जलवायु परिवर्तन News

गोवा के पंजिम में एक पेड़ को मापते शोधकर्ता। तस्वीर: नंदिनी वेल्हो।

बड़े होते शहरों में सिकुड़ती हरियाली

इस साल की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी में किसी भी भारतीय शहर की सड़कों पर चलते हुए आपको चिलचिलाती गर्मी में चक्कर आ सकता है। हालांकि, पेड़ों से भरी सड़क पर…
गोवा के पंजिम में एक पेड़ को मापते शोधकर्ता। तस्वीर: नंदिनी वेल्हो।
सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 54 साल के देव प्रसाद अहिरवार जो हीटस्ट्रोक से बचने में सफल रहे। इलेस्ट्रेशन - हितेश सोनार/मोंगाबे।

भीषण गर्मी में तैनात सुरक्षा गार्ड के हीट-स्ट्रोक से बचने की कहानी

इस साल दिल्ली में गर्मी के दौरान लंबे समय तक चली लू में दिल्ली के अस्पतालों को एक कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा। जब हीट-स्ट्रोक से गंभीर रूप से…
सुरक्षा गार्ड की नौकरी करने वाले 54 साल के देव प्रसाद अहिरवार जो हीटस्ट्रोक से बचने में सफल रहे। इलेस्ट्रेशन - हितेश सोनार/मोंगाबे।
अप्रैल 2016 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चितई के पास चीड़ के जंगलों में लगी आग। फाइल तस्वीर- Ramwik/विकिमीडिया कॉमन्स

बकाया वेतन, संसाधनों का अभाव, जंगल की आग से कैसे लड़ेंगे उत्तराखंड के अग्नि प्रहरी

इस साल उत्तराखंड के लगभग सभी जिलों में वनाग्नि के मामले दर्ज किये गए। राज्य की दोनों प्रशासनिक इकाइयों में सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में उत्तरकाशी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून…
अप्रैल 2016 में उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के चितई के पास चीड़ के जंगलों में लगी आग। फाइल तस्वीर- Ramwik/विकिमीडिया कॉमन्स
नासिक जिले के किसान दिगंबर अशोक काटे अपने अंगूर के बागान की सुरक्षा प्लास्टिक कवर से करते हैं। तस्वीर- अरविंद शुक्ला।

अंगूर को अचानक बदलने वाले मौसम से बचाते हैं फसल के कवर

महाराष्ट्र के नासिक जिले में पिछले साल नवंबर में कई बार बेमौसम बारिश हुई और ओले भी पड़े। यह बारिश इतनी जोरदार थी कि सारे खेत ओलों से पट गए…
नासिक जिले के किसान दिगंबर अशोक काटे अपने अंगूर के बागान की सुरक्षा प्लास्टिक कवर से करते हैं। तस्वीर- अरविंद शुक्ला।
एकलव्य फाउंडेशन की ग्रीन बिल्डिंग धूप में पकाई गई मिट्टी और चूने से बनी ईंटो से बनी है जिस से यह दूसरी इमारतों के मुकाबले ठंडी रहती है। तस्वीर- एकलव्य फाउंडेशन

भोपाल की यह ईको-फ्रेंडली इमारत है पर्यावरण के लिए लाभकारी

मई और जून के महीनों में बाहर पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद भी भोपाल के एकलव्य फाउंडेशन के कर्मचारी एक पंखे के नीचे खुश हैं। उन्हें दूसरे दफ्तरों के…
एकलव्य फाउंडेशन की ग्रीन बिल्डिंग धूप में पकाई गई मिट्टी और चूने से बनी ईंटो से बनी है जिस से यह दूसरी इमारतों के मुकाबले ठंडी रहती है। तस्वीर- एकलव्य फाउंडेशन
स्पोटेड पोटेटो लेडीबर्ड बीटल जो आलू, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचाता है। तस्वीर - arian.suresh/विकिमीडिया कॉमन्स।

बढ़ते तापमान से बढ़ेगा फसलों पर कीटों का प्रभाव, पैदावार पर हो सकता है असर

बात पिछले साल सितंबर की है। केरल में वायनाड के थिरुनेली एग्री प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के किसान और सीईओ राजेश कृष्णन ने यहां धान की फसलों में कुछ अजीबो गरीब…
स्पोटेड पोटेटो लेडीबर्ड बीटल जो आलू, टमाटर, बैंगन और मिर्च की फसल को नुकसान पहुंचाता है। तस्वीर - arian.suresh/विकिमीडिया कॉमन्स।
डिब्रूगढ़, असम में बाढ़। तस्वीर- अरुनभ0368/विकिमीडिया कॉमन्स 

जलवायु परिवर्तन के कारण मेघालय में चरम बारिश की घटनाएं चार गुना बढ़ी- अध्ययन

1979 के बाद से, चार दशकों में मेघालय राज्य सहित बांग्लादेश और भारत क्षेत्र के पूर्वोत्तर हिस्सों में एक दिन में होने वाली चरम बारिश की घटनाएं चार गुना बढ़…
डिब्रूगढ़, असम में बाढ़। तस्वीर- अरुनभ0368/विकिमीडिया कॉमन्स 
रांची के एक अस्पताल में लगे एयर कंडीशनर। तस्वीर - विशाल कुमार जैन/मोंगाबे

छोटे शहरों में फैलता एयर कंडीशनर का बाजार, मौसम में तेज बदलाव से बढ़ती जरूरत

चंदन कुमार रांची में रहते हैं। एक साल पहले ही वह परिवार के साथ दिल्ली से झारखंड की राजधानी में शिफ्ट हुए हैं। चंदन रांची के जिस नामकुम इलाके में…
रांची के एक अस्पताल में लगे एयर कंडीशनर। तस्वीर - विशाल कुमार जैन/मोंगाबे
ऑटो के रियरव्यू मिरर पर बंधा हुआ तौलिया। ड्राइवर अक्सर गर्मी से राहत पाने के लिए अपना चेहरा ढकने के लिए गीले तौलिये या कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। तस्वीर - पल्लवी घोष।

भीषण लू से ऑटो रिक्शा चालकों की आय और स्वास्थ्य पर असर

दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में लू का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के वक्त छाया या घर में रहने की सलाह दी है। इस समय…
ऑटो के रियरव्यू मिरर पर बंधा हुआ तौलिया। ड्राइवर अक्सर गर्मी से राहत पाने के लिए अपना चेहरा ढकने के लिए गीले तौलिये या कपड़े का इस्तेमाल करते हैं। तस्वीर - पल्लवी घोष।
वधावन तट से शैलफिश और मोलस्क इकट्ठा करती मछुआरिन। तस्वीर - मीना मेनन।

मछुआरों के विरोध के बावजूद महाराष्ट्र में बंदरगाह परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी

महाराष्ट्र का वधावन गांव दहानू तालुका में स्थित है। यहां अंतर-ज्वारीय क्षेत्र पांच वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। यह क्षेत्र हरे समुद्री शैवाल या उलवा और नरम मैरून और…
वधावन तट से शैलफिश और मोलस्क इकट्ठा करती मछुआरिन। तस्वीर - मीना मेनन।
मुंबई में प्रदूषित समुद्र तट का नजारा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज़्यादा प्रदूषित देश है। साथ ही इसके इतिहास में पहली बार अमीरी और गरीबी के बीच सबसे ज्यादा अंतर देखा गया है। तस्वीर - वायन वोटा/फ़्लिकर।

भारत में अमीरों और गरीबों के उपभोग का पर्यावरण पर दुष्प्रभाव अलग-अलग- अध्ययन

हाल ही में इकोलॉजिकल इकोनॉमिक्स जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भारतीयों का खान-पान पर्यावरण पर होने वाले दुष्प्रभावों पर सबसे ज्यादा असर डालता है। खास…
मुंबई में प्रदूषित समुद्र तट का नजारा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज़्यादा प्रदूषित देश है। साथ ही इसके इतिहास में पहली बार अमीरी और गरीबी के बीच सबसे ज्यादा अंतर देखा गया है। तस्वीर - वायन वोटा/फ़्लिकर।
अपने बैलों के साथ सुंडी बाई उइके। बैल मोटे अनाज के सूखे डंठलों के चारों तरफ घूमते हैं। इस प्रक्रिया में अनाज के दाने डंठल से अगल हो जाते हैं। तस्वीर - शुचिता झा/मोंगाबे।

मोटे अनाज से क्यों दूर हो रहे हैं मध्य प्रदेश के आदिवासी?

सुंडी बाई उइके मध्य प्रदेश के मांडला जिले के केवलारी गांव में रहती हैं। गांव में उनकी झोपड़ी मिट्टी और गाय के गोबर से लीपकर बनाई गई है। झोपड़ी के…
अपने बैलों के साथ सुंडी बाई उइके। बैल मोटे अनाज के सूखे डंठलों के चारों तरफ घूमते हैं। इस प्रक्रिया में अनाज के दाने डंठल से अगल हो जाते हैं। तस्वीर - शुचिता झा/मोंगाबे।
ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स

विलायती बबूल की छाया में पनप रहे देसी शोला के पौधे

पश्चिमी घाट में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पाया कि विदेशी पेड़ों की छाया में शोला वनों की मूल प्रजातियों के पुनर्जनन यानी फिर से फलने फूलने की संभावना होती…
ब्लैक वेटल (अकेशिया मेरनसी)। तस्वीर- फॉरेस्ट और किम स्टार/विकिकिमीडिया कॉमन्स
हसदेव समुदाय की महिलाओं के साथ गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला। तस्वीर गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार के जरिए।

[इंटरव्यू] गोल्डमैन पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला ने कहा, “यह जल, जंगल, जमीन के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों का सम्मान”

छत्तीसगढ़ में पर्यावरण को बचाने के लिए काम करने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए 29 अप्रैल का दिन खास रहा। इस दिन राज्य के पर्यावरण कार्यकर्ता आलोक शुक्ला को संकटग्रस्त…
हसदेव समुदाय की महिलाओं के साथ गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार से नवाजे गए आलोक शुक्ला। तस्वीर गोल्डमैन पर्यावरण पुरस्कार के जरिए।
पृथ्वी का तापमान 1850-1900 के "पूर्व-औद्योगिक" औसत की तुलना में 1.5 और 2 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करना शुरू कर रहा है। इससे लोगों को गर्मी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तस्वीर-योगेंद्र सिंह/Pexels।

उफ़्फ़ ये गर्मी! क्यों बढ़ता ही जा रहा है पृथ्वी का पारा?

वैज्ञानिक शायराना अंदाज में कहते हैं, “धरती को बुखार हो गया है।” इसका मतलब यह है कि तापमान 1850-1900  के "औद्योगिक क्रांति से पहले" के औसत की तुलना में 1.5…
पृथ्वी का तापमान 1850-1900 के "पूर्व-औद्योगिक" औसत की तुलना में 1.5 और 2 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करना शुरू कर रहा है। इससे लोगों को गर्मी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। तस्वीर-योगेंद्र सिंह/Pexels।
देश से बाहर भेजने के लिए नमक की पैकेजिंग करते मजदूर। नमक उत्पादन को बेमौसम बारिश से बचाने के लिए यांत्रिक टर्बुलेशन, सौर पैनलों की मदद से गर्मी को रेगुलेट करने और खारे पानी के तापमान को बढ़ाने और वाष्पीकरण में मदद करने वाली रासायनिक रंगों जैसी तकनीकों का पता लगाया जा रहा है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे।

गुजरातः नमक उत्पादन पर अनिश्चित मौसम की मार, बढ़ रही लागत

आषाढ़ी बीज, कच्छी समुदाय का नया साल है। यह दिन गुजरात के कच्छ क्षेत्र में मानसून की शुरुआत का प्रतीक भी है। यह त्योहार जून के आखिर में आता है।…
देश से बाहर भेजने के लिए नमक की पैकेजिंग करते मजदूर। नमक उत्पादन को बेमौसम बारिश से बचाने के लिए यांत्रिक टर्बुलेशन, सौर पैनलों की मदद से गर्मी को रेगुलेट करने और खारे पानी के तापमान को बढ़ाने और वाष्पीकरण में मदद करने वाली रासायनिक रंगों जैसी तकनीकों का पता लगाया जा रहा है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे।
गर्मी के मौसम में दिल्ली के मयूर विहार में नारियल पानी बेचता एक व्यक्ति। तस्वीर- अंकुर जैन/विकीमीडिया कॉमन्स

[एक्सप्लेनर] हीटवेव में हो रही है बढ़ोतरी, क्या प्रभावी हैं भारत के हीट एक्शन प्लान?

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम की एक रिपोर्ट में सामने आया है कि दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अप्रैल में आई हीटवेव कई संवेदनशील और पिछले समुदायों के लिए…
गर्मी के मौसम में दिल्ली के मयूर विहार में नारियल पानी बेचता एक व्यक्ति। तस्वीर- अंकुर जैन/विकीमीडिया कॉमन्स
फरवरी 2024 में नोएडा में आयोजित सरस मेले में बांस के उत्पादों को दिखाता एक कारीगर। सरकार सरस आजीविका मेला जैसी पहलों के जरिए मार्केट लिंकेज पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं। तस्वीर-कुंदन पांडे/मोंगाबे।

बांस के जरिए कारीगरों के लिए बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश

ज्योत्सना देवनाथ का छोटी उम्र में पश्चिम त्रिपुरा के ब्रज नगर में नया सफर शुरू हुआ। यहां उनकी शादी हुई और वह एक ऐसे परिवार का हिस्सा बन गईं, जो…
फरवरी 2024 में नोएडा में आयोजित सरस मेले में बांस के उत्पादों को दिखाता एक कारीगर। सरकार सरस आजीविका मेला जैसी पहलों के जरिए मार्केट लिंकेज पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां कारीगर अपने उत्पादों का प्रदर्शन करते हैं। तस्वीर-कुंदन पांडे/मोंगाबे।
गोपाल सरकार अक्टूबर 2023 के बाद रेत और गाद से ढके अपने खेत को पुराने रूप में लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बाढ़  पड़ोसी राज्य सिक्किम से शुरू हुई थी और इसने पश्चिम बंगाल में तीस्ता नदी के किनारे जलपाईगुड़ी जिले के एक हिस्से पर असर डाला। तस्वीर - अरुणिमा कर।

सिक्किम की बाढ़ के बाद गाद और रसायनों से प्रभावित उत्तरी बंगाल के किसान

पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में जलपाईगुड़ी जिले के 54 वर्षीय किसान गोपाल सरकार को पिछली सर्दियों में सब्जियों की खेती करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उनका एक…
गोपाल सरकार अक्टूबर 2023 के बाद रेत और गाद से ढके अपने खेत को पुराने रूप में लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह बाढ़  पड़ोसी राज्य सिक्किम से शुरू हुई थी और इसने पश्चिम बंगाल में तीस्ता नदी के किनारे जलपाईगुड़ी जिले के एक हिस्से पर असर डाला। तस्वीर - अरुणिमा कर।
हाथ की चक्की पर बाजरे को पीसती हुई अट्टापडी में एक आदिवासी महिला। तस्वीर-मैक्स मार्टिन/मोंगाबे

लुप्त होती परंपरा बचाने के लिए केरल के आदिवासियों ने दोबारा शुरू की बाजरे की खेती

केरल के अट्टापडी हाइलैंड्स में आदिवासी बस्तियों के किनारे पहाड़ी जंगलों में एक बार फिर से बाजरा के लहलहाते खेत नजर आने लगे हैं। यह इलाका पश्चिमी घाट के वर्षा…
हाथ की चक्की पर बाजरे को पीसती हुई अट्टापडी में एक आदिवासी महिला। तस्वीर-मैक्स मार्टिन/मोंगाबे
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला

चामी मुर्मू: पेड़ और पानी से होते हुए पद्म श्री तक का सफर

32 साल में लगाए 30 लाख पेड़। हर दिन करीब 257 पौधे।   71 गांवों में चार अमृत सरोवर सहित कुल 217 तालाबों का निर्माण।  263 गांवों में बनाए 2873 स्वयं…
पहाड़ी नाली बनाने में अन्य मजदूरों का सहयोग करतीं चामी मुर्मू। पहाड़ पर जब बारिश होती है तो पानी तेजी से नीचे आता है, जिसे इस नाली की मदद से इकट्ठा किया जाता है। तस्वीर साभार- सहयोगी महिला
दिल्ली में धुंध वाली सर्दियों के एक दिन एक पुलिसकर्मी। तस्वीर- साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय भारत सरकार/विकिमीडिया कॉमन्स।

वायु प्रदूषण कम करने के लिए मॉनीटिरिंग बढ़ाने, सेहत को अहमियत देने की जरूरत: एक्सपर्ट

अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्ते में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और इसके आसपास के इलाकों को धुंधु की एक जहरीली परत ने ढक लिया था। इसी के साथ हर साल…
दिल्ली में धुंध वाली सर्दियों के एक दिन एक पुलिसकर्मी। तस्वीर- साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्रालय भारत सरकार/विकिमीडिया कॉमन्स।
दिसंबर 2022 में पश्चिमी नेपाल में आम कबूतरों का एक बड़ा झुंड देखा गया। झुंड कुछ ही दिनों में तितर-बितर हो गया। फोटो- हीरूलाल डंगौरा। 

नेपाल में कबूतरों के बड़े झुंड को लेकर क्यों हैरान हैं शोधकर्ता

नेपाल में तीन शोधकर्ता, हीरूलाल डंगौरा, विक्रम तिवारी और शुभम चौधरी, दिसंबर 2022 में नेपाल के पश्चिमी मैदानी इलाकों में गिद्धों की एक कॉलोनी पर नियमित शोध कर रहे थे।…
दिसंबर 2022 में पश्चिमी नेपाल में आम कबूतरों का एक बड़ा झुंड देखा गया। झुंड कुछ ही दिनों में तितर-बितर हो गया। फोटो- हीरूलाल डंगौरा। 
अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।

[वीडियो] याक के दूध से बनी चीजें ब्रोकपा समुदाय को दे रही आय के नए साधन

अरुणाचल प्रदेश के बाज़ारों में घूमते हुए आपको मौसमी कीवी, ख़ुरमा, मेवे वगैरह सहित कई तरह के स्थानीय व्यंजन मिल जाएंगे। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राज्य में आने…
अरुणाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले पहाड़ पर चराई करता याक। छुरपी जैसे याक के दूध से बनी चीजें याक पालने वाले ब्रोकपा पशुपालक समुदाय के लिए आजीविका का बेहतर विकल्प बन रहे हैं। तस्वीर - सुरजीत शर्मा/मोंगाबे।
भारत में एक आवास परिसर में लगी कुछ एयर कंडीशनिंग यूनिट। तस्वीर- डेविड ब्रॉसार्ड/विकिमीडिया कॉमन्स

मांग पूरी करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा में तीन गुना निवेश करने की जरूरत: रिपोर्ट

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) की ओर से हाल ही में जारी वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले तीन दशकों में दुनिया के हर देश और क्षेत्र…
भारत में एक आवास परिसर में लगी कुछ एयर कंडीशनिंग यूनिट। तस्वीर- डेविड ब्रॉसार्ड/विकिमीडिया कॉमन्स
गावों में खुले में चूल्हा  जिसमें आमतौर पर जलावन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बहुत ज्यादा धुआं निकलता है जिसमें बहुत ज्यादा बारीक कण (पीएम2.5) और ब्लैक कार्बन जैसे हानिकारक प्रदूषक होते हैं। तस्वीर - தகவலுழவன்/विकिमीडिया कॉमन्स। 

ब्लैक कार्बन: हवा को प्रदूषित करने के साथ ही वातावरण को कर रहा गर्म, पर नीति से गायब

वायुमंडल में ब्लैक कार्बन की बढ़ती मात्रा के चलते भारत और चीन जैसे एशियाई देशों में बहुत ज्यादा बारिश हो रही है। ब्लैक कार्बन उत्सर्जन भी बारिश के पैटर्न पर…
गावों में खुले में चूल्हा  जिसमें आमतौर पर जलावन का इस्तेमाल किया जाता है। इससे बहुत ज्यादा धुआं निकलता है जिसमें बहुत ज्यादा बारीक कण (पीएम2.5) और ब्लैक कार्बन जैसे हानिकारक प्रदूषक होते हैं। तस्वीर - தகவலுழவன்/विकिमीडिया कॉमन्स। 
मालिया मछली बाज़ार। जिंजर झींगा (मेटापेनियस कचेंसिस) कच्छ की खाड़ी की एक स्थानिक प्रजाति है और इसकी मछली पकड़ना यहां आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे

कच्छ में बढ़ते नमक उत्पादन से सिमट रहा झींगा कारोबार

गुजरात के कच्छ का सूरजबाड़ी ब्रिज डीजल का धुआं, धूल, ट्रक और ट्रेन की आवाज से आपका स्वागत करता है। आगे बढ़ने पर उस ब्रिज से नमक का मैदान दिखना…
मालिया मछली बाज़ार। जिंजर झींगा (मेटापेनियस कचेंसिस) कच्छ की खाड़ी की एक स्थानिक प्रजाति है और इसकी मछली पकड़ना यहां आजीविका का प्राथमिक स्रोत है। तस्वीर- रवलीन कौर/मोंगाबे
मोरोक्को, अफ्रीका में बिजली गिरने की घटना। प्रतीकात्मक तस्वीर- अब्देलहामिद बौ इखेसायेन/विकिमीडिया कॉमन्स।

ओडिशा में ताड़ का पेड़ लगाकर आकाशीय बिजली से बचने की तैयारी

ओडिशा के खोरदा जिले में 44 साल के सनोज पात्रा अपने एक एकड़ के धान के खेतों को देखने गए थे और उसी वक्त बिजली गिरने से वहीं पर उनकी…
मोरोक्को, अफ्रीका में बिजली गिरने की घटना। प्रतीकात्मक तस्वीर- अब्देलहामिद बौ इखेसायेन/विकिमीडिया कॉमन्स।
कश्मीर में बर्फ से सूनी पहाड़ी ढलानें। तस्वीर - मुदस्सिर कुल्लू।

कश्मीर में मौसमी बर्फबारी में कमी, जंगल, ग्लेशियर और नदी-झीलों पर पड़ेगा असर

जम्मू और कश्मीर में दिसंबर और जनवरी के महीनों में सूखा मौसम देखा गया। इससे क्षेत्र की जैव विविधता के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जानकार मौसम में…
कश्मीर में बर्फ से सूनी पहाड़ी ढलानें। तस्वीर - मुदस्सिर कुल्लू।
फुकरे-3 फिल्म का एक दृश्य जिसमें लोग टैंकर से पानी भरने के लिए गुत्म-गुत्था हो रहे हैं। तस्वीर साभार- एक्सेल इंटरटेनमेंट

लाइट, कैमरा, क्लाइमेट-एक्शन! पर्यावरण फिल्मों में बढ़ रही फिल्मकारों की दिलचस्पी

पानी का एक टैंकर खड़ा है और सैकड़ों लोग उसे घेरे खड़े हैं। गुत्थम-गुत्था हुए जा रहे हैं। चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं। टैंकर के पेट में सैकड़ों पाइप…
फुकरे-3 फिल्म का एक दृश्य जिसमें लोग टैंकर से पानी भरने के लिए गुत्म-गुत्था हो रहे हैं। तस्वीर साभार- एक्सेल इंटरटेनमेंट