खनन News

[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?

[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?

इक्कसवीं सदी के पहले दशक के मध्य में, मैं हैदराबाद से दूर, पाटनचेरू में मौजूद अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान के वैश्विक मुख्यालय में कार्यरत था। इस संस्था का…
[कॉमेंट्री] उदारीकरण के 30 साल: क्या कोविड-19 की दूसरी लहर भारतीय मध्य वर्ग की दिशा बदलेगी?
[वीडियो] खनन का दंश झेल रही महिलाएं पर इसकी चर्चा तक नहीं होती

[वीडियो] खनन का दंश झेल रही महिलाएं पर इसकी चर्चा तक नहीं होती

यह जगजाहिर है कि खनन की वजह से जमीन का ह्रास, रोजगार का संकट और जैव-विविधता पर बुरा असर हो रहा है। पर आस-पास रहने वाली महिलाएं भी इससे बुरी…
[वीडियो] खनन का दंश झेल रही महिलाएं पर इसकी चर्चा तक नहीं होती
हसदेव अरण्य में लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार

[वीडियो] हसदेव अरण्य और लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार

कोरबा ज़िले की पतुरियाडांड के सरपंच उमेश्वर सिंह आर्मो को 15 जून 2015 को मदनपुर में कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी का वह वादा याद है, जिसमें उन्होंने कहा…
हसदेव अरण्य में लेमरु हाथी रिजर्व: कोयले की चाह, सरकारी चक्र और पंद्रह साल का लंबा इंतजार
झारखंड में कोयला खदान से तहस-नहस हुई जमीन को वापस संवारने की कोशिश

[वीडियो] झारखंड: कोयला खदान से बर्बाद हुई जमीन के सुधार से सुधरी कई परिवारों की जिंदगी

बीते कुछ वर्षों में झारखंड के चतरा जिले की बेंती गांव निवासी कठपुतली देवी का जीवन बदला है। कुछ महीनों पहले तक गांव के समीप पिपरवार कोयला खदान की वजह…
झारखंड में कोयला खदान से तहस-नहस हुई जमीन को वापस संवारने की कोशिश
देश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ वन संपदा को नुकसान हुआ है बल्कि वहां के स्थानीय लोगों पर भी खनन का दुष्प्रभाव दिखता है। तस्वीर- गुरविंदर सिंह

छत्तीसगढ़ और कोयला खनन: पेसा कानून की अनदेखी पर फिर उठे सवाल, सरकार और ग्रामीण आमने-सामने

तो क्या आदिवासियों के संरक्षण के लिए 1996 में लागू किया गया पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) क़ानून का कोई अर्थ नहीं रह गया है? कम से कम…
देश के खनन प्रभावित क्षेत्रों में न सिर्फ वन संपदा को नुकसान हुआ है बल्कि वहां के स्थानीय लोगों पर भी खनन का दुष्प्रभाव दिखता है। तस्वीर- गुरविंदर सिंह
पन्ना के हीरा खदान में रामप्यारे मिट्टी से सने कंकड़ों को धो रहे हैं। इन्हीं कंकड़ों में से हीरा मिलने की संभावना रहती है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे-हिन्दी

[वीडियो] पन्ना के हीरा खदानों से निकलती बेरोजगारी, गरीबी और कुपोषण

जनवरी में पड़ने वाली सर्दी की एक ढलती हुई शाम जब कुसुम बाई (बदला हुआ नाम) अपने कच्चे घर के बाहर चारपाई पर बैठी हुई हैं। पन्ना जिले के कल्याणपुर…
पन्ना के हीरा खदान में रामप्यारे मिट्टी से सने कंकड़ों को धो रहे हैं। इन्हीं कंकड़ों में से हीरा मिलने की संभावना रहती है। तस्वीर- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे-हिन्दी
बैनर तस्वीर- कमला भील के पति सिलिकोसिस बीमारी की वजह से नहीं रहे। अब उनका बेटा भी इसी बीमारी से जूझ रहा है। तस्वीर- एमएलपीसी

खनन ने लील लिया परिवार पर पापी पेट की वजह से खदान में वापस आने को मजबूर हैं महिलाएं

“इसके सिवा मेरे पास रास्ता क्या है! मेरे चार बेटे भी जानते थे कि खदानों में काम करने से सिलिकोसिस जैसी बीमारी होगी। फिर भी वो यहां काम करते रहे।…
बैनर तस्वीर- कमला भील के पति सिलिकोसिस बीमारी की वजह से नहीं रहे। अब उनका बेटा भी इसी बीमारी से जूझ रहा है। तस्वीर- एमएलपीसी
चंबल सफारी में चौकीदार का काम करने वाले जगदीश इंडियन स्किमर के घोसलों की रक्षा करते हैं। एक दशक पहले इन्होंने घड़ियाल से संरक्षण का काम शुरू किया था। इलस्ट्रेशन- तान्या टिम्बले

अंडों की चौकीदारी: चम्बल के बीहड़ में मेहमान पक्षी को बचाने का संघर्ष

चम्बल के एक गांव जैतपुर से जगदीश जब लाठी, टॉर्च, कलम और डायरी लेकर निकलते हैं तो ऐसा लगता है कि गांव की चौकीदारी करने निकल रहें हैं। कुछ हद…
चंबल सफारी में चौकीदार का काम करने वाले जगदीश इंडियन स्किमर के घोसलों की रक्षा करते हैं। एक दशक पहले इन्होंने घड़ियाल से संरक्षण का काम शुरू किया था। इलस्ट्रेशन- तान्या टिम्बले
झारखंड के खनन क्षेत्र में एक महिला कोयला चुनते हुए

खनन का दंश झेल रही देश की महिलाएं, स्वास्थ्य से लेकर अस्मिता तक खतरे में

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिला खनन के लिए जाना जाता है। खदान क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं को जबरन देह-व्यापार में घसीट लिया गया। खनन के फायदे और नुकसान पर हो रही…
झारखंड के खनन क्षेत्र में एक महिला कोयला चुनते हुए

संपादक की नजर में 2020: वायरस से जुड़ी चिंता के बीच पर्यावरण को लेकर मिले मौके चूक जाने का वर्ष

आधिकारिक तौर पर भारत में कोविड-19 का पहला मामला केरल के थ्रीसुर में जनवरी 2020 में दर्ज किया गया था। अभी दिसंबर 2020 में 90-वर्षीय ब्रिटेन का एक नागरिक इस…