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84 खबरें

हॉर्नबिल के जीनोम ने खोले अतीत के राज, हिम युग में घटी थी आबादी

कान्हा के बाद सतपुड़ा बना बारहसिंगा का घर, बढ़ रही आबादी

महाराष्ट्र में तेंदुओं को लगेगा ‘बर्थ कंट्रोल टीका’, क्या कम होगा टकराव?

छत्तीसगढ़ के जंगलों की कीमत 1.41 लाख करोड़, फिर जीडीपी में क्यों नहीं दिखता पूरा हिसाब?

सात साल में तीन गुना हुआ बिहार का ग्रीन बजट, पर्यावरण के नतीजे अब भी कमजोर

शहरों में कौन से पेड़ उग रहे हैं? नीम, अमरूद और अरंडी समेत 742 प्रजातियों की विविधता

मधुमक्खी के बक्सों से आदिवासी महिलाओं की जिंदगी में नई मिठास

भारत की पहली बार बनी जुगनुओं की चेकलिस्ट, दर्ज हुईं 92 प्रजातियां

नेपाल की औद्योगिक और घरेलू गंदगी बिहार में कैसे लाती है सिरसिया नदी

दिल्ली विश्वविद्यालय का कार्बन गार्डन दिखाता है शहरी हरियाली का नया रास्ता

बाजार की अनिश्चितता से औषधीय पौधों के संग्रह पर असर (कमेंट्री)

पेड़ों की जगह मोबाइल टावरों पर घोंसले बना रहीं समुद्री चीलें, लेकिन बढ़ रहा खतरा

डीएनए विश्लेषण से खुलासा: रणथंभौर के बाघों के भोजन में मवेशियों की बड़ी हिस्सेदारी

भारत में पेड़ लगाने की रफ्तार तेज, फिर भी कमजोर असर

वैज्ञानिकों ने बिच्छुओं की प्रजाति से जुड़ी 110 साल पुरानी गलती को सुधारा, एक नई प्रजाति की भी खोज की

बंदीपुर टाइगर रिजर्व में घास की कमी, गौर और बाघ दोनों के लिए चिंता

पोखरा एयरपोर्ट पर एक पक्षी विज्ञानी का पहरा, गिद्धों और विमानों को बचाने की जद्दोजहद

[कॉमेंट्री] बहराइच में क्यों नाकाम हो रहे हैं पारंपरिक संरक्षण के तरीके?

कोहरा, तेज रफ्तार और लापरवाही, असम में ट्रेन से कुचल गए आठ हाथी

अपना इलाका स्थापित करने निकले बाघों के व्यवहार की निगरानी

दुनिया को चलाने वाले छोटे-छोटे कीटों के लिए अनोखा रिसर्च सेंटर

संरक्षणवादी और आशा की संदेशवाहक जेन गुडाल का 91 वर्ष की आयु में निधन [श्रद्धांजलि]

किसानों का मित्र मद्रास हेजहॉग, लेकिन घटती संख्या बढ़ा रही चिंता

हिम तेंदुओं की बढ़ रही तादाद, सर्वे से जगी उम्मीद

हिमालय पिका को रहता है सर्दियों के लिए मौसम के संकेतों का इंतजार

जागरूकता फैलाने के लिए कंटेंट क्रिएटर बने जीवविज्ञानी

लद्दाख: आम नागरिकों की पहल से कारगर हो रहा वन्यजीव संरक्षण

मधुमक्खी और तितली जैसे कीड़े-मकोड़ों के कम होने का असर इंसानों पर भी, हर साल मर रहे पांच लाख लोग

[वीडियो] समान सिंचाई के मॉडल से बदलती महाराष्ट्र के इस सूखाग्रस्त क्षेत्र की तस्वीर

कॉप15: साल 2030 तक 30% जैव-विविधता को बचाने पर भारत का जोर, सहमति बनाना बड़ी चुनौती