ऊर्जा News

32 वर्षीय किरण कुमारी, एक दिहाड़ी मजदूर हैं। कहती हैं, “मैं कोयला खनन शुरू होने के बाद विस्थापित हो गयी और एक पुनर्वासित गांव में रहती हूं। यहां वैसे तो एक सिलाई केंद्र है, लेकिन बंद ही रहता है। लोग इसे पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। जब हमारे पास जमीन थी, तो हमें खाने-पीने की चिंता नहीं रहती थी। हम अपना गेहूं खुद उगाते थे। अब मुझे हर दिन काम की तलाश करनी पड़ती है। मैं जल्दी निकल जाती हूं और देर शाम ही घर वापस लौट पाती हूं। हमें अपने गांव में ही कुछ काम मिल जाता तो जीवन थोड़ा आसान रहता। तस्वीर- सैयम खोसला / कार्बन कॉपी

खनन से जुड़े लोग: भविष्य को लेकर बज रही खतरे की घंटी

अंग्रेजी हुकूमत से जुड़े खनन की कहानी में कैनरी पक्षी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उस दौरान इस गाने वाले पक्षी की मदद से यह पता लगाया जाता था कि…
32 वर्षीय किरण कुमारी, एक दिहाड़ी मजदूर हैं। कहती हैं, “मैं कोयला खनन शुरू होने के बाद विस्थापित हो गयी और एक पुनर्वासित गांव में रहती हूं। यहां वैसे तो एक सिलाई केंद्र है, लेकिन बंद ही रहता है। लोग इसे पार्किंग के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। जब हमारे पास जमीन थी, तो हमें खाने-पीने की चिंता नहीं रहती थी। हम अपना गेहूं खुद उगाते थे। अब मुझे हर दिन काम की तलाश करनी पड़ती है। मैं जल्दी निकल जाती हूं और देर शाम ही घर वापस लौट पाती हूं। हमें अपने गांव में ही कुछ काम मिल जाता तो जीवन थोड़ा आसान रहता। तस्वीर- सैयम खोसला / कार्बन कॉपी

कोयला संकट से उजागर होती ऊर्जा क्षेत्र की कुछ बड़ी खामियां

शशांक पाठक झारखंड के रांची शहर में एक फोटोकॉपी की दुकान चलाते हैं। शहर के कोकर इलाके में स्थित उनकी दुकान की आमदनी सीधे बिजली पर निर्भर है। पिछले कुछ…

क्या नीति आयोग की बैटरी स्वैपिंग पॉलिसी से इलेक्ट्रिक वाहनों के बाज़ार में आएगा बदलाव?

मयूर रॉय ओडिशा के कटक शहर में रहने वाले 31 वर्ष के एक कारोबारी हैं। उन्होनें बीते फरवरी महीने में एक बिजली से चलने वाला स्कूटर खरीदा था। रॉय की…
संगनारा गांव के 1400 लोगों की आबादी मुख्य रूप से खेती और पशुपालन के साथ गोंद जैसे वनोपज बेचकर गुजर-बसर करती है। तस्वीर- रवलीन कौर

[वीडियो] गुजरातः कच्छ में पवन चक्की विस्तार से मुश्किल में दुर्लभ कांटेदार जंगल

जंगल में प्रवेश करते ही चना राना रबारी लकड़ी का एक टुकड़ा उठाते हैं। उन्हें लकड़ी के सहारे उबड़-खाबड़ और कांटेदार वनस्पतियों से भरे रास्ते को आसानी के साथ पार…
संगनारा गांव के 1400 लोगों की आबादी मुख्य रूप से खेती और पशुपालन के साथ गोंद जैसे वनोपज बेचकर गुजर-बसर करती है। तस्वीर- रवलीन कौर
छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के साल्ही गांव से लगे हसदेव अरण्य के जंगल में आदिवासी पेड़ कटने का विरोध कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से यहां प्रदर्शन हो रहे हैं। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

कोयले के लिए हसदेव अरण्य में काटे जा सकते हैं साढ़े चार लाख पेड़, रात-दिन जागकर पेड़ों की रक्षा कर रहे हैं आदिवासी

देश में चारों तरफ लोगों को यह सलाह दी जा रही है कि जानलेवा धूप है, घर से ना निकालें। छत्तीसगढ़ में भी कई इलाकों में मौसम का पारा 46…
छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के साल्ही गांव से लगे हसदेव अरण्य के जंगल में आदिवासी पेड़ कटने का विरोध कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से यहां प्रदर्शन हो रहे हैं। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

झारखंड: सौर ऊर्जा से बदल रही है गुमला के महिला उद्यमियों की तस्वीर

पचास वर्ष की बिरसुनी उरांव झारखंड के गुमला जिले के गुनिया गांव में रहती हैं।  कुछ महीने पहले तक वो अपने घर के काम के अलावा खेतों में अपने पति…
मध्यप्रदेश के रीवा स्थित सोलर प्लांट। यहां बनने वाली बिजली का एक बड़ा भाग दिल्ली में मेट्रो परिचालन के लिए भेजा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली मेट्रो में 60 फीसदी बिजली की जरूरत इस पार्क से पूरी होती है। तस्वीर- मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम

क्या बैंकों द्वारा नवीन ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने से भारत के ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव आएगा?

2030 तक क्लीन एनर्जी के अपने तयशुदा लक्ष्य को पाने के लिए भारत को वर्तमान में निवेश की जा रही धन राशि की तुलना में कम से कम दोगुने धन…
मध्यप्रदेश के रीवा स्थित सोलर प्लांट। यहां बनने वाली बिजली का एक बड़ा भाग दिल्ली में मेट्रो परिचालन के लिए भेजा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली मेट्रो में 60 फीसदी बिजली की जरूरत इस पार्क से पूरी होती है। तस्वीर- मध्य प्रदेश ऊर्जा विकास निगम
महाराष्ट्र के गन्ना समृद्ध क्षेत्र बारामती में एक किसान अपने खेत की जुताई करता हुआ। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे

20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य खेतों और भूजल के लिए बन सकता है संकट

भारत सरकार ने हाल ही में संसद में पेश किए अपने बजट भाषण में बताया कि देश ने 9.45 प्रतिशत की इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण के लक्ष्य को हासिल कर लिया है।…
महाराष्ट्र के गन्ना समृद्ध क्षेत्र बारामती में एक किसान अपने खेत की जुताई करता हुआ। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे
बिहार के गया जिले में मुख्यमंत्री सौर पंप योजना के तहत लगा सोलर पंप। तस्वीर- मनीष कुमार

आखिर भारत के गावों में क्यों दम तोड़ देती हैं सोलर परियोजनाएं?

चार साल पहले जब आप दिल्ली से मेरठ की तरफ जाते थे तो यमुना नदी पर बने पुल पर सोलर पैनल का शीशा चमकता दिखता था। इस दिल्ली-मेरठ हाइवे पर…
बिहार के गया जिले में मुख्यमंत्री सौर पंप योजना के तहत लगा सोलर पंप। तस्वीर- मनीष कुमार
पवन चक्की से कुछ दूर जलावन के लिए लकड़ियां इकट्ठा करता एक किसान। नेट जीरो को लेकर भारत की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर जानकारों की राय है कि वर्तमान स्थिति में भारत की नीति निर्माण में भारी विरोधाभास है। तस्वीर- वेस्तास/याहू/फ्लिकर

जलवायु परिवर्तन से जंग में पीछे छूटते भारतीय बैंक

भारत एनर्जी ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है। इस ट्रांजिशन के तहत देश कार्बन उत्सर्जन करने वाले जीवाश्म ऊर्जा के स्रोत जैसे पेट्रोलियम, कोयला आदि की जगह सौर और…
पवन चक्की से कुछ दूर जलावन के लिए लकड़ियां इकट्ठा करता एक किसान। नेट जीरो को लेकर भारत की महत्वाकांक्षी योजना को लेकर जानकारों की राय है कि वर्तमान स्थिति में भारत की नीति निर्माण में भारी विरोधाभास है। तस्वीर- वेस्तास/याहू/फ्लिकर