वन्य जीव एवं जैव विविधता News

लद्दाख का गड़ेरिया। हिमालय में भेड़ जैसे शाकाहारी जीव पालने वाले लोगों के साथ ही कई दूसरे मांसाहारी जीव भी रहते हैं। ऐसे में उनका मांसाहारी जीवों के साथ संबंध काफी नाजुक होता है। फोटो- कोशी/फ्लिकर

जंगली जानवर और इंसान क्यों बन जाते हैं जानी-दुश्मन, हिमालय में हुए अध्ययन से सामने आया जवाब

कल्पना कीजिए आपके घर के आसपास कोई मांसाहारी जीव नजर आ जाए। ऐसे जीव को देखकर आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी! आपको गुस्सा आ सकता है, आप डर सकते हैं या…
लद्दाख का गड़ेरिया। हिमालय में भेड़ जैसे शाकाहारी जीव पालने वाले लोगों के साथ ही कई दूसरे मांसाहारी जीव भी रहते हैं। ऐसे में उनका मांसाहारी जीवों के साथ संबंध काफी नाजुक होता है। फोटो- कोशी/फ्लिकर
जंगल की बीच बसे उमरावन गांव को गाजर घास से चारो तरफ से घेर लिया है। यहां खेलते बच्चों को कई चर्मरोग और त्वचा संबंधी रोग का खतरा है। फोटो- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे हिन्दी

[वीडियो] खेतों के बाद अब जंगलों में भी गाजर घास की घुसपैठ, नहीं रोका तो होगा बड़ा नुकसान

पन्ना टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच एक उजड़ चुका गांव हैं उमरावन। विशाल पेड़ों और झाड़ियों के झुरमुट से गुजरता एक पथरीला रास्ता इस गांव को जाता है।…
जंगल की बीच बसे उमरावन गांव को गाजर घास से चारो तरफ से घेर लिया है। यहां खेलते बच्चों को कई चर्मरोग और त्वचा संबंधी रोग का खतरा है। फोटो- मनीष चंद्र मिश्र/मोंगाबे हिन्दी
प्रवासी पक्षी कॉमन क्रेन अपनी लंबी उड़ान भरता हुआ। प्रवास के लिए पक्षी हजारो किलोमीटर की उड़ान भरते हैं। फोटो- उदया किरण/विकिमीडिया कॉमन्स

पक्षी हो या इंसान, दोनों के लिए प्रवास का दंश एक समान

करीब छः महीने पहले देश में माइग्रेशन और माइग्रेन्ट का मुद्दा छाया हुआ था। लॉकडाउन लगने के बाद हजारों-लाखों प्रवासी मजदूर सड़क पर थे। रोजी-रोटी की उम्मीद में बड़े शहरों…
प्रवासी पक्षी कॉमन क्रेन अपनी लंबी उड़ान भरता हुआ। प्रवास के लिए पक्षी हजारो किलोमीटर की उड़ान भरते हैं। फोटो- उदया किरण/विकिमीडिया कॉमन्स
सूर्यास्त के समय केन नदी का दृष्य। केन-बेतबा लिंक परियोजना के दूसरे चरण में 40 मीटर ऊंचा और 2,218 मीटर लंबा बांध प्रस्तावित है। फोटो- क्रिस्टोफर क्रे/फ्लिकर 

केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना पर पर्यावरण मंत्रालय ने मांगे नए आंकड़े, नए सिरे से होगा आंकलन

भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत केन-बेतवा लिंक के दूसरे चरण में बांध बनने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। हालांकि पर्यावरण मंत्रालय इसको लेकर कुछ असहज है।…
सूर्यास्त के समय केन नदी का दृष्य। केन-बेतबा लिंक परियोजना के दूसरे चरण में 40 मीटर ऊंचा और 2,218 मीटर लंबा बांध प्रस्तावित है। फोटो- क्रिस्टोफर क्रे/फ्लिकर 
ब्यास नदी की कछार में रेत पर धूप सेंकता घड़ियाल। रेत खनन की वजह से इनका यह स्थान छिन सकता है, जिस पर ये आराम करने के साथ-साथ अंडा भी देते हैं। फोटो- विवेक गुप्ता

दशकों बाद पंजाब की नदी में फिर नजर आ रहे घड़ियाल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का भी योगदान

दशकों से पंजाब में यह माना जा रहा था कि घड़ियाल खत्म हो गए। तीन साल पहले इस जलजन्तु को लेकर एक छोटी सी कोशिश हुई और फिर इसके संरक्षण…
ब्यास नदी की कछार में रेत पर धूप सेंकता घड़ियाल। रेत खनन की वजह से इनका यह स्थान छिन सकता है, जिस पर ये आराम करने के साथ-साथ अंडा भी देते हैं। फोटो- विवेक गुप्ता
इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू

इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू

स्लॉथ बियर भालू की एकमात्र प्रजाति है जो अपने से हजारों गुना छोटी चींटियों का शिकार कर उन्हें अपने भोजन के तौर पर इस्तेमाल करता है। इस भालू के मुख्य…
इंसानों से टकराव की वजह से कहीं विलुप्त न हो जाएं ये भालू
मादा खरमोर राजस्थान के आसमान में उड़ान भरती हुई। राजस्थान का शोकलिया-केकरी क्षेत्र में खरमोर प्रजनन के लिए आते हैं। फोटो- अंगद अछाप्पा/विकिमीडिया कॉमन्स

इंसानी विकास की होड़ से संकट में खरमोर पक्षी का अस्तित्व

मालवी में भाट कुकड़ा, हिंदी में खरमोर और अंग्रेजी में लैसर फ्लोरिकन। अलग-अलग बोली-भाषाओं में इस पक्षी के अनेक नाम हैं, लेकिन हर स्थान पर इस पक्षी से जुड़ी एक…
मादा खरमोर राजस्थान के आसमान में उड़ान भरती हुई। राजस्थान का शोकलिया-केकरी क्षेत्र में खरमोर प्रजनन के लिए आते हैं। फोटो- अंगद अछाप्पा/विकिमीडिया कॉमन्स
कोडागू स्थित मंदिर के सामने नाग देवता का स्थान फोटो यू. प्रशांत बल्लुलल्या

देश में आस्था के सहारे होता था सांपों का संरक्षण, बदलने लगा है परिदृश्य

धार्मिक स्थल के साथ-साथ पेड़-पौधे और वन भी भारतीय समाज में आस्था के प्रतीक रहे हैं। लोग प्राकृतिक संसाधनों को विभिन्न देवी-देवताओं से जोड़कर पूजते रहे हैं। भारत में पवित्र…
कोडागू स्थित मंदिर के सामने नाग देवता का स्थान फोटो यू. प्रशांत बल्लुलल्या
दीमकों द्वारा बनाये गए अधिकतर टीले इतने मजबूत होते हैं कि सिर्फ ड्रिल करने या हथौड़े से ही तोड़े जा सकते हैं फोटो निखिल मोरे

दीमक होते हैं गजब के कारीगर, बनाते हैं हजारों साल तक खड़े रहने वाला टीला

कीटों की दुनिया में अगर वास्तुकारों या आर्किटेक्ट की बात की जाए तो दीमक निसन्देह इसके बादशाह माने जाएंगे।  मिट्टी, पानी और अपने लार को मिलाकर दीमक जैसा टीला तैयार…
दीमकों द्वारा बनाये गए अधिकतर टीले इतने मजबूत होते हैं कि सिर्फ ड्रिल करने या हथौड़े से ही तोड़े जा सकते हैं फोटो निखिल मोरे

महाराष्ट्र के एक विद्युत संयंत्र में इंसानों के साथ रहने लगे हैं बाघ, क्या होगा भविष्य

चंद्रपुर, महाराष्ट्र। बाघ का नाम आते ही घने जंगल याद आते हैं। ऐसे जंगल जहां बाघ निश्चिंत भाव से विचरण कर रहे हैं और उन्हें इंसानी गतिविधियों की कोई फिक्र…