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केन-बेतवा परियोजना: कौन छूटा, किसे कितना मिला मुआवजा और आंदोलन के बाद क्या बदला

असम के पर्यावरण कार्यकर्ता प्रणब डोले की गिरफ़्तारी का विरोध

किरकसाल में भेड़िये, लकड़बग्घे और 600 से ज्यादा प्रजातियां, गांव ने खुद संभाली जैव-विविधता की कमान

मधुमक्खी के बक्सों से आदिवासी महिलाओं की जिंदगी में नई मिठास

झारखंड में सूखे की आहट, रोपाई और बुआई में 20 दिन की देरी

लू से बचने के लिए रात में काम, लेकिन ईंट-भट्ठा मजदूरों की मुश्किलें बरकरार

नेपाल की औद्योगिक और घरेलू गंदगी बिहार में कैसे लाती है सिरसिया नदी

बिहार के भोजपुर में मां के दूध में 716 गुना, गेहूं में 8 गुना और भूजल में 55 गुना तक ज्यादा आर्सेनिक

बाढ़ के बाद केरला के गांवों ने खुद शुरू की बारिश की निगरानी

इरुला समुदाय और एक दम तोड़ती नदी का दर्द

छत्तीसगढ़ में सरकारी वनोपज खरीदी 94% घटी, खुले बाजार के भरोसे आदिवासी

झारखंड में फिर लौट रही हैं देसी धान की किस्में

नेपाल के मधेस के जल संकट में कृत्रिम तालाबों से राहत, विशेषज्ञों ने खराब डिजाइन पर चेताया

असम की बाराक घाटी में बदलती बारिश और तापमान से धान-सब्जियों की पैदावार प्रभावित

गिर से बाहर फैल रहे हैं गुजरात के शेर, संरक्षण की नई चुनौती

पूर्वी हिमालय का दुर्लभ मिशमी ताकिन अब नए खतरों के बीच

झारखंड की महिलाओं ने कोयला कंपनी को किया वायु प्रदूषण पर काम करने को मजबूर

बंगाल चुनावों की चाय पे चर्चा और आधुनिकीकरण में छुपी ‘ज़मीनी’ हकीकत

नेपाल में हल्दी की खेती ने घटाया हाथी-मानव टकराव, किसानों की बढ़ी आमदनी

बस्तर का चित्रकोट जलप्रपात संकट में, मार्च में ही घटा इंद्रावती का प्रवाह

बाघ संरक्षण और सामुदायिक अधिकारों के बीच अटका जंगल पर निर्भर लोगों का जीवन

अपनी आस्था और प्रकृति की रक्षा के लिए 700 किमी की पदयात्रा, क्या है ‘ओरण बचाओ’ आंदोलन?

सौर कोल्ड स्टोरेज से घटा फसल नुकसान, बढ़ी किसानों की कमाई

25 साल बाद झारखंड में लागू हुई पेसा नियमावली, क्या मजबूत होंगी ग्राम सभाएं

झारखंड में महिला समूह चला रहे सोलर मिनी ग्रिड, गांवों में पनप रहे छोटे कारोबार

कश्मीर में वैज्ञानिकों ने बचाई मुश्क बुडजी चावल की पारंपरिक किस्म

कश्मीर में 12 हजार फीट पर सूखते झरनों के बीच उम्मीद बने अल्पाइन तालाब

महाराष्ट्र के पहाड़ी गांवों ने खोजा जल संकट समाधान, माइक्रोवाटरशेड से बढ़ा जलस्तर

बिना सुरक्षा के जलवायु जोखिम से लड़ रहे प्रवासी मजदूर

झारखंड में कम होते हाथी के बावजूद क्यों बढ़ रहा संघर्ष