छत्तीसगढ़ News

तेंदू यानी डायोसपायरस मेलेनोक्ज़ायलोन के पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है। आदिवासी इलाकों में इसे हरा सोना भी कहा जाता है क्योंकि वनोपज संग्रह पर निर्भर एक बड़ी आबादी के लिए तेंदूपत्ता आय का सबसे बड़ा स्रोत है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे

छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता खुद बेचना चाहते है आदिवासी, सरकार को है ऐतराज

छत्तीसगढ़ के कांकेर ज़िले के डोटोमेटा के सरपंच जलकू नेताम खुश हैं कि इस बार उनके गांव के लोगों को तेंदूपत्ता की सही क़ीमत मिलेगी। उनका आरोप है कि वनोपज…
तेंदू यानी डायोसपायरस मेलेनोक्ज़ायलोन के पत्तों का उपयोग बीड़ी बनाने के लिए किया जाता है। आदिवासी इलाकों में इसे हरा सोना भी कहा जाता है क्योंकि वनोपज संग्रह पर निर्भर एक बड़ी आबादी के लिए तेंदूपत्ता आय का सबसे बड़ा स्रोत है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल/मोंगाबे
छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के साल्ही गांव से लगे हसदेव अरण्य के जंगल में आदिवासी पेड़ कटने का विरोध कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से यहां प्रदर्शन हो रहे हैं। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

कोयले के लिए हसदेव अरण्य में काटे जा सकते हैं साढ़े चार लाख पेड़, रात-दिन जागकर पेड़ों की रक्षा कर रहे हैं आदिवासी

देश में चारों तरफ लोगों को यह सलाह दी जा रही है कि जानलेवा धूप है, घर से ना निकालें। छत्तीसगढ़ में भी कई इलाकों में मौसम का पारा 46…
छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के साल्ही गांव से लगे हसदेव अरण्य के जंगल में आदिवासी पेड़ कटने का विरोध कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से यहां प्रदर्शन हो रहे हैं। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल

महुआ बीनने के मौसम में छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश के जंगल में आ गए हाथी, इंसानों के साथ द्वंद रोकना बड़ी चुनौती

जंगल से सटा गांव मसियारी के लोगों के लिए मार्च-अप्रैल का महीना व्यस्तताओं भरा रहता है। वजह हैं महुआ के फूल। इन दो महीनों में हर कोई अधिक से अधिक…
हसदेव अरण्य को हाथियों का घर कहा जाता है। यह करीब 1,70,000 हेक्टेयर में फैला जैव विविधता से भरा हुआ जंगल है। तस्वीर- आलोक प्रकाश पुतुल
विस्थापितों ने अपने पक्के मकान छोड़कर कच्चा मकान बना लिए। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल

अचानकमार और कान्हा टाइगर रिजर्व में साथ हुआ विस्थापन पर अनुभव एकदम जुदा

छत्तीसगढ़ के मुंगेली ज़िले के बोकराकछार गांव में रहने वाले 30 साल के भागबली से बचपन की बात करें तो उनकी आंखों में अभी भी अपना गांव और जंगल तैर…
विस्थापितों ने अपने पक्के मकान छोड़कर कच्चा मकान बना लिए। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल
अध्ययन में नवीकरणीय परियोजनाओं सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए कोयला खदानों की भूमि का उपयोग करने का आह्वान किया गया है। तस्वीर- मयंक अग्रवाल / मोंगाबे

सबसे बड़ा कोयला उत्पादक जिला कोरबा कैसे पकड़ेगा स्वच्छ ऊर्जा की राह

भारत में एनर्जी ट्रांजिशन यानी जीवाश्म ईंधन से स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के रास्ते में  जमीन एक बड़ी जरूरत है। साथ ही, कोयला खनन को वैज्ञानिक तरीके से बंद…
अध्ययन में नवीकरणीय परियोजनाओं सहित विभिन्न परियोजनाओं के लिए कोयला खदानों की भूमि का उपयोग करने का आह्वान किया गया है। तस्वीर- मयंक अग्रवाल / मोंगाबे
30 साल के दिवाकर मांझी (बाएं) को फ्लोराइड की वजह से कई बीमारियां हो गई हैं। वह बिना छड़ी के सहारे चल नहीं सकते। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे

सरकारी उदासीनता से बढ़ रहा है झारखंड, छत्तीसगढ़ में फ्लोराइड का प्रकोप

बुधराम भुइयां, झारखंड के लातेहार जिले के सकलकट्टा गांव के रहने वाले हैं। उनके जिले से सटा एक जिला है - पलामू, जहां फ्लोराइड की समस्या बहुत अधिक है। इसकी…
30 साल के दिवाकर मांझी (बाएं) को फ्लोराइड की वजह से कई बीमारियां हो गई हैं। वह बिना छड़ी के सहारे चल नहीं सकते। तस्वीर- मनीष कुमार/मोंगाबे

छत्तीसगढ़: धान के कटोरे से गायब होता स्वाद

छत्तीसगढ़ के बालोद ज़िले के दुर्गीटोला गांव के रहने वाले कार्तिक भूआर्य से आप धान की खेती की बात करें तो वो पुरानी यादों में गुम हो जाते हैं, “अब…
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बैलाडीला लौह अयस्क खदानों का एक दृश्य। तस्वीर- सुरेश यादव

छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क के खनन के लिए जंगलों की कटाई

छत्तीसगढ़ में एक बड़े हिस्से में जंगल है जो न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर की आबोहवा के लिए जरूरी है। पर राज्य में लौह अयस्क का प्रचूर भंडार भी…
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में बैलाडीला लौह अयस्क खदानों का एक दृश्य। तस्वीर- सुरेश यादव
खनन के खिलाफ स्वदेशी समुदायों के सदस्यों के लिए कला का इस्तेमाल एक सशक्त हथियार है। तस्वीर- अमोल के. पाटिल। कॉपीराइट © प्रभाकर पचपुते, कोलकाता।

गांव छोड़ब नहीं: खनन से जुड़े प्रतिरोध में कला के सहारे बुलंद होती आवाज

“आगे मशीनीकरण के राज, जुच्छा कर देही सबके हाथ, बेरोजगारी हे अइसे बाढ़े हे, अउ आघु बढ़ जाही रे, मेहनतकश जनता हा, बिन मौत मारे जाही रे, फिर होही अनर्थ…
खनन के खिलाफ स्वदेशी समुदायों के सदस्यों के लिए कला का इस्तेमाल एक सशक्त हथियार है। तस्वीर- अमोल के. पाटिल। कॉपीराइट © प्रभाकर पचपुते, कोलकाता।
छत्तीसगढ़ के पारिस्थितिकी तौर पर संवेदनशील क्षेत्र एन कोयला खनन को लेकर हमेशा विवाद रहा है। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल

छत्तीसगढ़ में कोयला खनन: दो रिपोर्ट, दो सिफारिश और सरकारी खेल

क्या छत्तीसगढ़ में, पर्यावरण और वन्यजीवों को लेकर शोध संस्थाओं की चेतावनी को हाशिये पर रखते हुए कोयला खनन को मंजूरी दी जा रही है? भारतीय वन्यजीव संस्थान की ताज़ा…
छत्तीसगढ़ के पारिस्थितिकी तौर पर संवेदनशील क्षेत्र एन कोयला खनन को लेकर हमेशा विवाद रहा है। तस्वीर-आलोक प्रकाश पुतुल