जलवायु परिवर्तन News

[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?

[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?

इक्कसवीं सदी के पहले दशक के मध्य में, मैं हैदराबाद से दूर, पाटनचेरू में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान के वैश्विक मुख्यालय में कार्यरत था। इस संस्था का…
[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?
बहस नेट जीरो की: कार्बन उत्सर्जन की लड़ाई में भारत के राज्य कहां खड़े हैं!

बहस नेट जीरो की: कार्बन उत्सर्जन की लड़ाई में भारत के राज्य कहां खड़े हैं!

संयुक्त राज्य अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के आह्वान पर, अप्रैल में लगभग 40 देशों ने नेट-जीरो हासिल करने के लिए समय-सीमा की घोषणा की। भारत के प्रधानमंत्री…
बहस नेट जीरो की: कार्बन उत्सर्जन की लड़ाई में भारत के राज्य कहां खड़े हैं!
कोविड के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रम से जैव-विविधता और इसके संरक्षण की बढ़ी उम्मीद

कोविड के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रम से जैव-विविधता और इसके संरक्षण की बढ़ी उम्मीद

जैव-विविधता वैसे तो हमारे जीवन को वृहत्तर तौर पर प्रभावित करती है पर आम-जन में इसकी चर्चा कम ही होती है। जब से कोरोना महामारी ने इंसानी समाज को अपने…
कोविड के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रम से जैव-विविधता और इसके संरक्षण की बढ़ी उम्मीद
बिहार: अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी साबित हो रहा रुकतापुर, 4 साल में महज 0.5 प्रतिशत लक्ष्य हुआ हासिल

अक्षय ऊर्जा: यहां भी बिहार साबित हो रहा रुकतापुर, 4 साल में 0.5% लक्ष्य हुआ हासिल

इस वक्त कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जब पूरे देश में कोरोना के इलाज के लिए अस्पतालों में एक सीट नहीं मिल रही, ऐसे में बिहार के एक छोटे…
बिहार: अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी साबित हो रहा रुकतापुर, 4 साल में महज 0.5 प्रतिशत लक्ष्य हुआ हासिल
[फ़ोटो] पश्चिम बंगाल में गंगा नदी की कटाई से बेहाल हैं लोग

[फ़ोटो] पश्चिम बंगाल में गंगा नदी की हर साल बढ़ती कटाई से बेहाल हैं लोग

मुर्शिदाबाद जिले के धनघरा गांव के लोग पिछले साल आधी रात आए सैलाब को चाहकर भी भूल नहीं पा रहे हैं। गांव वालों पर गंगा का रौद्र रूप कहर बनकर…
[फ़ोटो] पश्चिम बंगाल में गंगा नदी की कटाई से बेहाल हैं लोग
पेट्रोल-डीजल से होती है सरकार को मोटी कमाई, फिर कैसे होगा एनर्जी ट्रांजिशन!

पेट्रोल-डीजल से होती है सरकार को मोटी कमाई, फिर कैसे होगा एनर्जी ट्रांजिशन!

हाल में हुए पेट्रोल-डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि ने कई तरह के सवाल खड़े किए। तब भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े रहे जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की…
पेट्रोल-डीजल से होती है सरकार को मोटी कमाई, फिर कैसे होगा एनर्जी ट्रांजिशन!

[कमेंट्री] स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य: सिर्फ मंजिल नहीं रास्तों की भी करनी होगी परवाह

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के पदभार संभालने के बाद, जलवायु परिवर्तन भारत और अमरीका के संबंधों के बीच फिर से एक धुरी बनकर उभर रहा है। चतुर्भुज सुरक्षा संवाद…
सिमलीपाल जंगल में लगी आगः वन विभाग या वनवासी, कौन है जिम्मेवार?

सिमलीपाल जंगल में लगी आगः वन विभाग या वनवासी, कौन है जिम्मेवार?

ओडिशा के सिमलीपाल राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व में भीषण आग लगी हुई है। वन विभाग तकरीबन एक महीने से यहां आग बुझाने की कोशिश कर रहा है पर सफलता…
सिमलीपाल जंगल में लगी आगः वन विभाग या वनवासी, कौन है जिम्मेवार?
पत्लिकुहल में ट्राउट के बीज तैयार किए जाते हैं। यह प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी फार्म है। तस्वीर- पार्थिव हल्दीपुर/फ्लिकर

हिमाचल के ट्राउट मछली पालक क्यों छोड़ने लगे अपना पेशा

“सब कुछ मेरे सामने हुआ। मैंने बाढ़ के पानी को टैंक की तरफ आते हुए देखा। बाढ़ के पानी के साथ सारी मछलियां बहकर जाने लगीं। मैंने बदहवास हो गया।…
पत्लिकुहल में ट्राउट के बीज तैयार किए जाते हैं। यह प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी फार्म है। तस्वीर- पार्थिव हल्दीपुर/फ्लिकर
सुभद्रा सान्याल और गीता मंडल सुंदरबन के सतजेलिया गांव में रहती हैं। दोनों महिलाओं के पति बाघ के हमले में मारे गए। गीता आज भी जंगल के उत्पादों से जीवन यापन करती हैं, लेकिन सुभद्रा के मन मस्तिष्क पर बाघ के हमले का गहरा असर हुआ और अब वह जंगल जाने से डरती हैं। तस्वीर- कार्तिक चंद्रमौली/मोंगाबे

सुंदरबन में भ्रांति और अनदेखी के बीच पिसती ‘बाघ विधवाएं’

रॉयल बंगाल टाइगर के घर सुंदरबन के सतजेलिया गांव में सूरज ढलते ही लोगों के बीच अजीब सी मायूसी छा जाती है। मछली और केकड़ा पकड़कर पेट पालने वाली गीता…
सुभद्रा सान्याल और गीता मंडल सुंदरबन के सतजेलिया गांव में रहती हैं। दोनों महिलाओं के पति बाघ के हमले में मारे गए। गीता आज भी जंगल के उत्पादों से जीवन यापन करती हैं, लेकिन सुभद्रा के मन मस्तिष्क पर बाघ के हमले का गहरा असर हुआ और अब वह जंगल जाने से डरती हैं। तस्वीर- कार्तिक चंद्रमौली/मोंगाबे