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बाजार की अनिश्चितता से औषधीय पौधों के संग्रह पर असर (कमेंट्री)

बिहार के भोजपुर में मां के दूध में 716 गुना, गेहूं में 8 गुना और भूजल में 55 गुना तक ज्यादा आर्सेनिक

आपदा खत्म होने के बाद भी बना रहता है मानसिक आघात, वायनाड अध्ययन में खुलासा

इरुला समुदाय और एक दम तोड़ती नदी का दर्द

मिर्जापुर में पावर प्लांट और कानूनी लड़ाई के बीच फंसा स्लॉथ बेयर रिजर्व

आजादी के आठ दशक बाद भी वन विभाग के नियंत्रण में क्यों हैं मध्य प्रदेश के वन ग्राम? [कमेंट्री]

छत्तीसगढ़ में सरकारी वनोपज खरीदी 94% घटी, खुले बाजार के भरोसे आदिवासी

झारखंड की महिलाओं ने कोयला कंपनी को किया वायु प्रदूषण पर काम करने को मजबूर

बंगाल चुनावों की चाय पे चर्चा और आधुनिकीकरण में छुपी ‘ज़मीनी’ हकीकत

नेपाल में हल्दी की खेती ने घटाया हाथी-मानव टकराव, किसानों की बढ़ी आमदनी

आजीविका, संस्कृति के लिए निजी जंगल को बचाती आदिवासी महिलाएं (कमेंट्री)

लद्दाख में छठी अनुसूची: एक मांग, लेकिन हर क्षेत्र की अलग जरूरत

बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात संकट में, मार्च में ही घटा इंद्रावती का प्रवाह

बाघ संरक्षण और सामुदायिक अधिकारों के बीच अटका जंगल पर निर्भर लोगों का जीवन

अपनी आस्था और प्रकृति की रक्षा के लिए 700 किमी की पदयात्रा, क्या है ‘ओरण बचाओ’ आंदोलन?

बोकारो स्टील प्लांट का प्रदूषण, कम वजन और समय से पहले जन्मे बच्चों का खतरा

25 साल बाद झारखंड में लागू हुई पेसा नियमावली, क्या मजबूत होंगी ग्राम सभाएं

कश्मीर में वैज्ञानिकों ने बचाई मुश्क बुडजी चावल की पारंपरिक किस्म

कश्मीर में 12 हजार फीट पर सूखते झरनों के बीच उम्मीद बने अल्पाइन तालाब

छत्तीसगढ़ में गुफा संरक्षण पर टकराव, ग्रीन गुफा बनेगी पर्यटन स्थल या वैज्ञानिक धरोहर?

बिना सुरक्षा के जलवायु जोखिम से लड़ रहे प्रवासी मजदूर

किसी का घर तो किसी की ज़मीन गई, रिपोर्ट में सामने आया बिहार की बाढ़ का भयावह रूप

अरावली की परिभाषा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, अधर में लटका है पहाड़ियों का भविष्य

फेजआउट की दुनिया, फेजअप का छत्तीसगढ़

मखाना: व्यापार की चमक के पीछे छुपी मजदूरों की कड़ी मेहनत

धनबाद: भूजल स्तर गिरा, पुराने कुओं के पुनर्जीवन से जगी उम्मीद

[कमेंट्री] कुत्तों के प्रति हमारा आधा-अधूरा प्रेम

ब्लू इकोनॉमी बढ़ी पर मछली पालन से जुड़ी महिलाओं की स्थिति जस की तस

बढ़ती गर्मी, लू से निपटने के लिए कूलिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं को तेजी से अपनाना जरूरी

थार में वन्यजीवों के रक्षक राधेश्याम बिश्नोई, ‘बड़ी जल्दी कर दी जाने में’ [श्रद्धांजलि]