Articles by Alok Prakash Putul

छत्तीसगढ़ के पारिस्थितिकी तौर पर संवेदनशील क्षेत्र एन कोयला खनन को लेकर हमेशा विवाद रहा है। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल

छत्तीसगढ़ में कोयला खनन: दो रिपोर्ट, दो सिफारिश और सरकारी खेल

क्या छत्तीसगढ़ में, पर्यावरण और वन्यजीवों को लेकर शोध संस्थाओं की चेतावनी को हाशिये पर रखते हुए कोयला खनन को मंजूरी दी जा रही है? भारतीय वन्यजीव संस्थान की ताज़ा…
छत्तीसगढ़ के पारिस्थितिकी तौर पर संवेदनशील क्षेत्र एन कोयला खनन को लेकर हमेशा विवाद रहा है। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

[वीडियो] छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों के लिए छोड़ा जा रहा धान, जानकारों को अजीब लग रहा यह फैसला

सरगुजा ज़िले के मैनपाट के बरपारा के लोकनाथ यादव अपने टूटे हुए घर के सामने खड़े हो कर यही सोच रहे हैं कि अब इस बरसात में टूटे घर की…
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल
छत्तीसगढ़ में 2014 की गणना में राज्य में 46 बाघ थे, जबकि 2018 की गणना में लगभग 19 बाघों के होने का अनुमान है। तस्वीर- पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़

[वीडियो] छत्तीसगढ़ में बाघ संरक्षण की बढ़ती चुनौती: राज्य के तीनों टाइगर रिजर्व अब माओवादी क्षेत्र में

छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व में भी अब माओवादी गतिविधियों का ख़तरा मंडराने लगा है।  केंद्र सरकार ने हाल ही में राज्य के मुंगेली को माओवाद प्रभावित ज़िलों में शामिल…
छत्तीसगढ़ में 2014 की गणना में राज्य में 46 बाघ थे, जबकि 2018 की गणना में लगभग 19 बाघों के होने का अनुमान है। तस्वीर- पर्यटन विभाग, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के इंद्रावती नदी का चित्रकोट वाटरफाल। चार दशक पहले इंद्रावती नदी पर ही बोधघाट बांध बनना तय हुआ था। छत्तीसगढ़ सरकार इसे पुनः शुरू करने जा रही है। तस्वीर: Ishant46nt/विकिमीडिया कॉमनस

मार्फत बोधघाट परियोजना, छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज और कांग्रेस सरकार के ढाई साल

बस्तर के ककनार गांव के चैतराम इस बात से नाराज़ हैं कि आदिवासियों के विरोध के बाद भी राज्य सरकार बार-बार बस्तर में बोधघाट इंदिरा सरोवर जल विद्युत परियोजना को…
छत्तीसगढ़ के इंद्रावती नदी का चित्रकोट वाटरफाल। चार दशक पहले इंद्रावती नदी पर ही बोधघाट बांध बनना तय हुआ था। छत्तीसगढ़ सरकार इसे पुनः शुरू करने जा रही है। तस्वीर: Ishant46nt/विकिमीडिया कॉमनस
छत्तीसगढ़: धान के खेतों में वृक्षारोपण से किसका भला करना चाहती है सरकार!

छत्तीसगढ़: धान के खेतों में वृक्षारोपण से किसका भला करना चाहती है सरकार!

एक तरफ छत्तीसगढ़ में अन्य राज्यों की तरफ खाद्य सुरक्षा का संकट है तो दूसरी तरफ राज्य सरकार किसानों को अपने खेत में वृक्षारोपण करने के लिए प्रोत्साहित कर रही…
छत्तीसगढ़: धान के खेतों में वृक्षारोपण से किसका भला करना चाहती है सरकार!
छत्तीसगढ़: करोड़ों खर्च, क्लोनिंग आदि किए बाद भी नहीं हो पा रहा वनभैंसों का संरक्षण

छत्तीसगढ़: करोड़ों के खर्च, क्लोनिंग के बाद भी नहीं हो पा रहा वनभैंस का संरक्षण

छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंस ख़तरे में है। सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी राज्य में वनभैंस की वंश वृद्धि नहीं हो पा रही है। क्लोनिंग से लेकर असम…
छत्तीसगढ़: करोड़ों खर्च, क्लोनिंग आदि किए बाद भी नहीं हो पा रहा वनभैंसों का संरक्षण

लघु वनोपज संग्रहण का मॉडल राज्य छत्तीसगढ़ में कितनी सुधरी आदिवासियों की स्थिति?

छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले के पतुरियाडांड के सरपंच उमेश्वर सिंह आर्मो को उम्मीद नहीं है कि इस साल वनोपज संग्रहण का कोई लाभ गांव के लोगों को मिल पाएगा।  इस…
हसदेव अरण्य में लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार

[वीडियो] हसदेव अरण्य और लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार

कोरबा ज़िले की पतुरियाडांड के सरपंच उमेश्वर सिंह आर्मो को 15 जून 2015 को मदनपुर में कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी का वह वादा याद है, जिसमें उन्होंने कहा…
हसदेव अरण्य में लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार
गोधन न्याय योजना के तहत छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की द्रौपदी के पास 65 गाय हैं। वह हर महीने सरकार को गोबर बेचती हैं। तस्वीर- डीपीआर छत्तीसगढ़

[वीडियो] छत्तीसगढ़ के गोबर खरीद योजना को केंद्र से मिली वाहवाही लेकिन जमीन पर नहीं मिल रहे खरीदार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनों इस बात से ख़ुश हैं कि राज्य में गोबर ख़रीदी की जिस महत्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना का विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने…
गोधन न्याय योजना के तहत छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की द्रौपदी के पास 65 गाय हैं। वह हर महीने सरकार को गोबर बेचती हैं। तस्वीर- डीपीआर छत्तीसगढ़
देश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ वन संपदा को नुकसान हुआ है बल्कि वहां के स्थानीय लोगों पर भी खनन का दुष्प्रभाव दिखता है। तस्वीर- गुरविंदर सिंह

छत्तीसगढ़ और कोयला खनन: पेसा कानून की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, सरकार और ग्रामीण आमने-सामने

तो क्या आदिवासियों के संरक्षण के लिए 1996 में लागू किया गया पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) क़ानून का कोई अर्थ नहीं रह गया है? कम से कम…
देश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ वन संपदा को नुकसान हुआ है बल्कि वहां के स्थानीय लोगों पर भी खनन का दुष्प्रभाव दिखता है। तस्वीर- गुरविंदर सिंह