेश ने डेटा जुटाने की प्रक्रिया में एक कमी की ओर इशारा किया, जो इसकी एक वजह हो सकती है।
उन्होंने कहा, “जब किसी घटना की तीव्रता का सही अनुमान नहीं लग पाता, तो निश्चित रूप से कोई न कोई डेटा बिंदु छूट रहा होता है।”
रमेश ने समझाया कि मौसम पूर्वानुमान IMD को भेजे जाने वाले स्थानीय डेटा की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। उनके मुताबिक, राज्यों से IMD को डेटा रियल-टाइम में मिलना चाहिए, लेकिन फिलहाल यह सही छः-छः घंटे के अंतराल पर भेजा जाता है।
उन्होंने कहा, “अगर आप हाइपरलोकल स्तर पर किसी घटना की गंभीरता को पकड़ना चाहते हैं, तो समय पर मिलने वाला हाइपरलोकल डेटा IMD के मॉडलिंग सिस्टम में पहुंचना जरूरी है।”

रमेश ने कहा कि पहले आंधियों की रफ्तार आमतौर पर 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती थी। उन्होंने जोड़ा कि जलवायु परिवर्तन के कारण गंभीर और स्थानीय स्तर पर बनने वाली आंधियां और ज्यादा तीव्र व आम हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर उन्होंने 7 जून को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बिना चेतावनी आई ऐसी ही आंधी का जिक्र किया। यह आंधी उत्तर प्रदेश की घटना के तीन हफ्ते बाद आई थी। तीन मिनट चली इस आंधी में हवा की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई और तीन विमानों को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने कहा, “एक बार रडार नेटवर्क 24 घंटे काम करने लगे, तो तेजी से बढ़ती तीव्रता की निगरानी, पहचान और पूर्वानुमान पूरी तरह संभव है।” मौजूदा रडार नेटवर्क देश के 87 प्रतिशत से अधिक भूभाग को कवर करता है और IMD को चक्रवात, बारिश और आंधी-तूफान का पूर्वानुमान लगाने में मदद करता है। सरकार का ‘मिशन मौसम’ IMD की पूर्वानुमान क्षमता मजबूत करने के लिए रडार की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
आपदा से निपटने की तैयारी
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष वर्मा ने मोंगाबे-हिंदी को बताया कि सरकार हर गांव में ‘आपदा मित्र’ की टीम तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि ये आपदा मित्र हाइपरलोकल स्तर पर आपदा प्रबंधन का काम करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में सिर्फ बचाव और राहत कार्य ही नहीं, बल्कि रोकथाम से जुड़े कदम भी शामिल होंगे, जैसे संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित आश्रय स्थलों में पहुंचाना।
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वर्मा ने चरम मौसम की घटनाओं के लिए प्रशासन की मौजूदा मानक संचालन प्रक्रिया के बारे में भी बताया। उन्होंने मोंगाबे-हिंदी को बताया कि सरकार डिजिटल और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से लोगों को अलर्ट करती है। उनके मुताबिक, अलर्ट तुरंत सरकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और गांवों के पदाधिकारियों व जमीनी कार्यकर्ताओं वाले वॉट्सऐप समूहों में साझा किया जाता है। तेज और व्यापक प्रसार के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मदद ली जाती है। पुलिस रिस्पॉन्स वाहन अपने पब्लिक एड्रेस सिस्टम से घोषणाएं करते हैं और उपलब्ध दूसरे पब्लिक एड्रेस सिस्टम का भी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि जिला जनसंपर्क कार्यालय में इस काम की निगरानी के लिए एक समर्पित वॉर रूम है।
हालांकि, आंधी में अपने परिजनों को खोने वाले ऊपर बताए गए लोगों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनके इलाके में इन प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं। उन्होंने बताया कि न तो उन्होंने किसी पब्लिक एड्रेस सिस्टम से चेतावनी सुनी और न ही उन्हें वॉट्सऐप या SMS पर कोई अलर्ट मिला।
बैनर तस्वीरः उत्तर प्रदेश के सेवला गाँव में धूल भरी आँधी के कारण घर की दीवारें और छत ढहने के बाद, कंक्रीट का मलबा साफ करता एक व्यक्ति। 130 किमी/घंटा की रफ्तार से आए भीषण तूफान ने सैकड़ों घरों, फसलों और मवेशियों को भारी नुकसान पहुँचाया। (एपी फोटो/पवन शर्मा)